राजनीति विधि-कानून संविधान : भारतीय लोकतंत्र की अटूट नींव और भविष्य की रोशनी November 26, 2025 / November 26, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment संविधान दिवस केवल एक औपचारिक तिथि नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। यह हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम वास्तव में संविधान की भावना के अनुरूप समाज का निर्माण कर रहे हैं। संविधान हमें अधिकार भी देता है और जिम्मेदारी भी। यही दस्तावेज़ हमें स्वतंत्रता, समानता और न्याय की राह दिखाता है। बदलते समय में संविधान भारत की स्थिरता, प्रगतिशीलता और लोकतांत्रिक परंपरा का आधार बना हुआ है। Read more » भारतीय संविधान
राजनीति विधि-कानून हिंदी में शपथः नए भारत की भाषाई चेतना का निर्णायक उद्घोष November 26, 2025 / November 26, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा हिंदी में शपथ लेना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और मनोवैज्ञानिक Read more » 53वें प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा हिंदी में शपथ न्यायमूर्ति सूर्यकांत
विधि-कानून बीआर गवई देश को क्या संदेश देकर गए हैं November 26, 2025 / November 26, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment बीआर गवई 23 नवंबर को सीजेआई पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और जाते-जाते उन्होंने ऐसे कई संदेश दिये जिन्हें समझने की जरूरत है । अपने कार्यकाल के दौरान Read more » बीआर गवई
राजनीति विधि-कानून संविधानः लोकतंत्र की आत्मा और सुशासन का आधार November 25, 2025 / November 25, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment संविधान किसी भी राष्ट्र का चरित्र, मर्यादा और दिशा निर्धारित करता है। यह केवल विधिक दस्तावेज नहीं होता, बल्कि एक जीवंत मूल्य-व्यवस्था होती है जो राष्ट्र की आत्मा को Read more » संविधान दिवस- 26 नवम्बर
लेख विधि-कानून भारत की महानता का प्रमाण है संविधान November 25, 2025 / November 27, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हमारे समाज में माना जाता है कि बच्चा जन्म से ही अपनी मुट्ठी में तकदीर लेकर आता है पर भारतीय समाज की संरचना में यह धारणा सटीक नहीं बैठती। जातियों के जंजाल में फंसे समाज में बच्चे की तकदीर Read more » संविधान दिवस
लेख विधि-कानून भारत में धर्मांतरण विरोधी कानून: धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक चुनौती November 13, 2025 / November 13, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment भारत में धर्मांतरण विरोधी कानूनों को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के नाम पर लागू किया गया है, परंतु इनका वास्तविक प्रभाव नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नियंत्रण के रूप में उभर रहा है। Read more » Anti-conversion laws in India Anti-Conversion Laws in India: A Constitutional Challenge to Religious Freedom and Secularism भारत में धर्मांतरण विरोधी कानून
महत्वपूर्ण लेख राजनीति विधि-कानून पीएम मोदी ने न्यायिक व्यवस्था को आईना दिखाया November 10, 2025 / November 13, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment न्यायिक व्यवस्था साल में पांच महीने छुट्टी पर होती है, फिर पांच करोड़ मुकदमों के लंबित होने की बात करती है। सवाल यह है कि किसकी वजह से अदालतों में पांच करोड़ मुकदमे फैसले का इंतजार कर रहे हैं। Read more » न्यायिक व्यवस्था
लेख विधि-कानून जो हुआ वो गलत हुआ, पर हुआ ही क्यों?इसपर भी चिंतन जरूरी! October 7, 2025 / October 7, 2025 by सुशील कुमार नवीन | Leave a Comment न्यायालय देश के प्रत्येक उस व्यक्ति की सबसे बड़ी उम्मीद है जो हर तरह की व्यवस्था से आहत है। जब कोई सुनवाई नहीं हो रही हो। न प्रशासन सुन रहा हो और न सरकार। तब उम्मीद की एकमात्र रोशनी की किरण यहीं से प्राप्त होने की होती है। न्यायालय द्वारा कहा गया हर एक शब्द पत्थर की लकीर होता है। हर एक शब्द अक्षय बन जाता है। Read more »
