मीडिया विविधा भारत में ई-जर्नलिज्म का विकास January 17, 2016 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान भारत जैसे विकासशील देश में, बड़े शहरों और जिला स्तर तक तो इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन आज भी गांव-देहातों में रहने वाले करोड़ों लोग इससे वंचित हैं। भारत में तेजी से फैलते इंटरनेट के जाल के बावजूद भी ज्यादातर जनसंख्या इंटरनेट सुविधाओं से दूर है। सवा अरब की आबादी वाले भारत […] Read more » development of e journalism e journalism Featured rise of e journalism भारत में ई-जर्नलिज्म का विकास
जन-जागरण मीडिया विविधा साक्षात्कार नरेन्द्र यादव की तकनीकि एमटीएनएल के लिये नजीर बन गयी January 5, 2016 by अरूण पाण्डेय | 3 Comments on नरेन्द्र यादव की तकनीकि एमटीएनएल के लिये नजीर बन गयी ज्यादा समय नही कुछ महीनों पहले की बात है, हर कोई एमटीएनएल के लैंडलाइन टेलीफोन कनेक्शन से अपना पीछा छुडाने में लगा था । कारण था कि कभी फोन खराब है, तो कभी लाइन खराब है , कभी तार टूट गया है , बार बार जाने पर कहा जाता था कि अपना तार लेकर आओ […] Read more » Featured Narendra Yadav of MTNL एमटीएनएल नरेन्द्र यादव नरेन्द्र यादव की तकनीकि
मीडिया विविधा कर्तव्यों व जि़म्मेदारियों पर भारी पड़ती टीआरपी की होड़ January 3, 2016 / January 3, 2016 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on कर्तव्यों व जि़म्मेदारियों पर भारी पड़ती टीआरपी की होड़ तनवीर जाफ़री मीडिया को समाज का दर्पण माना जाता है। हमारे भारतीय लोकतंत्र मे तो इसे गैर संवैधानिक तरीक़े से ही सही परंतु इसकी विश्वसनीयता तथा जि़म्मेदारी के आधार पर इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की संज्ञा से नवाज़ा गया है। अख़बारों में छपने वाली खबरें अथवा रेडियो या टीवी पर प्रसारित होने वाले समाचार […] Read more » Featured कर्तव्यों व जि़म्मेदारियों पर भारी पड़ती टीआरपी की होड़
मीडिया विविधा सार्थक पहल “काये मेडम जो टूटर का होत ?” December 26, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | 3 Comments on “काये मेडम जो टूटर का होत ?” कीर्ति दीक्षित “काये मेडम जो टूटर का होतकि ? सुनत हैं इसे पिरधान मंत्री लौ सुन लेत ?” पिछले दिनों बुंदेलखंड के गाँव में कुछ खबरें कवर करने गई हुई थी l किसानों से बात कर ही रही थी कि पीछे से आये इस सवाल ने मेरे ध्यान को उस तरफ खीचा , मैंने […] Read more » “काये मेडम जो टूटर का होत ?” Featured
मीडिया राजनीति पापी है ‘प’……पॉलिटिक्स, पुलिस और प्रेस December 26, 2015 by हिमांशु तिवारी आत्मीय | Leave a Comment नियम को तोड़ना है तो लाल और नीली बत्ती पर्याप्त है, तराजू वाली देवी को धता साबित करने के लिए गाड़ी में पुलिस लिखवा लीजिए, सूबे में अपनी औकात दिखानी है तो उत्तर प्रदेश सरकार को गाड़ी की नंबर प्लेट से चिपका लीजिए, बाकी टैक्सी हो या फिर ऑटो का सफर पुलिसिया वर्दी फ्री में […] Read more » Featured पापी है ‘प’……पॉलिटिक्स पुलिस और प्रेस
मीडिया राजनीति संतुलन खोते लोकतंत्र के स्तंभ December 19, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक हमारी लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था के चार स्तंभ हैं। विधानपालिका यानी संसद, कार्यपालिका यानी सरकार, न्यायपालिका यानी अदालत और खबरपालिका यानी अखबार और टीवी-रेडियो चैनल! क्या ये चारों स्तंभ अपना-अपना काम सही-सही कर रहे हैं? ये सब काम तो कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि उनके काम-काज में कोई बुनियादी कमी […] Read more » Featured संतुलन खोते लोकतंत्र के स्तंभ
