आर्थिकी खेत-खलिहान राजनीति कभी दिल की भी सुन लिया करो साहब March 24, 2015 by आदर्श तिवारी | 1 Comment on कभी दिल की भी सुन लिया करो साहब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेअपने ६वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम किसानों से किया लेकिन, बात किसानों की मन की नहीं बल्कि अगर हम ये कहें कि मोदी अपने सरकार पर लग रहे भूमि अधिग्रहण बिल के आरोपो का स्पष्टीकरण देकर किसानों का भरोसा जीतने की कवायद की तो ये तनिक भी अतिशयोक्ति नहीं होगी. बेमौसम हुए […] Read more » आदर्श तिवारी कभी दिल की भी सुन लिया करो साहब बेमौसम बरसात भूमि अधिग्रहण बिल मन की बात
आर्थिकी खेत-खलिहान लोकतंत्र में महत्वपूर्ण कौन: क्रिकेट या किसान? March 21, 2015 / March 21, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment यहकतई आश्चर्य की बात नहीं है कि आजकल अखबार व दृश्य श्रव्य मीडिया का पहलासमाचार क्रिकेट है, फिर राजनीतिक उठापटक और अपराध या फ़िल्मी सितारों की चमकदमक वगैरह। जंतर मंतर पर लाखों किसान देश के दूर दराज इलाकों से आकर अपनीसमस्याएं बताना चाहते हैं लेकिन मीडिया लोकसभा और राज्यसभा में किसानों केचिंतकों की बात तो […] Read more » क्रिकेट या किसान लोकतंत्र में महत्वपूर्ण कौन क्रिकेट या किसान ? शैलेन्द्रचौहान
खेत-खलिहान संकट में अन्नदाता किसान March 19, 2015 by निर्मल रानी | 1 Comment on संकट में अन्नदाता किसान निर्मल रानी हमारे देश का अन्नदाता यानी भारतीय किसान वैसे तो लगभग प्रत्येक वर्ष देश के किसी न किसी हिस्से में आने वाली बाढ़ अथवा सूखे के कारण संकट का सामना करता ही रहता है। खासतौर पर गरीब व मध्यमवर्गीय किसान तो ऐसे हालात से प्राय: प्रभावित ही रहता है। परंतु इस वर्ष मार्च के […] Read more » संकट में अन्नदाता
आर्थिकी खेत-खलिहान प्राकृतिक आपदा से संकट में खेती-किसानी March 14, 2015 / March 14, 2015 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव मध्यप्रदेश समेत पूरे देश में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से खेती-किसानी जबरदस्त संकट में हैं। इस संकट को भ्रष्ट प्रषासनिक व्यवस्था और राजनीतिक लापरवाही ने किसान को बेहद मायूस कर दिया है। किसान को जहां खरीफ फसल की बोनी के दौरान सूखे ने परेशानी में डाला वहीं इस ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात ने […] Read more » agriculture disaster agriculture problem indian agricultural problems Indian farmer
खेत-खलिहान किसान किस पर विश्वास करे ? April 11, 2014 / April 11, 2014 by कन्हैया झा | Leave a Comment आजकल गेहूं, चावल, मक्का, कॉटन आदि अनेक फसलों के ऐसे बीज उपलब्ध हैं जो प्राकृतिक नहीं होते बल्कि प्रयोगशालाओं में तैयार किये जाते हैं. ये बीज Genetically Modified अथवा जी-एम् कहलाते हैं. अप्रैल 3, 2014 एक खबर के अनुसार केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर जवाब देते हुए प्रार्थना की है […] Read more » किसान किस पर विश्वास करे ?
