कविता कृष्ण जन्माष्टमी August 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जन्म जन्मान्तर तक,जन्माष्टमी हम मनायेंगे प्रभु कृष्ण तुम्हारी लीला के सैदव गुण ही गायेंगे द्वापर में जन्म लिया,दुष्ट कंस का वध किया अपने भक्तो की रक्षा के लिये तुमने जन्म लिया माँ देवकी ने जन्म दिया,वासुदेव के पुत्र दुलारे हो यशोदा माता ने पालन किया,नन्द बाबा के दुलारे हो ग्वाल वाल के सखा हो तुम,गोपियों […] Read more » कृष्ण तुम्हारी लीला माँ देवकी वासुदेव सुदामा
कविता ये जिन्दगी का कैसा है खेल August 28, 2018 / August 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी ये जिन्दगी का कैसा है खेल कोई पास है तो कोई है फेल कोई रोज माल पूए खाता कोई भूखा ही सो जाता कोई ए सी कमरे में सोता कोई फुट पात पर सोता ये जीवन के कैसे है खेल कोई पास तो कोई है फेल कोई रिक्शे में बैठ कर है […] Read more » गरीबों पीने को पानी प्रकृति मोदी हवाई जहाज
कविता रक्षाबन्धन का त्यौहार August 24, 2018 / August 24, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आया रक्षाबन्धन का त्यौहार लाया भाई-बहन का ये प्यार बहन सुंदर सा थाल सजाती रोली राखी व मिठाई लगाती भाई के माथे पर टीका लगाती उसको बढ़िया मिठाई खिलाती फिर हाथ में राखी पहनाती बढ़िया सा भोजन खिलाती ये देखा कितना अदभुत प्यार आया रक्षाबन्धन का ये त्यौहार राखी नहीं है मामूली सा धागा ये […] Read more » कृष्ण भगवान् धागों का त्यौहार भाई-बहन रक्षाबन्धन का त्यौहार
गजल एक गजल रक्षाबंधन पर August 24, 2018 / August 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment रिश्ते है कई दुनिया में,बहन का रिश्ता खास है बाँधती है जो धागा बहन,वह धागा कोई खास है लगाये रखती है बहन टकटकी,रक्षाबंधन के पर्व पर आयेगा उसका भाई जरुर,उसका यह एक विश्वास है सजाती है बहन जब थाली,राखी रोली और मिठाई से लगाती है जब प्यार से टीका,वह प्यार भी खास है खा […] Read more » एक गजल रक्षाबंधन पर बहन बाँधती है जो धागा बहन वह धागा कोई खास है
कहानी रेल की खिड़की से शहर – दर्शन …!! August 24, 2018 / August 24, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | 1 Comment on रेल की खिड़की से शहर – दर्शन …!! तारकेश कुमार ओझा किसी ट्रेन की खिड़की से भला किसी शहर के पल्स को कितना देखा – समझा जा सकता है। क्या किसी शहर के जनजीवन की तासीर को समझने के लिए रेलवे ट्रेन की खिड़की से झांक लेना पर्याप्त हो सकता है। अरसे से मैं इस कश्मकश से गुजर रहा हूं। जीवन संघर्ष के […] Read more » Featured गीतांजलि ट्रेन रेल की खिड़की से शहर - दर्शन ...!! हावड़ा - मुंबई
कहानी पांच से 25 करोड़ की यात्रा August 22, 2018 / August 22, 2018 by विजय कुमार | 1 Comment on पांच से 25 करोड़ की यात्रा विजय कुमार, बचपन में एक कहानी पढ़ी थी। पुनर्जीवन पर शोध कर रहे जेम्स नामक एक वैज्ञानिक की मृत्यु हो गयी। मरने से पहले उसने वसीयत में लिख दिया कि उसका शव रासायनिक लेप लगाकर 25 साल तक रख दिया जाए। उसे विश्वास था कि इतने समय में वह दवा बन जाएगी। तब वह […] Read more » Featured अभिनेता और अभिनेत्रियों जेम्स डॉक्टर पांच से 25 करोड़ की यात्रा राजनेता शव रसायन लगाकर
