कविता धर्म बदला जाति बदली,बदल लिया है गोत्र March 6, 2019 / March 6, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment धर्म बदला जाति बदली,बदल लिया है गोत्र दादा को दफनाया है,पंडित बन गया है पौत्र पंडित बन गया है पौत्र,वोट हमे कैसे मिलेगी बताओ कोई उपाय,सत्ता हमे अब कैसे मिलेगी कह रस्तोगी कविराय,क्यों करते हो ऐसा अधर्म धर्म बदलने से कुछ नहीं होगा,अपनाओ राष्टधर्म आतंकी कितने मारे गये,इस पर चल रही बहस पक्ष विपक्ष के […] Read more » धर्म बदला जाति बदली
लेख कैसे इंटर्नशिप नौकरी पाने में सहायक होती हैं। March 6, 2019 / March 6, 2019 by सर्वेश अग्रवाल | Leave a Comment इंजीनियरिंग छात्रा पूजा मिश्रा को कॉलेज प्लेसमेंट के माध्यम से नौकरी नहीं मिली। अच्छे अकादमिक प्रदर्शन के बावजूद वह इंटरव्यू के तकनीकी राउंड में सफल नहीं हो पायी। एक कॉलेज सीनियर के सुझाव पर उसने इंटर्नशिप करने का निर्णय किया। पूजा की कंटेंट राइटिंग में रुचि थी अतः उसने इस क्षेत्र की इंटर्नशिप के लिए […] Read more »
गजल आँसुओं में जब कोई मुझको लखा ! March 5, 2019 / March 5, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आँसुओं में जब कोई मुझको लखा,दास्तानों का उदधि वरवश चखा;दीनता की मम हदों को वह तका,क्षुद्रता की शुष्कता को वह चखा ! अभीप्सा मन मेरे में जो भी रही,शिक्षा दीक्षा जो हृदय मेरे रही;जगत ने जो उपेक्षा मेरी करी,भक्ति की जो भाव धारा मन भरी ! लख सका था क्या पथिक जीवन तरी,स्वानुभूति के परे […] Read more »
कविता देवो के है वे महादेव, March 5, 2019 / March 5, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment देवो के है वे महादेव,नमन इनको सब देव करते | खाली हाथ कोई नहीं जाता झोली सबकी भरते || सारा जहाँ नमन करता,शरण में उनकी जाते | शरण में उनकी जाकर,श्रद्धा के सुमन चढ़ाते || जरा सी भक्ति पर,रावण को दी सोने की लंका | बना है वह भोला भंडारी,बजाते डमरू का डंका || ये है महा […] Read more »
कविता मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता ! March 5, 2019 / March 5, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता, जाती उड़ कभी वही अलबत्ता;लखे खद्योत कभी द्योति तके,ज्योति संश्लेत कभी स्रोत लखे ! भूल मैं जाता कभी जो तरता,भटक में पाता कभी जो खोता;अटक मैं जाता कभी आहिस्ता,पार कर जाता कभी जग सरिता ! त्याग की सीमा कभी मैं वरता,सोच की हद से दूर मैं होता;भाव में पर कभी मैं […] Read more » मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता
कविता मोदी है तो सब मुमकिन है | March 1, 2019 / March 1, 2019 by आर के रस्तोगी | 4 Comments on मोदी है तो सब मुमकिन है | मोदी जी जो कहते है |वे हमेशा करते भी है ||अब तो साबित हो गया |वे 56 इंच का सीना रखते है || वैसे तो पहले भारत छेड़ता नहीं | छेड़ता है तो फिर वह छोड़ता नहीं || सुन ले पाक ! कान खोल कर | वख्त हमारा होगा,इलाका तेरा होगा || मोदी है तो […] Read more » मोदी है तो सब मुमकिन है |
कविता भालू , राम टटोले बोले February 27, 2019 / February 27, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment हाथी दादा लिए सूंड में, मोबाइल ,भन्नाकर बोले। क्यों करते डिस्टर्ब बीच में, मुझको मिस्टर राम टटोले। नहीं फेस बुक ,अभी छुआ है, वाट्स एप में लगा हुआ हूँ। बार- बार तुम प्रश्न पूछते, कोतवाल जी! क्या उत्तर दूँ? Read more » भालू
लेख आज भी प्रासंगिक हैं वीर सावरकर February 26, 2019 / February 26, 2019 by इंद्रभूषण मिश्र | Leave a Comment काल स्वयं मुझसे डरा है.मैं काल से नहीं,कालेपानी का कालकूट पीकर,काल से कराल स्तंभों को झकझोर कर,मैं बार बार लौट आया हूं,और फिर भी मैं जीवित हूं,हारी मृत्यु है, मैं नहीं….।।ऐसे बहुत कम होता है कि जितनी ज्वाला तन में हो उतना ही उफान मन में हो. जिसके कलम में चिंगारी हो उसके कार्यों में […] Read more »
कविता जनता की आवाज सुनो February 25, 2019 / February 25, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जनता में आक्रोश है,पहले अब इसको शांत करो गद्दारों को मार भगाओ,फिर पाक पर वार करो जे एन यु,ए एम यु, आंतकवाद की फैक्ट्री बंद करो सिद्धू जैसे दोगले नेताओ को,अब देश से बाहर करो मोदी जी अब लोहा गर्म है,इस पर तुम चोट करो अब मौका अच्छा है,धारा 370 को तुम खत्म करो संसद का तुम सत्र […] Read more » जनता की आवाज सुनो
व्यंग्य साहित्य मेरी दावेदारी भी लिख लें February 25, 2019 / February 25, 2019 by विजय कुमार | Leave a Comment किसी भी विवाह या जन्मदिन समारोह में जाएं, तो वहां कुछ राशि भेंट देना एक परम्परा है। कहीं इसे व्यवहार कहते हैं, तो कहीं शुभकामना या आशीर्वाद। मेजबान कुछ संकोच से ‘‘इसकी क्या जरूरत थी ?’’ कहकर उसे जेब में रख लेता है। कुछ जगह कुछ बुजुर्ग मेज-कुर्सी डालकर बैठे रहते हैं। वे मेहमान की […] Read more »
कविता बात-चीत से कुछ नहीं होगा,अब तो सीधा वार करो | February 21, 2019 / February 21, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बात-चीत से कुछ नहीं होगा,अब तो सीधा वार करो | बात-चीत का समय खत्म है,अब तो करारी चोट करो || लातो के भूत बातो से न माने,अब तुम क्यों बात करो ?पहले भी बात हुई थी,उनके परिणामो पर जरा गौर करो || मिली है छूट अब सेना को,थोडा अब तुम इंतजार करो | बात करने इमरान भी […] Read more » बात-चीत से कुछ नहीं होगा
कविता है नमन उन शहीदों को,जो तिरंगा ओढ़ कर सो गये | February 20, 2019 / February 25, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment है नमन उन शहीदों को,जो तिरंगा ओढ़ कर सो गये | है नमन उन जवानो को,जो धरा पर नया बीज बो गये || क्या लिखू उनके बारे में अब,शब्द भी बौने हो गये | जो मात पिता के दुलारे थे,वे अब सभी के हो गये || ये धरा भी रो रही है, उनके शोर्य को […] Read more »