खेत-खलिहान विविधा आत्महत्या की राह पर बदहाल किसान August 15, 2015 by आदर्श तिवारी | Leave a Comment उत्तर प्रदेश के मथुरा में पिछले 17 साल से भटक रहे लगभग पच्चीस हजार किसानों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामूहिक आत्महत्या करने की अनुमति मांगी हैl मथुरा गोकुल बैराज पीड़ित किसान लगभग 17 साल से मुआवज़े के लिए भटक रहे हैंl पिछले वर्ष नवंबर में किसानों […] Read more » आत्महत्या की राह पर किसान आत्महत्या की राह पर बदहाल किसान किसान
खेत-खलिहान विविधा दालों की बढती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए आयात करने का निर्णय July 13, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment अशोक “प्रवृद्ध” देश में दालों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार 5,000 टन उड़द और 5,000 टन तुअर दाल का आयात करने जा रही हे। उड़द दाल के साथ 5,000 टन तुअर के आयात के लिए सरकार पहले ही निविदा जारी कर चुकी है। उपभोक्ता मामलों के सचिव […] Read more »
खेत-खलिहान विविधा लंगड़ा आम का नामकरण कथा June 22, 2015 by अशोक “प्रवृद्ध” | 1 Comment on लंगड़ा आम का नामकरण कथा अशोक “प्रवृद्ध” यूँ तो प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बनारस आज भी बहुत-सी चीजों के लिए लोकप्रिय है, मशहूर है, तथापि जिस चीज के लिए वह सारे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है, वह है बनारस का लंगड़ा आम, जिसे देखते ही लोगों के मुँह में पानी आ जाता है और वे उसे किसी […] Read more » Featured लंगड़ा आम
खेत-खलिहान किसान और मनरेगा अधिनियम June 13, 2015 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on किसान और मनरेगा अधिनियम –अशोक “प्रवृद्ध”- गोंदल सिंह गाँव का एक लघु कृषक था और अपने गाँव में रहकर खेती एवं पशुपालन करते हुए अपनी आजीविका मजे में चला रहा था। संपन्न नही था फिर भी खुशहाल जीवन जी रहा था। गोंदल सिंह को खेती से बहुत प्यार था और किसान होने पर उसे गर्व था। वह कहता था […] Read more » Featured किसान किसान और मनरेगा अधिनियम मनरेगा मनरेगा अधिनियम
खेत-खलिहान जन-जागरण विविधा अन्नदाताओं की अनदेखी April 24, 2015 / April 24, 2015 by बी.आर.कौंडल | 3 Comments on अन्नदाताओं की अनदेखी राजनितिक दल चाहे कितनी हमदर्दी किसानों के प्रति दिखाएँ लेकिन हकीकत यही है कि किसानों के हितों की सभी सरकारों ने अनदेखी की है | भारत जैसे देश जहाँ पर 70 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं, में किसानों की बदहाली भविष्य के लिए भारी आक्रोश का संकेत देता […] Read more » Featured अन्नदाताओं की अनदेखी भूमि-अधिग्रहण अध्यादेश
खेत-खलिहान फसलों की बर्बादी पर मोदी का मरहम April 11, 2015 / April 11, 2015 by आदर्श तिवारी | 9 Comments on फसलों की बर्बादी पर मोदी का मरहम बेमौसम हुए बरसात और ओलावृष्टि से किसानों के फसल बर्बाद हो गए है.किसानों की हालत दिन-ब- दिन दयनीय होती जा रही है.इसपर सक्रियता दिखाते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बताया कि अब फसलों का नुकसान होने पर किसानो को ढेढ़ गुना मुआवजा दिया जायेगा,तो वहीँ किसानो के लिए राहत […] Read more » Featured आत्महत्या आदर्श तिवारी ओलावृष्टि किसान फसल बर्बाद फसलों की बर्बादी पर मोदी का मरहम हरित क्रांति
खेत-खलिहान प्रायोजित कृषि विनाश या प्राकृतिक आपदा ? April 10, 2015 / April 11, 2015 by डॉ. राजेश कपूर | 1 Comment on प्रायोजित कृषि विनाश या प्राकृतिक आपदा ? पिछले अनेक वर्षों से हम देख रहे हैं कि आंधी, वर्षा, तूफ़ान, ओलावृष्टि बड़े नपे-तुले समय पर होती है.जब वृक्षों-फसलों में फूल, फल बनने का समय होता है तभी आंधी, ओले, तूफ़ान, वर्षा बड़े नियम के साथ अपनी विनाश लीला दिखा देते हैं. जब फसलें पकने व काटने का समय होता है तब भी प्रकृति […] Read more » Featured प्रायोजित कृषि विनाश या प्राकृतिक आपदा ? राजेश कपूर
