कविता कविता – राह August 4, 2012 / August 4, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल वह सड़क जिस पर मैँ चल रहा हूँ तुम्हारे भीतर जाकर खत्म हो जाती है वह सड़क जिस पर तुम चल रही हो किसी चौराहे पर जाकर नहीँ मेरे मन के भीतर खत्म होती है सही है कि सड़क की कोई मंजिल नहीँ होती एक दिशा तो होती ही है उसी दिशा […] Read more »
कविता कविता:काश मै खुदा होता August 4, 2012 / August 4, 2012 by पियूष द्विवेदी 'भारत' | Leave a Comment पियूष द्विवेदी बहुत जलन होती है, आकाश में इतराते हुए, अपनी पाँखे फैलाके, उड़ती चिड़िया को देखकर | नहीं सह पाता हूँ, उसके पाँखों को, उसके उड़ने को, और उसकी, इस निश्चिन्त स्वतंत्रता को | पर यही मन, दुखी भी होता है, उन्ही पाँखों को फड़फड़ाते हुवे, उड़ने का विफल प्रयास करते देखकर किसी शिकारी […] Read more » कविता:काश मै खुदा होता
व्यंग्य व्यंग्य: गधों ने घास खाना बन्द कर दिया है August 3, 2012 / August 3, 2012 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे शिक्षा ही अवसरवादी हो गर्इ है । मैं अपने घर में बैठा था कि हमारे घर के तथा कथित नीति निर्धारक चाचा चतरू ने दरवाजे पर आकर नोकिगं की । मै उठता उससे पहले ही मेरी बेगम ने उठ कर दरवाजा खोला और आदब की पाजिषन में आते हुए उनका स्वागत सत्कार कर […] Read more »
गजल गजल:पालने से लेकर कांधों तक August 2, 2012 / August 2, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment सुजीत द्विवेदी पालने से लेकर कांधों तक कांपती है ज़िन्दगी, महज़ वक़्त के इशारों पर नाचती है ज़िन्दगी|| मन हुआ पागल क़ि ना जाना चाहे उस छोर तक, जिस ओर सिर्फ कुछ कदम नापती है ज़िंदगी| मरने को मर जाते हैं कुछ लोग यूं ही, कैसे भी, पैगाम-ए-मोहब्बत के साथ मरना चाहती है […] Read more » गजल:पालने से लेकर कांधों तक
कविता कविता – लड़ाई July 31, 2012 / July 30, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल अधिक समय तक हम जिँदा रहने की जिजीविषा मेँ नहीँ देख पाते मुट्ठियोँ मेँ उगे पसीने को और यहीँ से फुटना शुरू होतेँ हैँ तमाम टकराहटोँ के काँटेँ यहीँ से शुरू होता है धरती और आकाश का अंतर चाहे आकाश कितना भी फैला हो और हो उसमेँ ताकत धरती को ढंक लेने की […] Read more » poem by motilal कविता - लड़ाई
कविता कविता:शांति की खोज July 30, 2012 / July 30, 2012 by बलबीर राणा | Leave a Comment बलबीर राणा शांति खोजता रहा धरती के ओर चोर भटकता रहा कहाँ है शांति कहीं तो मिलेगी इस चाह में जीवन कटता रहा समुद्र की गहराई में गोता लगाता रहा झील की शालीनता को निहारता रहा चट्टाने चडता रहा घाटियाँ उतरता रहा पगडंडियों में संभालता रहा रेगिस्तानी में धंसता रहा कीचड़ में फिसलता […] Read more » kavita by balbir rana कविता:शांति की खोज
गजल गजल:दोस्त की शक्ल में दुश्मन से बचा ए भाई….. July 30, 2012 / July 30, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on गजल:दोस्त की शक्ल में दुश्मन से बचा ए भाई….. इक़बाल हिंदुस्तानी सारी दुनिया का ना तू ठेका उठा ए भाई, तेरा जो फ़र्ज़ है तू उसको निभा ए भाई। तेरी दौलत से हमें कुछ नहीं लेना देना, कितनी इज़्ज़त है तेरे दिल में दिखा ए भाई। कोई तालीम हो कोई भी ज़बां हो चाहे, अपने बच्चे का तू किरदार बना ए भाई। […] Read more » gazal bby iqbal hindustani गजल-इक़बाल हिंदुस्तानी
कविता कविता:दीया अंतिम आस का July 29, 2012 / July 29, 2012 by दिनेश गुप्ता 'दिन' | 4 Comments on कविता:दीया अंतिम आस का दिनेश गुप्ता ‘दिन’ दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास परिहास उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभल जाऊँ दोनों हाथ उठाकर, फिर एक बार तिरंगा लहराऊँ दुआ अंतिम रब से, कण […] Read more » कविता:दीया अंतिम आस का
कविता कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा July 26, 2012 / July 26, 2012 by बलबीर राणा | Leave a Comment किधर जाऊं चोराहे पर खड़ा हूँ सुगम मार्ग कोई सूझता नहीं सरल राह कोई दिखता नहीं कौन है हमसफ़र आवाज कोई देता नहीं किधर जाऊं चोराहे पर खड़ा हूँ इस पार और भीड़ भडाका उस पार सूनापन एक और शमशान डरावन एक और गर्त में जाने का दर डर लगता किधर जाऊं चोराहे पर […] Read more » :चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा poem by balbir rana कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा
कविता कविता:अमानुष बना कैसे July 25, 2012 / July 25, 2012 by बलबीर राणा | 1 Comment on कविता:अमानुष बना कैसे बलबीर राणा मा ने प्यार दिया पिता ने दुलार भाई ने साथ दिया बहन ने आभार अमानुष बना कैसे समाज ने एकतादी जाती ने अपनापन धर्म ने सतमार्ग दिया वेद पुराण कुरान बाईबल ने मानवता फिर अमानुष बना कैसे रीfत रिवाजों ने अनुसरण दिया इतिहास ने पुनरावृति गुरु ने ज्ञान दिया ग्रंथों […] Read more » poem by balbir rana कविता:अमानुष बना कैसे
कविता कविता:अडिग सैनिक July 24, 2012 / July 24, 2012 by बलबीर राणा | 1 Comment on कविता:अडिग सैनिक बलबीर राणा बर्फीले तूफान के आगे अघोरजंगलके बीच समुद्री लहरों के साथ , पर्वतकी चोटियों पर अडिग खड़ा हूँ मा की ममता से दूर पिता के छांव से सुदूर पत्नी के सानिंध्य के बिना पुत्र मोह से अलग अडिग खड़ा हूँ दुश्मन की तिरछी निगाहों के सामने देश विद्रोहियों के बीच दुनिया समाज […] Read more » कविता:अडिग सैनिक
पुस्तक समीक्षा प्रवक्ता न्यूज़ चर्च में दलित र्इसाइयों के शोषण का आर्इना है उपन्यास ‘बुधिया……. July 23, 2012 / July 23, 2012 by आर.एल. फ्रांसिस | Leave a Comment झांसी:- नगर के जनवादी लेखक पीबी लोमियो के उपन्यास ‘बुधिया एक सत्यकथा का विमोचन राजकीय संग्रहालय सभागार में एससी कुल्हारे के मुख्य आतिथ्य व वरिष्ठ स्तम्बकार दिनेश बैस की अध्यक्ष्ता में हुआ। पुअर क्रिशिचयन लिबरेशन मूवमेंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर एल फ्रांसिस व वरिष्ठ पत्रकार रमेश चौबे कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रहे। एससी कुल्हारे ने […] Read more » book budhiya उपन्यास 'बुधिया