कविता इफ्तार पार्टी तो बहाना है,हमे तो महागठबंधन बुलाना है June 14, 2018 / June 14, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment इफ्तार पार्टी करना तो केवल एक बहाना है इस बहाने तो महागठबंधन को बुलाना है बुलाया है उन नेताओ को जो रोजा नहीं रखते रोजा बिना रखे टोपी पहन कर मुसलमान बनते अगर ये सर्व धर्म समान है और धर्मो को क्यों नहीं बुलाते ? भारत में जैन,सिख,बोध धर्म भी है उनको क्यों नहीं बुलाते […] Read more » इफ्तार पार्टी जैन बहाना है बोध धर्म विपक्ष सिख हमे तो महागठबंधन बुलाना है
पुस्तक समीक्षा असहिष्णुता के सुनियोजित प्रोपेगंडा के बरक्स June 14, 2018 / June 14, 2018 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment डॉ. आशीष द्विवेदी ( निदेशक, इंक मीडिया इंस्टीट्यूट, सागर) आज के जमाने में लिखा और कहा तो बहुत कुछ जा रहा है पर उसमें उतना असर दिखता नहीं है। कारण अंतस से मन, वचन और कर्म को एकाकार कर लिखने वाले गिनती के हैं। शायद इसीलिए वह लेखन शाम ढलते ही किसी अंधेरे कोने […] Read more » Featured असहिष्णुता के सुनियोजित उपराष्ट्रपति कलाकार निष्पक्षता प्रोपेगंडा के बरक्स प्रोपेगंडा से वैश्विक मीडिया शिक्षक साहित्य
कविता मोदी के मन की बात -तुम मुझे हटा ना पाओगे June 13, 2018 / June 13, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम मुझे हरा ना पाओगे तुम मुझे हटा ना पाओगे महागठबंधन बनाया है तुमने सबको बुलाया है तुमने सबको मिलाया है तुमने मिलाकर भी ना मिला पाओगे तुम मुझे हरा ना पाओगे तुम मुझे हटा ना पाओगे घर-बार छोड़ दिया देश के लिये पत्नि छोड़ दी राष्ट्र हित के लिये लगा हूँ देश के विकास […] Read more » तुम मुझे हटा ना पाओगे तुम मुझे हरा ना पाओगे मोदी के मन की बात - मोदी बोले राहुल बोला
व्यंग्य हमें भी खिलाओ नहीं तो… June 13, 2018 / June 13, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार आजकल दूरदर्शन ने क्रिकेट और फुटबॉल को हर घर में पहुंचा दिया है; पर हमारे बचपन में ऐसा नहीं था। तब गुल्ली-डंडा, पिट्ठू फोड़, कंचे और छुपम छुपाई जैसे खेल अधिक खेले जाते थे। खेल में झगड़ा भी होता ही है। भले ही वह थोड़ी देर के लिए हो। हमारे मित्र शर्मा जी […] Read more » Featured कंचे गुल्ली-डंडा पिट्ठू फोड़ भूतपूर्व मंत्रियों मुख्यमंत्री विधायक सांसद हमें भी खिलाओ नहीं तो...
कहानी स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज June 12, 2018 / June 12, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग कहते हैं कि जिसके सिर पर कुछ कर गुजरने का जुनून सवार होता है तो फिर वो हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेता है। ऐसे लोग अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होते बल्कि वो आत्मनिर्भर होकर अपने सभी कामों को […] Read more » Featured उत्तरप्रदेश छत्तीसगढ़ जिजीविषा मणिपुर रायपुर राष्ट्र समाज सरकार संस्था व संविधान ईमानदारी स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज
कविता प्रकाश धरा आ नज़र आता June 12, 2018 / June 12, 2018 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment गोपाल बघेल ‘मधु’ प्रकाश धरा आ नज़र आता, अंधेरा छाया आसमान होता; रात्रि में चमकता शहर होता, धीर आकाश कुछ है कब कहता ! गहरा गहमा प्रचुर गगन होता, गुणों से परे गमन वह करता; निर्गुणी लगता पर द्रढी होता, कड़ी हर जोड़ता वही चलता ! दूरियाँ शून्य में हैं घट जातीं, विपद बाधाएँ व्यथा ना देतीं; घटाएँ राह से हैं छट जातीं, रहनुमा कितने वहाँ मिलवातीं ! भूमि गोदी में जब लिये चलती, तब भी टकराव कहाँ करवाती; ठहर ना पाती चले नित चलती, फिर भी आभास कहाँ करवाती ! संभाले सृष्टा सब ही करवाते, समझ फिर भी हैं हम कहाँ पाते; हज़म ‘मधु’ अहं को हैं जब करते, द्वार कितने हैं चक्र खुलवाते ! Read more » आ नज़र आता आकाश प्रकाश धरा भूमि गोदी
