साहित्य वाड्रा पर ई डी का शिकंजा February 7, 2019 / February 11, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment ई डी ने वाड्रा पर जबसे कसा है शिकंजा देखो,अब कांग्रेस कौन सा लड़ाईती है पंजा लन्दन में जो नो नो प्रॉपर्टी रखता ई डी के सामने वह नो नो करता वाड्रा बना है छोटे से बड़ा आदमी देखो,उसकी पूछ-ताछ ऐसी ही होती प्रियंका को दिया महासचिव का प्रभार देखो,तुम अब भाई-बहिन का प्यार जब से वह इस सीट पर है बैठी देखो,उसने एक […] Read more » Enforcement Directorate and Robert Vadra Robert Vadra Robert Vadra and ED Vadra under the clutches of ED
व्यंग्य हे स्पीड प्रेमी बाइकरों… राहगीरों पर रहम करो…!! February 4, 2019 / February 4, 2019 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझाहे स्पीड प्रेमी बाइकरों… खतरों से खेलने पर आमादा नौजवानों। प्लीज हमराहगीरों पर रहम करो। क्या गांव और क्या शहर क्या चौक – चौराहा। हर सड़कपर आपका ही आतंक पसरा है। बेहद जरूरी कार्य से निकले शरीफ लोग भले हीपुलिसकर्मियों की नजरों में आ जाए, लेकिन पता नहीं आप लोगों के पास ऐसाकौन […] Read more »
लेख मनुष्य की मृत्य क्यों होती है? February 4, 2019 / February 4, 2019 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य अपनी माता से इस संसार में जन्म लेता है। आरम्भ में शैशव अवस्था होती है। समय के साथ उसके शरीर व ज्ञान में वृद्धि होती है। वह माता की बोली को सुनकर उसे समझने लगता है व कुछ समय बाद बोलने भी लगता है। शैशव अवस्था बीतने पर किशोर व […] Read more »
कविता बजट आते ही, राहुल जी हुए बडे उदास February 4, 2019 / February 4, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बजट आते ही, राहुल जी हुए बडे उदास कहने को बचा नहीं,मुद्दा नहीं कोई पास मुद्दा नहीं पास,बीजेपी को कैसे दे झटका सोचे सभी उपाय,माथे को काफी पटका कह रस्तोगी कविराय,लिखाओ तुम रपट रपट लिखाते ही ,रूक जाएगा ये बजट बजट आते ही मध्यम वर्ग हुआ खुशहाल किसान मजदूर वर्ग भी,हुआ है मालामाल हुआ है मालामाल मोदी के सब गुण गायेगे सन 19 […] Read more » बजट आते ही
कविता काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता February 2, 2019 / February 2, 2019 by आर के रस्तोगी | 3 Comments on काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता तुम्हारे कानो से चिपका होता तुम अपने दिल की बात कहतीमैं अपने दिल की बात कहता काश ! तुम मेरे मोबाइल होतेभले ही मेरे कानो से चिपके होतेपर जब मैं बॉय फ्रेंड से बात करती तुम्हारे दिल में कडवाहट होती काश ! मै तुम्हारा दीपक होता तुम मेरी तेल बाति होती मै सारी रात […] Read more » काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता
लेख जार्ज फर्नांडीसः कुछ संस्मरण February 2, 2019 / February 2, 2019 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिकजाॅर्ज फर्नांडीस जब 1967 में पहली बार लोकसभा में चुनकर आए तो सारे देश में उनके नाम की धूम मची हुई थी। वे बंबई के सबसे लोकप्रिय मजदूर नेता थे। उन्होंने कांग्रेस के महारथी एस के पाटील को मुंबई में हराया था। तब जाॅर्ज संसोपा के उम्मीदवार थे। संयुक्त समाजवादी पार्टी के नेता […] Read more »
