दोहे निर्गुण सगुण की सृष्टि लीला! June 23, 2020 / June 23, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment निर्गुण सगुण की सृष्टि लीला, ब्रह्म चक्र सुधा रही; संचर औ प्रतिसंचर विहर, आयाम कितने छू रही! प्रकृति पुरुष संयोग कर, सत रज औ तामस सज सँवर; हो महत फिर वर अहं चित्त, भूमा मना छायी रही! जब चित्त तामस गुण गहा, आकाश तब उमड़ा गुहा; वायु बही अग्नि उगी, जल बहा औ पृथ्वी बनी! […] Read more » निर्गुण सगुण की सृष्टि लीला!
व्यंग्य चाँद और रोटियां June 23, 2020 / June 23, 2020 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment दिलीप कुमार प्रगतिशीलता के पुरोधा,परम्पराओं को ध्वस्त करने वाले कवि करुण कालखंडी जी देश में मजदूरों के पलायन से बहुत दुखी थे ,उन्होंने लाक डाउन के पहले दिन से बहुत मर्माहत करने वाली तस्वीरें और करुणा से ओत प्रोत कविताएं लिखी थीं ।वो सरकार पर बरसते ही रहे थे कि सरकार ने ऐसा क्यों किया ?कोई […] Read more » चाँद और रोटियां
लेख समाज काल के प्रवाह में आचार संहिता June 21, 2020 / June 21, 2020 by गंगानन्द झा | Leave a Comment मेरी माँ के पहनावे में सिलेसिलाए वस्त्र शामिल नहीं थे। कमर से साड़ी के नीचे कपड़े का एक टुकड़ा लपेटा रहा करता था। कमर का ऊपरी भाग साड़ी के आँचल में लिपटा एवम् ढका रहा करता था। हमारी दीदी साड़ी के साथ साया और ब्लाउज पहना करती थी। हमारी छोटी बहन दीदी से बीस साल […] Read more » Code of conduct in the flow of time काल के प्रवाह में आचार संहिता
आर्थिकी राजनीति लेख वैश्विक महामारी Covid-19 के बाद देश में एक नई आर्थिक शुरूआत June 21, 2020 / June 21, 2020 by श्रवण बघेल | Leave a Comment श्रवण बघेल वैश्विक महामारी Covid-19 के कारण आज हमारे देश में आर्थिक प्रगति रुक गयी है | अगर हम वर्तमान समय को देश में अर्थव्यवस्था की दृष्टि से देखें, तो भारत की स्वतंत्रता के बाद से प्रथम बार भारत इस प्रकार का आपातकाल देख रहा है , हमारी पीढ़ी के लिए तो यह एक दम […] Read more » Covid-19 के बाद देश में एक नई आर्थिक शुरूआत आर्थिक शुरूआत वैश्विक महामारी
कविता पिता दिवस June 21, 2020 / June 21, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पिता परमेश्वर तो नहीं,पर परिवार का तो पालक है।करता है दिन रात परिश्रम,वहीं घर का चालक है।। पिता ही पत्नी का पति है,उससे ही सारे रिश्ते बनते है।चाचा ताऊ नाना मामा,परिवार के रिश्ते इससे बनते है।। पिता ही मां का श्रंगार है,बच्चो का वह संसार कहलाता है।पिता ही घर की छत दीवार है,वह ही सबको […] Read more » पिता दिवस
व्यंग्य कोरोना संबंधी ‘ज्ञान वर्षा ‘ से भ्रमित होता आम आदमी June 21, 2020 / June 21, 2020 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़रीकोरोना महामारी का क़हर लगभग पूरे विश्व में अपना रौद्र रूप धारण किये हुए है। सुखद समाचार यह है कि जहाँ न्यूज़ीलैंड,तंज़ानिया,वेटिकन,फ़िज़ी,मोंटेनेग्रो, सेंट किट्स-नेविस , सेशल्स, तिमोर- लेस्त तथा पापुआ न्यू गिनी जैसे कई देशों ने कोरोना पर क़ाबू पाकर स्वयं को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया है वहीं उत्तर कोरिया,तुर्कमेनिस्तान, माइक्रोनेशिया, तुवालु,किरिबाती, नाउरु, मार्शल आइलैंड्, पलाउ, वनुआटू,सोलोमन आइलैंड्स, टोंग जैसे अनेक छोटे परन्तु सौभाग्यशाली देश ऐसे […] Read more » कोरोना संबंधी ज्ञान वर्षा
