राजनीति कनाडा की स्वीकारोक्ति और खालिस्तानी चुनौती September 8, 2025 / September 8, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment भारत वर्षों से यह कहता रहा है कि कनाडा की धरती पर खालिस्तान समर्थक तत्व सक्रिय हैं और उन्हें वहां की सरकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष संरक्षण मिलता है। हाल ही में कनाडा सरकार के वित्त विभाग की रिपोर्ट ने इस सच्चाई पर आधिकारिक मुहर लगा दी हैं । ऐतिहासिक पृष्ठभूमि खालिस्तान आंदोलन की जड़ें […] Read more » Canada's confession and the Khalistani challenge खालिस्तानी चुनौती
राजनीति समाज वृद्धावस्था की ओर बढ़ता भारत September 8, 2025 / September 8, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भ-नमूना पंजीकरण-प्रणाली (एसआरएस) की सांख्यिकी रिपोर्टप्रमोद भार्गव प्रकृतिजन्य जैविक घटना के अनुसार एक संतुलित समाज में बच्चों, किशोरों, युवाओं, प्रौढ़ों और बुजुर्गों की संख्या को एक निश्चित अनुपात में होना चाहिए। अन्यथा यदि कोई एक आयु समूह की संख्या में गैर आनुपातिक ढंग से वृद्धि दर्ज ही जाती है तो यह वृद्धि उस संतुलन को […] Read more » Reference- Statistical Report of Sample Registration System (SRS) वृद्धावस्था की ओर बढ़ता भारत संदर्भ-नमूना पंजीकरण-प्रणाली (एसआरएस) की सांख्यिकी रिपोर्ट
पर्यावरण राजनीति प्रकृति की नाराजगी को नहीं समझा तो मानव अस्तित्व खतरे में September 8, 2025 / September 8, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग –प्रकृति अपनी उदारता में जितनी समृद्ध है, अपनी प्रतिशोधी प्रवृत्ति में उतनी ही कठोर है। जब तक मनुष्य उसके साथ तालमेल में रहता है, तब तक वह जीवन को वरदान देती है, जल, जंगल और जमीन के रूप में। लेकिन जैसे ही मनुष्य अपनी स्वार्थपूर्ण महत्वाकांक्षाओं और तथाकथित आधुनिक विकास की अंधी […] Read more » प्रकृति की नाराजगी प्रकृति की नाराजगी को नहीं समझा तो मानव अस्तित्व खतरे में मानव अस्तित्व खतरे में
राजनीति अमेरिकी टेरिफ़ को चुनौती देंगे हाथी और ड्रैगन? September 6, 2025 / September 6, 2025 by विजय सहगल | Leave a Comment विजय सहगल 20 जनवरी 2025 को 79 वर्षीय डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाने पर डोनाल्ड ट्रम्प ने पूरी दुनियाँ को टेरिफ़ वार की जंग मे उलझा दिया। दुनियाँ में महाशक्ति होने की प्रतिष्ठा जो पूर्व राष्ट्रपतियों ने सालों मे हांसिल की थी, ट्रम्प के आने के बाद बैसी छवि अब उनकी […] Read more » Will the Elephant and the Dragon challenge American tariffs अमेरिकी टेरिफ़ को चुनौती
राजनीति क्या बिहार में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव अपने मंसूबे में सफल होंगे! September 6, 2025 / September 6, 2025 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे बिहार में राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव की वोटर अधिकार यात्रा 16 दिन तक चली। ये यात्रा बिहार के 23 जिलों, 1300 किलोमीटर और 67 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी। वैसे तो इस यात्रा का मकसद था बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाकर जनता का समर्थन हासिल करना और इंडी गठबंधन को मजबूत करना लेकिन […] Read more » Will Rahul Gandhi and Tejaswi Yadav succeed in their plans in Bihar? राहुल गांधी और तेजस्वी यादव
राजनीति भारत की चिप क्रांति : सपनों से साकार होती हकीकत September 6, 2025 / September 6, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment उम्मीदों की चिप ने दिए आत्मगौरव और नवाचार को पंख भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ तकनीकी आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक प्रगति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गर्व और वैश्विक नेतृत्व की दिशा भी बन गई है। दशकों तक चिप और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल उपभोक्ता के रूप में पहचाने जाने वाला भारत […] Read more » India's chip revolution: Dreams turning into reality भारत की चिप क्रांति
