व्यंग्य पार्क की महफिल में June 9, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- बचपन में रामलीला देखने का चाव किसे नहीं होता ? हमारे गांव में भी जब रामलीला होती थी, तो हम शाम को ही मंच के आगे अपनी बोरी बिछा आते थे। एक बड़े से कागज पर अपने बाबाजी का नाम लिखकर उसे बोरी पर रखकर एक ईंट से दबा देते थे। फिर क्या […] Read more » पार्क की महफिल में रामलीला
व्यंग्य दुखराम बाबा June 7, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- शर्मा जी के मोहल्ले में संकटमोचन हनुमान जी का एक प्राचीन सिद्ध मंदिर है। वहां प्रायः कथा, कीर्तन और सत्संग होते रहते हैं। पिछले दिनों भी वहां अयोध्या से एक प्रख्यात संत आये हुए थे। शर्मा जी के बहुत आग्रह पर मैं भी एक-दो बार वहां गया। एक दिन संत जी ने सत्संग […] Read more » दुखराम बाबा. हिन्दी व्यंग्य
व्यंग्य तुम्हारा नाम क्या है ? June 1, 2014 by बीनू भटनागर | Leave a Comment -बीनू भटनागर- पिछले दो अंकों मे मैंने घर का नाम जिसे पैट नेम या निक नेम कहते हैं, उसकी चर्चा नहीं की थी तो आज यहीं से आरंभ करते हैं। बच्चे के पैदा होते ही अगर पहले से नाम न सोचा हो तो लोग उसे मुन्ना-मुन्नी, गुड्डु-गुड़िया या बंटी-बबली जैसे नामो से पुकारने लगते हैं, […] Read more » तुम्हारा नाम क्या है ? नाम व्यंग्य व्यंग्य हिन्दी व्यंग्य
गजल व्यंग्य अब तो आंखें खोल May 31, 2014 / May 31, 2014 by पंडित सुरेश नीरव | 1 Comment on अब तो आंखें खोल -पंडित सुरेश नीरव- अमल से सिद्ध हुए हैवान जमूरे अब तो आंखें खोल। न जाने किसकी है संतान जमूरे अब तो आंखें खोल।। मिला है ठलुओं को सम्मान जमूरे अब तो आंखें खोल। हुआ है प्रतिभा का अपमान जमूरे अब तो आंखें खोल।। पराई थाली में पकवान जमूरे अब तो आंखें खोल। हमारे हिस्से में […] Read more » अब तो आंखें खोल गजल व्यंग्य
चुनाव व्यंग्य लोक सभा चुनाव की अनूठी उपलब्धि May 23, 2014 by बी एन गोयल | 1 Comment on लोक सभा चुनाव की अनूठी उपलब्धि -बी एन गोयल- हाल ही में संपन्न लोकसभा के चुनाव के बारें में चर्चा हो रही थी। इन चुनाव ने भारत के सामाजिक और आर्थिक पटल पर कुछ नयी उपलब्धियों दर्ज की हैं। कितने प्रत्याशी जीते, कितने हारे- इस पर चर्चा हर नुक्कड़ पर हो रही है लेकिन यह कोई विशेष बात नहीं है। कौन-कौन […] Read more » अमृता राय एनडी तिवारी चुनाव उपलब्धि दिग्विजय सिंह नारायण दत्त तिवारी लोकसभा चुनाव
व्यंग्य वासना, संयम और गांधीजी May 19, 2014 by एल. आर गान्धी | Leave a Comment -एलआर गांधी- बापू की अस्मत फिरंगियों के बाजार में नीलाम होने जा रही है। बापू यूं तो कई बार नीलाम हुए मगर इस बार की बात कुछ ‘निजी’ सी है… राज परिवार के गान्धियों की निज़ता का विशेष ख्याल रखने वाली गांधीवादी सरकार उदासीन सी है। नीलामी में बापू के तीन खत बिकेंगे… एक खत […] Read more » गांधीजी बापू बापू के आरोप महात्मा गांधी महात्मा गांधी के आरोप हरी लाल पर आरोप
चुनाव व्यंग्य नमोनियां May 9, 2014 by बीनू भटनागर | 11 Comments on नमोनियां -बीनू भटनागर- बाज़ार में एक नई दवा आई है ‘Modicin’, यह B.J Pharma का उत्पाद है। कंपनी के CEO का दावा है कि इसे खाने से कोई भी रोग ठीक हो जाता है। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि यह एक प्रकार का Steroid है, इससे तुरन्त कुछ लाभ दिख सकता है, पर नुकसान […] Read more » अरविंद केजरीवाल कांग्रेस नरेंद्र मोदी राजनीतिक व्यंग्य
चुनाव राजनीति व्यंग्य जो पहनाना शौक से पहनाओ, बस वोट दिलाओ! April 21, 2014 / April 21, 2014 by अशोक गौतम | Leave a Comment -अशोक गौतम- देखिए साहब! आपको तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करनी है तो मत कीजिए! कौन कहता है कि जो करने को आपका मन नहीं करता वह कर ही लो! अरे, यहां सब सब करने को स्वतंत्र हैं। यहां सब कुछ भी कहने को स्वतंत्र हैं। फांसी लगाने , लगवाने की भी कोई जरूरत नहीं! फांसी […] Read more » politics on cap जो पहनाना शौक से पहनाओ बस वोट दिलाओ!
