लेख नो डिटेंशन पॉलिसी के खात्मे से शिक्षा में होगा सुधार ! December 30, 2024 / December 30, 2024 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला हाल ही में केंद्र सरकार (शिक्षा मंत्रालय) ने ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है जिसके तहत अब कक्षा 5 और 8 की वार्षिक परीक्षा में असफल छात्रों को फेल किया जाएगा, यह वाकई एक स्वागत योग्य कदम है। वास्तव में, केंद्र सरकार के इस फैसले से बच्चों के अंदर सीखने की इच्छा और ललक बढ़ेगी। नियम में बदलाव का फायदा यह होगा कि अब उन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो किसी कारणवश पढ़ाई में अच्छी परफोर्मेंस नहीं दे पाते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो, इस दौरान छात्र की शिक्षा स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षकों की ओर से विशेष कोशिश की जाएगी और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। शिक्षक न केवल छात्र विशेष के शैक्षणिक प्रदर्शन पर ध्यान देंगे, बल्कि उनके माता-पिता, अभिभावकों को भी समय समय पर उसके बारे मार्गदर्शन व सुझाव आदि देंगे। इस पॉलिसी के खत्म होने के बाद पांचवीं और आठवीं कक्षा में जो छात्र फेल या असफल हो जाते हैं, उन्हें फेल/असफल ही घोषित किया जाएगा और उन्हें दो महीनों के भीतर एक बार पुनः परीक्षा में शामिल होने का अवसर प्रदान किया जाएगा और यदि वे इसमें भी फेल या असफल होते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में प्रोन्नति नहीं दी जाएगी। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि अभी तक आठवीं कक्षा तक फेल करने का प्रावधान नहीं था। यहां यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले, प्रारंभिक शिक्षा के दौरान किसी भी छात्र को कक्षा विशेष में रोकने की परमिशन नहीं थी। हालांकि, अब 5वीं और 8वीं कक्षा में शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर रोकने की परमिशन दी गई है। बहरहाल, एक और अच्छी बात यह है कि इस पॉलिसी के तहत किसी भी छात्र को स्कूल से निकाला नहीं जाएगा। वर्ष 2010-11 से पहले पांचवीं और आठवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षाओं का प्रावधान किया गया था,जिसे वर्ष 2010-11 से बंद कर दिया गया था। विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता था। इससे स्कूली शिक्षा के स्तर में लगातार गिरावट आ गई थी। इतना ही नहीं, इसका प्रभाव 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं पर भी कमोबेश पड़ा और नतीजे खराब आ रहे थे। यहां तक कि राज्य सरकारें भी पहले से जारी व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति में थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य चाहें तो परीक्षा करा सकते हैं। पाठकों को बताता चलूं कि केंद्र सरकार ने कक्षा 5 व 8 के छात्रों को अनुत्तीर्ण न करने की नीति को खत्म करने के संबंध में शिक्षा के अधिकार कानून में बदलाव करके इसे वर्ष 2019 में ही अधिसूचित कर दिया था, लेकिन देश के बहुत से राज्य व केंद्र शासित प्रदेश इसे अपनाये हुए हैं। गौरतलब है कि जुलाई 2018 में तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर लोकसभा में शिक्षा का अधिनियम, 2009 के संशोधन पर अपनी बात रखते हुए यह कहा था कि ‘कई सरकारी स्कूल अब मिड डे मील स्कूल बन गए थे क्योंकि इनमें शिक्षा और सीखना ग़ायब है।’गौरतलब है कि उस समय केंद्र में नो डिटेंशन पॉलिसी थी, जिसे अब केंद्र सरकार ने पांचवीं और आठवीं कक्षा के लिए हटा दिया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शिक्षा संविधान में आज समवर्ती सूची का विषय है।1976 से पूर्व शिक्षा पूर्ण रूप से राज्यों का उत्तरदायित्व था, लेकिन 1976 में किये गए 42 वें संविधान संशोधन द्वारा जिन पाँच विषयों को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाला गया, उनमें शिक्षा भी शामिल थी। गौरतलब है कि समवर्ती सूची में शामिल विषयों पर केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं। अब केंद्र सरकार ने शिक्षा (पांचवीं/आठवीं कक्षा के बच्चों) के संदर्भ में यह निर्णय लिया है कि कमजोर छात्रों की मॉनीटरिंग हो और इनकी कमजोरी को चिह्नित कर अभिभावकों की मदद से इन छात्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि शिक्षा के स्तर में सुधार किए जा सकें। यह पॉलिसी केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय व सैनिक