राजनीति मातृत्व का अपमानः बिहार की राजनीति पर असर September 6, 2025 / September 6, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की माताजी के संबंध में कांग्रेस और राजद के मंच से जो अभद्र व अशालीन शब्द कहे गए, उसने न केवल राजनीतिक वातावरण को कलंकित किया है, बल्कि पूरे देश की संवेदनाओं को भी आहत किया है। भारत में माँ केवल एक परिवार की सदस्य नहीं होती, […] Read more » Insult of motherhood: Impact on Bihar politics मातृत्व का अपमान
राजनीति अभी रिटायर नहीं होंगे मोदी September 6, 2025 / September 6, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी मोदी को तीसरा कार्यकाल मिलने से विपक्ष में हताशा बढ़ती जा रही है । दूसरी तरफ जो पूरा इको सिस्टम मोदी को सत्ता से हटाना चाहता है, वो भी असहाय महसूस कर रहा है । 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों और उनके इको सिस्टम को लग रहा था कि इस बार वो मोदी को सत्ता से बाहर कर देंगे लेकिन उनकी उम्मीद टूट गई। अल्पमत की सरकार होने पर उनकी उम्मीद फिर जाग गई कि नीतीश और नायडू की बैसाखियों पर टिकी यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी क्योंकि मोदी को गठबंधन सरकार चलाने का अनुभव नहीं है। एक साल बाद विपक्ष को समझ आ गया है कि निकट भविष्य में इस सरकार को कोई खतरा नहीं है। ऐसे में संघ प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान ने विपक्ष को उम्मीदों से भर दिया । मोदी जब सत्ता में आये थे तो उन्होंने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय राजनीति से बाहर कर दिया था । इससे ये संदेश गया कि भाजपा अब बूढ़े नेताओं को पार्टी में रखने वाली नहीं है। विशेष रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो कहा जाने लगा कि पार्टी अब 75 साल से ज्यादा उम्र वाले नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा रही है। इस बात की अनदेखी कर दी गई कि जब आडवाणी जी को भाजपा ने चुनावी राजनीति से बाहर किया तो उनकी उम्र 75 वर्ष से कहीं ज्यादा 92 वर्ष थी । इसी तरह मुरली मनोहर जोशी को भी भाजपा ने 85 वर्ष की आयु में टिकट नहीं दिया था और उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था । विपक्ष ये विमर्श कहां से ले आया कि भाजपा अब 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को सक्रिय राजनीति से बाहर का रास्ता दिखा रही है। जब आडवाणी जी पार्टी में एक सांसद के रूप में 92 वर्ष तक रह सकते हैं तो 75 साल वाला फार्मूला कहां से आ गया भाजपा विरोधी जान चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता से हटाना उनके वश की बात नहीं है। उन्होंने पूरी कोशिश करके देख लिया है कि मोदी की लोकप्रियता कम होने का नाम नहीं ले रही है। उनके लगाए आरोपों का जनता पर कोई असर नहीं होता है। विपक्ष नए-नए मुद्दे लेकर आता है लेकिन उसके मुद्दे जनता के मुद्दे नहीं बन पाते हैं। यही कारण है कि हताशा में विपक्ष देश विरोध तक चला जाता है। जब मोहन भागवत ने 75 साल में रिटायर होने के मोरोपंत पिंगले के कथन का जिक्र किया था तो विपक्ष में बहुत बड़ी उम्मीद पैदा हो गई थी । उन्हें लगा कि मोदी को सत्ता से हटाना बेशक मुश्किल हो लेकिन जब संघ प्रमुख कह रहे हैं कि 75 साल वाले नेता को रिटायर हो जाना चाहिए तो मोदी भी रिटायर हो जाएंगे । उनकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए भागवत ने बयान दिया है कि मैंने किसी के लिए नहीं कहा कि उसे 75 साल में पद छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दूसरी बात यह कही कि मैं भी 75 साल का होने जा रहा हूँ और मैं भी पद नहीं छोड़ने जा रहा हूँ। विपक्ष को लग रहा था कि अगर