गजल कश्मीर समस्या समाधान पर एक गजल July 5, 2018 / July 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment 370 धारा क्या मिली कश्मीर को हिंदुस्तान से वह अपने आप को अलग समझने लगा हिंदुस्तान से कश्मीर पर ज्यादा खर्च करना अब मुनासिब नहीं दोस्तों गीत गाता है पाकिस्तान का,खाता है वह हिंदुस्तान से कश्मीर एक ऐसी बेवफा औरत है अपने आप में नैन मैटटके करने लगी है वह अब पाकिस्तान से कश्मीर छिनाल […] Read more » 370 धारा कश्मीर समस्या कश्मीरी पंडितो पाकिस्तान समाधान पर एक गजल
कविता नारी की पीड़ा July 4, 2018 / July 4, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment नारी तुझको कोई अबला कहता,कोई सबला भी कहता है पुरुष तुझको सबला कहकर,फिर भी वह प्रताड़ित करता है तूही द्वापर में,तूही त्रेता में,तूही कलयुग में आई है कही तुझे जुए में हारा,कही तूने अग्नि परीक्षा पाई है जो नारी का करे अपमान,वह मर्द कभी नहीं हो सकता है जो बहन का करे न सुरक्षा,वह भाई […] Read more » तूही कलयुग तूही त्रेता में तूही द्वापर में नारी की पीड़ा
कहानी स्विस बैंकों के रहस्य July 4, 2018 / July 4, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार, शर्मा जी बड़े आदमी हैं। इसलिए वे दूसरों के यहां नहीं जाते। उनकी मान्यता है कि बड़ा आदमी कहीं क्यों जाए ? अगर वो हर किसी के पास जाने लगा, तो फिर वह भी अरविंद केजरीवाल की तरह आम आदमी हो जाएगा। इसलिए वे सुबह दस बजे खा-पीकर लोगों से मिलने के […] Read more » Featured टैक्स चोरी मोदी सरकार लोकसभा के चुनाव शर्मा जी स्विस बैंकों के रहस्य
कविता बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम July 3, 2018 / July 3, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बारिश का मौसम है,आओ भीगे सनम तन की तपन को शीतल कर ले सजन ये जीवन धीरे से ऐसे ही कट जाएगा आशाओ के सहारे ऐसे ही कट जाएगा निराशा न देना तुम मेरे प्यारे सनम आओ बारिश में भीगे हम तुम सजन बारिस का मौसम है, ………… मन को न मसोसे कभी हम और […] Read more » आओ भीगे सनम घनघोर घटाये बारिस का मौसम है सावन हरियाली
कविता सावन के महीने में विरहणी के प्रश्न July 2, 2018 / July 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी जब सावन का महीना आता क्या पिया का संदेशा लाता ? जब बादल आसमां में गरजते एक दूजे के लिये क्यों तरसते ? जब बिजली आसमां में चमकती माथे की बिंदिया क्यों दमकती ? जब घनघोर घटायें घिरती विरहणी क्यों दिन में डरती ? जब दिन में ही रात हो जाती पिया […] Read more » नन्नी नन्नी बुंदियाँ बिजली आसमां सावन के महीने में विरहणी के प्रश्न
कविता फांसी चढ़ा दो मंदसौर के दरिंदों को July 2, 2018 / July 2, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी फांसी पर चढ़ा दो,रेप करने वाले मंदसौर के दरिंदो को पृथ्वी पर भार बने है,जीने का हक़ नहीं इन दरिंदो को कैंडिल मार्च से कुछ नही होगा,पकड़ लो इन दरिंदो को चौपले पर गोली मारो,खत्म करो अब तुम इन दरिंदो को न्याय मिलेगा,कब मिलेगा,न्याय नहीं अब जल्द मिलता है इस प्रकार […] Read more » फांसी चढ़ा दो मंदसौर के दरिंदों को फांसी चढ़ाओ बलात्कार बेटियों
कविता ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै June 30, 2018 / June 30, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै तेरे गम में अपनी आँखे भिगोती नहीं हूँ मै ए पत्थर के सनम ! दिल को पत्थर बना लिया है मैंने जिसको माना था भगवान,उसको अब पूजती नहीं हूँ मै बहाये थे जिन आँखों से आँसू,उनको बंद कर लिया है […] Read more » आँखों से आँसू ए सनम ! तेरी याद में अब रोती नहीं हूँ मै पत्थर वैध हकीम
कविता मामूली हैं मगर बहुत खास है… June 30, 2018 / June 30, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा, मामूली हैं मगर बहुत खास है… बचपन से जुड़ी वे यादें वो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखना मगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलना सिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहल और कड़ी मशक्कत से हासिल टिकट लेकर किसी विजेता की तरह पहली पंक्ति में […] Read more » कनखियों से रसगुल्लों फिल्मों बारिश मामूली हैं मगर बहुत खास है... रसगुल्लों की बाल्टियों
कविता सावन आया,उमंग लाया June 29, 2018 / June 29, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment सावन आया,उमंग लाया उमड़ घुमड़ कर बदरा आये जिससे मेरा जिया घबराये काले बदलो ने आसमान घेरा जिससे छाया पृथ्वी पर अँधेरा अँधेरे में अब बिजली चमकी जिससे मेरी बिंदिया दमकी गरज गरज कर बदरा आये पिया का कुछ संदेशा लाये मैं बोली पिया का सन्देशा सुनाओ बदरा बोले हमारे करीब तो आओ अपने पिया […] Read more » उमंग लाया पृथ्वी पर अँधेरा बिजली चमकी वर्षा रानी सावन आया
दोहे काले दिवस के सफेद दोहे June 28, 2018 / June 28, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment आर के रस्तोगी कोई किसे हिटलर कहे,कोई किसे को औरंगजेब जब जिसको मौका मिले,काटे जनता की ये जेब काला दिवस मना कर,क्या करना चाहते हो सिद्ध दोनो आपस में ऐसे लड़ रहे ,जैसे मांस पर गिद्ध बीती गई बिसार दो,एक दूजे की टांग खीचते क्यों ? गड़े मुर्दे उखाड़ने में,समय बर्बाद करते हो तुम […] Read more » औरंगजेब काले दिवस के सफेद दोहे भाषण बाजी हिटलर
कविता प्यार करते रहेगे हम जनम जनम June 26, 2018 / June 26, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कसम खाते है आज दोनों सनम प्यार करते रहेगे हम जनम जनम प्यार की डगर है कितनी कठिन इस पर चलना और भी कठिन इस पर चलते रहेगे सदा हम किसी का साथ छोड़ेगे ना हम कसम खाते है आज दोनों सनम प्यार करते हम जनम जनम ये गमो की दुनिया है बिकते है जख्म […] Read more » कसम खाते प्यार करते रहेगे प्यार की खरीद हम जनम जनम
कविता नेताओ के बारे में कुछ दोहे June 25, 2018 / June 25, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment योगी ने योग किया,मोदी ने मन की बात राबड़ी ने रबड़ी खाई,लालू ने खाये भात देश में बेरोजगारी बढ़ रही,मिल रही न जॉब तेजस्वी नवी फ़ैल है उनको कब मिलेगी जॉब राहुल भी बेरोजगार है,कब मिलेगा पी एम जॉब चिंता मर करो पप्पू भैया,जल्द मिलेगा ये जॉब माया को माया न मिली,मिले न उसे श्रीराम […] Read more » तेजस्वी नवी दिग्विजय नेताओ के बारे में कुछ दोहे मनमोहन जी मोदी ने मन योगी सोनिया जी