राजनीति विधि-कानून जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ हैं तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों पर चोट क्यों न दें? September 22, 2025 / September 22, 2025 by कमलेश पांडेय | Leave a Comment कमलेश पांडेय जब भारत के गांवों में किसी से विवाद बढ़ने पर और घात-प्रतिघात की परिस्थितियों के पैदा होने पर पारस्परिक हुक्का-पानी या उठक-बैठक, खान-पान बन्द करने के रिवाज सदियों से चलते आए हैं तो फिर वैश्विक दुनियादारी में हम लोग इसे लागू क्यों नहीं कर सकते ताकि हमारे मुकाबिल खड़े होने वाले देशों को […] Read more » then why should Modi's policies not harm American interests When Donald Trump's policies are against India डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़
राजनीति विधि-कानून न्याय की रीढ़ पर वार: क्यों जरूरी है अधिवक्ता संरक्षण कानून September 20, 2025 / September 20, 2025 by पवन शुक्ला | Leave a Comment पवन शुक्ला _अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम की माँग उत्तर प्रदेश में लगातार तेज़ हो रही है। हापुड़ से वाराणसी तक हुई घटनाओं ने वकीलों की असुरक्षा को उजागर किया है। विधि आयोग और बार काउंसिल अपनी सिफ़ारिशें सरकार को दे चुके हैं। अब ज़रूरत है कि विधानमंडल तुरंत अधिनियम लागू कर न्यायपालिका की रीढ़ को मज़बूती […] Read more » अधिवक्ता संरक्षण कानून
लेख विधि-कानून न्यायिक ढांचे में विस्तारक विकेन्द्रीयकरण जरूरी September 18, 2025 / September 18, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment धीतेन्द्र कुमार शर्मा गुजरे 12 सितम्बर को राजस्थान की वकील बिरादरी में तूफानी हलचल थी। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर और जयपुर दोनों पीठ, राजधानी जयपुर, और कोचिंग कैपिटल कोटा, झीलों की नगरी उदयपुर के अलावा कई स्थानों पर बार एसोसिएशनों (अधिवक्ताओं के संगठन) ने तल्ख प्रदर्शनों के साथ हड़ताल (न्यायिक कार्य बहिष्कार) रखी। वजह बना केन्द्रीय कानून […] Read more » न्यायिक ढांचे में विस्तार
राजनीति विधि-कानून वक्फ के सुप्रीम फैसले पर पक्ष-विपक्ष दोनों खुश September 17, 2025 / September 17, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करने वाले वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन कानून केन्द्र सरकार ने बनाया था । लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के पश्चात 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों के बाद यह कानून देश में लागू हो गया था । 5 अप्रैल को ही आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान व अन्य ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी । असदुद्दीन ओवैसी,मोहम्मद जावेद, एआईएमपीएलबी और अन्य भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए । 17 अप्रैल को केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले की सुनवाई तक ‘वक्फ वाई यूजर’ या ‘वक्फ वाई डीड’ सम्पत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा । 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं की सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित कर लिया था । 