लेख विधि-कानून वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने September 16, 2025 / September 16, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर तो रोक नहीं लगाई लेकिन उसके कुछेक प्रावधानों में विधिसम्मत और तर्कसंगत संशोधन किया है या फिर पूरी तरह से उन पर रोक लगा दी है। इसलिए वक्फ संशोधन अधिनियम में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने समझना बहुत जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के इस ताजातरीन फैसले से वे आशंकाएं दूर हो जाएंगी जो इस नए कानून को लेकर इससे पहले जताई जा रही थीं। चूंकि कोर्ट का यह निर्णय संविधान के अनुरूप है, इसलिए दोनों पक्षों ने इसे मान लिया है। यह एक शुभ लक्षण है। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए गए संशोधन महत्वपूर्ण और जरूरी हैं, क्योंकि इनमें संविधान की भावनाओं का भी ख्याल रखा गया है। इसलिए इसके परिवर्तित मायने राष्ट्रीय एकता के लिहाज से अहम हैं। लिहाजा इस फैसले का मुख्य असर निम्नलिखित है:- पहला, कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है जिसमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना जरूरी था, बताया गया है। हालांकि यह रोक तभी तक लागू रहेगा जब तक राज्य सरकारें इसके लिए अलग से नियम नहीं बना देतीं। चूंकि यह शर्त मनमानी हो सकती थी, इसलिए अदालत ने इसे स्थगित कर दिया है। समझा जाता है कि वक्फ करने के लिए न्यूनतम 5 बरसों तक इस्लाम का अनुयायी होने के प्रावधान पर तब तक रोक रहेगी, जब तक राज्य सरकारें इसके सत्यापन के लिए नियम नहीं बना लेती। चूंकि देश में धर्म व्यक्तिगत मामला है और यह जरूरी नहीं कि कोई नागरिक अपनी धार्मिक पहचान का सार्वजनिक प्रदर्शन करे। इसलिए यह तय करना कि कोई किसी धर्म को कब से मान रहा है, बेहद जटिल है। राज्य सरकारों से उम्मीद है कि इस बारे में नियम बनाते समय वे सभी पहलुओं का ध्यान रखेंगी और ज्यादा संवेदनशीलता बरतेंगी। दूसरा, कोर्ट ने यह भी निर्णय दिया है कि जिला कलेक्टर को यह फैसला देने का अधिकार नहीं है कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, जब तक वक्फ ट्रिब्यूनल या कोर्ट अंतिम निर्णय न कर ले। इससे कलेक्टर की शक्ति सीमित हुई है और मनमानी पर रोक लगी है। यह एक अहम संशोधन है क्योंकि शीर्ष अदालत ने वक्फ संपत्ति जांच के प्रावधानों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नामित अधिकारी की आंशिक रूप से रिपोर्ट के आधार पर ही किसी प्रॉपर्टी को गैर-वक्फ नहीं माना जा सकता। समझा जाता है कि अदालत ने संपत्ति अधिकार तय करने की ताकत जिलाधिकारी को देने को संविधान में की गई व्यवस्था शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ माना है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि लोकतंत्र के तीनों अहम अंगों- विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्ति का संतुलन बना रहे। एक पक्ष की ओर पलड़े का थोड़ा भी झुकाव व्यवस्था के संतुलन को बिगाड़ देगा। तीसरा, वक्फ बोर्ड में सदस्यों की संख्या और गैर-मुस्लिम सदस्यों की सीमा में संशोधन भी कुछ हद तक सुरक्षित की गई है लेकिन कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर स्थगन लगाया है। लिहाजा लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी सरकार अन्य धर्मों के लिए भी इसी तरह के कानून लाएगी व उसका अनुपालन का निर्णय करेगी। चतुर्थ, कोर्ट ने कुछ प्रावधानों को शक्ति के ‘मनमाने’ प्रयोग को रोकने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित किया है जिसमें वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और बुजुर्गों का धर्म पालन जैसे मुद्दे शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि वक्फ संशोधन अधिनियम के कई बिंदुओं पर विपक्ष को गहरी आपत्ति थी। इसे लेकर दोनों सदनों में और सड़क पर भी काफी हंगामा हुआ। इस मामले की गंभीरता और उसके असर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला जिम्मेदारी भरा है। यूँ तो इस बाबत दायर याचिका में पूरे कानून को रद्द करने की मांग की गई थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे नहीं माना। इस तरह के कदम बेहद दुर्लभ मामलों में उठाए जाते है और इनका प्रभाव बहुत व्यापक होता है। देखा जाए तो इस मायने में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया और यह भी ध्यान रखा कि विधायिका के साथ सीमाओं का अतिक्रमण न हो। इसलिए उसने समझदारी पूर्वक बीच का रास्ता निकाला है। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में बेहद संतुलित नज़रिया अपनाया है। सच कहा जाए तो कोर्ट का यह फैसला वक्फ कानून में संतुलित नज़रिया को अधिक न्यायसंगत और संवैधानिक बनाने की दिशा में संकेत देता है। साथ ही इसके मार्फ़त सरकारी शक्तियों और व्यक्तिगत अधिकारों का संतुलन बनाने का प्रयास भी किया गया है। कोर्ट के इस फैसले से संबंधित कुछ नियम और प्रावधान तभी तक लागू नहीं होंगे, जब तक इस बारे में अधिक स्पष्ट नियम और निर्देश नहीं बन जाते। इस तरह से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है जबकि पूरे कानून पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई है। ऐसा करके उसने एक ओर जहां संतुलित नजरिया अपनाते हुए शक्ति का संतुलन बिठाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर वक्फ कानून पर फैसला देते हुए उसने अतिरिक्त संवेदनशीलता की जरूरत भी समझी है। यही वजह है कि अपेक्षाकृत विवादास्पद मामलों में उसका एक और जिम्मेदारी भरा निर्णय सामने आया है जिससे देश-प्रदेश ने राहत की सांस ली है। कमलेश पांडेय Read more » Meaning of Supreme Amendment in Waqf Amendment Act 2025 वक्फ संशोधन अधिनियम 2025
लेख विधि-कानून नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार आवश्यक September 6, 2025 / September 6, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डा.वेदप्रकाश नागरिकों द्वारा कर्त्तव्यों के ज्ञान और निर्वाह के बिना संकल्प से सिद्धि का मार्ग बाधित होता है। इसलिए आज व्यापक स्तर पर यह आवश्यक है कि संविधान सम्मत नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार हो। विकसित भारत के संकल्प में सभी को अधिकार मिलें इसके लिए यह भी आवश्यक है कि सभी नागरिक कर्तव्यों का पालन […] Read more » Publicity of civic duties is essential नागरिक कर्त्तव्यों का प्रचार-प्रसार आवश्यक
मनोरंजन विधि-कानून न्याय होता हुआ दिखेः तारीख़ पर तारीख़ की संस्कृति बदले September 1, 2025 / September 1, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग- देश के सर्वाेच्च न्यायालय ने अपने 75 वर्ष का गरिमामय सफर पूरा किया है। यह केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को परखने का अवसर भी है। न्यायपालिका ने इन आठ दशकों में अनेक युगांतरकारी फैसले दिये, जिन्होंने संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। किंतु आज […] Read more » Justice should be seen to be done: The culture of date after date should change तारीख़ पर तारीख़ की संस्कृति बदले
लेख विधि-कानून जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ, तो कानून की आस्था कैसे बचे? August 23, 2025 / August 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील ही इस व्यापार में शामिल होते हैं तो वकालत की गरिमा और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दोनों पर गहरा आघात होता है। ऐसे वकीलों पर आपराधिक मुकदमे चलना अनिवार्य है ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा […] Read more » झूठे मुकदमे
मनोरंजन विधि-कानून ऑनलाइन गेमिंग बिल : “मनोरंजन, रोजगार और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन की तलाश August 23, 2025 / August 23, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment लोकसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को लेकर गहन बहस हुई। सरकार ने इसे समाज में जुए और लत जैसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए आवश्यक बताया, जबकि विपक्ष ने इसे रोजगार और उद्योग पर चोट मानते हुए संशोधन की माँग रखी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने स्पष्ट किया कि बिल केवल रियल-मनी गेमिंग और सट्टेबाज़ी […] Read more »
