साहित्‍य

मार्कण्डेय : जीवन के बदलते यथार्थ के संवेगों का साधक

-अरुण माहेश्वरी ‘निर्मल वर्मा की कहानियों में लेखकीय कथनों की एक कतार लगी हुई है। जहां जरा-सा गर्मी-सर्दी लगी कि...

उत्तर आधुनिकतावाद क्या है?

-जगदीश्‍वर चतुर्वेदी उत्तर-आधुनिकतावाद को वृद्ध पूंजीवाद की सन्तान माना जाता है। पूंजीवाद के इजारेदाराना दौर में तकनीकी प्रोन्नति को इसका...

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