कविता मुस्कान का दान April 25, 2025 / April 25, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment कभी किसी शाम की थकी हुई साँसों में,तुम्हारा एक हल्का सा “कैसे हो?” उतरता है —जैसे रेगिस्तान में कोई बूँद गिर जाए,जैसे सूनी आँखों में उम्मीद फिर गहराए। दान क्या है?सिर्फ अन्न, जल, या स्वर्ण की गाथा नहीं,कभी-कभी वक्त का दिया पल भीकिसी की टूटती दुनिया की परिभाषा बदल देता है। तुम जब अनकहे दर्द […] Read more » gift of smile\
व्यंग्य नेताओं की मोहब्बत और जनता की नादानी April 25, 2025 / April 25, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment राजनीति की रंगमंचीय दुश्मनी और जनता की असली बेवकूफी कभी किरण चौधरी और शशि थरूर मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े होते हैं, कभी हिंदू-मुस्लिम के नाम पर पार्टियों की नीतियाँ बँटती हैं, और इसी बीच पिसती है आम जनता। क्या हमने कभी सोचा कि ये नेता तो एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, कार्यक्रमों में […] Read more » The love of leaders and the ignorance of the public
कविता मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! April 24, 2025 / April 24, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें ! आत्माराम यादव मैं बचपन से ही किताबों से बहुत प्रेम करता हूं, पहले लोटपोट, मधुर मुस्कान, नंदन गुडिया जैसी किताबों का चस्का लगा था धीरे धीरे सरिता,कादम्बिनी, माया निरोगधाम जैसी पत्रिकाओं का शौक मुझे सातवें आसमान पर पहुंचा देता था। किताबें पढ़ने के जुनून ने 10 साल […] Read more » मैं और मेरी अलमारी में बंद किताबें
लेख कोई पानी डाल दे तो मैं भी चौंच भर पीलूं: चुपचाप मरते परिंदों की पुकार April 24, 2025 / April 24, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment तेज़ होती गर्मी, घटते जलस्रोत और बढ़ती कंक्रीट संरचनाओं के कारण पक्षियों के लिए पानी और छांव जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी दुर्लभ होती जा रही हैं। परिंदे हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, और अगर वे गायब हो गए तो यह धरती और भी सूनी हो जाएगी। आधुनिक समाज एसी चलाने में सक्षम है […] Read more » चौंच भर पीलूं
लेख नायकों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता April 23, 2025 / April 23, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डा.वेदप्रकाश हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि- हमारे राष्ट्रीय नायक महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज हैं, मुगल शासक औरंगजेब नहीं। यह हमारा नैतिक दायित्व है कि इतिहास में हुए अन्याय को हम खारिज करें। साथ ही देश के युवाओं को बताएं कि महाराणा प्रताप और शिवाजी महाराज केवल पुस्तकों […] Read more » महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज
लेख समाज नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment लिव इन में रह रही युवती के अपहरण का प्रयास , महिला पर चढ़ाई गाड़ी ।यह खबर आज के समाचार पत्रों में प्रकाशित है । शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जिस दिन एक या एक से अधिक समाचार इस तरह की घटनाओं को लेकर प्रकाशित न होते हों । भारतीय समाज में इस […] Read more » defects of live in relation The evil of live-in relationship which is leading towards moral degradation must be stopped नैतिक पतन की ओर बढ़ रही लिव इन की बुराई को रोकना होगा
