लेख सतत् विकास हेतु जल संरक्षण आवश्यक March 21, 2025 / March 21, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment (22 मार्च विश्व जल दिवस विशेष आलेख) सुनील कुमार महला 22 मार्च को ‘विश्व जल दिवस’ मनाया जाता है। वास्तव में प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व जल दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा समर्थित एक वैश्विक पहल है जो वर्ष 1993 से मनाया जा रहा है। दरअसल,इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस का विचार वर्ष 1992 […] Read more » 22 मार्च विश्व जल दिवस
कविता बूँद-बूँद में सीख March 21, 2025 / March 21, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment ●●●इस धरती पर हैं बहुत, पानी के भंडार।पीने को फिर भी नहीं, बहुत बड़ी है मार॥●●●जल से जीवन है जुड़ा, बूँद-बूँद में सीख।नहीं बचा तो मानिये, मच जाएगी चीख॥●●●अगर बचानी ज़िंदगी, करें आज संकल्प।जल का जग में है नहीं, कोई और विकल्प॥●●●धूप नहीं, छाया नहीं, सूखे जल भंडार।साँसे गिरवी हो गई, हवा बिके बाज़ार॥●●●आये दिन […] Read more » बूँद-बूँद में सीख
कविता छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना… March 21, 2025 / March 21, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment बारिश को अब आने दो।तपती गर्मी जाने दो॥ छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना,जीवन को बच जाने दो॥ ये बादल भी कुछ कह रहे।इनको मन की गाने दो॥ कटते हुए पेड़ बचाओ।शुद्ध हवा कुछ आने दो॥ पंछी क्या कहते है सुन लो।उनको पंख फैलाने दो॥ फोटो में ही लगते पौधे।सच को बाहर लाने दो॥ होती कैसे धरा […] Read more » छोड़ो व्यर्थ पानी बहाना…
पर्यावरण लेख वन-संस्कृति को अक्षुण्ण रखना बड़ी चुनौती March 20, 2025 / March 20, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2025- 21 मार्च, 2025ललित गर्ग भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में वनों का सर्वाधिक महत्व रहा है, वन ऑक्सीजन, भोजन, ईंधन, दवाइयां, सुगंध, कागज़, और कपडे़ और कई तरह की चीज़ें देते हैं। वन जहां वैश्विक तापमान को बनाए रखने में मदद करते हैं वहीं वर्षा को नियंत्रित करते हैं। वन भूमि कटाव […] Read more » अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2025- 21 मार्च वन-संस्कृति
लेख मन बदलती कठपुतली को याद करने का समय March 20, 2025 / March 20, 2025 by मनोज कुमार | Leave a Comment 21 मार्च विश्व कठपुलती दिवस पर विशेषप्रो. मनोज कुमारडोर में बंधी कठपुतली इशारों पर कभी नाचती, कभी गुस्सा करती और कभी खिलखिलाकर हमें सम्मोहित करती..यह यादें आज भी अनेक लोगों के जेहन में तरोताजा होंगी. कुछ यादें ऐसी होती है जो बचपन से लेकर उम्रदराज होने तक जिंदा रहती हैं और इसमें कठपुतली को दर्ज […] Read more » 21 मार्च विश्व कठपुलती दिवस
पर्यावरण लेख गोरैया: कहां गायब हो गई यह छोटी चिडिय़ा? March 20, 2025 / March 20, 2025 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment विश्व गोरैया दिवस 20 मार्च पर विशेष:अमरपाल सिंह वर्मा हमारे आसपास के परिवेश में हम जितने पक्षी देखते थे, उनमें से कई पक्षी गायब हो रहे हैं। पक्षियों का विलुप्त होना पर्यावरण के संतुलन के लिए एक गंभीर संकट है। ये नन्हे पंखों वाले जीव न केवल प्रकृति की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी बनाए रखते हैं। जंगलों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और शिकार के कारण परिंदों की कई प्रजातियां लुप्तप्राय: हो चुकी हैं। घरेलू चिडिय़ा गौरैया भी ऐसे पक्षियों मेंं शामिल है, जो हमारी आंखों से ओझल होते जा रहे हैं। यदि हमने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो प्रकृति का यह अनमोल खजाना हमेशा के लिए खो सकता है। पक्षियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवास बचाने, कीटनाशकों के उपयोग को कम करने और जन जागृति फैलाने की जरूरत है।