खेत-खलिहान इस सवाल का जवाब जरूरी है April 10, 2015 / April 11, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment मेरे पूर्व लिखित लेखों में भूमि अर्जन, पुनस्र्थापन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता कानून-2013 के पक्ष में कई तर्क हैं। इन तर्कों को सामने रख कोई सहमत हो सकता है कि वह भूमि बचाने वाला कानून था। वह बहुमत की राय के आधार पर भूमिधर को भूमि बेचने, न बेचने की आजादी देता […] Read more » Featured अन्ना अरुण तिवारी भूमि अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण क़ानून
खेत-खलिहान ओला-अनावृष्टि पीड़ित किसानों की आत्महत्याओं पर निष्ठुर नसीबवाले चुप क्यों हैं ? April 8, 2015 / April 11, 2015 by श्रीराम तिवारी | 1 Comment on ओला-अनावृष्टि पीड़ित किसानों की आत्महत्याओं पर निष्ठुर नसीबवाले चुप क्यों हैं ? इस देश का गरीब किसान तो सदियों से ही आत्महत्या के लिए मजबूर होता रहा है किन्तु ‘नसीबवालों’ के राज में तो गजब हो गया। हर संवेदनशील इंसान को देश के कोने-कोने से, प्रकृति की मार से पीड़ित किसानों की बिधवाओं का चीत्कार ही सुनायी दे रहा है। ओला-अनावृष्टि पीड़ित किसानों की आत्महत्याओं पर निष्ठुर नसीबवाले चुप क्यों हैं ? न केवल वामपंथी किसान संगठन […] Read more » Featured आत्महत्या ओला-अनावृष्टि किसानों की आत्महत्या पीड़ित किसान श्रीराम तिवारी ओला-अनावृष्टि पीड़ित किसानों की आत्महत्याओं पर निष्ठुर नसीबवाले चुप क्यों हैं ?
खेत-खलिहान किसानों को स्नेह और सहानुभूति की जरुरत April 7, 2015 / April 11, 2015 by रमेश पांडेय | 1 Comment on किसानों को स्नेह और सहानुभूति की जरुरत असमय बारिश और ओलावृष्टि ने उत्तर भारत के किसानों को तबाह कर रखा है। देश के कोने-कोने से किसानों के आत्महत्या करने और फसल की बर्बादी को देख सदमे से मौत हो जाने की खबरें आ रही हैं। ऐसी खबरों से साफ है कि किसान और उनके परिवारीजन कितनी भयावह मनोदशा से गुजर रहे होंगे। […] Read more » Featured असमय बारिश ओलावृष्टि किसानों को स्नेह और सहानुभूति की जरुरत रमेश पाण्डेय
खेत-खलिहान राजनीति प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार April 6, 2015 / April 11, 2015 by मानव गर्ग | 3 Comments on प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार गत एक मास में भारत के अनेक क्षेत्रों में अनपेक्षित महती वृष्टि और शिलावृष्टि (ओलावृष्टि) हुई, जिससे इन क्षेत्रों में हो रही कृषि को और कृषिकों को महान् हानि पहुँची है । विशेषतः उत्तर भारत में इसका दुष्प्रभाव सर्वाधिक हुआ है, यहाँ तक कि अनेक किसानों के आघात (सदमे) के कारण मृत्यु या आत्महत्या के […] Read more » Featured किसानों के आत्महत्या के समाचार प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार मानव गर्ग
आर्थिकी खेत-खलिहान राजनीति अन्नदाताओं से नीरस संवाद March 24, 2015 / March 24, 2015 by प्रमोद भार्गव | 2 Comments on अन्नदाताओं से नीरस संवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के बहाने रेडियो के माध्यम से देश के अन्नदाताओं से जो इकतरफा व एकपक्षीय संवाद किया, उसने साफ है कि केंद्र सरकार के लिए किसान एवं कृषि हित से कहीं ज्यादा औद्योगिक हित महत्वपूर्ण हैं। जबकि मोदी ने तूफानी चुनावी दौरों में किसानों को भरोसा जताया था […] Read more » mann ki bat अन्नदताओं से नीरस संवाद किसान अत्महात्या कृषि मजदूर प्रमोद भार्गव प्राकृतिक आपदा भूमि अधिग्रहण