लेख संजीवनी की तलाश में दिख रही भारतीय रेल! December 30, 2019 / December 30, 2019 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे सरकारी व्यवस्थाओं का निजिकरण करना हुक्मरानों के लिए बहुत ही आसान काम है। इससे अपने किसी चहेते को लाभ पहुंचाने के मार्ग आसानी से प्रशस्त किए जा सकते हैं। यक्ष प्रश्न यही है कि सरकारों के द्वारा जिन विभागों में निजिकरण की बयार बहाई जा रही है वहां के जिम्मेदार अफसरान की गलत […] Read more » Indian Railways Indian Railways is looking for Sanjeevani भारतीय रेल
व्यंग्य डर दा मामला है December 30, 2019 / December 30, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “सबसे विकट आत्मविश्वास मूर्खता का होता है ,हमें एक उम्र से मालूम है –हरिशंकर परसाई”। फिल्मों की “द फैक्ट्री “चलाने वाले निर्देशक राम गोपाल वर्मा महोदय ने डर के लेकर दिलचस्प प्रयोग किये।वो अपनी किसी फेम फिल्म में डर फेम शाहरुख़ खान को तो नहीं ला पाये ,लेकिन डर को लेकर उन्होंने विभिन्न प्रयोग किये […] Read more » डर दा मामला है
कविता संघातों में सदा अविचल होना ! December 30, 2019 / December 30, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment तुम वीरता के दृढ़ प्रतिमान , कभी नहीं धीरज खोना ! कंटक राहें हों दुर्निवार , न भयभीत कहीं रुकना-झुकना ! तुम वीर प्रहरी पुण्यभूमि के , अनंत शक्ति संवाहक होना ; तूफान मिले विस्फोट मिले , अडिग अटल अविचल होना । तुम सभ्यता के पुरातन दृढ़ स्तम्भ , अनन्त संस्कृतियों के ,चिर-संवाहक होना ; […] Read more » संघातों में सदा अविचल होना
कविता विनय December 30, 2019 / December 30, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ईश्वर ! तुमने हमे दिया है सुंदर सा एक शरीर स्वस्थ सभी अंग दिए है ये अपनी जागीर हमको दो आँखे दी तुमने देख-भाल कर बढ़े चले कान दिए हैं सुने मधुर हम अच्छाई को सुने-गुने दो है हाथ दिए हमको हम, काम हजारो कर लेंगे दो पैरो के बल चलकर हम नए-नए पथ खोलेगे […] Read more » विनय
व्यंग्य खुदाई मेरा राष्ट्रीय दायित्व है ! December 29, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल खुदाई हमारी संस्कार में रची बसी है। हमारे पुरखों की यह विरासत रही है। खुदाई की वजह से हमने ऐतिहासिक सभ्यताएं हासिल की हैं, जिनका महत्व हमारी इतिहास की मोटी-मोटी किताबों मंे दर्ज है। खुदाई से निकली ऐसी सभ्यताओं पर […] Read more » Digging is my national responsibility
बच्चों का पन्ना लेख समाज गुम होते बचपन और बाल सुलभ हरकतों पर भी हो विचार December 26, 2019 / December 26, 2019 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे आज दौड़ती भागती जिंदगी में मनुष्य रोज ही न जाने कितनी जद्दो जहद से रूबरू होता है। संचार क्रांति के इस युग में बच्चों पर ध्यान देने की फुर्सत शायद ही माता पिता को रह गई है। पैसा कमाने की अंधी होड़ में बच्चों का बचपन गुम हो रहा है। बच्चों की बाल […] Read more » lost childhood गुम होते बचपन
लेख नव-वर्ष की हार्दिक बधाई !! December 25, 2019 / December 25, 2019 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment नव-वर्ष की हार्दिक बधाई !! “ नवल किरण से सजी उषा का , दिव्य प्रभात मुबारक हो। धन-धान्य भरे आगार रहें, सुख- सम्पत्ति हर्ष मुबारक हो।। विद्या-व्यापार,कला-कौशल ,अवनी पर नाम मुबारक हो। भगवान-कृपा से आज सभी को,नूतन वर्ष […] Read more » नव-वर्ष की हार्दिक बधाई
लेख भारत की इतिहास परंपरा में उपनिषदों का योगदान December 25, 2019 / December 25, 2019 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment भारत की राष्ट्रीय चेतना को आर्ष ग्रंथों ने बहुत अधिक प्रभावित किया है । बहुत दीर्घकाल तक भारतीय संस्कृति की प्रेरणा के स्रोत बने इन ग्रंथों ने भारत के राष्ट्रीय मानस को ,राष्ट्रीय चेतना को , राष्ट्रीय परिवेश को और राष्ट्रीय इतिहास को इतना अधिक प्रभावित किया है कि इनके बिना भारतीयता के उद्बोधक इन […] Read more » Contribution of Upanishads Contribution of Upanishads to the history tradition of India उपनिषदों का योगदान
लेख सार्थक पहल जानिए अपने उपभोक्ता अधिकार December 24, 2019 / December 24, 2019 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (24 दिसम्बर) पर विशेष बनें जागरूक उपभोक्ता – योगेश कुमार गोयल रमेश ने बाजार से बिजली का एक पंखा खरीदा लेकिन एक वर्ष की गारंटी होने के बावजूद सिर्फ दो महीने बाद ही पंखा खराब होने पर भी दुकानदार उसे ठीक कराने या बदलने में आनाकानी कर रहा है। रेलवे भर्ती […] Read more » consumer right national consumer day world consumer rights day उपभोक्ता अधिकार राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (24 दिसम्बर)
व्यंग्य आपको क्या तकलीफ है December 24, 2019 / December 24, 2019 by दिलीप कुमार सिंह | 1 Comment on आपको क्या तकलीफ है रिपोर्टर कैमरामैन को लेकर रिपोर्टिंग करने निकला।वो कुछ डिफरेंट दिखाना चाहता था डिफरेंट एंगल से ।उसे सबसे पहले एक बच्चा मिला ।रिपोर्टर ,बच्चे से-“बेटा आपका इस कानून के बारे में क्या कहना है”?बच्चा हँसते हुये-“अच्छा है,अंकल इस ठण्ड में सुबह सुबह उठकर स्कूल नहीं जाना पड़ता “।रिपोर्टर -आपकी सरकार से क्या डिमांड है ?बच्चा -सरकार […] Read more » आपको क्या तकलीफ है
कविता सबसे लम्बी रात का सुपना नया… December 24, 2019 / December 24, 2019 by अरुण तिवारी | Leave a Comment अरुण तिवारी सबसे लम्बी रात का सुपना नया देह अनुपम बन उजाला कर गया। रम गया, रचता गया रमते-रमते रच गया वह कंडीलों को दूर ठिठकी दृष्टि थी जो पता उसका लिख गया सबसे लम्बी रात का सुपना नया… रमता जोगी, बहता पानी रच गया कुछ पूर्णिमा सी कुछ हिमालय सा रचा औ हैं रची […] Read more » सबसे लम्बी रात का सुपना नया
लेख समाज कहां गई डोली और कहां गए कहार December 24, 2019 / December 24, 2019 by अनिल अनूप | 4 Comments on कहां गई डोली और कहां गए कहार -अनिल अनूप दो कहार आगे और दो ही कहार पीछे अपने कंधो पर रखकर डोली में बैठने वाले को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे. थक जाने की स्थिति में सहयोगी कहार उनकी मदद भी करते थे. इसके लिए मिलने वाले मेहनताने और इनाम इकराम से कहारों की जिंदगी की गाड़ी चलती थी. […] Read more » doli doli aur kahar kahar डोली