कविता मैं 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस हूँ August 16, 2018 / August 16, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मैं पन्द्रह अगस्त स्वतंत्रता दिवसहूँ दिल्ली के लाल किले से बोल रहा हूँ कहने को मैं स्वतन्त्र हो गया हूँ पर भुखमरी और भ्रष्टाचार से जकड़ा हुआ हूँ जन जन और कण कण को पकड़ा हुआ हूँ यहाँ दिन रात महिलाओ का बलात्कार होता है जिसको देख कर मैं सुबक सुबक कर रोता हूँ मै […] Read more » दिल्ली के लाल किले बलात्कार मैं 15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवस हूँ मोदी जी रिश्वत
कविता किन किन चीजो से आजाद होना है भारत August 16, 2018 / August 16, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कहते है 15 अगस्त को अंग्रेजो से मुक्त हुआ था भारत पर करना है अभी बाकी है,गरीबी से मुक्त हो भारत आधे से अधिक जनता,सो जाती है एक बख्त खाकर ऐसे उपाय करे हम,जो भुखमरी से मुक्त हो भारत कण कण में फैला है भ्रष्टचार,बन गई है एक कहावत कड़े क़ानून बनाने है,जो भ्रष्टाचार से […] Read more » आतंकवाद किन किन चीजो से आजाद होना है भारत - धर्म और जाति भुखमरी
कविता स्वतंत्रता दिवस पर एक नारी की पीड़ा August 14, 2018 / August 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment 71 वर्ष हो गये आजादी के,पर मैं अभी आजाद नहीं दर दर ठोकरे खाती हूँ,पर कही मैं अभी आबाद नहीं बचपन में पिता,जवानी में पति,बुढापे में पुत्र के आधीन रही कैसा बीता मेरा ये जीवन, क्या किसी को यहाँ मालूम नहीं बाहर निकल कर नहीं सुरक्षित,घर में भी मैं सुरक्षित नहीं कैसे है मेरा असुरक्षित […] Read more » जवानी में पति नारी देवी बचपन में पिता बुढापे में पुत्र के आधीन रही स्वतन्त्रता दिवस
कविता कांवड़ यात्रा पर विवाद से दुखी है खांटी खड़गपुरिया तारकेश कुमार ओझा August 13, 2018 / August 13, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा सावन की पुकार…!! —————- बुलाते हैं धतुरे के वो फूल धागों की डोर बाबा धाम को जाने वाले रास्ते गंगा तट पर कांवरियों का कोलाहल बोल – बम का उद्गघोष मदद को बढ़ने वाले स्वयंसेवियों के हाथ कांवर की घंटी व घुंघरू शिविरों में मिलने वाली शिकंजी उपचार के बाद ताजगी देती […] Read more » कांवड़ यात्रा खांटी खड़गपुरिया शिव श्रावण
कहानी संस्मरण— झलकियों में August 10, 2018 / August 10, 2018 by गंगानन्द झा | 1 Comment on संस्मरण— झलकियों में गंगानन्द झा तब हम पाँच-छः साल के रहे होंगे। पिता के साथ मैं दुमका गया था।. दिन के भोजन के समय मैंने उससे पूछा कि वह किस क्लास में पढ़ता है। उसने कहा, — “बच्चा क्लास”. मैंने कहा—“बच्चा क्लास, कच्चा रोटी” इण्टर में दाखिला लेने के बाद बोर्ड पर से रूटिन लिखते समय बायलॉजी का […] Read more » Featured कृष्ण नारायण डॉ एन.पी. झा दुमका नागेश्वर संस्मरण--- झलकियों में
कविता तीन तलाक August 10, 2018 / August 10, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on तीन तलाक तीन तलाक़ का दौर खत्म हुआ,मिली है राहत मुस्लिम महिलाओं को गुलामियत का दौर ख़त्म हुआ,अब मिली है आजादी इन महिलाओं को ये जीत हार का सवाल नहीं,ये सवाल है मुस्लिम महिलाओ के अधिकारों का जो सदियो से थी गुलाम अपने शोहर की,मांग कर रही थी अपने अधिकारों का मुल्ला मोलवियो का अब दख्ल […] Read more » गुलाम तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं शोहर
कविता करुणा निधि करुणा के सागर थे August 8, 2018 / August 8, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करुणा निधि करुणा के सागर थे,जनता के अनोखे चहेते थे राजनीती के प्रकांड पंडित थे,हर बार एम एल ए बन जाते थे दक्षिण भारत में उनका बोलबाला था, पार्टी के वे सर्वा सर्वे थे वह नास्तिक होते हुये भी,झूठे आडम्बरो में खिलापत करते थे अस्त हो गया दक्षिण भारत का तारा,जो 3 जून १९२४ में […] Read more » करुना निधि करुना के सागर थे कवि व लेखक दक्षिण भारत
कविता पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये August 7, 2018 / August 8, 2018 by आर के रस्तोगी | 2 Comments on पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये आर के रस्तोगी पड़ गये झूले,प्रियतम नहीं आये कू कू करे कोयल,मन को न भाये मन मोरा नाचे,ये किसको बुलाये जिसकी थी प्रतीक्षा,वो नहीं आये घिर घिर बदरवा,तन को तडफाये काली काली घटा,ये मुझको डराये पिया गये प्रदेश,वापिस नहीं आये क्या करू मैं,मुझे कोई तो समझाये यमुना तट मेरा कृष्ण बंशी बजाये सखिया सब आई,राधा […] Read more » किससे करू बाते पड़ गये झूले पिया नहीं अब प्रियतम नहीं आये मेरा कृष्ण बंशी बजाये यमुना तट
कविता भोले बाबा के मन की संवेदना August 6, 2018 / August 6, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी कल रात भोले बाबा भंडारी शंकर मेरे सपनो में आ गये कलयुग में कांवडियो की हरकते देखकर चक्कर खा गये वह बोले, रस्तोगी तुम्हारे क्षेत्र में यह क्या हो रहा है कांवडियो के कारनामो को देख कर दुखी हो रहा हूँ मैं बोल्या,प्रभु ये कांवडिये और ये क्षेत्र आपने ही बनाये है […] Read more » कांवडिये चरस भांग पुलिस प्रशासन भोले बाबा के मन की संवेदना सावन के महीने में
कहानी मित्र के नाम पत्र August 6, 2018 / August 6, 2018 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा तुम्हारे साथ बातें करना उकसावे में पड़ने जैसा होता है। उसमें एक प्रकार का trap रहता है कि मैं ऐसी चर्चा करूँ जिसमें मेरी पहुँच नहीं हो। जीवन-मृत्यु का क्षेत्र तिलस्म जैसा ही है न। हमने पहले भी कई बार इस प्रसंग की बातें की हैं। तुमको याद होगा मृत्यु के जन्म के […] Read more » Featured पिताजी ब्रह्मदेव बाबू मित्र के नाम पत्र वनस्पति शास्त्र
गजल एक गजल -सिगरेट की बदनसीबी August 4, 2018 / August 4, 2018 by आर के रस्तोगी | 7 Comments on एक गजल -सिगरेट की बदनसीबी खुद को जलाकर,दूसरो की जिन्दगी जलाती हूँ मैं बुझ जाती है माचिस,जलकर राख हो जाती हूँ मैं पीकर फेक देते है रास्ते में,इस कदर सब मुझको चलते फिरते हर मुसाफिर की ठोकरे खाती हूँ मैं करते है वातावरण को दूषित पीकर जो मुझे लेते है लुत्फ़ जिन्दगी का बदनाम होती हूँ मैं लिखी है वैधानिक […] Read more » एक अजीब रिश्ता पाती हूँ मैं एक गजल -सिगरेट की बदनसीबी कागज तम्बाकू मैं उनकी सगी बहन हूँ
व्यंग्य राष्ट्रीय विद्रोही दल August 3, 2018 / August 3, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment – विजय कुमार, शर्मा जी की बेचैनी इन दिनों चरम पर है। 2019 सिर पर है और चुनाव लड़ने के लिए अब तक राष्ट्रीय तो दूर, किसी राज्य या जिले स्तर की पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया। उन जैसे समाजसेवी यदि संसद में नहीं जाएंगे, तो क्या होगा देश का ?शर्मा जी ने कई […] Read more » Featured गुलदस्ते जिले स्तर की पार्टी राष्ट्रीय विद्रोही दल लिफाफे सार्वजनिक शौचालय