कविता उठो जवानो ! भारत को आंतकवाद से मुक्त करना होगा | March 11, 2019 / March 11, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment उठो जवानो ! भारत को आंतकवाद से मुक्त करना होगा | होगा जो राष्ट हित में उसको तुम सबको अब करना होगा || आस्तीन के साँपों को अब उनके फ़न को कुचलना होगा | जो पिलाते है उनको दूध उन को भी अब जहर पीना होगा || कम करते है जो सेना का मनोबल,उनको अब […] Read more »
व्यंग्य जूता है तो सबकुछ मुमकिन है March 11, 2019 / March 11, 2019 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल भारतखंडे आर्यावर्ते जूता पुराणे प्रथमो अध्यायः। मित्रों! अब तो आप मेरा इशारा समझ गए होंगे, क्योंकि आप बेहद अक्ल और हुनरमंद हैं। आजकल जूता यानी पादुका संस्कृति हमारे संस्कार में बेहद गहरी पैठा बना चुकी है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हम आपको इसकी महत्ता बताने जा रहे हैं। कहते हैं कि […] Read more »
लेख ऑनलाइन ट्रेनिंग आपके करियर के लिए कैसे हो सकता है फायदेमंद March 6, 2019 / March 6, 2019 by सर्वेश अग्रवाल | Leave a Comment ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद, कृति अवसरों की तलाश में थी, लेकिन निरंतर प्रयासों के बाद भी उसे सफलता प्राप्त नहीं हुई। कृति को अहसास हुआ की यह असफलता का कारण पर्याप्त अनुभव न होना और कौशल की कमी है। दुर्भाग्य से, कृति जैसे अनेकों छात्र और छात्राएं हैं जो इस परेशानी से जूझ रहे […] Read more »
कविता धर्म बदला जाति बदली,बदल लिया है गोत्र March 6, 2019 / March 6, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment धर्म बदला जाति बदली,बदल लिया है गोत्र दादा को दफनाया है,पंडित बन गया है पौत्र पंडित बन गया है पौत्र,वोट हमे कैसे मिलेगी बताओ कोई उपाय,सत्ता हमे अब कैसे मिलेगी कह रस्तोगी कविराय,क्यों करते हो ऐसा अधर्म धर्म बदलने से कुछ नहीं होगा,अपनाओ राष्टधर्म आतंकी कितने मारे गये,इस पर चल रही बहस पक्ष विपक्ष के […] Read more » धर्म बदला जाति बदली
लेख कैसे इंटर्नशिप नौकरी पाने में सहायक होती हैं। March 6, 2019 / March 6, 2019 by सर्वेश अग्रवाल | Leave a Comment इंजीनियरिंग छात्रा पूजा मिश्रा को कॉलेज प्लेसमेंट के माध्यम से नौकरी नहीं मिली। अच्छे अकादमिक प्रदर्शन के बावजूद वह इंटरव्यू के तकनीकी राउंड में सफल नहीं हो पायी। एक कॉलेज सीनियर के सुझाव पर उसने इंटर्नशिप करने का निर्णय किया। पूजा की कंटेंट राइटिंग में रुचि थी अतः उसने इस क्षेत्र की इंटर्नशिप के लिए […] Read more »
गजल आँसुओं में जब कोई मुझको लखा ! March 5, 2019 / March 5, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment आँसुओं में जब कोई मुझको लखा,दास्तानों का उदधि वरवश चखा;दीनता की मम हदों को वह तका,क्षुद्रता की शुष्कता को वह चखा ! अभीप्सा मन मेरे में जो भी रही,शिक्षा दीक्षा जो हृदय मेरे रही;जगत ने जो उपेक्षा मेरी करी,भक्ति की जो भाव धारा मन भरी ! लख सका था क्या पथिक जीवन तरी,स्वानुभूति के परे […] Read more »
कविता देवो के है वे महादेव, March 5, 2019 / March 5, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment देवो के है वे महादेव,नमन इनको सब देव करते | खाली हाथ कोई नहीं जाता झोली सबकी भरते || सारा जहाँ नमन करता,शरण में उनकी जाते | शरण में उनकी जाकर,श्रद्धा के सुमन चढ़ाते || जरा सी भक्ति पर,रावण को दी सोने की लंका | बना है वह भोला भंडारी,बजाते डमरू का डंका || ये है महा […] Read more »
कविता मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता ! March 5, 2019 / March 5, 2019 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता, जाती उड़ कभी वही अलबत्ता;लखे खद्योत कभी द्योति तके,ज्योति संश्लेत कभी स्रोत लखे ! भूल मैं जाता कभी जो तरता,भटक में पाता कभी जो खोता;अटक मैं जाता कभी आहिस्ता,पार कर जाता कभी जग सरिता ! त्याग की सीमा कभी मैं वरता,सोच की हद से दूर मैं होता;भाव में पर कभी मैं […] Read more » मेरी सत्ता लगे कभी पत्ता
कविता मोदी है तो सब मुमकिन है | March 1, 2019 / March 1, 2019 by आर के रस्तोगी | 4 Comments on मोदी है तो सब मुमकिन है | मोदी जी जो कहते है |वे हमेशा करते भी है ||अब तो साबित हो गया |वे 56 इंच का सीना रखते है || वैसे तो पहले भारत छेड़ता नहीं | छेड़ता है तो फिर वह छोड़ता नहीं || सुन ले पाक ! कान खोल कर | वख्त हमारा होगा,इलाका तेरा होगा || मोदी है तो […] Read more » मोदी है तो सब मुमकिन है |
कविता भालू , राम टटोले बोले February 27, 2019 / February 27, 2019 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment हाथी दादा लिए सूंड में, मोबाइल ,भन्नाकर बोले। क्यों करते डिस्टर्ब बीच में, मुझको मिस्टर राम टटोले। नहीं फेस बुक ,अभी छुआ है, वाट्स एप में लगा हुआ हूँ। बार- बार तुम प्रश्न पूछते, कोतवाल जी! क्या उत्तर दूँ? Read more » भालू
लेख आज भी प्रासंगिक हैं वीर सावरकर February 26, 2019 / February 26, 2019 by इंद्रभूषण मिश्र | Leave a Comment काल स्वयं मुझसे डरा है.मैं काल से नहीं,कालेपानी का कालकूट पीकर,काल से कराल स्तंभों को झकझोर कर,मैं बार बार लौट आया हूं,और फिर भी मैं जीवित हूं,हारी मृत्यु है, मैं नहीं….।।ऐसे बहुत कम होता है कि जितनी ज्वाला तन में हो उतना ही उफान मन में हो. जिसके कलम में चिंगारी हो उसके कार्यों में […] Read more »