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अपना अंतरिम फैसला दे दिया है । वक्फ कानून के खिलाफ अदालत गए याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है । याचिकाकर्ता चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट पूरे कानून पर रोक लगा दे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कानून पर अंतरिम रोक लगाने को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए और दुर्लभ से दुर्लभतम मामलों में ही पूरे कानून पर रोक लगानी चाहिए । इस फैसले से सरकार और कानून के पक्षधर बहुत खुश हैं लेकिन कानून के खिलाफ गए याचिकाकर्ता भी खुश हैं क्योंकि अदालत ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है । देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से दोनों पक्षों को कुछ खुशी दी है और कुछ गम भी दिए हैं । याचिकार्ताओं का कहना था कि वक्फ संपत्ति देने के लिए 5 साल इस्लाम पालन की शर्त लगाई गई है जो कि भेदभावपूर्ण प्रावधान है । सरकार का कहना था कि जमीनों का अतिक्रमण किया जा रहा है, इसलिए यह प्रावधान किया गया है । अदालत ने फैसला सुनाया है कि जब तक राज्य सरकारें यह तय करने के लिए नियम नहीं बनाती कि कोई व्यक्ति मुस्लिम है या नहीं, तब तक तत्काल प्रभाव से इस प्रावधान पर रोक रहेगी । इससे याचिकाकर्ता खुश हैं लेकिन सरकार को भी परेशानी नहीं है क्योंकि यह अस्थायी रोक है । राज्य सरकारें कानून बनाकर इसे लागू कर सकती हैं । कानून में प्रावधान था कि कलेक्टर वक्फ संपत्ति का फैसला कर सकता है लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इससे वक्फ संपत्ति की जमीन सरकारी दर्ज हो जाएगी । सरकार का कहना था कि कलेक्टर केवल प्रारंभिक जांच करता है, अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल या कोर्ट का होगा । अदालत ने इस प्रावधान पर रोक लगा दी है और कहा है कि कलेक्टर को नागरिकों के संपत्ति अधिकारों पर फैसला लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती । जब तक ट्रिब्यूनल या अदालत फैसला नहीं दे देते, तब तक वक्फ की संपत्ति का स्वरूप नहीं बदलेगा । याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यह थी कि जिन वक्फ संपत्तियों का लंबे समय से धार्मिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें वक्फ संपत्ति घोषित करने का प्रावधान बना रहे बेशक उस संपत्ति के दस्तावेज न हों । इस कानून को ‘वक्फ वाई यूजर’ कहा जाता है । सरकार ने संशोधित कानून में यह प्रावधान खत्म कर दिया है । अदालत ने भी सरकार की बात मान ली है और ‘वक्फ वाई यूजर’ लागू करने से मना कर दिया है । इस मामले में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए आदेश दिया है कि बिना दस्तावेज वाली ऐसी संपत्तियों को, जहां लंबे समय से धार्मिक कार्य चल रहे हैं और उन्हें वक्फों द्वारा काबिज कर लिया गया है, उन संपत्तियों को ट्रिब्यूनल या अदालत द्वारा अंतिम फैसला आने तक न तो वक्फों को संपत्ति से बेदखल किया जाएगा और न ही राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री प्रभावित होगी । सरकार के लिए परेशानी यह है कि बिना दस्तावेज वाली जिन संपत्तियों को पहले ही ‘वक्फ वाई यूजर’ घोषित करके वक्फों द्वारा कब्जा कर लिया गया है, उन्हें कैसे वापिस लिया जाएगा । सरकार को इस मामले में अदालत से दोबारा विचार करने के लिए कहना होगा । यह ठीक है कि ‘वक्फ वाई यूजर’ बोलकर अब किसी की संपत्ति पर वक्फ बोर्ड नाजायज कब्जा नहीं कर सकता लेकिन जिन संपत्तियों पर कब्जा कर लिया गया है, उनके बारे में भी विचार करने की जरूरत है । हमें याद रखना होगा कि वक्फों द्वारा लाखों एकड़ सरकारी और गैर-सरकारी भूमि इस तरीके से कब्जा कर ली गई हैं । नए कानून में प्रावधान किया गया था कि केन्द्रीय वक्फ बोर्ड परिषद और राज्य वक्फ बोर्डो में गैर-मुस्लिम भी सदस्य बन सकते हैं । याचिकाकर्ताओं का कहना था कि गैर-मुस्लिम बहुमत बनाकर हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकते हैं । केन्द्र सरकार का कहना था कि ऐसा नहीं होगा क्योंकि गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या 2-4 तक ही होगी । अदालत ने भी यह बात मान ली है और कहा है कि केन्द्रीय वक्फ परिषद में 22 में से अधिकतम 4 और राज्य वक्फ बोर्डो में 11 में से अधिकतम 3 सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं । नए कानून में वक्फ बोर्ड के सीईओ का मुस्लिम होना अनिवार्य नहीं है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सीईओ का मुस्लिम होना अनिवार्य होना चाहिए । अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मांग को ठुकरा दिया है लेकिन कहा है कि जहां तक संभव हो सीईओ मुस्लिम ही होना चाहिए। नए कानून में प्रावधान किया गया है कि वक्फ संपत्ति की लिखित रजिस्ट्री व पंजीकरण होना चाहिए जबकि पहले मौखिक रूप से भी किसी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता था । याचिकाकर्ता चाहते थे कि पुराना प्रावधान लागू होना चाहिए और मौखिक वक्फ भी मान्य होना चाहिए । केन्द्र सरकार का कहना था कि इस प्रावधान से वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनेगी और फर्जी वक्फ के मामले रुक जाएंगे । अदालत ने इस मामले में सरकार की बात मान ली है और इस प्रावधान पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है । अदालत का कहना है कि यह प्रावधान 1995 और 2013 के कानून में था और सरकार ने इसे दोबारा लागू किया है । विपक्षी दलों के कुछ नेता अदालत के फैसले से खुश हैं । कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का कहना है कि सरकार ने यह कानून जल्दबाजी में बनाया था, इस पर बहस होती तो यह कानून नहीं बनता । अजीब बात यह है कि इस कानून को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था, जिसके सामने सबको अपनी बात रखने का मौका दिया गया था। देखा जाए तो इस कानून पर लंबी बहस हुई थी। पवन खेड़ा और कितनी बहस चाहते हैं। वक्फ बोर्ड बहुत से मुस्लिम देशों में हैं लेकिन ऐसा कानून किसी भी देश में नहीं है । वास्तव में वक्फ बोर्ड सिर्फ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन का काम करता है, उसका यह काम नहीं है कि वो लोगों की जमीनों पर कब्जा करे । मुस्लिम देशों में वक्फ के पास जमीन दान देने से आती है जबकि भारत में वक्फ बोर्ड के पास जमीन कब्जे से आ रही है । 1995 में कांग्रेस सरकार ने वक्फ कानून में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को लैंड माफिया में बदल दिया था । वक्फ बोर्ड सरकारी और गैर-सरकारी जमीनों पर कब्जा करने लगे थे क्योंकि उन्हें वक्फ वाई यूजर का हथियार मिल गया था । उन्हें किसी की जमीन पर कब्जा करने के लिए किसी कागज की जरूरत नहीं थी । उनका यह मानना ही काफी था कि वो जमीन वक्फ की है । अदालत में भी इस कब्जे को चुनौती नहीं दी जा सकती थी । बेशक नए कानून से ये नाजायज कब्जे बंद हो जाएंगे लेकिन सवाल यह है कि लाखों एकड़ जमीनों पर किए गए कब्जों का क्या होगा । ऐसा लग रहा है कि यह कानून अभी भी अधूरा है क्योंकि वक्फ बोर्ड का काम केवल प्रबंधन का है, जो कि मुस्लिम देशों में भी होता है लेकिन हमारे देश के वक्फ बोर्डों के पास कब्जा की गई जमीनें हैं । यह कानून तभी पूरा माना जाएगा, जब कब्जा की गई जमीनें वापिस मिल जाएँगी । कितनी अजीब बात है कि एक आदमी पूरे जीवन मेहनत करके कमाई गई पूंजी से जमीन खरीदे और अचानक वक्फ बोर्ड आए और उसकी जमीन वक्फ बताकर छीन ले । वो बेचारा रोता रहे और उसकी सुनवाई कहीं न हो । कमाल की बात है कि संविधान होते हुए भी ऐसे पीड़ितों के लिए अदालत का दरवाजा भी बंद कर दिया गया था । मोदी सरकार ने कानून बनाकर यह अन्याय बंद कर दिया है लेकिन जो अन्याय हो चुका है, उसका भी हिसाब होना चाहिए । दूसरी बात यह है कि वक्फ की जमीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान, मस्जिद, शैक्षणिक संस्थान और गरीबों के फायदे के लिए किया जा सकता है लेकिन वक्फ बोर्ड के पास लाखों एकड़ भूमि होने के बावजूद गरीब मुस्लिम जमीन के लिए सरकार के सामने खड़े रहते हैं । इसका कारण यह है कि वक्फ की संपत्तियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है । अदालत को इस कानून पर फिर विचार करने की जरूरत है । यह देखना जरूरी है कि भविष्य में इस कानून का गलत इस्तेमाल न हो लेकिन यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो गलत इस्तेमाल हो चुका है, उसे भी ठीक किया जाए । राजेश कुमार पासी Read more » वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन