व्यंग्य पाकिस्तान में शरीफ भैंस September 29, 2018 by विजय कुमार | 1 Comment on पाकिस्तान में शरीफ भैंस – विजय कुमार, किसी समय दूध का अर्थ था, जंगल में चरने वाली देसी गाय का दूध; पर समय बदला, तो दूध कई तरह का हो गया। यों तो हर स्तनपायी मादा के पास अपनी संतानों के लिए दूध होता है; पर गाय, भैंस, जरसी, बकरी, भेड़ या ऊंटनी का दूध मनुष्यों के काम भी […] Read more » पाकिस्तान में शरीफ भैंस क्रिकेट शरीफ मियां सेना प्रमुखों
व्यंग्य सेल ! सेल ! पर एक गजल September 15, 2018 by आर के रस्तोगी | 1 Comment on सेल ! सेल ! पर एक गजल सेल लगाकर दुकानदार,ग्राहकों को आकर्षित करते अधिक है जब ग्राहक दुकान में घुस जाये,उसकी जेब काटते अधिक है देते है जो डिस्काउंट,चीजो की प्राइस बताते अधिक है इस तरह दुकानदार ग्राहकों का,ऊल्लू बनाते अधिक है लालच करना बुरी बला है,उसमे ग्राहक फसते अधिक है जो फस जाते है उसमे,बाद में पछताते बहुत अधिक है सेल […] Read more » दुकानदार ग्राहकों लालच सेल ! सेल ! पर एक गजल
व्यंग्य बदहाल अर्थ व्यवस्था में आखिर क्या करे आदमी ….!! September 14, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को एक जगह ला खड़ी करती है। 80 के दशक तक जबरन बाल विवाह की सूली […] Read more » दिल्ली-मुंबई फिजूलखर्ची बदहाल अर्थ व्यवस्था
व्यंग्य पति की अभिलाषा September 5, 2018 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें सोच रखा है छुट्टी का दिन सारा आराम करके गुजार दूँगा चाय पीके सो जाऊंगा, कहीं वो शॉपिंग की याद न दिला दें हफ़्ते भर की थकान मीठी नींद, भीने सपनो […] Read more » पति की अभिलाषा शॉपिंग सुन्दर डीपी
व्यंग्य राष्ट्रीय विद्रोही दल August 3, 2018 / August 3, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment – विजय कुमार, शर्मा जी की बेचैनी इन दिनों चरम पर है। 2019 सिर पर है और चुनाव लड़ने के लिए अब तक राष्ट्रीय तो दूर, किसी राज्य या जिले स्तर की पार्टी ने उनसे संपर्क नहीं किया। उन जैसे समाजसेवी यदि संसद में नहीं जाएंगे, तो क्या होगा देश का ?शर्मा जी ने कई […] Read more » Featured गुलदस्ते जिले स्तर की पार्टी राष्ट्रीय विद्रोही दल लिफाफे सार्वजनिक शौचालय
व्यंग्य जेब कतरा -एक व्यंग –आर के रस्तोगी August 3, 2018 / August 3, 2018 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक जेब कतरा जेब काटते पकड़ा गया कुछ पुलिस वालो के वह हत्थे चढ़ गया पुलिस वाले बोले,तू जेब काटता है क्यू जेब कतरा बोला,तुम रिश्वत मांगते हो क्यू पुलिस वाले बोले,हमारे थाने बिकते है सरे आम सारे देश मे नीलाम होते है हमे भी उपर वालो को देना पड़ता है बिना दिए अच्छा थाना […] Read more » असली जेब कतरे जेब कतरा -एक व्यंग --आर के रस्तोगी तू जेब काटता है क्यू पुलिस वाले बोले
व्यंग्य संयुक्त प्रधानमंत्री योजना July 27, 2018 / July 27, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment – विजय कुमार इन दिनों भारत में चातुर्मास चल रहे हैं। देवी-देवता निद्रा में हैं। चातुर्मास में साधु-संत भी अपना प्रवास स्थगित कर एक ही जगह रहते हैं। इस दौरान वे अपना अधिकांश समय अध्ययन, चिंतन, पूजा और प्रवचन में बिताते हैं। पर चातुर्मास में असुर क्या करते हैं, इस पर शास्त्र मौन हैं। शर्मा […] Read more » Featured अध्ययन कांग्रेस चिंतन पूजा और प्रवचन राहुल संयुक्त प्रधानमंत्री योजना
