खेत-खलिहान पशुधन से धनवान होते किसान May 11, 2010 / December 23, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | Leave a Comment -फ़िरदौस ख़ान भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में डेयरी उद्योग का महत्वपूर्ण स्थान है। हरियाणा में डेयरी उद्योग खासा फलफूल रहा है। हालांकि राज्य में दूध के प्रसंस्करण का अधिकतर काम निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। राज्य में इस समय दूध को प्रसंस्कृत करने के छोटे-बड़े 32 डेयरी प्लांट काम कर […] Read more » Farmer किसान पशुधन
खेत-खलिहान हरित क्रांति : धरती को बंजर होने से बचाने की दरकार April 28, 2010 / December 24, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment on हरित क्रांति : धरती को बंजर होने से बचाने की दरकार मौजूदा खाद्यान्न की जरूरत को देखते हुए देश में दूसरी हरित क्रांति पर खासा जोर दिया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जब सोना उगलने वाली धरती ही बंजर हो जाएगी तो अनाज कैसे पैदा होगा। इसलिए भूमि की उर्वरक शक्ति को बचाए रखना बेहद जरूरी है, वरना कृषि के विकास की तमाम […] Read more » Green Revolution धरती बंजर हरित क्रांति
खेत-खलिहान किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के समाधान के लिए सार्थक कदमों की जरूरत है- अखिलेश आर्येन्दु April 20, 2010 / December 24, 2011 by अखिलेश आर्येन्दु | 2 Comments on किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के समाधान के लिए सार्थक कदमों की जरूरत है- अखिलेश आर्येन्दु पहले की तरह इस बार के केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र के लिए मामूली बढ़ोत्तरी की गई है जबकि विभिन्न राज्यों में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं का दौर जारी है। जिन वजहों से किसान आत्महत्याएं कर रहें हैं, न तो राज्य सरकारें समग्रता से उसके समाधान के लिए कोई सार्थक कदम उठा रही […] Read more » Suicide आत्महत्या किसान
खेत-खलिहान वैज्ञानिकों की चेतावनी जैविक खेती ही धरती को बचा सकती है – मुलख राज विरमानी April 19, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on वैज्ञानिकों की चेतावनी जैविक खेती ही धरती को बचा सकती है – मुलख राज विरमानी विश्व की पृथ्वी की ऊपरी परत खराब हो रही है क्योंकि किसान अधिक से अधिक रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। समय-समय पर हमारे विशेषज्ञ ऐसी चेतावनी देते रहे हैं कि वास्तव में धरती को पौष्टिक जैविक इत्यादि खाद चाहिए जिससे उसकी गुणवत्ता बनी रहे। इस चेतावनी का व्यापक असर तो नहीं हुआ परंतु […] Read more » Organic Farming जैविक खेती
खेत-खलिहान राष्ट्रीय समृद्धि के लिए कृषि प्रौद्योगिकी March 20, 2010 / December 24, 2011 by आशीष कुमार ‘अंशु’ | 3 Comments on राष्ट्रीय समृद्धि के लिए कृषि प्रौद्योगिकी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने देश को खाद्यान्न-संकट से उबार कर आत्मनिर्भर बनाने में उल्लेखनीय योगदान सन् 1905 में स्थापित होने से लेकर अब तक दिया है। संस्थान के क्रिया-कलापों को किसानों और जन-सामान्य तक पहुंचाने तथा यहां विकसित नवीनतम प्रौद्योगिकियों से उन्हें अवगत कराने हेतु इसी माह संस्थान में ‘कृषि विज्ञान मेला’ […] Read more » New Delhi नई दिल्ली भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
खेत-खलिहान जैव विविधता पर टूटता कहर March 20, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on जैव विविधता पर टूटता कहर धरती में पाई जाने वाली ”जैव विविधता” अनमोल सम्पदा है। इस सम्पदा के बारे में अधिकांश लोग परिचित नहीं हैं। जैव विविधता में प्रकृति का अनुपम सौंदर्य समाया हुआ है। वहीं जैव विविधता को संरक्षित कर हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाए हुए हैं। जैव विविधता का आर्थिक महत्व भी है, जो आज हो रहे […] Read more » Bio-diversity जैव विविधता