मीडिया इंटर्नशिप का कहर December 14, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कालेज के सेमेस्टर खत्म होने से पहले ही सभी को इंटर्न की चिंता होने लगती है। फिर चाहे वह किसी भी क्षेत्र का विद्यार्थी हो उसे इंटर्न की चिंता सताने लगती है। सेमेस्टर के अंतिम दिनों में जब परीक्षा का भूत हमारे सर पर सवार होता है तो ऐसे में इंटर्न का भी आतंक हमें […] Read more » इंटर्नशिप का कहर
मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर… December 13, 2015 by तनवीर जाफरी | 1 Comment on अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर… तनवीर जाफ़री मानवाधिकारों संबंधित अनेक बिंदुओं में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी एक प्रमुख बिंदु है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया भी जाना चाहिए। किसी भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जहां कहीं लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होती उस व्यवस्था को तानाशाही व्यवस्था माना जाता है। परंतु इसी […] Read more » Featured अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
मीडिया राजनीति सहिष्णुता का समीकरण December 7, 2015 by डॉ. मधुसूदन | 1 Comment on सहिष्णुता का समीकरण डॉ. मधुसूदन (एक) कुछ प्रश्न: प्रश्न (१): सहिष्णुता शब्द किस भाषा का है? उत्तर(१): अंग्रेज़ी का तो लगता नहीं। फिर क्या अरबी का है, या फारसी का है? नहीं। तो लातिनी, ग्रीक इत्यादि में से किस भाषा का है? नहीं जी, यह शब्द तो हिन्दी का है। पर महाराज, हिन्दी में कहाँ से आया? अब […] Read more » Featured सहिष्णुता का समीकरण
मीडिया राजनीति सहिष्णुता-असहिष्णुता का विलाप December 7, 2015 by मनोज कुमार | 1 Comment on सहिष्णुता-असहिष्णुता का विलाप मनोज कुमार सहिष्णुता अथवा असहिष्णुता का यह मुद्दा उन लोगों का है जिनके पेट भरे हुए हैं। जो दिन-प्रतिदिन टेलीविजन के पर्दे पर या अखबार और पत्रिकाओं के पन्ने पर पक्ष लेते हैं दिखते हैं अथवा देश और सरकार को कोसते हैं। ये वही आमिर खान हैं जिन्होंने कभी भोपाल में कहा था कि उनकी […] Read more » Featured सहिष्णुता-असहिष्णुता का विलाप
मीडिया विविधा आभासी सांप्रदायिकता को स्थापित करने में लगी शक्तियों के इरादों को समझें November 27, 2015 / November 27, 2015 by संजय द्विवेदी | 2 Comments on आभासी सांप्रदायिकता को स्थापित करने में लगी शक्तियों के इरादों को समझें इस असहिष्णु समय में! संजय द्विवेदी सड़क से लेकर संसद तक असहिष्णुता की चर्चा है। बढ़ती सांप्रदायिकता की चर्चा है। कलाकार, साहित्यकार सबका इस फिजां में दम घुट रहा है और वे दौड़-दौड़कर पुरस्कार लौटा रहे हैं। राष्ट्रपति से लेकर आमिर खान तक सब इस चिंता में शामिल हो चुके हैं। भारत की सूरत और […] Read more » Featured virtual communalism virtual intolerence आभासी सांप्रदायिकता
मीडिया पत्रकार सुरक्षित होंगे तभी प्रेस की आजादी सुरक्षित रहेगी : डॉ. नंदकिशोर त्रिखा November 23, 2015 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment ”प्रेस की आजादी सुरक्षित रखनी है तो पत्रकार सुरक्षित रहना चाहिए।” यह बात गत 22 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक संगोष्ठी में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नंदकिशोर त्रिखा ने कही। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने किया था और विषय था- ‘पत्रकार सुरक्षा अधिनियम और मीडिया […] Read more » दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन