गजल गजल:शायद जीवन को मिले एक नया विस्तार July 17, 2012 / July 15, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment आँगन सूना घर हुआ, बच्चे घर से दूर। मजदूरी करने गया, छोड़ यहाँ मजबूर।। जल्दी से जल्दी बनें, कैसे हम धनवान। हम कुदाल बनते गए, दूर हुई संतान।। ऊँचे पद संतान की, कहने भर में जोश। मगर वही एकांत में, भाव-जगत बेहोश।। कहाँ मिला कुछ आसरा, वृद्ध हुए माँ बाप। कहीं सँग […] Read more »
मीडिया व्यंग्य फेसबुक ……दुनिया की सबसे बड़ी मंडी July 17, 2012 / July 17, 2012 by टी के मारवाह | Leave a Comment टी के मारवाह यूँ तो ये पूरी दुनिया ही मंडियों से अटी पड़ी हे सब कुछ बिकाऊ ,पर आज कल एक मंडी पुरी दुनिया मैं आज सबसे ज्यादा चल रही हे और बहुत जोरों और शोरों मैं हे |इस मंडी ने आज हमारा सामाजिक ढांचा ही बदल के रख दिया हे ,दिन बाद मैं शुरू […] Read more » face book
आलोचना जो लूट सके तो लूट ! July 16, 2012 / July 16, 2012 by जावेद उस्मानी | 1 Comment on जो लूट सके तो लूट ! जावेद उस्मानी भला हो सूचना के अधिकार कार्यकर्ता एस सी अ्रग्रवाल का जिन्होने एक बहुत अहम मुकाम पर ऐसी जानकारी निकाली जिसकी इस समय बहुत जरुरत थी। यह सूचना, इसका संकेत है कि, देश बड़ी तेज़ी से दो वर्गों में बंटता जा रहा है जिसका एक छोर स्वर्ग है तो दूसरा छोर नरक है। जाहिर […] Read more »
गजल गजल:हर बातों में हम होते हैं July 16, 2012 / July 16, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन यूँ सबके हमदम होते हैं दुख के दिन में कम होते हैं साथ निभाये जो आफत में लोग वही मरहम होते हैं शायर चलता लीक छोड़कर उसके यही नियम होते हैं जो टकराते वक्त से जितना वही असल दमखम होते हैं जहँ टूटता दिल अपनों से आँखों में शबनम […] Read more » गजल:हर बातों में हम होते हैं
गजल गजल:सुमन पागल अरजने में- श्यामल सुमन July 15, 2012 / July 15, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment खुशी की दिल में चाहत गर, खुशी के गीत गाते हैं भरोसा क्या है साँसों का, चलो गम को भुलाते हैं दिलों में गम लिए लाखों, हँसी को ओढ़कर जीते सहज मुस्कानवाले कम, जो दुनिया को सजाते हैं है कीमत कामयाबी की, जहाँ पर लोग अपने हों उसी अपनों से क्यूँ अक्सर, वही […] Read more » gazal by shyamal suman गजल- श्यामल सुमन गजल:बेच रहे तरकारी लोग गजल:बेच रहे तरकारी लोग- श्यामल सुमन
व्यंग्य फंस गए चोर वर्ना वंस-मोर July 15, 2012 / July 15, 2012 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment एल.आर.गाँधी सत्ता के भद्रलोक से दो भद्र पुरुषों की आज एक साथ विदाई ,कारण लगभग एक ही …. बस एक का तीर निशाने पर रहा और दूसरा चूक गया…..लिहाज़ा एक अर्श पर तो दूसरा फर्श पर. … जी हाँ ये हैं कांग्रेस भद्रलोक के दो खिलाडी लगभग एक ही आयु के . एक बंगाल से […] Read more » sattire on pranav mukherjee