खेत-खलिहान छत्तीसगढ़ की कृषि नीति July 25, 2013 by संजय पराते | Leave a Comment निजी क्षेत्र की पैरोकारी, उदारीकरण से यारी –संजय पराते छत्तीसगढ़ की कृषि और किसान समुदाय दोनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। इस संकट की अभिव्यक्ति प्रदेश में घटते कृषि रकबे, बढ़ती लागत, ग्रामीणों के गिरते जीवन स्तर, कृषि निवेश में कमी, कृषि ऋण व फसल बीमा तक पहुंच न होने, लाभकारी मूल्य के अभाव […] Read more »
खेत-खलिहान बहुफसलीय खेती की जरुरत June 7, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment हरित क्रांति का अभिशाप झेल रहा पंजाब बहुफसलीय खेती की ओर मुड़ता दिखाई दे रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि खेती में विविधता न केवल भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए उपयोगी होगी, बल्कि फसलों की पैदावार में जो एकरुपता आ गई है, बल्कि फसलों की पैदावार में जो एकरुपता आ गई […] Read more » बहुफसलीय खेती की जरुरत
उत्पाद समीक्षा खेत-खलिहान जीन संवर्धित फसलों की प्रासंगिकता February 1, 2013 / February 1, 2013 by सतीश सिंह | Leave a Comment भारत में जीन संवर्धित (जीएम) फसलों पर किये जाने वाले प्रयोग को लेकर शुरु से ही विवाद रहा है। कुछ लोग इस तरह के प्रयोग के पक्ष में हैं, तो वहीं कुछ विरोध में। इस बाबत फसलों पर केनिद्रत भारतीय जैव प्रौधोगिकी नियामक प्राधिकरण विधेयक (बीआरएआर्इ), 2009 को लेकर पहले भी काफी हो-हल्ला मच चुका […] Read more »
खेत-खलिहान भगवान के डाकियों को लीलते कीटनाशक… January 21, 2013 / January 21, 2013 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | Leave a Comment आशीष वशिष्ठ बढ़ते कीटनाशको के उपयोग ने पक्षियों के जीवन को बहुत नुकसान पहुंचाया है. किसानों के मित्र समझे जाने वाले पक्षियों की प्रजातियों में दिन-प्रतिदिन भारी कमी होती जा रही है. हालात ये हैं कि कुछ समय से तो कुछेक प्रजातियों के पक्षी नजर ही नहीं आ रहे हैं. विशेष बात तो यह है […] Read more » भगवान के डाकियों को लीलते कीटनाशक…
खेत-खलिहान कृषि प्रधान देश में बेमौत मरते किसान.. November 19, 2012 / November 19, 2012 by डॉ0 आशीष वशिष्ठ | Leave a Comment डॉ. आशीष वशिष्ठ दीपावली से एक दिन पूर्व महाराष्ट्र में पुलिस की गोलीबारी में दो किसानों की मौत ने दीवाली को बेरौनक कर दिया. अपनी मांगों को मनवाने के लिए अहिंसक प्रदर्शन कर रहे किसानों पर गोलीबारी करना कृषि प्रधान और लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए शर्म की बात है. पुलिस की गोली से किसानों की […] Read more » कृषि प्रधान देश में बेमौत मरते किसान
खेत-खलिहान खेतिहर मजदूरी को मनरेगा से जोड़ा जाना चाहिए September 6, 2012 / September 6, 2012 by अनूप आकाश वर्मा | Leave a Comment अनूप आकाश वर्मा दरअसल, सवाल नज़रिए का है..ज़रा विचारिये, आज छटे वेतन आयोग ने सरकार की सेवा में कार्यरत एक चपरासी को तकरीबन १५ हज़ार रूपये मासिक दने की वकालत की है| अच्छी बात है| मगर अब उन किसानों की नियति को क्या कहेंगे जो पूरे माह दिन-रात एक कर खेतों में खून-पसीना बहा कर […] Read more » खेतिहर मजदूर
खेत-खलिहान कृषि जागरूकता की अधूरी पहल August 3, 2012 / August 3, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment सतीश कुमार यादव इस साल मौसम की बेरूखी ने जितना किसानों को प्रभावित किया है उससे कहीं अधिक सरकार चिंतित है। अब तक 20 फीसदी कम वर्शा ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। अगर हालात यही रहे तो देश को खाद्यान उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार […] Read more » कृषि