कविता ज्येष्ठ माह की दोपहरी May 29, 2019 / May 29, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी देख दोपहरी ज्येष्ठ की,गर्म हो गया गात |झुलस रहे है सब पेड़ो के नये कोमल पात || छाया भी छाया मांग रही ,है बड़ी बैचेन |छाया को छाया मिल जाये तब आये चैन || प्यासा पथिक पूछ रहा है कहाँ मिलेगा नीर |एक पग चलना है मुश्किल हो रहा वह अधीर || […] Read more »
दोहे साहित्य घन घन घण्ट देवालय टकोरे, अविरत गूँजे जा रहे हैं॥ May 29, 2019 / May 29, 2019 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on घन घन घण्ट देवालय टकोरे, अविरत गूँजे जा रहे हैं॥ डॉ. मधुसूदन (१) घन घन घण्ट देवालय टकोरे,—अविरत गूँजे जा रहे हैं। मेरे भारत की आरति–आज, विश्व सारा गा रहा है॥ —आनंद आकाश छू रहा है॥ (२) पांचजन्य* सुन, बज रहा है—हो रहा, विलम्बित *सबेरा। भोर की, आरति भारत की—–गा रहा है विश्व सारा ॥ घन घन घण्ट देवालय टकोरे,—अविरत गूँजे जा रहे हैं। (पांचजन्य* […] Read more » घन घन घण्ट देवालय टकोरे
व्यंग्य एक पाती राहुल बचवा के नाम May 29, 2019 / May 29, 2019 by विपिन किशोर सिन्हा | 2 Comments on एक पाती राहुल बचवा के नाम प्रिय पप्पू, आज बहुत दिनों के बाद तोहरे पास पाती पेठा रहे हैं। का करीं बचवा, हम भी चुनाव के नतीजों का तोहसे कम बेचैनी से इन्तज़ार नहीं कर रहे थे। सोचे थे कि तुम जीतोगे तो जोरदार बधाई देंगे, लेकिन ई मोदिया सब तहस-नहस कर दिया। पिछले विधान सभा चुनाव में तुम्हारे […] Read more » एक पाती राहुल बचवा के नाम
साहित्य वीर सावरकर का विरोध करने वाले कायर है. May 29, 2019 / May 29, 2019 by डॉ. मनीष कुमार | Leave a Comment कांग्रेस और वामपंथी सहित सभी सेकुलरिस्ट पार्टियां विनायक दामोदर सावरकर का मूल्यांकन काफी संकुचित दायरे में करती है. वो सिर्फ वीर ही नहीं थे बल्कि वो महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, लेखक और कवि भी थे. कांग्रेस जब अंग्रेजों का सेफ्टी वल्व बनकर ब्रिटिश सरकार के प्रति निष्ठा की शपथ लिया करती थी. जब भारत के स्वतंत्रता […] Read more » वीर सावरकर
कविता राजनीति अखिलेश के मन की पीड़ा May 27, 2019 / May 27, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पहले पकड़ा था राहुल का हाथ,उसने भी न दिया था मेरा साथ|इस बार माया के हाथी पे बैठा,उसने भी घुमा कर मारी लात || दोनों तरफ से मेरा बुरा हुआ ,किसी न दिया है मेरा साथ |मैंने अपनी खुद नाव डुबोई ,इसलिए मैंने खाई है मात || जिसकी थी जीरो सीट,उसको हो गयी पूरी दस […] Read more » POEM on akhilesh poetry political poem
कविता साहित्य वो छप्पर May 27, 2019 / May 27, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment वो छप्पर जिसके नीचे कभी चार जिन्दगियों का गुजारा हुआ करता था।जो जाड़े की गलन सेगर्मी की तपन सेबरसात की सीलन से उन्हें बचाता था।खुद धूप, ठंड , बरसात को झेलकर उन्हें सुरक्षित रखता था।छप्पर को सहारा देने वाले दोस्त जैसे थमले,उन पर होने वाले आँधियों के हमले।लेकिन फिर भी वो हमेशा छप्पर के साथ खड़ा रहता था,आँधियों […] Read more » poem on roof poetry roof