खेत-खलिहान खेतों से थाली तक पहुंचा ‘स्लो पॉयज़न’ March 18, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कीटनाशकों और रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जहां कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं कृषि उत्पाद भी जहरीले हो गए हैं। अनाज ही नहीं, दलहन, फल और सब्जियों में भी रसायनों के विषैले तत्व पाए गए हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। इसके बावजूद अधिक उत्पादन की […] Read more » Slow poison कीटनाशक
आर्थिकी खेत-खलिहान गौ आधारित ग्रामीण विकास – हेमंत दुबे March 12, 2010 / December 24, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on गौ आधारित ग्रामीण विकास – हेमंत दुबे कृषि में रसायनों का अनियंत्रित उपयोग मानव जगत के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य हेतु हानिकारक है। अनुसंधानों के तथ्य यह बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनियंत्रित उपयोग से मानव स्वास्थ्य पर त्वरित एवं दूरगामी परिणाम होते हैं। जो मनुष्य इन रसायनों के सीधे संपर्क में आते हैं, उनमें त्वरित परिणाम देखने को […] Read more » Cow गौ ग्रामीण विकास
खेत-खलिहान भारतीय कृषि: सुख-समृद्धि का मूलाधार March 9, 2010 / December 24, 2011 by डॉ. प्रवीण तोगड़िया | 2 Comments on भारतीय कृषि: सुख-समृद्धि का मूलाधार महंगे रसायनों के कर्जे, जमीन मृत, झूठे सपने दिखाने वाली सरकारों के कारण लिए हुए अन्य कर्जे, बिचौलिए इन सबमें हमारा किसान मारा गया। हमारी धरती माता मारी गयी, जिसके मूलाधार उसकी समृद्ध मृत्तिका और शुद्ध जलस्रोत थे। शाकवने रम्यं चन्दने रक्तचंदनै:। हरीतकी कणिकार धात्री वन विभूषितम॥ द्राक्शावाल्ली नागवल्ली कणावल्ली शतावृतम। मल्लिका यूथिका कुंदमदयन्ति सुगंधितम॥ […] Read more » Indian farmer भारतीय कृषि
खेत-खलिहान कार्बन क्रेडिट्स से अनभिज्ञ हम और हमारी सरकारी नीतियां January 28, 2010 / December 25, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | 4 Comments on कार्बन क्रेडिट्स से अनभिज्ञ हम और हमारी सरकारी नीतियां एक राष्ट्र की प्रगति में उद्योग एवं निर्माण कार्यों का बहुत बड़ा हाथ होता है और यहां उद्योग धंधे जिन प्रक्रियाओं से आगे बढ़ते हैं वह परिणामत: कार्बन या अन्य गैसों का उत्सर्जन करते हैं, जो अंतत: पृथ्वी के तापमान को बड़ाती है। क्योटो (जापान) प्रोटोकॉल के अनुसार ज्यादातर विकसित एवं विकासशील देशों ने ग्रीन […] Read more » Carbon credit कार्बन क्रेडिट
खेत-खलिहान नवीन हरित क्रांति की संभावनाएं एवं आवश्यकता January 27, 2010 / December 25, 2011 by पंकज चतुर्वेदी | Leave a Comment भारत को एक कृषि प्रधान देश माना जाता है एवं काफी लंबे समय से यह कहा जाता है कि इस देश की 70 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की कृषि परंपरा का इतिहास काफी पुराना है। समृद्ध कृषक राष्ट्र होने के कारण एक समय भारत को सोने की चिड़िया […] Read more » Green Revolution हरित क्रांति
खेत-खलिहान खुशहाली की राह दिखाती हर्बल खेती January 8, 2010 / December 25, 2011 by फ़िरदौस ख़ान | 2 Comments on खुशहाली की राह दिखाती हर्बल खेती दुनियाभर में हर्बल पदार्थों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अमेरिका में 33 फीसदी लोग हर्बल पद्धति में विश्वास करते हैं। अमेरिका में आयुर्वेद विश्वविद्यालय खुल रहे हैं और जर्मनी, जापान, आस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, नीदरलैंड, रूस और इटली में भी आयुर्वेद पीठ स्थापित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की […] Read more » Herbal Farming हर्बल खेती