कविता सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है June 12, 2018 / June 12, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कलयुग में सब बदलने लगे है सूरज,चाँद भी बदलने लगे है ये भी अब मजे लेने लगे है अपनी आदत बदलने लगे है इंसान की तरह बदलने लगे है एक दूजे को धोखा देने लगे है “सूरज” की जरा असलियत तो देखो, सुबह सैर को निकलता है “किरन” के साथ दोपहर को रहता है “रौशनी” […] Read more » कलयुग चाँद सूरज सूरज और चाँद भी मजे लेने लगे है
कविता आज भी तरसते है हम उन सब लम्हों के लिये June 11, 2018 / June 11, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कुछ लम्हें आये जिन्दगी में,कुछ लम्हों के लिये आज भी तरसते है हम,उन सब लम्हों के लिये ख़ुदा ने हमसे कहा,कुछ तो मांग लो मुझ से मैंने कहा,बिताये लम्हें दे दो,कुछ लम्हों के लिये मेरे मुक्कदर में आये थे आप,कुछ लम्हो के लिये मैं सारी रात रोई, बिताये हुये उन लम्हों के लिये आते नहीं […] Read more » आज भी तरसते है ख़ुदा ने हमसे जिन्दगी तरस मेरे मुक्कदर हम उन सब लम्हों के लिये
कविता रावण के मन की पीड़ा June 5, 2018 / June 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुम मुझे यू ना जला पाओगे तुम मुझे यू भुला ना पाओगे तुम मुझे हर साल जलाओगे मार कर भी तुम ना मार पाओगे जली लंका मेरी,जला मैं भी तुम भी एक दिन जला दिए जाओगे मैंने सीता हरी,हरि के लिये राक्षस कुल की बेहतरी के लिये मैंने प्रभु को रुलाया वन वन में तुम […] Read more » नगर में नारी नारी का मरण प्रभु को रुला राम से युद्ध रावण के मन की पीड़ा
कविता तुलसी को मिली पत्नि फटकार June 5, 2018 / June 5, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तुलसी को मिली पत्नि फटकार छोड़ दिया था उसने घरवार लिख दिया था ग्रन्थ महान तुलसी बने एक कवि महान पत्नि छोड़ भागे जो लोग वही बने विद्वान व भगवान गौतम बुद्ध महावीर स्वामी पत्नि छोड़ थे बने भगवान् पत्नि छोड़ भागे जो मोदी आज बने है वे देश प्रधान अडवाणी छोड़ न सके पत्नि […] Read more » गौतम बुद्ध तुलसी को मिली पत्नि फटकार पत्नि छोड़ पार्टी प्रधान महावीर स्वामी
पुस्तक समीक्षा एक नयी दुनिया के सपनो का नाम प्रोस्तोर: वंदना गुप्ता June 2, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment वंदना गुप्ता ‘प्रोस्तोर’ एक लघु उपन्यास एम. एम. चन्द्रा जी द्वारा लिखा डायमंड बुक्स से प्रकाशित है. आज बड़े बड़े उपन्यास लिखे जाने के दौर में लघु उपन्यास लिखा जाना भी साहस का काम है और यही कार्य लेखक ने किया है. शायद चुनौतियों से आँख मिला सके वो ही सच्चे साहित्यकार की पहचान होती […] Read more » Featured अघोघ उपन्यास एक नयी दुनिया के सपनो का जितेन्द्र दुष्कर प्रोस्तोर: वंदना गुप्ता बंटी भुवन मुख्य पात्र योगेश राजीव विपिन
कविता प्यार के पत्ते जब झड़ जाते है,पतझड़ आ जाता है जीवन में May 29, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment प्यार के पत्ते जब झड़ जाते है,पतझड़ आ जाता है जीवन में शरीर के अंग जब थक जाते है,बुढ़ापा आ जाता है जीवन में ह्रदय तोड़ दे जब कोई तुम्हारा,नीरसता आ जाती है जीवन में पास न हो जब प्रियतम तुम्हारा,विरहता आ जाती है जीवन में मिलन हो जाये जब दो दिलो का,खुशियां आ जाती […] Read more » क्रान्ति तुम्हारे मन का मीत मिल जाये तुमको संतोष धन