मनोरंजन विधि-कानून विकराल होते आनलाइन गेम पर नियंत्रण का कानून सराहनीय August 22, 2025 / August 23, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-इंटरनेट के विस्तार ने आधुनिक दौर में जीवन को अनेक सुविधाएं दी हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ नए गंभीर संकट भी पैदा किए हैं। इनमें सबसे गंभीर संकटों में से एक है ऑनलाइन गेमिंग या कहें तो मनी गेमिंग की बढ़ती लत। यह सच है कि गेमिंग मनोरंजन का साधन हो सकती है, […] Read more » The law to control the growing online games is commendable आनलाइन गेम पर नियंत्रण का कानून
लेख विधि-कानून सड़क के कुत्तों को डॉग शेल्टर होम में रखने के सुप्रीम आदेश के व्यवहारिक मायने दिलचस्प August 15, 2025 / August 15, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने गत सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के इलाकों से सड़क के कुत्तों को पकड़ने और उन्हें डॉग शेल्टर में रखने का निर्देश दिया है, उसके व्यवहारिक मायने दिलचस्प हैं जबकि कतिपय नेताओं व पशु प्रेमियों ने इस सुप्रीम आदेश की सड़क छाप मुखालफत शुरू कर दी है। देखा जाए तो यह […] Read more » डॉग शेल्टर होम
मनोरंजन लेख विधि-कानून आखिर कितना उपयोगी साबित होगा ओपन बुक असेसमेंट ? August 12, 2025 / August 12, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment सुनील कुमार महला आज हम इक्कीसवीं सदी में सांस ले रहे हैं और इस सदी की आवश्यकताओं के मद्देनजर हमारे देश में नई शिक्षा नीति-2025 भी लागू की गई है, जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का ही एक उन्नत रूप या संस्करण है, लेकिन इसमें भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, लचीला और कौशल आधारित(स्किल […] Read more » After all how useful will open book assessment ओपन बुक असेसमेंट
राजनीति विधि-कानून क्या अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि रोहिंग्या- शरणार्थी हैं या घुसपैठिए’ August 4, 2025 / August 4, 2025 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2025 को कहा कि वह यह तय करेगा कि भारत में रह रहे अवैध रोहिंग्या ‘शरणार्थी’ माने जाएँगे या ‘अवैध घुसपैठिए’। कोर्ट में रोहिंग्या से जुड़े कई मामलों की सुनवाई हो रही है। जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन. कोटिश्वर सिंह की तीन जजों की पीठ ने कहा कि यह मामला अब तीन दिनों […] Read more » रोहिंग्या- शरणार्थी हैं या घुसपैठिए
राजनीति विधि-कानून बिहार को लेकर ‘सुप्रीम’ निर्णय August 1, 2025 / August 8, 2025 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment बिहार विधानसभा का चुनाव के दृष्टिगत सभी के भीतर इस बात को लेकर कौतूहल है कि वहां सरकार का नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार अगली बार फिर सत्ता में लौटेंगे या नहीं ?दूसरे, यहां मोदी का जादू चलता है या नहीं? तीसरे, लालू की लालटेन यहां जलेगी या फिर राहुल गांधी कुछ विशेष कर पाएंगे […] Read more » 'Supreme' decision regarding Bihar
मनोरंजन विधि-कानून निरंकुश अभिव्यक्ति से जुड़े सुप्रीम फैसलों का स्वागत हो July 18, 2025 / July 18, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एंटी सोशल अभिव्यक्ति की सुनवाई करते हुए समय-समय पर जो कहा, वह जहां संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिहाज से खासा अहम है वहीं एक संतुलित एवं आदर्श राष्ट्र एवं समाज व्यवस्था का आधार भी है। सोशल मीडिया मंचों पर एंटी सोशल अभिव्यक्ति […] Read more » निरंकुश अभिव्यक्ति से जुड़े सुप्रीम फैसलों का स्वागत
लेख विधि-कानून समाज यौन हिंसा पर सख्त कानून के बावजूद आखिर अपराधों में कमी क्यों नहीं आ रही ? July 18, 2025 / July 18, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हाल ही में ओडिशा के बालेश्वर जिले के एक कॉलेज में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यौन उत्पीड़न से परेशान होकर बी.एड की एक छात्रा ने खुद को आग लगा ली थी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से पूरे राज्य […] Read more »