कविता सड़क की पीड़ा September 18, 2023 / September 18, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल मैं ने सुनी हैं उसकी आहटें मौन पीड़ा और अकुलाहटें वह बिलखती और तड़पती भी है आँसूओं से नहाती भी है लेकिन… उसकी आवाज़ मौन है क्योंकि वह एक सड़क है ! अब वह अकेली है उजड़ गए हैं उसके श्रृंगार विस्तार के लिए काट दिए गए पेड़ वह अब नंगी […] Read more » road pain
कविता मां शब्द की क्या ही परिभाषा दूं? September 18, 2023 / September 18, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment भावना मेहराकपकोट, बागेश्वरउत्तराखंड मां शब्द की क्या ही परिभाषा दूं?मां एक शब्द है न लेख है,ना ही इस शब्द का कोई मोल है,मां शब्द एक एहसास है, एक प्यार है,जिंदगी के हर दुख में छुपे एक हंसी का एहसास है,जो साथ न होकर भी आसपास है,छोटे-छोटे कदमों का साथ है,जो आज भी हमारे साथ है,मां […] Read more » What definition should I give of the word mother?
लेख सड़क दुर्घटनाओं से जूझता पहाड़ September 18, 2023 / September 18, 2023 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment गिरीश बिष्टरुद्रपुर, उत्तराखंड भारत में प्रति वर्ष जितने लोग विभिन्न बिमारियों के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं, तक़रीबन उतनी ही संख्या में अकेले सड़क दुर्घटनाओं के कारण अपनी जान गंवा देते हैं. मैदानी इलाकों के साथ साथ पहाड़ी राज्यों में भी प्रति वर्ष अलग अलग सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों […] Read more » Mountain suffering from road accidents
कविता कश्मीर का गोनन्द से कर्कोटक कायस्थ,उत्पल कल्यपाल,लोहर खस,शाहमीर छिभ राजवंश September 18, 2023 / September 18, 2023 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायक ये कश्मीर वही है जहाँ ज्ञान की देवी श्री शारदा पीठ में रहती, शारदा कश्मीर की अधिष्ठात्री देवी जिससे निकली शारदा लिपी, ये कश्मीर वही जहाँ सती देह से सतीसर बना,वितस्ता निकली, सती ही कश्मीरा देवी,कश्यपमेरु से कश्यपमीड़ संज्ञा कश्मीर की कश्मीर के मूल निवासी नाग पिशाच व आर्य कश्यप की संतति […] Read more » Gonand to Karkotak Kayastha Lohar Khas Shahmir Chhib dynasty of Kashmir. Utpal Kalypal
राजनीति लेख शख्सियत समाज नये भारत के निर्माता हैं कर्मयोद्धा नरेन्द्र मोदी September 18, 2023 / September 18, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment श्री नरेंद्र मोदी के 73वें जन्म दिवस- 17 सितम्बर 2023 पर विशेष– ललित गर्ग- एक महान् कर्मयोद्धा के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजनैतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक, सामरिक और आर्थिक सशक्तता की छाप छोड़ते हुए भारत को विश्वगुरु बनाने को तत्पर है, यह इतिहास के निर्माण का भाव है। निश्चित ही उनकी दृष्टि एवं दिशा भारत […] Read more »
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख वर्त-त्यौहार समाज गणेश हैं विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और उन्नत राष्ट्र-निर्माता September 18, 2023 / September 18, 2023 by ललित गर्ग | Leave a Comment गणेश चतुर्थी- 19 सितम्बर 2023 पर विशेष -ललित गर्ग-गणेश भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं, वे विघ्नहर्ता एवं मंगलकर्ता सात्विक देवता हैं और उन्नत राष्ट्र-निर्माता हैं। वे न केवल भारतीय संस्कृति एवं जीवनशैली के कण-कण में व्याप्त है बल्कि विदेशों में भी घर-कारों-कार्यालयों एवं उत्पाद केन्द्रों में विद्यमान हैं। हर तरफ गणेश ही गणेश छाए […] Read more » Ganesha is the remover of obstacles the auspicious giver and the progressive nation-builder.