कविता अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment — पहलगाँव हमले पर एक कविता अभी तो हाथों से उसका मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था,कलाईयों में छनकती चूड़ियाँ नई थीं,सपनों की गठरी बाँध वो चल पड़ा था वादियों में,सोचा था — एक सफर होगा, यादों में बस जाने वाला। पर तुम आए —नाम पूछा, धर्म देखा, गोली चलाई!सर में…जहाँ शायद अभी भी […] Read more » terrorist attack in pahalgaon अभी तो मेंहदी सूखी भी न थी
कविता पहलगाम के आँसू April 23, 2025 / April 23, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment वो बर्फ से ढकी चट्टानों की गोद में,जहाँ हवा भी गुनगुनाती थी,जहाँ नदियाँ लोरी सुनाती थीं,आज बारूद की गंध बसी है। वो हँसी जो बाइसारन की घाटियों में गूँजी,आज चीखों में तब्दील हो गई।टट्टू की टापों के संग जो चला था सपना,खून में सना हुआ अब पथरीले रास्ते पर गिरा है। एक लेफ्टिनेंट — विनय,जिसने […] Read more » पहलगाम के आँसू"
कविता पहलगाम की चीख़ें April 23, 2025 / April 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment जब बर्फ़ीली घाटी में ख़ून बहा,तब दिल्ली में सिर्फ़ ट्वीट हुआ।गोलियाँ चलीं थी सरहद पार से,पर बहस चली—”गलती किसकी है सरकार से?” जो लड़ रहे थे जान पे खेलकर,उनकी कुर्बानी दब गई मेल में।और जो बैठे थे एयरकंडीशन रूम में,लिखने लगे बयान—”मोदी है क़सूरवार इसमें।” कब समझोगे, ये दुश्मन बाहर है,जो मज़हब की आड़ में […] Read more » पहलगाम की चीख़ें
लेख चरित्र निर्माण के बिना दौड़ता जीवन! April 23, 2025 / April 23, 2025 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव जिन्दगी के 60 बसंत पंख लगाकर कब फुर्र से उड़ गए पता ही नहीं चला किन्तु एक पुराना वाकया याद आ गया जहा स्कुल से मिले चरित्र प्रमाणपात्र के बाद जीवन में पुलिस से प्रमाणित चरित्र प्रमाण पत्र माँगा गया, मैंने जबाव दिया की जब बिना चरित्र के अब तक गुजर गई तब वे पुलिस वाले जो खुद चरित्रहीन है वे कैसे और क्यों मेरे चरित्र की गारंटी लेंगेl चरित्र मेरा है इसलिए अपने चरित्र की गारंटी मैं खुद ले सकता हूँ, पुलिसवाले गारंटी दे यह बात गले नहीं उतरी थीl मेरे चरित्र के विषय में 100 प्रतिशत गारंटी मेरी मान्य होने चाहिए वाकी जो घटिया चरित्र को छुपाकर में अपने घर परिवार या बाल सखा आदि के साथ रहता हूँ वे मेरे सच्चे मित्र होने के साथ मेरे सुख दुःख के साथी भी है l मेरे विषय में मेरे मोहल्ले पड़ोस या साथ रहने वाले फिफ्टी फिफ्टी मेरे चरित्र का प्रमाण दे तो समझ आती है किन्तु जो पुलिस मुझे न जानते समझते मेरे चरित्र की गारंटी ले तो वैसी ही बात होगी जैसे आज महंगाई ढीठ- हरजाई-जैसी प्रेमिका के रूप में सोने की कीमतों को आसमान पर बिठाले है, भला सोने के उतार चढ़ाव को यह बाजार क्या जाने, जब बाजार भावों को नहीं समझ सकता तो पुलिस जो कहीं भी मेरे न तो आगे है और न पीछे है वह चरित्र की गारंटी कैसे ले सकती है? जरा विचार कीजिये मैं जीवन में कुछ बनना चाहता हूँ किन्तु न तो सरकार बनाने को तैयार है और न ही इस देश में एसी व्यवस्था है की लाखों रूपये की इंजीनियर, ला, प्रोफ़ेसर आदि की डिग्री लेने के बाद आप इंजीनियर, जज या कोई पद पर जा सकेl देश में लाखो डिग्रीधारी है वे […] Read more » चरित्र निर्माण
