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    Homeसाहित्‍यकविताखेलने खाने दो उनको !

    खेलने खाने दो उनको !

    खेलने खाने दो उनको,
    टहल कर आने दो उनको;
    ज़रा गुम जाने दो उनको,
    ढूँढ ख़ुद आने दो उनको !

    नहीं कोई कहीं जाता,
    बना इस विश्व में रहता;
    स्वार्थ में रम कभी जाता,
    तभी परमार्थ चख पाता !

    प्रयोगी प्रभु उसे करते,
    जगत बिच स्वयं ले जाते;
    हनन संस्कार करवाते,
    ध्यान तब उनका लगवाते !

    बाल वत विचर सब चलते,
    प्रौढ़ होते समय लेते;
    प्रकृति की टहनियाँ लखते,
    विकृति तब ही मिटा पाते !

    दर्द अपनों को दे जाते,
    भाँप पर वे कहाँ पाते;
    ‘मधु’ हिय उर रखे उनके,
    मुक्त मन निरखते उनको !

    ✍? गोपाल बघेल ‘मधु’

    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल 'मधु'
    गोपाल बघेल ‘मधु’ अध्यक्ष अखिल विश्व हिन्दी समिति आध्यात्मिक प्रबंध पीठ मधु प्रकाशन टोरोंटो, ओन्टारियो, कनाडा www.GopalBaghelMadhu.com

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