व्यंग्य राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण July 17, 2018 / July 17, 2018 by विजय कुमार | 1 Comment on राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण – विजय कुमार, आंसू का साहित्य में बड़ा महत्व है। भाषा कोई भी हो, पर आंसू की खुराक के बिना उसकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। न जाने कितनी कविता, शेर, गजल, कहानी और उपन्यासों के केन्द्र में आंसू ही हैं। सुमित्रानंदन पंत के शब्दों में – वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा […] Read more » Featured ऑक्सीजन और थोड़ा कैल्शियम; कुमारस्वामी राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण राष्ट्रगान सुमित्रानंदन पंत हाइड्रोजन
व्यंग्य दूसरों की कमाई , हमें क्यों बताते हो भाई ….!! July 7, 2018 / July 7, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा उस विवादास्पद अभिनेता पर बनी फिल्म की चर्चा चैनलों पर शुरू होते ही मुझे अंदाजा हो गया कि अगले दो एक – महीने हमें किसी न किसी बहाने से इस फिल्म और इससे जुड़े लोगों की घुट्टी लगातार पिलाई जाती रहेगी। हुआ भी काफी कुछ वैसा ही। कभी खांसी के सिरप तो […] Read more » Featured क्रिकेटर गरीबी - बेरोजगारी दूसरों की कमाई बाढ़ - सूखा बायोपिक फिल्म हमें क्यों बताते हो भाई
व्यंग्य भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए… .!! June 22, 2018 / June 22, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा मैं जिस शहर में रहता हूं इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां बंगलों का ही अलग मोहल्ला है। शहर के लोग इसे बंगला साइड कहते हैं। इस मोहल्ला या कॉलोनी को अंग्रेजों ने बसाया था। इसमें रहते भी तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी ही थे। कहते हैं कि ब्रिटिश युग में किसी […] Read more » Featured अंग्रेज उच्चतम न्यायालय किसी से न खाली करवाए... .!! भगवान सरकारी बंगला मीडिया पोस्टमार्टम
व्यंग्य इच्छा मृत्यु की ओर बढ़ती कांग्रेस June 20, 2018 / June 20, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार, कल शर्मा जी के घर गया, तो वे ‘इच्छा मृत्यु’ के बारे में एक लेख पढ़ रहे थे। पढ़ने के बाद उन्होंने वह अखबार मुझे पकड़ा दिया। उस लेख का सार इस प्रकार है।जीवन और मृत्यु के बारे में संतों, मनीषियों और विद्वानों ने बहुत कुछ कहा है। जीवन की तरह मृत्यु भी […] Read more » Featured अध्यक्ष राहुल गांधी इच्छा मृत्यु की ओर बढ़ती कांग्रेस नवीन पटनायक न्यायालय ममता बनर्जी
व्यंग्य हमें भी खिलाओ नहीं तो… June 13, 2018 / June 13, 2018 by विजय कुमार | Leave a Comment विजय कुमार आजकल दूरदर्शन ने क्रिकेट और फुटबॉल को हर घर में पहुंचा दिया है; पर हमारे बचपन में ऐसा नहीं था। तब गुल्ली-डंडा, पिट्ठू फोड़, कंचे और छुपम छुपाई जैसे खेल अधिक खेले जाते थे। खेल में झगड़ा भी होता ही है। भले ही वह थोड़ी देर के लिए हो। हमारे मित्र शर्मा जी […] Read more » Featured कंचे गुल्ली-डंडा पिट्ठू फोड़ भूतपूर्व मंत्रियों मुख्यमंत्री विधायक सांसद हमें भी खिलाओ नहीं तो...