व्यंग्य फर्जी के पहाड़ पर बैठा है आदमी July 25, 2024 / July 25, 2024 by नवेन्दु उन्मेष | Leave a Comment हमारे देश का हर आदमी फर्जी चीजों के पहाड़ पर बैठा हुआ है। जिधर भी नजरदौड़ाइये हर तरफ फर्जी ही फर्जी नजर आता है। आप जो खा-पी रहे हैं उसमेंमिलावट है जिसे आप फर्जी सामान कहते हैं। यहां तक कि देश में कई नेता औरअभिनेता भी फर्जी हैं। नेता फर्जी बातें करता है। अभिनेता डुप्लीकेट […] Read more »
व्यंग्य “सदी की शादी” (व्यंग्य) July 22, 2024 / July 22, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment “जय श्रीराम शुक्लाजी, कहाँ से लौट रहे हैं इतनी गर्मी में ? आसमान स आग बरस रही है और आप स्कूटर घर में रखकर साइकिल भांज रहे हैं । काहे बचा रहे हैं इतना पैसा” मैंने उन्हें अभिवादन करते हुए उन्हें शब्दों की चिकोटी काटने की कोशिश की। “राम -राम, कैसे हो कुमार खुराफाती। तुम […] Read more » सदी की शादी
व्यंग्य नीट की परीक्षा का ससुराली गठजोड़ July 1, 2024 / July 1, 2024 by नवेन्दु उन्मेष | Leave a Comment नवेन्दु उन्मेष नीट की परीक्षा को आखिर लीक होना था सो हो गया। वैसे तो आये दिन कोई नकोई परीक्षा लीक होती ही रहती है। लेकिन नीट की परीक्षा को लेकर कुछ लोगज्यादा ही हाय तौबा मचा रहे हैं। कुछ लोग जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारेलगाते हुए सड़को पर पुतले फूंक रहे हैं तो कुछ लोग धरना-प्रदर्षन […] Read more » NEET exam in-laws alliance
व्यंग्य उस्ताद और शागिर्द May 29, 2024 / May 29, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के आज से लगभग 50 साल पहले के रचित अलग-अलग व्यंग्य लेखों से कुछ लाइनें चुन कर आपके समक्ष पेश हैं,जो आज भी बेहद मौजूं हैं और मिर्ची से भी तीखी लगेंगी। लेकिन यदि परसाई जी के शब्द भेदी बाणों को आज के समय की नजीर में देखा जाए तो शायद ये […] Read more » master and disciple उस्ताद और शागिर्द
व्यंग्य पंच में परमेश्वर की आत्मा कहीं खो गई ? May 22, 2024 / May 22, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment भारत की आत्मा गांवों में बसी है इसलिए देश के सभी गांवों में सर्वसमाज पृथक या सार्वजनिक रूप से अपने यहां के सभी प्रकार के विवादों को पंच परमेश्वर की न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास कर पंचायत के द्वारा दिये गए निर्णय को स्वीकार कर पंच परमेश्वर की जयकारा के नारे लगाता था, पर यह व्यवस्था अनेक […] Read more » Is the Spirit of God lost somewhere in Punch पंच में परमेश्वर की आत्मा
व्यंग्य अस्त्र के रूप में लात का चिंतन ! May 16, 2024 / May 16, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव आज लात मारना आम बात हो गई है ओर लात का प्रयोग एक अस्त्र की तरह हो रहा है ओर चारों युगों कि बात कि जाए तो सबसे पहले भृगु जी द्वारा विष्णु की छाती पर लात मारने का प्रसंग हो या लंकाधिपति रावण द्वारा अपने भाई विभीषण को लात मारने का, ये […] Read more » Contemplation of the kick as a weapon!
व्यंग्य वकालत की शुरुआत ओर वकील की पैदाइश कब हुई ? May 16, 2024 / May 16, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव जगत के सभी धर्म शास्त्र, पुराण ओर वेद उपनिषद आदि में कही भी लेशमात्र अधिवक्ता,वकील, एडवोकट, बैरिस्टरनाम नाम के किसी भी प्राणी का उल्लेख नहीं है। देववाणी संस्कृत, देवनागरी लिपि हिन्दी व उनकी वर्णमाला के स्वरों-व्यंजनों ओर व्याकरण में भी इस विचित्र प्राणी का […] Read more » When did advocacy begin and the birth of a lawyer?
व्यंग्य मक्खी मरी नही, तो गई कहाँ? April 24, 2024 / April 24, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव नन्हें-नन्हें पंखों वाली नन्ही सी सुंदर काया वाली मक्खी ओर मक्खा यत्र तत्र सर्वत्र निवास करते है। सबसे ज्यादा नटखट, फुर्तीली यह मक्खी सभी जगह घट-घट में मिल जाएगी, दुनिया का ऐसा कोई स्थान नहीं जो मक्खी से अछूता हो। दिन हो या रात मक्खी बिना आलस किए काम करती है। […] Read more »
व्यंग्य भ्रमजाल में खुद भी फंसिए और दूसरों को भी फंसाईये… April 20, 2024 / April 20, 2024 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment चुनावी माहौल : सजने लगी चुनाव की मंडी, फ्रेंचाइजी लेने वालों को माननीय बनवाने की सौ फीसदी गारंटी सुशील कुमार ‘नवीन ‘आइए,आइए साहेबान! एक बार हमारी तरफ भी नजर फरमाऐं। सब कुछ आपके लिए ही तो सजा रखा है। भारी डिस्काउंट, गिफ्ट आइटम। सब कुछ तो है। एक बार हमारी तरफ आकर तो देखें। वादा […] Read more » चुनावी माहौल
व्यंग्य सबकी अपनी-अपनी खूंटी April 8, 2024 / April 8, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment – आत्माराम यादव पीव हर मनुष्य का अपना-अपना व्यक्तित्व है और वही उसकी पहचान भी है। करोड़ों की भीड़ में हरेक मनुष्य अपने निराले व्यक्तित्व के कारण पहचान लिया जाता है, यही उसकी विशेषता भी है। जैसे प्रकृति का नियम है कि वह पूरे जगत में एक भी वृक्ष,पौधा,बेल आदि सभी प्रकार की वनस्पति हो […] Read more »
व्यंग्य दूध और पानी की मैत्री April 7, 2024 / April 7, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव दूध और पानी आपस में गहरे मित्र है। ग्वालों के घर पैदा हुआ हॅू इसलिए गायों की प्रकृति को समझता हॅू, वहीं गाय जो हमें अमृत रूपी दूध देती है उस दूध और पानी की मित्रता तथा आपसी प्रेम को लेकर अनेक बार नानी जी उनकी प्रेम कहानी बताती रही […] Read more »
व्यंग्य “महिमा अमित न जाई बखानी” March 27, 2024 / March 27, 2024 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment चाय की दुकान पर सिगरेट का कश फूंकते हुये इतवार का अखबार मैंने इस उम्मीद में खोला कि अगर मेरा व्यंग्य छप गया होगा तो तीन सौ रुपये मिलेंगे। उम्मीद थी कि इससे चाय- सिगरेट की उधारी निबटाने में आसानी रहेगी। चाय की दुकान पर मैं मुफ्त का अखबार पढ़ने और उधारी की सिगरेट पीने […] Read more »