लेख वर्षों से स्टूडेंट्स के रोल मॉडल बने हुए हैं बिहार के मैथेमेटिक्स गुरु, प्रतिभाओं को दे रहे हैं उड़ान May 25, 2019 / May 25, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मुरली मनोहर श्रीवास्तव “आनंद कुमार, अभयानंद और आरके श्रीवास्तव जैसे शिक्षक हैं हजारों युवायों के रोल मॉडल। अपने क़डी मेहनत, उच्ची सोच और पक्का इरादा के बल पर विश्वपटल पर बनायी इन शिक्षकों ने पहचान” बिहार का मान सम्मान को विश्व पटल पर बढ़ाने वाले मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव है हजारो स्टूडेंट्स के रोल […] Read more » role models teachers tutor
कविता मोदी मुक्तक May 25, 2019 / May 25, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी दे दो गालियाँ जितनी तुम अब मुझको |कोई फर्क नहीं पड़ता सुनने में मुझको ||तय कर लिया है देश को आगे बढ़ाने का |हिम्मत हैं तो रोक कर दिखाओ मुझको || मत पूछो,आजादी कैसे ली थी हमने |कुर्बानी दे कर आजादी ली थी हमने ||गीत गाते है आज हम उन्ही दिवानो केजिन्हें […] Read more » on modi poem poem on modi poetry political poem
गजल मुक्तिका/हिंदी गजल May 25, 2019 / May 25, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हर बशर बदगुमान नजर आता है।भटका हुआ जवान नजर आता है।।प्यून है घूस से अर्श पर पहुंचा,देखिए साहिबान नजर आता है।जीभ फेरिए जरा सूखे होंठ पर,रचा रचाया पान नजर आता है।लग रही है मेनका सुंदरता में,कलेवर तो कमान नजर आता है।लतीफे की किताबें पढ़कर लगा कि,इस तरह संविधान नजर आता है। अविनाश ब्यौहार रायल एस्टेट […] Read more » genere of hindi hindi hindi gajal literature
कविता मोदी की जीत के बाद के देखने वाले द्रश्य May 24, 2019 / May 24, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी मोदी सरकार तीन सौ पचास के पार |विपक्षी दलों में मच गया है हाहाकार || कितना मचा लो तुम सब हाहाकार |अब नहीं बदल सकता है चौकीदार || रायबरेली की सीट लेकर क्या नाचेगी |अब तो वह सीधा इटली को भागेगी || प्रज्ञा ठाकुर ने दे दी दिग्विजय को मात |अब कैसे […] Read more » modi victory on modi politics
कविता राजनीति चली है मोदी की ऐसी आंधी May 24, 2019 / May 24, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी चली है मोदी की ऐसी आंधी | जिसमे उड गये राहुल गाँधी || हो न जाये काग्रेस में बगावत | आ न जाये परिवार में आफत || जब आंधी ऐसे जोर से है आती | लालू की लालटेन भी बुझ जाती || महागठबंधन अब ऐसा है टूटा | जिसमे माया का माथा […] Read more » modi poem poem on modi poetry
गजल हिंदी गजल/मुक्तिका May 24, 2019 / May 24, 2019 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment गले मिल के गला काट रहें हैं। रहनुमा देश को बाँट रहे हैं।। अवसादी घेरे हैं आस पास, चौंसठ घड़ी पहर आठ रहे हैं। आधुनिक युग का देखा हर बशर, बनते सदैव वे काठ रहे हैं। हैं दलों के बीच खाइयाँ बहुत, खाइयों को हमीं पाट रहे हैं। उनका इरादा कभी न नेक था, इज़्तिराब […] Read more » gajal