स्कूलों सहित सरकार द्वारा संचालित तीन हजार से ज्यादा स्कूलों में लागू होगी। कहना ग़लत नहीं होगा कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठाये जा रहे थे। अब नई पालिसी से शिक्षा में पहले से कहीं अधिक सुधार होगा। यह भी कहना ग़लत नहीं होगा कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए, क्यों कि शिक्षा का किसी राष्ट्र का प्रमुख आधार स्तंभ होती है, विकास की असली रीढ़ होती है। आज भी हमारे देश की शिक्षा प्रणाली कमोबेश मैकोले शिक्षा प्रणाली पर आधारित है। अतः आज जरूरत इस बात की है कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर हमेशा ठोस कार्य हों। शिक्षा पद्धति को जटिल नहीं अपितु सरल होना चाहिए अथवा उसमें ऐसा समावेश किया जाना चाहिए, जिससे छात्र सरलता से जटिलता की ओर आगे बढ़ें। नीरस और स्तरहीन शिक्षा का कोई औचित्य नहीं होता। आज जरूरत इस बात की है कि शिक्षा में परंपरागत पद्धतियों के स्थान पर आधुनिक पद्धतियों का समावेश किया जाए। आज के परिवेश में छात्र अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यालयों में विभिन्न संसाधनों इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही शिक्षकों की कमी आदि पर भी आज ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षा में पर्यावरण, प्रकृति व खेल को विशेष स्थान दिया जाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी शिक्षा से जुड़ें। हमें यह बात अपने जेहन में रखनी चाहिए कि आज शिक्षा का अधिकार जितना अहम है, उतना ही उसकी गुणवत्ता में कंट्रोल भी जरूरी और अति आवश्यक है। बिना गुणवत्ता वाली शिक्षा का कोई औचित्य नहीं है। समाज को भी यह समझना होगा कि अनुत्तीर्ण छात्र को अनुत्तीर्ण करना ही उचित व सही है। अनुत्तीर्ण छात्र को उत्तीर्ण करने से शिक्षा में गुणवत्ता कहां से आएगी ? अनुत्तीर्ण छात्र की शिक्षा पर ध्यान दिया जा सकता है, उसे अभ्यास और मेहनत से नये आयामों की ओर ले जाया जा सकता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज शिक्षा प्रणाली में निश्चित ही आमूलचूल परिवर्तन आए हैं, बहुत से सुधार किए गए हैं, लेकिन आज भी शिक्षा में और भी बहुत से सुधार किए जाने की आवश्यकता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि शिक्षा को छात्रों को व्यावहारिक कौशल और ज्ञान से लैस करना चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और दूसरों पर कम निर्भर हों। सच तो यह है एक व्यापक व अच्छी शिक्षा प्रणाली ही हमारे शरीर,मन और आत्मा को समृद्ध करती है और हमें देश के अच्छे नागरिक बनाती है और इससे व्यक्ति,देश, समाज और राष्ट्र उन्नयन और प्रगति की ओर अग्रसर होते हैं। सुनील कुमार महला Read more » नो डिटेंशन पॉलिसी
लेख फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण, चलना हुआ मुश्किल। December 30, 2024 / December 30, 2024 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment -प्रियंका सौरभ मुख्य बाजारों, चौक-चौराहों, गलियों में दुकानदारों और रेहड़ी-फड़ी वालों की ओर से किया गया अतिक्रमण दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। परिणामस्वरूप शहर के बाजारों में वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। स्ट्रीट वेंडर्स, जो अपने जीवनयापन के लिए अपने व्यापार पर निर्भर हैं, ने हर एक व्यस्त […] Read more » Encroachment on footpaths and roads फुटपाथों और सड़कों पर अतिक्रमण
लेख उत्तरकालीन पेशवा : पेशवा नारायणराव December 27, 2024 / December 27, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment पेशवा रघुनाथराव उर्फ राघोबा एक छेद के कारनै डूब जात है नावअनेकों जिसमें छेद हों बचा न पावें राम ।। पेशवा माधवराव द्वितीय अब मराठा साम्राज्य पूर्णरूपेण सत्ता संघर्ष के दौर में प्रवेश कर चुका था। भीतरी कलह इतनी बढ़ गई थी कि थोड़ी-थोड़ी देर के लिए दुर्बल पेशवा नियुक्त हो रहे थे और वह […] Read more » Later Peshwa: Peshwa Narayanrao पेशवा नानासाहेब द्वितीय
लेख विविधा स्वास्थ्य-योग सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल या लूट का अड्डा December 26, 2024 / December 26, 2024 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानी वैसे तो 2012 में प्रसारित किये गये आमिर ख़ान के प्रसिद्ध व लोकप्रिय धारावाहिक ‘सत्यमेव जयते’ में भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त धांधली व लूट जैसे अति गंभीर विषय को अत्यंत प्रभावी रूप से उठाया जा चुका है। इस में प्रमाणिक तरीक़े से यह बताया गया था कि किस प्रकार डॉक्टर्स द्वारा मरीज़ों […] Read more » Super Specialty Hospital or Robbery Den सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लूट का अड्डा