कहानी भाई के नाम पत्र August 22, 2018 / August 22, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा कल की डाक से तुम्हारा पत्र मिला। मैं प्रतीक्षा कर रहा था। पता नहीं क्यों देर हुई। पर खैरियत से पहुँच गया, ग़नीमत है। तुम्हारा अवलोकन सही है कि मुझे जीवन के सम्बन्ध की उक्तियों वाले वाक्य खींचते रहे हैं। शायद तुम्हें याद हो तुमसे मैंने बतलाया था कि तुम्हारी एक उक्ति, जो […] Read more » Featured भाई के नाम पत्र विजयादशमी श्री मुचकुन्द दूबे
कविता मुझे तुम बहुत याद आये August 21, 2018 / August 21, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आरके रस्तोगी जब जब मुसीबते आई अपनों ही निगाहे फिराई गेरो ने दिया सहारा अपनों ने किया किनारा मै इतनी दुखी हो चली थी आत्म हत्या करने चली थी पर मेरे कदम डगमगाए मुझे तुम याद आये मुझे तुम याद आये मै बिस्तर पर बीमार पड़ी थी जीवन कि अंतिम घड़ी थी दवाये भी कोई […] Read more » अंतिम घड़ी काजल मुझे तुम बहुत याद आये रिश्तेदार सुहागन
कविता बेगानों के जश्न में,दीवाना मस्ताना है कोई August 20, 2018 / August 20, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बेगानों के जश्न में,दीवाना मस्ताना है कोई मुल्क से बढकर,किसी का दोस्त है वहाँ कोई शहीदों के कातिलो को, बेगुनाह समझते हो तुम उनके मुल्क में जाकर,उनको गले लगाते हो तुम सोचते हो अगर वे बेगुनाह है सिद्धू ऐसा हो तुम फिर पाक में जाकर,बस जाते क्यों नहीं तुम ? पता लगेगा तुम्हे,कैसी कदर करता […] Read more » 'मुल्क क्रिकेट दीवाना मस्ताना है कोई बेगानों के जश्न में मोहब्बत
कहानी मित्र के नाम पत्र 2 August 18, 2018 / August 18, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा तुम्हारे पास से पत्र का पाना मेरे लिए दुर्लभ कोटि का हुआ करता है। कल की डाक से जब मिला तो तुम्हारे द्वारा दी गई जानकारी के बावजूद उपलब्धि का एहसास हुआ। तुम्हें तो पता ही होगा कि स्थिरता नहीं रह जाने के कारण मेरी लिखावट अपाठ्य रही है अब उम्र के साथ […] Read more » Featured कविता माँ-बाप मित्र के नाम पत्र 2 सोशल नेटवर्किंग साइट्स
कविता कैसे अटल जी,तुमको हम विदा करे August 17, 2018 / August 17, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment दिल में है गम,आँखों में है आँसू भरे कैसे अटल जी,तुमको हम विदा करे तुम एक महान कवि और वक्ता भी थे तुम्हारे भाषणों को सब ध्यान से सुनते थे वो आवाज कहाँ लुप्त हो गई,कहाँ खो गई चौरानवे वर्ष की हो गई थी वह कहाँ सो गई तुम्हारे शब्दों से सारी संसद भी गूंजती […] Read more » आँखों में है आँसू भरे कैसे अटल जी तुमको हम विदा करे दिल में है गम महान कवि
कविता एक गजल मोहब्बत पर August 16, 2018 / August 16, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम सामने आ जाओ,मेरे सोये जज्बात जग जाये मेरी मोहब्बत के सफर में एक नया रंग आ जाये करता हूँ की इसलिए हर वक्त मैं तू जन्नत से उतर कर मेरे साथ संग आ जाये छोड़ दू मैखाना मैं जाना ता उमर जिन्दगी अगर तू मेरे नशे का एक अंग बन जाये पैदा करे मिसाल मोहब्बत […] Read more » इबादत इश्क इल्जाम एक गजल मोहब्बत पर मोहब्बत