भागवत पद छोड़ देंगे तो मोदी पर नैतिक दबाव आ जायेगा और उन्हें भी पद छोड़ना पड़ेगा। भागवत के इस बयान से कि वो भी पद छोड़ने वाले नहीं है, विपक्ष की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। कितने ही लोग अपने-अपने प्रधानमंत्री मन में बना चुके थे, उनके सपने टूट गए। विपक्ष ही नहीं, भाजपा के भी कुछ लोग अपनी गोटियां बिठा रहे थे. उनकी भी उम्मीद खत्म हो गई है। संघ प्रमुख के बयान से यह सोचना कि मोदी भी रिटायर हो जाएंगे, विपक्ष की राजनीतिक नासमझी है । मेरा मानना है कि 2029 का चुनाव तो भाजपा मोदी के नेतृत्व में लड़ने वाली है और संभावना इस बात की भी है कि 2034 का चुनाव भी मोदी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा । अंत में उनका स्वास्थ्य निर्णय लेगा कि वो कब तक पद पर बने रहते हैं। राजनीति में भविष्यवाणी नहीं की जाती लेकिन मेरा मानना है कि मोदी खुद सत्ता छोड़कर जाएंगे. उन्हें न तो विपक्ष सत्ता से हटा सकता है और न ही भाजपा में कोई नेता ऐसा कर सकता है । राजनीति में वही पार्टी का नेतृत्व करता है जिसके नाम पर वोट मिल सकते हैं। इस समय मोदी ही वो नेता हैं जिनके नाम पर भाजपा वोट मांग सकती है। जब तक मोदी राष्ट्रीय राजनीति में हैं, भाजपा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती और न ही संघ कुछ कर सकता है। भाजपा पर संघ का प्रभाव है, इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन भाजपा के काम में एक हद तक ही संघ दखल दे सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को बदलना संघ के लिए भी मुश्किल काम है क्योंकि इसी नेतृत्व के कारण संघ के सारे काम पूरे हो रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है और इस समय कैडर पूरी तरह से मोदी के पीछे खड़ा है। कैडर के खिलाफ जाकर भाजपा के नेतृत्व को बदलने के बारे में सोचना संघ के लिए भी मुश्किल है। बेशक संघ भाजपा का मातृ संगठन है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से बड़ा व्यक्तित्व आज कोई दूसरा नहीं है, संघ प्रमुख भी नहीं । भाजपा और संघ में कहा जाता है कि व्यक्ति से बड़ा संगठन होता है लेकिन मोदी आज संगठन से बड़े हो गए हैं। क्या यह सच्चाई संघ को नजर नहीं आ रही है। मेरा मानना है कि संघ भी इस सच की अनदेखी नहीं कर सकता । अगर कहीं भी संघ के मन में ऐसा विचार आया होगा कि भाजपा की कमान एक उम्र के बाद मोदी की जगह किसी दूसरे नेता को देनी चाहिए तो सच्चाई को देखते हुए वो पीछे हट गया है। मोदी जी की जगह किसी और को नेतृत्व सौंपने के परिणाम की कल्पना संघ ने की होगी तो उसे पता चल गया होगा कि मोदी को हटाने का भाजपा और संघ को कितना बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है । क्या संघ को अहसास नहीं है कि मोदी सरकार आने के बाद उसका सामाजिक और भौगोलिक विस्तार लगातार हो रहा है। वो इससे अंजान नहीं है कि अगर भाजपा सत्ता से बाहर गयी तो उसकी सबसे बड़ी कीमत संघ को ही चुकानी होगी । अगर मोदी के कारण संघ का भाजपा पर नियंत्रण कम हो गया है तो उसका राष्ट्रीय महत्व भी बहुत बढ़ गया है। अगर मोदी के जाने के बाद भाजपा के हाथ से सत्ता चली जाती है तो संघ को भाजपा पर ज्यादा नियंत्रण मिलने का कोई फायदा होने वाला नहीं है। देखा जाए तो संघ एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, राजनीतिक संगठन नहीं है। राजनीतिक उद्देश्य के लिए उसने भाजपा का निर्माण किया था जो पूरी तरह से फलीभूत हो रहा है। अगर भाजपा के जरिये संघ के न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्य भी पूरे हो रहे हैं तो संघ को भाजपा से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। ऐसा लगता है कि संघ ने बहुत सोच समझ कर पीछे हटने का फैसला कर लिया है। संघ को सत्ता की ताकत का अहसास अच्छी तरह से हो गया है और वो यह भी जान गया है कि भाजपा का लगातार सत्ता में रहना कितना जरूरी है। भाजपा के लगातार तीन कार्यकाल तक