साहित्य जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन का February 1, 2019 / February 1, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जो रहगुज़र हो जाए तेरे तन बदन का मुझे वही झमझमाती बारिश कर दो तुमसे मिलते ही यक ब यक पूरी हो जाए मुझे वही मद भरी ख़्वाहिश कर दो जो रुकती न हो किसी भी फ़ाइल में मेरी उसी “साहेब” से गुजारिश कर दो गर लैला-मजनूँ ही मिशाल हैं अब भी फिर हमारे भी […] Read more »
कविता आज मेरा मन डोले ! January 31, 2019 / January 31, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment आकुल-व्याकुल आज मेरा मन , ना जाने क्यों डोले…..विघटित भारत की वैभव को ले लेभाषा इंकलाब की बोलेआज मेरा मन डोले !कष्टों का चित्रण कर रहा व्यथित ह्रदय मेरासुदृढ दासता और बंधन की फेरा…..उजड रही जीवों की बसेरा,सुखद शांति की कब होगी सबेरा…..!न्यायप्रिय शांति के रक्षक, त्वरित क्रांति को खोलें….आज मेरा मन डोले…..!भाषा इंकलाब […] Read more »
कविता वे लोग January 27, 2019 / January 27, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment उदासीन जीवन को लेक्या-क्या करते होंगे वे लोगन जाने किन-किन स्वप्नों को छोड़कितने बिलखते होंगो वे लोग।कितने संघर्ष गाथाओं में, अपनी एक गाथा जोड़ते होंगे वे लोगपर भी, असहाय होकरकैसे-कैसे भटकते होंगो वे लोग।कुछ बाधाओं से जूझते परास्त नहींकैसे होते होंगे वे लोग;जीवन को दाँव लगा राष्ट्र हित में,मिटने वाले कौन होते होंगे वे लोग।गरीबी में […] Read more »
कविता मैं माटी का छोटा सा दीपक हूँ,सबको देता हूँ प्रकाश January 27, 2019 / January 27, 2019 by आर के रस्तोगी | 5 Comments on मैं माटी का छोटा सा दीपक हूँ,सबको देता हूँ प्रकाश मैं माटी का छोटा सा दीपक हूँ,सबको देता हूँ प्रकाश अन्धकार को दूर भगाता हूँ,ये मेरा है पक्का विश्वास तेल बाति मेरे परम मित्र है,ये देते है मेरा सैदव साथइन के बिन किसी को न दे पाता हूँ,मैं अपना प्रकाश दिवाली त्यौहार की रौनक हूँ मै, कुम्हार मुझे बनाते है गरीब मजदूर मुझे ही बेचकर,दिवाली अपनी मनाते […] Read more » दीपक
कविता साहित्य नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाई January 25, 2019 / January 25, 2019 by बरुण कुमार सिंह | 1 Comment on नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाई नेताओं से आजादी बाकी है मेरे भाईनेताजी कह रहे हैं-तू हिन्दू, तू मुस्लिम, तू सिख, तू ईसाईतो बताओ, तुम कैसे हुए भाई-भाई।भाईचारे के नाम परभाई-भाई को आपस में लड़वाईअपनों को ही अपने से बैर करवाईअमन के नाम पर विष फैलाई।नेताओं का नहीं हैकोई धर्म ईमान मेरे भाई।अब तो साधुबाबा ने भीबजरंगी को दलित बतलाई।कभी भाषा, […] Read more »
व्यंग्य रसगुल्ले पर रसीली चर्चा January 25, 2019 / January 25, 2019 by विजय कुमार | 1 Comment on रसगुल्ले पर रसीली चर्चा कहते हैं कि खबरों का अपना संसार तो है ही; पर उनका स्वाद भी होता है। विश्वास न हो, तो इस मीठी खबर का स्वाद लें। पिछले दिनों कोलकाता में रसगुल्ले के आविष्कार के 150 साल पूरे होने पर ‘रसगुल्ला उत्सव’ मनाया गया। उस पर डाक टिकट और विशेष कवर भी जारी किया गया है। […] Read more »