कविता फ़ुर्क़त वो दिन भी लाएगी April 22, 2025 / April 22, 2025 by डॉ राजपाल शर्मा 'राज' | Leave a Comment फ़ुर्क़त वो दिन भी लाएगीतू फिर से मिलने आएगी दर्द कभी तो ठहरेगा हीक्या जो साँस नहीं आएगी नाज़ुक सी है शम्म-ए-मोहब्बतहवा लगी तो बुझ जाएगी भँवरा इक मँडरा तो रहा हैनादॉं कली खिल ही जाएगी अभी तो है आगाज़-ए-मोहब्बतअभी अदा सारी भाएगी उठा है पर्दा अभी तो रुख़ सेअभी तो वो चिलमन ठाएगी ख़ुशियाँ […] Read more » That day will bring trouble too फ़ुर्क़त वो दिन भी लाएगी
लेख कर्ज तले दबा अन्नदाता April 22, 2025 / April 22, 2025 by राजेश खण्डेलवाल | Leave a Comment राजेश खण्डेलवाल कभी तेज सर्दी तो कभी भीषण गर्मी, कभी अकाल तो कभी बाढ़, कई बार कीटों का प्रकोप तो कई बार तेज हवाएं। ऐसे ही कारणों से चौपट होती अपनी फसल को देख किसान दु:खी रहता है। कृषि प्रधान भारत में किसान यूं तो अन्नदाता कहलाता है लेकिन वही आज आज भारी कर्ज के बोझ तले दबा है। सरकारें भले ही राहत योजनाओं का ढोल पीटती हों लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ अलग ही नजर आती है। बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि देश के 58 फीसदी किसान कर्जदार हैं। साहूकारों और निजी उधारदाताओं से लिए गए कर्जे के ठोस सरकारी आंकड़े ही उपलब्ध नहीं है। सरकार ने 2014 से लेकर 2025 तक कृषि बजट में 8 गुना तक बढ़ोतरी कर विकास का दावा किया लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी किसान की तकदीर व तस्वीर पहले जैसे ही है। मार्च, 2024 तक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कर्जदारी रही जहां 1.46 करोड़ किसान 8.38 लाख करोड़ के कर्ज तले दबे हैं। राजस्थान के 1.05 करोड़ किसान 1.74 लाख करोड़ और मध्य प्रदेश के 93.52 लाख किसान 1.50 लाख करोड़ के कर्जदार हैं। जून 2023 तक राजस्थान के किसानों पर वाणिज्यिक, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीणों बैंकों का 147538.62 करोड़ रुपए कृषि कर्ज बकाया था। राजस्थान में एक किसान परिवार पर औसतन 1.66 लाख का कर्ज है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 18.81 करोड़ किसान परिवारों पर कुल 32,35,747 करोड़ का कृषि ऋण है। यह रकम 2025-26 के कृषि बजट (1,71,437 करोड़) का लगभग 20 गुना है। किसानों को सबसे ज्यादा कर्ज वाणिज्यिक बैंकों से मिलता है। वहीं देश में एक किसान परिवार पर औसतन 1.70 लाख का कर्ज है। केन्द्र और राज्य सरकारें फिलहाल कर्जमाफी के मूड में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता किसान कल्याण योजनाओं पर अधिक ध्यान देना है। केंद्र सरकार ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। किसानों के लिए उन्नत बीजों का इंतजाम कर रही है। ड्रोन टेक्नोलॉजी लेकर आई है। हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी भी कर रही है और खरीद भी बढ़ा रही है। 2014 में केंद्र सरकार का कृषि बजट 21,933 करोड़ था। 2025-26 में यह बढकऱ 1,71,437 करोड़ हो गया है। अब तक 3.46 लाख करोड़ रुपए किसानों को पीएम किसान योजना के तहत मिल चुके हैं। 100 जिलों में पीएम धन धान्य योजना के तहत कृषि विकास से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ होने की उम्मीद है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के 85.86 लाख किसानों पर कुल 2.20 लाख करोड़ का बैंक कर्ज बकाया है। दक्षिण भारतीय राज्यों में किसानों पर बकाया ऋण की स्थिति अलग-अलग है। ऋणग्रस्तता के मामले में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सबसे अधिक प्रभावित हैं जबकि तमिलनाडु में सबसे अधिक ऋण बकाया है। राजेश खण्डेलवाल Read more » Farmers burdened with debt कर्ज तले दबा अन्नदाता