कविता खेलने खाने दो उनको ! June 21, 2020 / June 21, 2020 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment खेलने खाने दो उनको,टहल कर आने दो उनको;ज़रा गुम जाने दो उनको,ढूँढ ख़ुद आने दो उनको ! नहीं कोई कहीं जाता,बना इस विश्व में रहता;स्वार्थ में रम कभी जाता,तभी परमार्थ चख पाता ! प्रयोगी प्रभु उसे करते,जगत बिच स्वयं ले जाते;हनन संस्कार करवाते,ध्यान तब उनका लगवाते ! बाल वत विचर सब चलते,प्रौढ़ होते समय लेते;प्रकृति […] Read more » खेलने खाने दो उनको
लेख योग, संयोग और सहयोग June 20, 2020 / June 20, 2020 by डॉ. राकेश राणा | Leave a Comment डॉ0 राकेश राणा21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत के लिए गौरव का दिन है। यह तारीख़ विश्व-गुरु भूमिका में भारत का प्रस्थान बिन्दू है। जहां से दुनियां को सुख, समृद्धि और निरोग जीवन के सूत्र प्रदान करने वाली योग पद्धति का औपचारिक प्रथम परिचय सत्र प्रारम्भ हुआ। भारत विश्व कल्याण के लिए संयुक्त राष्ट् संघ […] Read more » योग
कविता बाबूजी का थैला June 20, 2020 / June 20, 2020 by डॉ. सदानंद पॉल | Leave a Comment ■ डॉ. सदानंद पॉल होश सँभालने से अबतक,थैले ढो रहे हैं बाबूजी;बचपन में स्लेट व पोथी लिएथैले ढोये थे बाबूजी;कुछ बड़े हुए, तो उसी थैले मेंटिकोले चुनते थे बाबूजी;उमर बढ़े, उसी थैले में मिट्टी खिलौने भरबेचने, मेले जाते थे बाबूजी;कुम्हारगिरी से गुजारे नहीं, तो दर्ज़ीगिरी लिएउसी थैले में कपड़े लाते थे बाबूजी;फिर टेलीफून भरकर उसी […] Read more » बाबूजी का थैला
कविता बहिष्कार करो चीनी माल का June 19, 2020 / June 19, 2020 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बहिष्कार करो चीनी माल का,अगर देश को तुम्हे बचाना है।प्रण करो देशवासियों आज सभीभारत को आत्मनिर्भर बनाना है।। बन्द करो चीनी आयात को,निर्यात को तेजी से बढ़ाना है।भारत को आर्थिक दृष्टिकोण सेअब खूब माला माल बनाना है।। आत्मनिर्भर जब होगा भारत,तभी हर जंग लड़ पाएगा।चीन पाक जैसे मुल्कों को,तभी भारत धूल चटा पाएगा।। सेना सीमा […] Read more » बहिष्कार करो चीनी माल का
लेख विविधा सार्वजनिक परिवहन को ज्यादा साफ-सुरक्षित बनाना होगा June 19, 2020 / June 19, 2020 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment डॉo सत्यवान सौरभ, अब परिवहन सड़कों पर लौट आया है, लेकिन जब तक कोरोनोवायरस संक्रमण बढ़ रहा है, चीजें सामान्य से बहुत दूर रहेंगी। अर्थव्यवस्था को फिर से गति देने और शहरों में कामगारों को कार्यस्थल पर लाने में सार्वजनिक परिवहन एक प्रमुख माध्यम है, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के समय में बसों, ट्रेनों की […] Read more » Public transport will have to be made safer सार्वजनिक परिवहन
लेख जब रानी झाँसी ‘लक्ष्मीबाई’ खुद को ‘बलिदान’ कर गयी June 19, 2020 / June 19, 2020 by डॉ. सदानंद पॉल | Leave a Comment ■ डॉ. सदानंद पॉल ‘खूब लड़ी मर्दानी, वो तो झांसी वाली रानी थी’ कि कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान को ही मैं बाल्यावस्था में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई समझता था । वो मराठी ब्राह्मण थी । विकिपीडिया के अनुसार, लक्ष्मीबाई का जन्म बनारस में 19 नवम्बर 1828 को हुई थी, बचपन का नाम मणिकर्णिका थी, लेकिन प्यार से […] Read more » When Rani Jhansi Lakshmibai sacrificed herself रानी झाँसी लक्ष्मीबाई