व्यंग्य भिखारियों से शर्मिंदा है देश December 5, 2023 / December 5, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव आज की तारीख में दुनियाभर के देशों में भारत का नेतृत्व करने वाले ये राजनेता वोट की भीख मॉगते समय भिखारियों के आत्मविश्वास को धराशाही कर वोट की भीख पाकर अपने भाग्य को आजमा कर भाग्यशाली बन जाते है। असल में देखा जाए तो भारत मॉ के भाल […] Read more » The country is ashamed of beggars
व्यंग्य कुदरत का निजाम November 27, 2023 / November 27, 2023 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment पाकिस्तान की एक रिपोर्टर कुदरत बलोच ने वहां के निवर्तमान कप्तान बाबर आजम से पूछा – “ अब आप कप्तान नहीं रहे, ये कैसा कुदरत का निजाम है “ ? बाबर – “देखें जी कुदरत ये निजाम नहीं आजम है।आप बलोच लोग जानबूझकर आजम को निजाम कहती हैं । बलोच लोग इंडिया से मिले हुए […] Read more »
व्यंग्य प्रशंसक बिना जग सूना November 27, 2023 / November 27, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment प्रशंसक की अपनी दुनिया है। दुनिया में कोई भी प्रशंसक के बिना जीना नहीं चाहता है, इसलिये सभी के प्रशंसक होते है, प्रशंसक न हो तो यह जीवन बोझ लगने लगता है। जब तक हमें अपने कानों से अपनी प्रशंसा न सुनने को मिले या सोसलमीड़िया के विभिन्न प्लेटफार्मो, […] Read more » The world is empty without fans
व्यंग्य क्या नेता जी अभी फुर्सत में है ? November 24, 2023 / November 24, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment अभी अभी प्रदेश की जनता ने अपना फैसला ईव्हीएम मशीन की वटन दबाकर दर्ज करा दिया, एक पखवाड़े बाद फैसला आना है, फैसला आने तक सारे के सारे नेता फुर्सत में है। हमने अपने विधानसभा प्रत्याशी के न मिलने पर एक बड़े नेता के चुनाव लड़ने पर उनका मन टटोलकर बात छेड़ दी, […] Read more »
व्यंग्य दिवाली पर लक्ष्मी जाती है, आती नही ? November 9, 2023 / November 9, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीवसमुद्र मथने से लक्ष्मी समुद्र से निकली और बाहर आयी। बाहर का तात्पर्य जमीन पर नहीं क्षीरसागर में, जहॉ समुद्र में, ही विष्णु ने वरण कर लिया। क्षीरसागर से निकली लक्ष्मी जमीन पर आई, जमीन पर लक्ष्मी को ज्यादा चला नही जाता है इसलिये वह बैकुंठ में, […] Read more » Lakshmi goes on Diwali
व्यंग्य खादी,खाकी और काले रंग में रंगी जा रही पत्रकारिता November 3, 2023 / November 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव आज के समय की पत्रकारिता विकास के पथ को तलाशती, जनआकांक्षाओं के समक्ष समपर्ण कर, भ्रष्टाचार की भूलभुलैया मे थककर स्वयं का ही गलाघोटते हुये अधर्म का शिकार हो गयी है। पत्रकार स्वयं पत्रकारिता के अवमूल्यन और तमाम तरह की मर्यादाओं को तोड़ने के लिये खुद अग्रणी हो गया है। वह अपने कर्तव्य […] Read more » Journalism is being painted in khadi khaki and black colors
व्यंग्य गपोड़ी एण्ड सपोड़ी वोट बैंक November 3, 2023 / November 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment हमारे देश में रंगा और बिल्ला नाम के दो भाई हुए थे, उनके बेटे गपोड़ी और सपोड़ी ने चुनावी मौसम का बारीकी से अध्ययन कर जान लिया कि जिस प्रकार दुनियाभर में पर्यावरण असंतुलन ने नींद उड़ा दी है, उसी तर्ज पर उनकी गपोड़ी एण्ड़ सपोड़ी बैंक खुल जाये तो वे इससे मिलने वाले मुनाफें […] Read more »
व्यंग्य गपोड़शंख का करामाती जूता October 20, 2023 / October 20, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव थाने में दरोगा से मिलते ही गपोड़शंख फूटे की तरह फूटने लगा, हुजूर गजब हो गया मेरा एक जूता बिना मुझसे कहे कहीं भाग गया है! जूता भाग गया, क्या गजब ढाते हो, अभी तक लड़के लड़की भागते थे, जूता कैसे भागेगा, दरोगा ने डपट लगाई। गपोडशंख बोला-पता नही, हुजूर, पर ऐसा […] Read more »
व्यंग्य शिलान्यास पत्थर पर नाम चाहिये October 3, 2023 / October 3, 2023 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव मिस्टर प्रश्न कुमार दिखने में साफ-सुथरे है पर विडम्बनाओं और विकृत मानसिकता के मुखौटे बाजी में वे सबके बाप है। अल्पविराम, अर्द्धविराम, कामा, प्रश्नवाचक, प्रश्नचिन्ह, चन्द्रबिन्दु आदि आधे-अधूरे मित्रों से घिरे रहने वाले प्रश्नकुमार सदैव घटिया मानसिकता की बाॅहों […] Read more » शिलान्यास पत्थर पर नाम चाहिये
व्यंग्य मैं सांड हूँ ! जहाँ जाइएगा मुझे पाइएगा…? September 19, 2023 / September 19, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल हमारे गांव-जवार में लठ्ठन गुरू का जलवा है। वह लम्बी कद काठी के गबरू जवान हैं। हालांकि उमर उनकी साठा है, लेकिन अपने को वह किसी गबरू जवान से कम नहीं समझते। फीट भर की हासिएदार मुंछे और छह फिट की लाठी रखते हैं। […] Read more » I am a bull! Wherever you go you will find me
व्यंग्य कहने से नहीं, अपनाने से होगी हिंदी की सार्थकता September 14, 2023 / September 14, 2023 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment सुशील कुमार ‘नवीन’ आप सभी जेंटलमैन को ‘ हिंदी दिवस’ की मैनी मैनी कांग्रेचुलेशन। यू नो वेरी वेल कि हिंदी हमारी मदरटेंग है। इसकी रिस्पेक्ट करना हम सब की रेस्पॉनसबिलीटी है। टुमारो हमारे कॉलेज ने भी हिंदी-डे पर एक प्रोग्राम आयोजित किया था। उसमें पधारे चीफ गेस्ट ने हिंदी की इंपोर्टेंस पर बड़ी ही अट्रेक्टिव और […] Read more » कहने से नहीं
व्यंग्य हिंदी की खाइए और अंग्रेजी की गाइए September 12, 2023 / September 12, 2023 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment गजोधर भईया हिंदी की उन्नति को लेकर बेहद परेशान रहते हैं। बेचारे हिंदी के विकास में खुद का विकास खोजते हैं। सितंबर का पुण्य मास लगते ही उनका मुरझाया चहेरा खिल उठता है। उनके भीतर सुस्त पड़ा संवृद्ध हिंदी का सपना कुलाचें मारने लगता है। क्योंकि पवित्र मास का दूसरा पखवाड़ा हिंदी दिवस के रूप […] Read more »