गजल गजल:देश बंटने से बचाना है ज़रा याद रहे….. July 15, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment इक़बाल हिंदुस्तानी तुमको कुछ करके दिखाना है ज़रा याद रहे, सबको इंसाफ़ दिलाना है ज़रा याद रहे। बम कोई सा भी बनाओ तुम्हें पूरा हक़ है, बम से गै़रों के बचाना है ज़रा याद रहे। तुमने बोई थी जो वादों की फ़सल काट चुके, अब अमल करके दिखाना है ज़रा याद रहे। […] Read more » gazal by iqbal hindustani
गजल गजल:बेच रहे तरकारी लोग- श्यामल सुमन July 15, 2012 / July 15, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment प्रायः जो सरकारी लोग आज बने व्यापारी लोग लोकतंत्र में बढ़ा रहे हैं प्रतिदिन ये बीमारी लोग आमलोग के अधिकारों को छीन रहे अधिकारी लोग राजनीति में जमकर बैठे आज कई परिवारी लोग तंत्र विफल है आज देश में भोग रहे बेकारी लोग जय जयकार उन्हीं की होती जो हैं […] Read more » gazal by shyamal suman गजल- श्यामल सुमन गजल:बेच रहे तरकारी लोग गजल:बेच रहे तरकारी लोग- श्यामल सुमन
कविता कविता:आरक्षण की वेदी पर…-बीनू भटनागर July 15, 2012 by बीनू भटनागर | 9 Comments on कविता:आरक्षण की वेदी पर…-बीनू भटनागर आरक्षण के मुद्दे पर, यों तो सब दल साथ खड़े हैं, इतनी छीना झपटी देखकर, हम तो शर्मसार खड़े हैं। संसद तो बन गया अखाड़ा, कुश्ती देखो, देखो दंगल, सारे पहलवान खड़े हैं। जाति आधारित आरक्षण का, अब कोई आधार नहीं है, इसके चलते जिनके पू्र्वज, ऊँची कुर्सी पा चुके हैं, उन्हीं के वंशज […] Read more » poem by binu bhastnagar कविता:आरक्षण की वेदी पर कविता:आरक्षण की वेदी पर...-बीनू भटनागर कविता:बीनू भटनागर
गजल गजल:पूछो तो भगवान है क्या–श्यामल सुमन July 14, 2012 / July 14, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment समझदार की भीड़ सामने एक सुमन नादान है क्या मन्दिर मस्जिद गिरिजाघर में पूछो तो भगवान है क्या पालनहार वही जब सबका मरते भूखे लोग कई बेबस होकर सोच रहा मन ये उनकी सन्तान है क्या दरगाहों में या मन्दिर में लाखों लोग किनारे हैं बड़े लोग का स्वागत ऐसा मालिक का मेहमान […] Read more » gazal by shayamal suman गजल:पूछो तो भगवान है क्या–श्यामल सुमन गजल:श्यामल सुमन
आलोचना होने लगी है आशीर्वादों की बारिश July 14, 2012 / July 13, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य होने लगी है आशीर्वादों की बारिश हर कोई पा लेता है आशीर्वाद आजकल आशीर्वाद देना और पाना सबसे सस्ता और सहज काम हो गया है। आशीर्वाद पाने के लिए उतावले लोगों की जितनी भीड़ है उससे कहीं ज्यादा भीड़ आशीर्वाद देने को व्यग्र बैठे लोगों की है। आशीर्वाद देने और पाने वाले […] Read more » आशीर्वादों की बारिश
आलोचना पाखंडी अध्यात्मवादियों’ को बढ़ावा देने की जनता भी ज़िम्मेदार July 13, 2012 / July 12, 2012 by निर्मल रानी | 2 Comments on पाखंडी अध्यात्मवादियों’ को बढ़ावा देने की जनता भी ज़िम्मेदार निर्मल रानी जिस युग में भारतवर्ष को विश्वगुरु कहा जाता था उस समय भी शायद इस देश में इतने तथाकथित ‘गुरु’ नहीं रहे होंगे जितने कि अब देखे जा रहे हैं। टीवी चैनल्स ने इनकी ‘दुकानदारी’ कुछ ज़्यादा ही बढ़ा दी है। जिसे देखो वही अध्यात्म की अपनी अलग दुकान सजाए बैठा है। इस प्रकार […] Read more »