गजल गजल:अनुभूति-श्यामल सुमन July 5, 2012 by श्यामल सुमन | 1 Comment on गजल:अनुभूति-श्यामल सुमन कभी जिन्दगी ने मचलना सिखाया मिली ठोकरें तो सम्भलना सिखाया जीना सम्भलकर कठिन जिन्दगी में उलझ भी गए तो निकलना सिखाया रंगों की महफिल है ये जिन्दगी भी गिरगिट के जैसे बदलना सिखाया सबकी खुशी में खुशी जिन्दगी की खुद की खुशी में बहलना सिखाया बहुत दूर मिल के भी क्यों […] Read more » gazal by shyamal suman गजल:अनुभूति
गजल गजल:जो दिल में रहते हैं July 5, 2012 / July 5, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment जो दिल में रहते हैं ,पास क्या वो दूर क्या चाँद के रु-ब-रु कोई ,लगता है हूर क्या। कितनी बार की हैं बातें, मैंने भी चाँद से छलका है मेरे चेहरे भी ,कभी नूर क्या। इस मुहाने पर हैं ,कभी उस मुहाने पर छाया रहता है दिल पर जाने सरूर क्या। बस एक हवा के […] Read more » गजल:जो दिल में रहते हैं गजल:जो दिल में रहते हैं-सतेन्द्र गुप्ता
कविता पिता July 5, 2012 / July 5, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | Leave a Comment विपिन किशोर सिन्हा वह तुम्हारा पिता ही है जिसने — तुन्हें अपनी बाहों में उठाकर हृदय से लगाया था, जब तुम इस पृथ्वी पर आए थे; उंगली पकड़ाकर चलना सिखाया था, जब तुम लड़खड़ाए थे. वही है वह, जो सदा तुम्हें प्रोत्साहित करता है, तुम्हारे सारे सत्प्रयासों को दिल से सराहता है, कोई भी […] Read more » poem on father
गजल गजल- मेरा तो घर जला दिया अच्छा नहीं किया July 5, 2012 / July 5, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on गजल- मेरा तो घर जला दिया अच्छा नहीं किया इक़बाल हिंदुस्तानी तुमने हमें हरा दिया अच्छा नहीं किया, सोये थे क्यों जगा दिया अच्छा नहीं किया। सौदा तो कर लिया मगर कैसे टिकेगा ये, रूठों को यूं मना दिया अच्छा नहीं किया। खुद पर जो आंच आई तो हल्ला मचा दिया, मेरा तो घर जला दिया अच्छा नहीं किया। तुम तो […] Read more » gazal by iqbal hindustani गजल- मेरा तो घर जला दिया अच्छा नहीं किया
कहानी कविता: आकाश. समुद्र और हम-मोतीलाल July 4, 2012 / July 4, 2012 by मोतीलाल | 1 Comment on कविता: आकाश. समुद्र और हम-मोतीलाल जब तैरता है आकाश का नीलापन सागर के अंतस मेँ तब विचरने की प्रक्रिया आकाश से समुद्र तक या फिर समुद्र से आकाश तक मछलियोँ की तैरने सा या तारोँ के उगने सा समय के अंतराल को पार करता हुआ और खंडित होने से बचता हुआ हममे आकर टिक जाता है यह सच है […] Read more » आकाश. समुद्र और हम-मोतीलाल कविता: आकाश. समुद्र और हम
गजल गज़ल / ना भूले आदमी काटेगा वो जो बोता है….. June 29, 2012 / June 29, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 2 Comments on गज़ल / ना भूले आदमी काटेगा वो जो बोता है….. इक़बाल हिंदुस्तानी 0तमाम सर्दियों फुटपाथ पर जो सोता है, क़सूर उसका मज़दूर होना होता है। 0वो एकता का मसीहा बना जो बैठा है, वही तो मुल्क में नफरत के बीज बोता है। 0खुद अपने हाथ से एक हाथ काट लेता है, जो घर को बांट के भाई को भाई खोता है। 0वो […] Read more »
कविता महत्वपूर्ण लेख डॉ. मधुसूदन की कविता : घोडे़ को धक्का मारती है बग्गी ? June 27, 2012 / July 1, 2012 by डॉ. मधुसूदन | 11 Comments on डॉ. मधुसूदन की कविता : घोडे़ को धक्का मारती है बग्गी ? वैसे तो चमत्कार हुये हैं कई बार ! कई बार तर्क को नियमों ने तोड़ा है। पर अब की बार, जो हुआ चमत्कार ! उस ने सारी सीमाओं को लांघा है। हवा चलने से, पत्ते न हिले पेड़ों के, पत्तें हिलने से, चली है आँधी। अच्छा ? भूचाल आने से, न गिरा मकान- पर मकान […] Read more » गोधरा सांप्रदायिक दंगा
कहानी प्रेम कहानी / आर. सिंह June 24, 2012 / June 24, 2012 by आर. सिंह | 1 Comment on प्रेम कहानी / आर. सिंह प्रथम अध्याय निशा नागर, एक सुन्दर सुघड़ षोडशी नयी नयी कालेज में आयी थी,एक सुंदर सी बड़ी कार में.जब वह प्रथम दिन गाडी से उतरी तो न जाने कितने दिल फेंकों ने अपने अपने दिल उसकी ओर उछाल दिए.कुछ तो उसकी पैरों के आगे गिरे,पर उसने एक नजर भी उनकी ओर नहीं डाली.वे दिल यो […] Read more » प्रेम कहानी
गजल गज़ल: रफ़्ता रफ़्ता खुशियाँ –सतेन्द्रगुप्ता June 21, 2012 / June 20, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment रफ़्ता रफ़्ता खुशियाँ जुदा हो गई खुद-बुलंदी की राख़ जमा हो गई। लौटकर न आये वे लम्हे फिर कभी और ज़िन्दगी बड़ी ही तन्हा हो गई। ज़िस्म का शहर तो वही रहा मगर खुदमुख्तारी शहर की हवा हो गई। कैसे गुज़री शबे-फ़िराक़, ये न पूछ मेरे लिए तो मुहब्बत तुहफ़ा हो गई। इस क़दर बढ़ी […] Read more » gazal by satendra gupta गज़ल: रफ़्ता रफ़्ता खुशियाँ –सतेन्द्रगुप्ता
गजल गज़ल: तुम से मिलकर–सतेन्द्रगुप्ता June 20, 2012 / June 20, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment तुम से मिलकर, तुम को छूना अच्छा लगता है दिल पर यह एहसान करना, अच्छा लगता है। लबों की लाली से या नैनों की मस्ती से कभी चंद बूंदे मुहब्बत की चखना ,अच्छा लगता है। लाख छिप कर के रहे, लुभावने चेहरे , पर्दों में कातिल को कातिल ही कहना अच्छा लगता है। देखे हैं […] Read more » gazal by satendra gupta गज़ल: तुम से मिलकर –सतेन्द्रगुप्ता
गजल गजल:पैसे से रोग पाल के मग़रूर हो गया-इक़बाल हिंदुस्तानी June 20, 2012 / June 20, 2012 by इक़बाल हिंदुस्तानी | Leave a Comment हर शिकवा गिला आपसे जब दूर हो गया, अब आपका हर फ़ैसला मन्ज़ूर हो गया। अब तो वतन के वास्ते भी काम कुछ करो, रहबर तुम्हारा काम तो भरपूर हो गया। औरों के वास्ते तो बनाता रहा महल, छत चाही सर पे तो मजबूर हो गया। कमज़ोर पे सदा ही जो गुस्सा […] Read more » gazal by iqbal hindustani
गजल गज़ल:ज़िन्दगी बहता पानी है–सतेन्द्रगुप्ता June 20, 2012 / June 20, 2012 by सत्येन्द्र गुप्ता | Leave a Comment ज़िन्दगी बहता पानी है ,बहने दो उसे अपना रास्ता ,ख़ुद ही ढूँढने दो उसे। बिना लहरों के समन्दर फट जायेगा जी खोल कर के ही, मचलने दो उसे। नदी के अन्दर भी, एक नदी बहती है रफ़्ता रफ़्ता समंदर से मिलने दो उसे। घर किनारे टूट करवरना ढह जायेंगे उफ़न कर, कभी न बिखरने दो […] Read more » गज़ल:ज़िन्दगी बहता पानी है–सतेन्द्रगुप्ता