सत्ता में रहने की अहमियत का अंदाजा संघ को है इसलिए वो नहीं चाहेगा कि उसकी दखलंदाजी से भाजपा को अगला कार्यकाल मिलने में बाधा उत्पन्न हो जाए। भागवत ने कहा है कि भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा, ये भाजपा को तय करना है. संघ का इससे कोई लेना देना नहीं है । उनके इस बयान से साबित हो गया है कि संघ ने भाजपा में दखलंदाजी से दूरी बना ली है। इसका यह मतलब नहीं है कि भाजपा और संघ में दूरी पैदा हो गई है बल्कि संघ ने अपनी भूमिका को पहचान लिया है। उसको यह बात समझ आ गई है कि उसका काम भाजपा को सत्ता पाने में मदद करना है लेकिन सत्ता कैसे चलानी है, ये उसे तय नहीं करना है। संघ को पता चल गया है कि सत्ता पाने के बाद देश चलाना भाजपा का काम है और संघ का काम सत्ता के सहयोग से अपने संगठन को आगे बढ़ाने का है । वैसे भी जिन लोगों के हाथ में भाजपा की बागडोर है, वो संघ से निकले हुए उसके स्वयंसेवक ही हैं । संघ को अहसास हो गया है कि वो किसी को पार्टी का नेता बना सकता है लेकिन जनता का नेता बनाना उसके हाथ में नहीं है। 2014 के बाद मोदी अब भाजपा के नेता या संघ के कार्यकर्ता नहीं रह गए हैं बल्कि वो देश के नेता बन गए हैं। संघ जानता है कि मोदी की इस समय क्या ताकत है, इसलिए वो मोदी को कोई निर्देश देने की स्थिति में नहीं है। विपक्ष को मोदी के रिटायर होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए थी लेकिन अब उसे समझ आ जाना चाहिए कि उसे जल्दी मोदी से छुटकारा मिलने वाला नहीं है । जब तक मोदी का स्वास्थ्य अनुमति देगा, वो भाजपा का नेतृत्व करते रहेंगे । राजेश कुमार पासी Read more » Modi will not retire now अभी रिटायर नहीं होंगे मोदी
राजनीति कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री की मां का अपमान – राहुल ने किया सेल्फ गोल September 6, 2025 / September 6, 2025 by मृत्युंजय दीक्षित | Leave a Comment बिहार विधानसभा चुनाव 2025 भारत के प्रधानमंत्री को पूरा विश्व दे रहा सम्मान और विपक्ष कर रहा अपमान मृत्युंजय दीक्षित बिहार विधानसभा चुनाव -2025 को लेकर राजनैतिक दलों की गतिविधियां तीव्र हो चली है । यद्यपि अभी वहां चुनाव होने में दो माह से अधिक का समय शेष है तथापि चुनावी घमासान चरम पर पहुंच […] Read more » कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री की मां का अपमान
आर्थिकी राजनीति जीएसटी का नया दौर: कराधान व्यवस्था क्रांति की ओर September 5, 2025 / September 6, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – भारतीय कराधान व्यवस्था में जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) का आगमन एक ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम था। इसने अप्रत्यक्ष करों के जटिल और उलझे जाल को जहां सरल बनाने का प्रयास किया, वहीं शासन एवं प्रशासन में पसरे भ्रष्टाचार एवं अफसरशाही को भी काफी सीमा तक नियंत्रित किया। सुधार, सुविधा एवं […] Read more » New era of GST New era of GST: Towards revolution in taxation system Towards revolution in taxation system जीएसटी
राजनीति गुजरा वोटर यात्रा का “कारवां”, अब सिर्फ नफरत का “गुबार” September 4, 2025 / September 4, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment प्रदीप कुमार वर्मा पीएम नरेंद्र मोदी के विरुद्ध “तू-तड़ाक” की भाषा का इस्तेमाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के विरुद्ध भद्दी गालियों का चलन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भावी पीएम के रूप में ऐलान, राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा खुद को सीएम घोषित करने की कशमकश और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारों का प्रयोग। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अगुवाई में बिहार में वोटर अधिकार यात्रा का यही फलसफा देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मतदाताओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा एक प्रकार से अपने उद्देश्य से कोसों दूर रही। विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करने की नाकाम कोशिश भी वोटर अधिकार यात्रा में दिखी। वहीं, प्रधानमंत्री समेत भाजपा तथा अन्य के विरुद्ध राजनीतिक घृणा का एक नया चेहरा भी सामने आया। कांग्रेस और राजद जहां वोटरों के अधिकार से इस यात्रा को जोड़ रही है। वहीं, भाजपा सहित समूचे एनडीए के नेताओं का आरोप है यह घुसपैठियों को बचाने की यात्रा है। कुल मिलाकर बिहार चुनाव में वोटर अधिकार यात्रा का कारवां गुजर चुका है और अपने पीछे राजनीतिक नफरत का गुबार छोड़ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बिहार में करीब एक पखवाड़े की वोटर अधिकार यात्रा सोमवार को समाप्त हो गई। यह यात्रा राज्य के 25 जिलों और 110 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ सासाराम से शुरू हुई थी और पटना में समाप्त हुई। करीब एक हजार 300 किलोमीटर लंबी इस यात्रा का मकसद उन लाखों मतदाताओं के लिए आवाज उठाना था, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इस यात्रा से बिहार का मतदाता कितना जागरूक हुआ है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन वोटर अधिकार यात्रा के दौरान कई विवाद हुए और राजनीति के कई स्याह चेहरे यात्रा के दौरान देखने को मिले। वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “तू-तड़ाक” की भाषा का इस्तेमाल किया। हद तो तब हो गई जब कांग्रेस और राजद के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को भी गाली दी गई जिसके चलते राहुल गांधी की इस वोटर अधिकार यात्रा के ” निहितार्थ” को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बिहार में पिछले करीब चार दशकों में कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई है। बिहार की राजनीति में वर्तमान में कांग्रेस राजद की अगुवाई वाले महा गठबंधन का हिस्सा है। बिहार में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन की तलाश लेकर कांग्रेस ने वोटर अधिकार यात्रा शुरू की। इस यात्रा ने राहुल गांधी को विपक्ष के मुख्य चेहरे के तौर पर स्थापित किया, इसमें कोई दो राय नहीं है। यह भी सत्य है कि वोटर अधिकार यात्रा ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी उत्साहित किया है। यात्रा के जरिए देश के मुख्य विपक्षी दलों ने भी अपनी एक जुटता दिखाने की कोशिश की और यात्रा के दौरान इन दलों के नेताओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। वोटर अधिकार यात्रा में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, रेवंत रेड्डी, अशोक गहलोत, केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया शामिल हुए। आरजेडी से तेजस्वी यादव पूरे समय यात्रा में रहे और लालू प्रसाद यादव भी इसमें बीच में शामिल हुए। वोटर अधिकार यात्रा में समाजवादी पार्टी से अखिलेश यादव, डीएमके के एमके स्टालिन और कनिमोझी, झारखंड मुक्ति मोर्चा से हेमंत सोरेन, तृणमूल कांग्रेस से यूसुफ पठान और ललितेश त्रिपाठी, एनसीपी (शरद पवार) से सुप्रिया सुले और जितेंद्र आव्हाड, शिवसेना (यूबीटी) से संजय राउत, वामपंथी पार्टियों से दीपांकर भट्टाचार्य (सीपीआई-एमएल), डी राजा (सीपीआई), एमए बेबी (सीपीआई-एम) और वीआईपी से मुकेश सहनी भी शामिल हुए। लेकिन वोटर अधिकार यात्रा के दौरान समय-समय पर हुए विवादों के चलते इस यात्रा के उद्देश्य और औचित्य पर भी सवाल उठने लगे। वोटर अधिकार यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा ऐलान किया गया था कि इस यात्रा के माध्यम से जिन लोगों के वोट काटे गए हैं, उनकी पहचान कर उनको सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के सामने पेश किया जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एक विवाद उस समय भी आया जब दक्षिण भारत के नेताओं ने वोटर अधिकार यात्रा में शिरकत