एक समय था जब हर घर, आंगन, खेत-खलिहान और बगीचे गोरैया की चहचहाहट से गुंजायमान होते थे। यह नन्ही चिडिय़ा हमारे बचपन की यादों का अभिन्न हिस्सा थी लेकिन अब यह प्यारी चिडिय़ा लुप्त होती जा रही है। शहरों में तो यह लगभग अदृश्य हो चुकी है और गांवों में भी इसकी संख्या तेजी से घट रही है।गोरैया की संख्या में गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली और पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम है। पहले लोग मिट्टी और लकड़ी के बने घरों में रहते थे, जहां गोरैया को घोंसले बनाने के लिए पर्याप्त जगह मिलती थी पर कंकरीट के आधुनिक घरों में गोरैया के घोंसला बनाने की गुंजाइश नहीं बची है।माना जाता है कि मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें छोटे पक्षियों, विशेषकर गोरैया की जैविक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। वायु प्रदूषण और जहरीले धुएं के कारण भी इनका जीवन संकट में आ गया है। पहले खेतों और बगीचों में गोरैया को अनाज, कीड़े-मकोड़े और फसलों के अवशेष आसानी से मिल जाते थे लेकिन कीटनाशकों और रासायनिक खादों के बढ़ते प्रयोग से हालात बदल गए हैं। कंक्रीट के जंगलों के विस्तार के कारण इनके घोंसले बनाने के लिए भी जगह नहीं बची। गर्मी में पानी की कमी भी इनके अस्तित्व के लिए खतरा बन रही है।गोरैया पर संकट के बारे में अब हर कोई जानता है। हर साल 20 मार्च को दुनिया भर में विश्व गौरैया दिवस मनाए जाने से लोग इस बारे में जागरूक हुए हैं। आम लोग गोरैया के संरक्षण के लिए प्रयास कर रहे हैं मगर फिर भी भारत समे दुनिया भर में इस चिडिय़ा की तादाद घटती जा रही है। गोरैया को बचाना बहुत जरूरी है क्यों कि यह केवल एक छोटी सी चिडिय़ा नहीं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह खेतों और बगीचों में हानिकारक कीटों को खाकर संतुलन बनाए रखती है। अगर यह विलुप्त हो गई तो कीटों की संख्या में वृद्धि होगी जिससे फसलों को नुकसान होगा और जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।गोरैया को बचाने के उपायों में तेजी लाए जाने की जरूरत है। इसके लिए हमें इसे घरों में घोंसले बनाने की जगह देनी होगी। हमें लकड़ी के छोटे घर, घोंसला बॉक्स तथा मिट्टी के बर्तन छतों और बालकनी में रखकर गोरैया को लौटने का न्योता देना चाहिए। जैविक खेती को बढ़ावा देकर और कीटनाशकों के सीमित उपयोग से गोरैया को बचाने में बड़ा कदम हो सकता है। हमें छतों और बगीचों में छोटे-छोटे पानी के पात्र रखने चाहिए ताकि गर्मियों में पक्षियों को पीने का पानी मिल सके। सरकार और वैज्ञानिकों को मिलकर ऐसे उपाय करने चाहिए जिससे टावरों से निकलने वाली तरंगों का प्रभाव पक्षियों पर कम पड़े। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को मिलकर गोरैया संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।गोरैया को बचाना केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और संस्कृति की भी जरूरत है। यह चिडिय़ा हमारे बचपन की साथी रही है, हमारे आंगन की रौनक रही है। इसे वापस लाना है तो इसके लिए हमें अपने घरों, दिलों और समाज में जगह बनानी होगी। यदि हम मिलकर थोड़े से प्रयास करें तो एक दिन फिर से हमारे आंगन में गोरैया फुदकती नजर आएगी और उसकी चहचहाहट से हमारी सुबहें महक उठेंगी। अमरपाल सिंह वर्मा Read more » विश्व गोरैया दिवस 20 मार्च
