मीडिया सीबीआई ने धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई की है या एनडीटीवी की स्वतंत्रता के खिलाफ? – एस. गुरुमूर्ति June 8, 2017 by हरिहर शर्मा | Leave a Comment पूरे यूपीए सरकार के कार्यकाल में, एनडीटीवी ने अपनी शेल सहायक कंपनियों में निवेशकों की पहचान का खुलासा करने से इनकार कर दिया। यहाँ तक कि उसने कानूनन आवश्यक अपेक्षित विदेशी सहयोगियों की बैलेंस शीट को भी संलग्न नहीं किया। हैरत की बात तो यह कि यूपीए सरकार के कंपनी कानून विभाग ने भी बैलेंस […] Read more » Featured एनडीटीवी एनडीटीवी की स्वतंत्रता धोखाधड़ी सीबीआई
मीडिया राष्ट्रवादी पत्रकारिता का दौर June 7, 2017 / June 23, 2017 by राजीव प्रताप सिंह | Leave a Comment भारत की अवधारणा एक ऐसे राष्ट्र की अवधारणा है जिसके लिए संघर्ष को निर्माण का आधार रूप में कभी स्वीकार नहीं किया गया. यहाँ आदि काल से ही चिंतन को प्राथमिकता दी गई और अनेकों भाषा, समुदाय, जाति इत्यादि के मष्तिष्क और शरीर यहाँ आएं और यहीं के होकर रह गए. ऐसे में सम्पूर्ण विश्वजगत […] Read more » Featured पत्रकरिता पत्रकरिता का मूल धर्म क्या राष्ट्रवादी पत्रकारिता सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
टेक्नोलॉजी मीडिया ये कैसा विकास है June 7, 2017 by संचित पुरोहित | Leave a Comment भारत में मोबाईल के उपयोगकर्त्ताआंे की संख्या में लगातार बढोतरी हो रही है । जून, 2017 तक भारत में 42 करोड से भी अधिक मोबाईल उपभोक्ता हो चुके हैं । प्राथमिक तौर पर देखने और सुनने में ऐसा लगता है कि हमारे वतन में एक संचार क्रांति जन्म ले चुकी है और उसका निरंतर विकास […] Read more » kids in social media विकास
मीडिया ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म May 27, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment –मनोज कुमार ‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ चुके हैं जहां उद्देश्य तय है, […] Read more » Featured जर्नलिज्म टारगेटेड जर्नलिज्म ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता पत्रकारिता
मीडिया नकारात्मक व ओच्छी मानसिकता की पत्रकारिता May 13, 2017 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on नकारात्मक व ओच्छी मानसिकता की पत्रकारिता यह दुख का विषय है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में भी कुछ ऐसे लोग प्रवेश कर गये हैं-जिनका खोजी पत्रकारिता से दूर दूर का भी संबंध नही है, उन्हें ना तो लोकतंत्र की परिभाषा ज्ञात है और ना ही धर्म की परिभाषा का ज्ञान है। वह उत्पीडऩ और भयादोहन कर लेखनी के साथ अन्याय करते हैं और समाज पर लेखनी का आतंक स्थापित करते हैं। ऐसी प्रवृत्ति निश्चय ही भयावह है। Read more » Featured negative journalism ओच्छी मानसिकता की पत्रकारिता नकारात्मक पत्रकारिता पत्रकारिता
मीडिया एक अजूबा यह भी : शिलालेख में विज्ञापन April 24, 2017 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment भारत में विज्ञापन संबंधी इतिहास खोजने वालों ने बताया है कि जहाँ तक उत्पादित माल बेचने के लिए विज्ञापन का संबंध है, संभवतः विश्व के सबसे पुराने विज्ञापन का श्रेय भारत को ही है । यह लगभग डेढ़ हजार वर्ष पुरानी बात है । तब देश के एक बड़े भाग पर कुमार गुप्त -प्रथम (415–455 ई.) का शासन था (जिसे शक्रादित्य और महेंद्रादित्य भी कहते हैं ; पिता चन्द्रगुप्त द्वितीय और माँ ध्रुवदेवी थीं जिन्हें ध्रुवस्वामिनी भी कहते हैं; प्रसिद्ध साहित्यकार जयशंकर ‘प्रसाद’ के इसी नाम के नाटक से कुछ पाठक परिचित ही होंगे) । कुमारगुप्त का साम्राज्य बंगाल से काठियावाड़ और हिमालय से नर्मदा तक फैला हुआ था । दिल्ली में क़ुतुब मीनार के पास खुले आकाश में खड़ा वह लौह स्तंभ भी कुमारगुप्त का ही बनवाया हुआ है जिसमें आजतक जंक नहीं लगी । Read more » Advertisement Featured विज्ञापन शिलालेख शिलालेख में विज्ञापन
