व्यंग्य जेब कतरा -एक व्यंग –आर के रस्तोगी August 3, 2018 / August 3, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक जेब कतरा जेब काटते पकड़ा गया कुछ पुलिस वालो के वह हत्थे चढ़ गया पुलिस वाले बोले,तू जेब काटता है क्यू जेब कतरा बोला,तुम रिश्वत मांगते हो क्यू पुलिस वाले बोले,हमारे थाने बिकते है सरे आम सारे देश मे नीलाम होते है हमे भी उपर वालो को देना पड़ता है बिना दिए अच्छा थाना […] Read more » असली जेब कतरे जेब कतरा -एक व्यंग --आर के रस्तोगी तू जेब काटता है क्यू पुलिस वाले बोले
पुस्तक समीक्षा “गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें August 2, 2018 / August 2, 2018 by हरीश चन्द्र बर्णवाल | Leave a Comment समीक्षक – हरीश चन्द्र बर्णवाल बहुत दिनों के बाद एक अच्छी पुस्तक पढ़ने का मौका मिला है। इस पुस्तक का नाम है “गंदगी के महारथी” और इसे लिखा है एबीपी न्यूज के पत्रकार साथी मनीष शर्मा जी ने।ऐसा बहुत कम होता है कि कोई टीवी पत्रकार बहुत अच्छी पुस्तक भी लिखे। टीवी पत्रकारों की विशेषज्ञता […] Read more » “गंदगी के महारथी” बदल सकती है आपकी कई बुरी आदतें Featured अजय तिवारी एबीपी न्यूज पत्रकार साथी मनीष शर्मा प्रधानमंत्री मोदी
कविता बुढापा August 2, 2018 / August 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बहुतो ने भुला दिया मुझे गिला नहीं उनसे कोई मुझे पर अपने ही भुला देते जब मुझे सोचने को मजबूर कर देते है मुझे जीवन का अंतिम पड़ाव है ये काटे से कटता अब नहीं है ये जीवन में मुश्किलें आई तो बहुत आसानी से काट ली थी तब वे जिनको चलना सिखाया था मैंने […] Read more » अंतिम पड़ाव अँधेरा दिखा जीवन पैसे दवाई बुढापा
कविता तुम पास आ गई हो,दिल को चैन आ गया है August 1, 2018 / August 1, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम पास आ गई हो,दिल को चैन आ गया है पुरानी यादो का मुझे,आज ध्यान आ गया है छोड़ना ना मुझे तुम,कहीं जाना न अब तुम आखरी मोड़ पर मिले,साथ निभाना अब तुम बड़ी मुद्दतों के बाद,ऊपर वाला मेहरबा हो गया है तुम पास आ गई हो,दिल को अब चैन आ गया है कहाँ चली […] Read more » तुम पास आ गई हो दिल को करार आ गया है दिल को चैन आ गया है
कविता आ गया सावन,सजन घर नहीं आये July 31, 2018 / July 31, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी आ गया सावन,सजन घर नहीं आये क्या करू अब मै,मन कुछ नहीं भाये भेजे उनको कितनी बार मैंने सन्देशे हर बार हो गये मेरे सन्देशे अनदेखे क्या करू मुझको कोई तो बतलाये क्या करू मेरे सजन घर नहीं आये पड गया झूले सजन मेरे नहीं आये क्या करू मै,मुझे कोई तो समझाये […] Read more » आ गया सावन सजन घर नहीं आये साजन सावन सावन में शरारत
कविता मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है July 30, 2018 / July 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment मिलना अपने श्याम से,ये सोच कर आये है दर्शन करने को हम सब लौट कर आये है छटा तुम्हारी सारे संसार में बिखरी है माया तुम्हारी सारी दुनिया में दिख रही है अनाथो के नाथ हो तुम,नाथ बनाने आये है तेरे दर्शन को हम सब लौट कर आये है तीनो लोक के मालिक हो,मृत्यु लोक […] Read more » तीनो लोक के मालिक हो मिलना अपने श्याम से मृत्यु लोक तुम्हारा है ये सोच कर आये है