लेख भारत में हर 4 मिनट में होती है सड़क पर एक मौत March 20, 2025 / March 20, 2025 by जयसिंह रावत | Leave a Comment जयसिंह रावत जीवन के सबसे बड़े सत्य का नाम मृत्यु है जिसे कोई नहीं रोक सकता। यह ऐसा सत्य है जिसकी कल्पना मात्र से मरने वाला ही नहीं बल्कि उसके प्रियजनों की भी रूह कांप जाती है। यह मृत्यु तब और अधिक भयंकर हो जाती है जब किसी की असामयिक मृत्यु हो जाय! राष्ट्रीय अपराध […] Read more » सड़क पर मौत
टेक्नोलॉजी लेख “ग्रोक” xAI द्वारा निर्मित कृत्रिम बुद्धि March 20, 2025 / March 20, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव Grok को xAI नामक कंपनी ने विकसित किया है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में है। xAI की स्थापना एलन मस्क और अन्य सह-संस्थापकों द्वारा की गई थी । यह कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम कर रही है । ग्रोक AI न केवल तकनीकी रूप से सक्षम है बल्कि उपयोगकर्ताओं […] Read more » "Grok" Artificial Intelligence created by xAI ग्रोक
कविता श्री जी राधारानी March 19, 2025 / March 19, 2025 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment तर्ज – मेरे सर पै रख दो बाबा….. मु : तेरे दर पै आया हूँ राधा, सुन लो मेरी अरदास,बार बार मोहि दीजिये, बरसाने कौ वास (श्री चरनों में वास)|बार बार मोहि दीजिये, श्री चरनों में वास| अ १: जब जब मै कोई जन्म है पाऊँ, बरसाने में ही मैं आऊं – 2नित दिन तेरे […] Read more » श्री जी राधारानी
दोहे खाटू श्याम March 19, 2025 / March 19, 2025 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment खाटू श्यामतर्ज: अकेले हैं चले आओ आओ मु : परेशान हैं सुनो प्यारे, जहा होखाटू मैं आएं हैं, तुम कहाँ होपरेशान हैं।। -2 अ १: तुझे हम चाहते हैं , जहां सब पूजता हैन कोई अब हमारा है, न कोई सूझता हैपरेशान हैं। ………।। -2 अ २: अब व्याकुल है, ये जीवनसताए है तेरा ही […] Read more » खाटू श्याम
कला-संस्कृति लेख भारत सक्षम है खुशी के उजालों को उद्घाटित करने में March 19, 2025 / March 19, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस- 20 मार्च, 2025ललित गर्गअंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस हर साल 20 मार्च को मनाया जाने वाला एक वैश्विक आयोजनात्मक एवं प्रयोजनात्मक दिवस है, जिसका उद्देश्य खुशी, खुशहाली के साथ एक अधिक प्रसन्न, दयालु एवं शांतिपूर्ण दुनिया को बढ़ावा देना है। यह लोगों के जीवन में खुशी के महत्व को मनाने और पहचानने तथा व्यक्तियों, […] Read more » International Day of Happiness - March 20 अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस- 20 मार्च
महिला-जगत लेख महिलाओं के खिलाफ आपराधिक व घिनौनी प्रवृत्तियों पर लगे अंकुश ! March 18, 2025 / March 18, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला भारतीय संस्कृति में महिलाओं की भूमिका सदैव से बहुत ही अहम और महत्वपूर्ण रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि महिलाएं परिवार समाज, समाज के बाद देश के विकास में अनेक भूमिकाएं निभाती हैं। वास्तव में ये महिलाएं ही हैं जो हमारे भारतीय समाज की असली रीढ़ हैं और समुदाय के विकास […] Read more » महिलाओं के खिलाफ आपराधिक व घिनौनी प्रवृत्तियों