कविता माफी सभी से सभी को प्रणाम September 18, 2023 / September 18, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment प्रणाम प्रणाम प्रणाम, मेरा आखिरी प्रणाम अंतिम सांसे है, शेष जीवन को प्रणाम देह में बसी थी, एक अंजान सी आत्मा तलाशती रही वह, न मिल सका परमात्मा अधूरी बची है साँसे, जीवन का है खात्मा आ रही है मृत्यु, यह जीवन मृत्यु के नाम प्रणाम प्रणाम प्रणाम ,मेरा मृत्यु को प्रणाम॥ 1।। बचपन का […] Read more » Apologies to all and greetings to all.
कविता तीन भाई सबसे जुदा September 14, 2023 / September 14, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment अपने ही घर में, एक कमरे में है बूढ़े माता पिता एक बेटे ने, नौकरी लगते ही उन्हे छोड़ दिया एक बेटे ने, घर की मर्यादा के लिए उन्हे छोड़ दिया दोनों निठल्लों के रहते, एक ने माँ बाप को छोड़ दिया ॥ एक भाई सुखी है, तमाम उम्मीदों के साथ एक भाई दुखी है, खुद की बुनी उलझनों में एक […] Read more »
लेख हिंदी दिवस हिंदी के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है September 14, 2023 / September 14, 2023 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (14 सितंबर 2023 हिंदी दिवस पर विशेष आलेख) हिन्दी हमेशा से हिन्दुस्तान की पहचान रही है। कहा जाये तो हिन्दुस्तान एक देश है और इसकी सांस है हिन्दी, बिना सांस (हिंदी) के हिन्दुस्तान में निवास करना और यहां की संस्कृति को बनाये रखना मुश्किल है। इसलिये हिन्दुस्तान देश में हिन्दी की अपनी महत्वता है, जिसे हिन्दुस्तान देश से कभी नहीं मिटाया जा सकता। हिंदी हमेशा से ज्ञान और भाव की भाषा रही है, तभी दुनिया में बुध्दिमत्ता के मामले में हिन्दुस्तानियों का डंका पिटता रहा है। हिंदी सदा दुनियां में पे्रम के भाव से बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी शब्द है हमारी आवाज का हमारे बोलने का जो कि हिन्दुस्तान में बोली जाती है। आज देश में जितनी भी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, उन सबकी जननी हिंदी है। और हिंदी को जन्म देने वाली भाषा का नाम संस्कृत है। जो कि आज देश में सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से हिंदी माध्यम के स्कूलों में एक विषय के रूप में पढाई जाती है। आज देश के लिए इससे बडी विडम्बना क्या हो सकती है कि जिस भाषा को हम अपनी राष्ट्रीय भाषा कहते हैं, आज उसका हाल भी संस्कृत की तरह हो गया है। जिस तरफ देखो उस तरफ अंग्रेजी से हिंदी और समस्त भारतीय भाषाओं को दबाया जा रहा है। चाहे आज देश में इंटरमीडिएट के बाद जितने भी व्यावसायिक पाठयक्रम हैं, सब अंग्रेजी में पढाये जाते हैं। अगर देश की शिक्षा ही देश की राष्ट्रीय भाषा में नहीं है तो हिंदी जिसे हम अपनी राष्ट्रीय भाषा मानते है। जिसे हम एक दूसरे का दुख दर्द बांटने की कडी मानते है। उसका प्रसार कैसे हो पायेगा। कहा जाये तो हिन्दी बिना हिन्दुस्तान अधूरा है। देश की एकता और अखण्डता को बनाये रखनें में हिन्दी का अहम योगदान है। आज हिन्दी सिनेमा विश्व में एक अहम स्थान रखता है। बाॅलीवुड की पहचान भी हिन्दी से ही है। हिन्दी की वजह से ही बाॅलीवुड में हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। हिन्दी भाषा सिर्फ वार्तालाप और संचार का ही माध्यम नहीं है बल्कि यह देश में रोजगार के सृजन का भी माध्यम है। आज हिन्दी सिनेमा से लेकर हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, और सोशल मीडिया पर हिन्दी का बोलबाला है, जो कि देश में लाखों रोजगार पैदा करते हैं। आज इंटरनेट पर भीप