साहित्य साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता : समस्या और समाधान July 30, 2018 / July 30, 2018 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment डॉ अर्पण जैन ‘अविचल‘ इंटरनेट की दुनिया ने हिंदी या कहे प्रत्येक भाषा के साहित्य और लेखन को जनमानस के करीब और उनकी पहुँच में ला दिया है, इससे रचनाकारों की लोकप्रियता में भी अभिवृद्धि हुई है। किन्तु इन्ही सब के बाद उनके सृजन की चोरी भी बहुत बड़ी है। जिन लोगों को लिखना नहीं […] Read more » Featured कलात्मक काम कोट खोज और आविष्कार डाटा महिलाएं शोषण रिपोर्ट रिसर्च वाक्यांशों वाद्ययंत्र साहित्य शब्दों संगीत साहित्य की चोरी से सस्ती लोकप्रियता : समस्या और समाधान
कविता लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में छिपा लिया July 28, 2018 / July 28, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को,उसे दिल में मैंने छिपा लिया पड़े ना बुरी निगाह राहू-केतू की,उसे नयनों में समां लिया आयेगा जब बुरा वक्त मेरे चाँद पर,लडूंगी आखरी वक्त तक उसने मुझे दिल में समा लिया,मैंने उसे दिल में समां लिया कहते है लोग मेरे चाँद पे काले धब्बे दिखाई देते है अनेक ये […] Read more » उसे दिल में छिपा लिया चाँदनी को चाँद राहू-केतू लगे ना ग्रहण मेरे चाँद को
कविता कर पाते कहाँ वे विकास ! July 28, 2018 / July 28, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment (मधुगीति १८०७२४) कर पाते कहाँ वे विकास, कर के कुछ प्रयास; वे लगाते रहे क़यास, बिना आत्म भास ! विश्वास कहाँ आश कहाँ, किए बिन सकाश; संकल्प कहाँ योग कहाँ, धारणा कहाँ ! है ध्येय कहाँ ज्ञेय रहा, गात मन थका; उद्देश्य सफल कहाँ हुआ, ना मिली दुआ ! बेहतर है प्रचुर कर्म करें, ज्ञान सृष्टि कर; सृष्टा को ध्यान कर के वरें, अपने कलेवर ! उर उनकी सुने चलते रहें, बृह्म भाव रस; ‘मधु’ के प्रभु के कार्य करें, उनके हृदय बस ! रचनाकार: गोपाल बघेल ‘मधु’ Read more » कर पाते कहाँ वे विकास ! ज्ञान सृष्टि मधु संकल्प
कविता करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को July 27, 2018 / July 27, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment करता हूँ नमन कोटि कोटि कारगिल के अमर शहीदों को देश के खातिर जिन्होंने परवाह नहीं की अपने वजिदो को किसी ने माँ की गोद सूनी की किसी ने पत्नि की माँग को किसी ने बहन की राखी को,किसी ने माँ-बाप के प्यार को ऐसे थे वीर बलिदानी,जिन्होंने न्योछावर कर दिया जान को आओ हम […] Read more » अमर शहीदों कारगिल कुर्बानियों जवान मां
व्यंग्य संयुक्त प्रधानमंत्री योजना July 27, 2018 / July 27, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment – विजय कुमार इन दिनों भारत में चातुर्मास चल रहे हैं। देवी-देवता निद्रा में हैं। चातुर्मास में साधु-संत भी अपना प्रवास स्थगित कर एक ही जगह रहते हैं। इस दौरान वे अपना अधिकांश समय अध्ययन, चिंतन, पूजा और प्रवचन में बिताते हैं। पर चातुर्मास में असुर क्या करते हैं, इस पर शास्त्र मौन हैं। शर्मा […] Read more » Featured अध्ययन कांग्रेस चिंतन पूजा और प्रवचन राहुल संयुक्त प्रधानमंत्री योजना
कविता रक्तिम – भँवर July 24, 2018 / July 24, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment रक्तिम – भँवर आलोक पाण्डेय भर – भर आँसू से आँखें , क्या सोच रहे मधुप ह्रदय स्पर्श , क्या सोच रहे काँटों का काठिन्य , या किसी स्फूट कलियों का हर्ष ? मन्द हसित , स्वर्ण पराग सी , विरह में प्रिय का प्रिय आह्वान , या सोच रहे किस- क्रुर प्रहार से छुटा […] Read more » उर निकुंज कुंकुम कुसुम - कलेवर घुँघरू प्रणय के आस बिन्दी रक्तिम - भँवर रोली विलुलित आँचल सब कुछ डूब भँवर जाने दो ; सान्ध्य-रश्मियों का विहार