मीडिया यह कैसा ‘राष्ट्रधर्म’ है? April 14, 2017 by अतुल तारे | 1 Comment on यह कैसा ‘राष्ट्रधर्म’ है? माचार पत्र एवं दृश्य मीडिया इसमें एक कारगर हथियार है। विगत इतिहास में सरकारी पैसों से वामपंथियों ने इसकी दम पर जहर घोला है घोल रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में मूल्य आधारित पत्रकारिता राष्ट्रीय विचारों की पत्रकारिता के टिमटिमाते ही सही दीए कौन कौन से हैं यह सरकार को सरकारी चश्मा हटाकर देखना होगा, समझना होगा। ध्ांधे के लिए पत्रकारिता एवं विचार के लिए पत्रकारिता इसमें सरकार को भेद करना होगा। Read more » Featured राष्ट्रधर्म
मीडिया वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य April 4, 2017 by अर्पण जैन "अविचल" | Leave a Comment आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. भविष्य में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी. पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने अपने प्रिंट संस्करण को बंद कर ऑनलाईन संस्करण जारी रखने का फैसला किया है. ‘जनसत्ता’के बारे में यह आसार लगाया जा रहा है कि समाचार-पत्र घाटे से बचने के लिए प्रिंट संस्करण बंद कर ऑन-लाईन से अपनी सेवा जारी रखेगा. बात स्पष्ट है कि जिस पत्र का लक्षित समूह उच्च वर्ग है और जिनके पास इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है, वह धीरे-धीरे प्रिंट संस्करण बंद कर पूर्ण रूप से ऑन-लाईन हो जायेगा. Read more » the bright future of web journalism Web Journalism वेब पत्रकारिता
मीडिया सिनेमा इतिहास से खिलवाड़ का किसी को हक नहीं March 17, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment महारानी पद्मावती पर केन्द्रित दो प्रख्यात महाकाव्य ‘पद्मावत’ और ‘जौहर’ हिन्दी-साहित्य में उपलब्ध हैं। सूफी संत परम्परा के कवि जायसी ने 947 हिजरी अर्थात सन् 1540 ईसवी के लगभग ‘पद्मावत’ महाकाव्य की रचना पूर्ण की। इसमें चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण और पद्मावती के जौहर का सविस्तार वर्णन है किन्तु कहीं भी पद्मावती की प्रस्तुति खिलजी की प्रेमिका के रुप में नहीं है। Read more » Featured इतिहास से खिलवाड़ फिल्मकार संजयलीला भंसाली महारानी पद्मावती अप्रतिम वीरांगना
मीडिया सामाजिक सरोकार और स्टारडम March 5, 2017 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment कई राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी को भी अपनी माँ सोनिया गांधी से उनकी संपत्ति में पचास प्रतिशत हिस्सा मांग लेना चाहिए क्योंकि जिस तरीके से पूरी कांग्रेस और श्री राहुल गांधी परफॉर्म कर रहे है उससे बहुत संभव है की श्रीमती सोनिया गांधी की आधी से ज़्यादा संपत्ति राहुल जी को लॉन्च करने में व्यय हो जाये। Read more » amitabh-bachchan on gender equality Featured gender eqality सामाजिक सरोकार स्टारडम
मीडिया दोषी कौन: ठग या लालची लोग? February 6, 2017 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment नोएडा का अनुभव मित्तल उस्तादों का उस्ताद निकला। इस 26 वर्षीय नौजवान ने अपनी एक कंपनी के जरिए लगभग 7 लाख लोगों को ठगा और उनसे 37 अरब रु. डकार गया। इस वक्त वह और उसके दो साथी जेल की हवा खा रहे हैं। मित्तल के पहले भी देश की कुछ नामी-गिरामी कंपनियों के मालिक […] Read more » Anubhav Mittal Featured Noida online fraud online scam अनुभव मित्तल आनलाइन लूट नोएडा नोएडा का अनुभव मित्तल
मीडिया आखिरकार ये विज्ञापन जनता को क्या देते हैं? January 30, 2017 by अनिल अनूप | Leave a Comment -अनिल अनूप दूरदर्शन पर कीटनाशक, चूहानाशक, भोजन-वस्त्र-आवास के घटक, प्रसाधन सामग्री, स्वाथ्यवर्द्धक, आदि-आदि चीजों से लेकर निरोध, गर्भनिरोधक, उत्तेजनावर्द्धक रसायन तक के विज्ञापन आखिरकार जनता को क्या देते हैं? परिवार नियोजन, साक्षरता अभियान, आयकर, गर्भपात, घूस, अनाचार, यातायात नियम, पर्यावरण सुरक्षा, नेत्रदान आदि की उपयोगी सूचनाएँ विज्ञापन के माध्यम से दी जाती हैं, जनता क्रमश: […] Read more » विज्ञापन