करोड़ों लोग हिंदी का अनुसरण करते हैं, इसलिए आज हिन्दुस्तान में सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, गूगल प्लस) भी अपना रूपांतरण हिंदी में कर चुका है और करोड़ों लोग फेसबुक तय ट्विटर में अपने विचार हिंदी में साझा करते हैं। आज विदेशी वेबसाइटें भी अपना हिंदी संस्करण हिन्दुस्तान में प्रारंभ कर रहीं है क्योंकि उनको पता है कि हिन्दुस्तान में अगर उनको टिकना है तो हिंदी को बढ़ावा देना ही होगा। महात्मा गांधी हिन्दी भाषी नहीं थे लेकिन वे जानते थे कि हिन्दी ही देश की संपर्क भाषा बनने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। उन्हीं की प्रेरणा से राजगोपालाचारी ने दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा का गठन किया था। देशभर में हिन्दी पढ़ना गौरव की बात मानी जाती थी। महात्मा गांधी जी ने 1916 में क्रिश्चियन एसोसिएशन आफ मद्रास की एक सभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि धर्मान्तरण राष्ट्रान्तरण है। उन्होंने हरिजन में लिखा था ‘‘यदि मैं तानाशाह होता तो अंग्रेजी की पुस्तकों को समुद्र में फेंक देता और अंग्रेजी के अध्यापकों को बर्खास्त कर देता।’’ सच तो यह है कि ज़्यादातर भारतीय अंग्रेज़ी के मोहपाश में बुरी तरह से जकड़े हुए हैं। आज स्वाधीन भारत में अंग्रेज़ी में निजी पारिवारिक पत्र व्यवहार बढ़ता जा रहा है काफ़ी कुछ सरकारी व लगभग पूरा ग़ैर सरकारी काम अंग्रेज़ी में ही होता है, दुकानों वगैरह के बोर्ड अंग्रेज़ी में होते हैं, होटलों रेस्टारेंटों इत्यादि के मेनू अंग्रेज़ी में ही होते हैं। ज़्यादातर नियम कानून या अन्य काम की बातें, किताबें इत्यादि अंग्रेज़ी में ही होते हैं, उपकरणों या यंत्रों को प्रयोग करने की विधि अंग्रेज़ी में लिखी होती है, भले ही उसका प्रयोग किसी अंग्रेज़ी के ज्ञान से वंचित व्यक्ति को करना हो। अंग्रेज़ी भारतीय मानसिकता पर पूरी तरह से हावी हो गई है। हिंदी (या कोई और भारतीय भाषा) के नाम पर छलावे या ढोंग के सिवाय कुछ नहीं होता है। माना कि आज के युग में अंग्रेज़ी का ज्ञान ज़रूरी है, क्योकि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। कई सारे देश अपनी युवा पीढ़ी को अंग्रेज़ी सिखा रहे हैं जिसमे एक भारत देश भी है पर इसका अर्थ ये नहीं है कि उन देशों में वहाँ की भाषाओं को ताक पर रख दिया गया है और ऐसा भी नहीं है कि अंग्रेज़ी का ज्ञान हमको दुनिया के विकसित देशों की श्रेणी में ले आया है। सिवाय सूचना प्रौद्योगिकी के हम किसी और क्षेत्र में आगे नहीं हैं और सूचना प्रौद्योगिकी की इस अंधी दौड़ की वजह से बाकी के प्रौद्योगिक क्षेत्रों का क्या हाल हो रहा है वो किसी से छुपा नहीं है। सारे विद्यार्थी प्रोग्रामर ही बनना चाहते हैं, किसी और क्षेत्र में कोई जाना ही नहीं चाहता है। क्या इसी को चहुँमुखी विकास कहते हैं? दुनिया के लगभग सारे मुख्य विकसित व विकासशील देशों में वहाँ का काम उनकी भाषाओं में ही होता है। यहाँ तक कि कई सारी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अंग्रेज़ी के अलावा और भाषाओं के ज्ञान को महत्व देती हैं। केवल हमारे यहाँ ही हमारी भाषाओं में काम करने को छोटा समझा जाता है। हिंदी भारत का मान है, कहा जाये तो हिन्दी के बिना हिन्दुस्तान की कल्पना करना निरर्थक है। आज हमारे देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे हैं। बचपन में हम सुना करते थे कि सोवियत रूस में नियुक्त राजदूत विजय लक्ष्मी पंडित जो कि प्रधानमंत्री नेहरू की सगी बहन थीं, ने रूस के राजा स्टालिन को अपना पहचानपत्र अंग्रेजी में भेजा। उन्होंने स्वीकार करने से इंकार कर दिया और पूछा कि क्या भारत की अपनी कोई भाषा है या नहीं। उन्होंने फिर हिन्दी में परिचय पत्र भेजा तब उन्होंने मिलना स्वीकार किया। अंग्रेजी व्यापार की भाषा है जरूर लेकिन वह ज्ञान की भाषा नहीं। सबसे अधिक ज्ञान-विज्ञान तो संस्कृत में है जिसे भाषा का दर्जा दिया जाना महज औपचारिकता भर रह गया है। आज जरूरत है हमारी सरकार को हिंदी का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहिए। जैसे कि चीन अपनी भाषा को प्रोत्साहन दे रहा है। वैसे ही भारत देश को अपनी भाषा को प्रोत्साहन देना होगा। और जितने भी देश में सरकारी कामकाज होते है वो सब हिंदी में होने चाहिए। और हिंदी में उच्च स्तरीय शिक्षा के पाठयक्रम को क्रियान्वित करने की जरूरत है। सभी जानते हैं कि अंग्रेजी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। मैं अपने विचार से कहना चाहूँगा की अग्रेजी सभी को सीखना चाहिए लेकिन उसे अपने ऊपर हमें कभी हावी नहीं होने देना है, अगर अंग्रेजी हमारी ऊपर हावी हो गयी तो हम अपनी भाषा और संस्कृति सब को नष्ट कर देंगे। इसलिए आज से ही सभी को हिंदी के लिए कोशिश जारी कर देनी चाहिए। अगर हमने शुरुआत नहीं की तो हमारी राजभाषा एक दिन संस्कृत की तरह प्रतीकात्मक हो जायेगी। जिसके जिम्मेदार और कोई नहीं हम लोग होंगे। अंग्रेजी भाषा की मानसिकता आज हम पर, खासकर हमारी युवा पीढ़ी पर इतनी हावी हो चुकी है कि हमारी अपनी भाषाओं की अस्मिता और भविष्य संकट में है। इसके लिए हमें प्रयास करने होंगे। और इसके लिए जरूरत है कि हमें अंग्रेजी को अपने दिलो-दिमाग पर राज करने से रोकना होगा, तभी हिंदी आगे बढ़ेगी और राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की यह घोषणा साकार होगी – “है भव्य भारत ही हमारी मातृभूमि हरी-भरी हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा और लिपि है नागरी।” Read more » हिंदी के बिना हिन्दुस्तान अधूरा है
लेख हिंदी दिवस वैश्विक परिपेक्ष्य में हिन्दी September 14, 2023 / September 14, 2023 by नीतेश राय | Leave a Comment हिन्दी भाषा का इतिहास साढ़े तीन हजार वर्षों पुराना है ,लेकिन आज जिस हिन्दी भाषा को हम लिखते बोलते है ये केवल 121 वर्ष पुरानीं है |हिन्दी एक ऐसी भाषा है जो हजारों वर्षों बाद विकसित हुई और समय के साथ बदलती गई |इसके साथ जो लोग अपने को नही बदल पाए ,वे आज भी […] Read more » Article on hindi diwas Hindi Diwas
व्यंग्य कहने से नहीं, अपनाने से होगी हिंदी की सार्थकता September 14, 2023 / September 14, 2023 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ आप सभी जेंटलमैन को ‘ हिंदी दिवस’ की मैनी मैनी कांग्रेचुलेशन। यू नो वेरी वेल कि हिंदी हमारी मदरटेंग है। इसकी रिस्पेक्ट करना हम सब की रेस्पॉनसबिलीटी है। टुमारो हमारे कॉलेज ने भी हिंदी-डे पर एक प्रोग्राम आयोजित किया था। उसमें पधारे चीफ गेस्ट ने हिंदी की इंपोर्टेंस पर बड़ी ही अट्रेक्टिव और […] Read more » कहने से नहीं
लेख मनुष्य की मनुष्य के प्रति कृतज्ञता है क्षमा ! September 13, 2023 / September 13, 2023 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment मनुष्य जीवन में क्षमा(माफ करना )का बहुत बड़ा महत्व है। जो व्यक्ति क्षमा करना जानता है वह जीवन में सदैव आगे बढ़ता है, उन्नति प्रगति करता है। क्षमाशील होने का मतलब है सहनशील होना या क्षमा करने वाला। क्षमा देखा जाए तो हमारे जीवन का एक आभूषण है। क्षमा करने वाला व्यक्ति हमेशा शांत प्रकृति […] Read more » Forgiveness is man's gratitude to man