की जिसको लेकर भाजपा और जनता दल यूनाइटेड ने उन पर निशाना साधा। यात्रा से पूर्व दक्षिण भारत के नेताओं ने बिहारी लोगों पर कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी जिसको लेकर भी यात्रा के दौरान काफी “तनाव” देखने को मिला। इस यात्रा के दौरान कुछ विवाद भी हुए। राहुल गांधी के काफिले में एक पुलिस कांस्टेबल घायल हो गया। बीजेपी ने इस मुद्दे पर हमला किया। दरभंगा में एक रैली के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध उपयोग की गई तू-तडाक की भाषा को लेकर लोगों में काफी रोष देखने को मिला तथा राहुल के इस तेवर की खूब आलोचना भी हुई। बीजेपी को इससे विपक्ष पर हमला करने का मौका मिल गया और उसने इसकी कड़ी आलोचना की। पटना में पक्ष-विपक्ष के पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई, जिससे तनाव बढ़ गया। कई राजनीतिक प्रेक्षकों ने राहुल गांधी की इस भाषा को सभ्य और शुचिता की राजनीति से परे बताया। कांग्रेस और राजद की वोटर अधिकार यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां के अपमान के रूप में भी याद किया जाएगा। कांग्रेस और राजद के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत मां के लिए भद्दी गलियों का इस्तेमाल वर्तमान की घृणित राजनीतिक सोच को बताता है। भाजपा अब इस अपमान के लिए कांग्रेस तथा आरजेडी पर हमलावर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम में भावुक होते हुए कहा कि उनकी मां का राजनीति से कोई लेना देना नहीं, वह सशरीर मौजूद नहीं है। इसके बाद भी उसे गाली दी गई। बिहार की मां-बहन और बेटियां इस अपमान को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। अपनी मां के अपमान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस भावुक अपील ने बिहार चुनाव के पहले नजर एक नया राजनीतिक विमर्श सेट कर दिया है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि जब-जब कांग्रेस सहित विपक्ष ने नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया है, तब तब विपक्ष को इसका नुकसान उठाना पड़ा है। वोटर अधिकार यात्रा के दौरान वोट चोरी के जो भी सबूत दिखाए गए, वह या तो पड़ताल के बाद में गलत निकले या फिर चुनाव आयोग से लेकर लोगों द्वारा इन्हें नकार दिया गया। वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच में अच्छी केमिस्ट्री देखने को मिली। जिससे बिहार चुनाव के दौरान महा गठबंधन में सीटों के बंटवारे तथा वोट ट्रांसफर को लेकर एक सुखद संकेत माना जा रहा है लेकिन इसके उलट कई कोशिशों के बावजूद भी राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित नहीं किए जाने को लेकर भी महा गठबंधन में चल रही खींचतान भी सामने आई। वोटर अधिकार यात्रा से उत्साहित कांग्रेस का कहना है कि हमने बिहार की धरती से “चुनावी क्रांति” का आगाज किया है और यह मैसेज पूरे देश में जाएगा। उधर भाजपा का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना यह कांग्रेस की पुरानी परिपाटी रही है जिसे लोकतंत्र के लिए सही नहीं माना जा सकता। बिहार की सत्ता पर काबिज जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि यह एक चुनावी नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं है। प्रदीप कुमार वर्मा Read more » voter yatra वोटर यात्रा
राजनीति हिंदुस्तान की विदेश नीति : बदलते वैश्विक परिदृश्य में नई दिशा और चुनौतियाँ September 4, 2025 / September 4, 2025 by अशोक कुमार झा | Leave a Comment अशोक कुमार झा 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में हिंदुस्तान का स्थान तेजी से बदल रहा है। एक ओर यह पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताक़त। इसकी 1.4 अरब से अधिक जनसंख्या, विशाल युवा शक्ति, मजबूत आईटी और अंतरिक्ष तकनीक, परमाणु क्षमता, रक्षा ताक़त और सांस्कृतिक धरोहर इसे वैश्विक मंच पर एक निर्णायक […] Read more » हिंदुस्तान की विदेश नीति