चुनाव राजनीति व्यंग्य थप्पड़ पर स्वतंत्र शोध April 20, 2014 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment -विजय कुमार- भारत का चुनाव किसी महाभारत से कम नहीं है। यहां जिन्दाबाद, मुर्दाबाद, डंडे, झंडे और फूलमाला आदि सबका उपयोग होता है। इसमें क्रिया-प्रतिक्रिया, फिल्म-थिएटर, हास्य-प्रहसन, एकल अभिनय और नुक्कड़ नाटक तक के दृश्य बिना टिकट ही देखे जा सकते हैं। इसीलिए दुनिया भर के पर्यटक इसका मजा लेने यहां आते हैं। पर देश […] Read more » satire on Arvind Kejrival slapped थप्पड़ पर स्वतंत्र शोध
कविता चुनाव राजनीति व्यंग्य भूख की रोटी, बोल के घी में लिपटाई है April 14, 2014 by जावेद उस्मानी | Leave a Comment -जावेद उस्मानी- भूख की रोटी, बोल के घी में लिपटाई है खाली कटोरी पर, लिखी गई मलाई है बेवफा वादो की चटनी के साथ फिर सपनों वाली वही बासी मिठाई है सजाए हुए बैठे हैं सब एक सी थाली ऐ सियासत तेरी अदाएं निराली !! नकली आंसू और वादो की भरमार हैं कुछ अजब सा, […] Read more » poem on politics बोल के घी में लिपटाई है भूख की रोटी
चुनाव राजनीति व्यंग्य ‘महाभारत’ के युद्ध का आंखों देखा हाल April 12, 2014 / April 12, 2014 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment -राकेश कुमार आर्य- नई दिल्ली। भारत में लोकसभा चुनावों का ‘महाभारत’ अपने चरमोत्कर्ष पर है। धृतराष्ट्र बने डॉ. मनमोहन सिंह अपने राजभवन में आराम फरमा रहे हैं। उनके पास वक्त तो खूब है, पर उनकी अपनी ‘वक्त’ समाप्त हो चुकी है। फुरसत में बैठे मनमोहन चुनावी समर की सूचना लेने का प्रयास कर रहे हैं। […] Read more » 'महाभारत' के युद्ध का आंखों देखा हाल present political war
व्यंग्य बलात्कारियों द्वारा नेताजी का अभिनन्दन April 11, 2014 / April 11, 2014 by गिरीश पंकज | 1 Comment on बलात्कारियों द्वारा नेताजी का अभिनन्दन गिरीश पंकज कुछ भूतपपूर्व और कुछ अभूतपूर्व बलात्कारी एक जगह एकत्र हो कर एक नेता जी का अभिनन्दन कर रहे थे. नेता जी ने काम ही ऐसा कर दिया था की उनका अभिनन्दन किया जाये. नेता जी ने पिछले दिनों युवा बलात्कारियों की हौसलाआफ़ज़ाई के लिए अद्भुत बयान दिया था, उन्होंने राष्ट्र के नाम सम्बोधन […] Read more » बलात्कारियों द्वारा नेताजी का अभिनन्दन