लेख मिर्जा गालिब: शायरी और गजल के शिखर फनकार थे December 26, 2024 / December 26, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment मिर्जा गालिब जयन्ती- 27 दिसम्बर, 2024 -ः ललित गर्ग:- मिर्ज़ा असदुल्लाह बेग ख़ान, जो अपने तख़ल्लुस ग़ालिब से जाने जाते हैं, उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के एक महान शायर थे। इनको उर्दू भाषा का सर्वकालिक एवं सार्वदैशिक महान शायर माना जाता है और फ़ारसी कविता के प्रवाह को हिन्दुस्तानी जबान में लोकप्रिय बनाने वाले वे एक महान् […] Read more » Mirza Ghalib मिर्जा गालिब
लेख प्रतिहार वंशी शासकों और भारतीय संस्कृति के बारे में विद्वानों के मत December 24, 2024 / December 24, 2024 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राणा अली हसन चौहान क्या कहते हैं ?राणा अली हसन चौहान पाकिस्तान के बहुत ही प्रतिष्ठित इंजीनियर, इतिहास लेखक और भाषाविद रहे हैं। वे उन कम पाकिस्तानियों में से हैं जो उर्दू, फारसी, अरबी के अलावा सिंधी, पंजाबी तथा हिंदी व संस्कृत में भी पारंगत थे। वे नागरी लिपि के एक बड़े प्रवर्तकों में से […] Read more » राणा अली हसन चौहान
लेख विधि-कानून समाज उपभोक्ताओं को मिले त्वरित न्याय December 24, 2024 / December 23, 2024 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (24 दिसम्बर) – योगेश कुमार गोयलदेश में प्रतिवर्ष 24 दिसम्बर को उपभोक्ताओं के विभिन्न हितों और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, उनके हितों के लिए बनाए गए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियमों तथा उनके अंतर्गत आने […] Read more » राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (24 दिसम्बर)
लेख बड़ा दिन, बड़े लोग, बड़ी बातें December 23, 2024 / December 23, 2024 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment डॉ घनश्याम बादल 25 दिसंबर यानी बड़ा दिन. दुनिया भर में ईसाई धर्म का सबसे बड़ा त्योहार क्रिसमस मनाया जाता है आज. अब जब दुनिया इसे बड़े दिन के नाम से जानती है तो फिर अवश्य ही दिन बड़े लोगों, बड़ी बातों एवं बड़े महत्व का होगा ही. दुनिया भर में सबसे ज्यादा आबादी यदि […] Read more » बड़ा दिन बड़ी बातें बड़े लोग
मीडिया लेख पत्रकारिता के अपराधीकरण का दौर December 23, 2024 / December 23, 2024 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण इस देश में विमर्श का बड़ा मुद्दा रहा है लेकिन पत्रकारिता के अपराधीकरण पर कभी कोई चर्चा नहीं होती। हां,शोर तब मचता है जब कोई पत्रकार वसूली या भयादोहन करते, अपराधियों या पुलिस के साथ मिलकर अपहरण,फिरौती या रंगदारी जैसे संगीन जुर्म मे पकड़ा अथवा शामिल […] Read more »
कला-संस्कृति लेख विविधा साड़ी: भारतीयता और परंपरा का विश्व प्रिय पोशाक December 23, 2024 / December 23, 2024 by सुरेश सिंह बैस शाश्वत | Leave a Comment 21 दिसंबर विश्व साड़ी दिवस के अवसर पर विशेष- – सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” महाभारत काल में हस्तिनापुर राज्य हस्तिनापुर के राज दरबार में पांडवों और कौरवों के बीच द्युतक्रीड़ा का आयोजन किया गया। यह क्रीड़ा और कुछ नहीं मामा शकुनी के कुटिल चाल में फंसाने के लिए पांडवों के विरुद्ध कौरवों द्वारा […] Read more » Saree: The world's favorite garment of Indianness and tradition
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लेख भारत में बुज़ुर्ग आबादी की समस्याएँ December 23, 2024 / December 23, 2024 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment –डॉ. सत्यवान सौरभ भारत की आबादी में वरिष्ठ नागरिकों का प्रतिशत हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ रहा है और यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है, ऐसा संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव के अनुसार है। कम आय या ग़रीबी को बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़ा पाया गया […] Read more » Problems of elderly population in India भारत में बुज़ुर्ग आबादी