राजनीति मोदी को अतीत और भविष्य के द्वन्द्व से बाहर आना ही होगा! December 13, 2015 by इक़बाल हिंदुस्तानी | 1 Comment on मोदी को अतीत और भविष्य के द्वन्द्व से बाहर आना ही होगा! इक़बाल हिंदुस्तानी हिंदुत्व-विकास दोनों को एकसाथ साधना उनके लिये चुनौती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पूर्ण बहुमत से सरकार बनने के बावजूद आज तक एक अजीब द्वन्द्व में फंसे हुए हैं। एक तरफ उनका मुल आधार हिंदुत्व रहा है तो दूसरी तरफ वे कांग्रेस राज से दुखी जनता को विकास का सपना दिखाकर सत्ता में […] Read more » Featured मोदी को अतीत और भविष्य के द्वन्द्व से बाहर आना ही होगा!
राजनीति उम्मीद करें, बिहार में जारी रहेगा विकासवाद December 11, 2015 by उमेश चतुर्वेदी | 1 Comment on उम्मीद करें, बिहार में जारी रहेगा विकासवाद उमेश चतुर्वेदी राजनीति में एक कहावत धड़ल्ले से इस्तेमाल की जाती है और इस बहाने राजनीतिक दल अपनी दोस्तियों और दुश्मनी को जायज ठहराते रहते हैं। वह कहावत है – राजनीति में न तो दोस्ती स्थायी होती है और ना ही दुश्मनी। चूंकि लोकतांत्रिक समाज में राजनीति का महत्वपूर्ण लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ लोककल्याण ही […] Read more » Featured उम्मीद करें बिहार में जारी रहेगा विकासवाद
राजनीति नेशनल हेरल्ड मामले में सोनिया और राहुल की साख दांव पर December 11, 2015 / December 11, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | 2 Comments on नेशनल हेरल्ड मामले में सोनिया और राहुल की साख दांव पर शैलेन्द्र चौहान नेशनल हेरल्ड अख़बार की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी. तब से यह अख़बार कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा. बहुत सारे ट्रस्टों और ट्रस्टियों की वजह से अख़बार का मालिकाना और संपादकीय नियंत्रण हमेशा जटिल रहा. वित्तीय रूप से नेशनल हेरल्ड पहले दिन से ही विफल रहा. आज़ादी से पहले […] Read more » Featured नेशनल हेरल्ड मामले सोनिया और राहुल की साख दांव पर
राजनीति निवेश की भ्रामक अवधारणा December 11, 2015 / December 11, 2015 by शैलेन्द्र चौहान | 14 Comments on निवेश की भ्रामक अवधारणा शैलेंद्र चौहान “अच्छे दिन आने वाले हैं” का सपना महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जूझ रही जनता को बहुत विश्वास के साथ दिखाया गया था. आम आदमी की उम्मीदें थीं कि महंगाई से राहत मिलेगी लेकिन बात अब सिर्फ और सिर्फ विदेशी निवेश की हो रही है. निवेश कोई चैरिटी तो है नहीं वह तो […] Read more » Featured निवेश की भ्रामक अवधारणा
राजनीति निराशा फैलाता विपक्ष December 9, 2015 / December 10, 2015 by मृत्युंजय दीक्षित | 3 Comments on निराशा फैलाता विपक्ष मृत्युंजय दीक्षित भारत असीम राजनैतिक संभावनाओं का देश है । विगत 14 मई 2014 को देश की जनता ने राजग गठबंधन को पूर्ण बहुमत देकर दंश का वास्तविक विकास करने के लिए सत्ता सौंपी है। लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है कि जब कोई भी चुनाव परिणाम आता है तब पराजित विपक्ष कहता है कि […] Read more » Featured निराशा फैलाता विपक्ष
राजनीति विश्ववार्ता भारत दादा नहीं, बड़ा भाई है! December 9, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 1 Comment on भारत दादा नहीं, बड़ा भाई है! विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में वही बात कह दी, जो पिछले कई वर्षों से मैं अपने पड़ौसी देशों में कहता रहा हूं। उन्होंने नेपाल के संदर्भ में कहा कि हमारी नीति दादा की नहीं, बड़े भाई की है। हम पड़ौसी देश के दादा नहीं, बड़े भाई हैं। याने ‘बिग ब्रदर’ नहीं, ‘एल्डर ब्रदर’! […] Read more » Featured
राजनीति विश्ववार्ता बैंकाक में खुले दरवाजे December 9, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 1 Comment on बैंकाक में खुले दरवाजे भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित दोभाल और पाकिस्तान के जनरल नसीरखान जेंजुआ की बैंकाक में हुई मुलाकात का मैं हार्दिक स्वागत करता हूं। जो काम अब डेढ़ साल बाद बैंकाक में हुआ है, वह पहले ही दिल्ली या इस्लामाबाद में भी हो सकता था लेकिन जिस आदमी में जरुरत से ज्यादा आत्म-विश्वास होता है, वह […] Read more » Featured बैंकाक में खुले दरवाजे
राजनीति सचमुच सियासी ही है सांप्रदायिक असहिष्णुता December 9, 2015 by अरुण तिवारी | Leave a Comment ’’असहिष्णुता, सियासी मसला है।’’ भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री टी एस ठाकुर ने यह बयान खासकर, मजहबी असहिष्णुता के संदर्भ मंे दिया। न्यायमूर्ति श्री ठाकुर द्वारा ठीक 06 दिसंबर, 2015 के दिए इस बयान का संदेश साफ है और ठीक इसी दिन भारत में घटे ताजा घटनाक्रम का भी। याद कीजिए कि 06 दिसबंर, […] Read more » Featured सचमुच सियासी ही है सांप्रदायिक असहिष्णुता सांप्रदायिक असहिष्णुता
राजनीति भगवा झंडे से इतनी नफरत क्यूँ December 9, 2015 by अश्वनी कुमार, पटना | 3 Comments on भगवा झंडे से इतनी नफरत क्यूँ भगवा रंग तो त्याग और बलिदान का प्रतीक है भला इससे किसी को क्या परेशानी होती होगी? ऐसे सवाल मन में जरूर आते हैं जब हम खुद को राजनीतिक या सांप्रदायिक नजरिये से कुछ पल के लिए अलग कर लेते हैं। इस देश में रंग, धर्म, जाती और मजहब की विवेचना करने वाले लोगों की […] Read more » Featured भगवा झंडे से इतनी नफरत क्यूँ
राजनीति व्यंग्य भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार December 7, 2015 / December 7, 2015 by अशोक मिश्र | 2 Comments on भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार अशोक मिश्र केजरी भाई लाख टके की बात कहते हैं। अगर आदमी भूखा रहेगा, तो ईमानदार कैसे रहेगा? भुक्खड़ आदमी ईमानदार हो सकता है भला। हो ही नहीं सकता। आप किसी तीन दिन के भूखे आदमी को जलेबी की रखवाली करने का जिम्मा सौंप दो। फिर देखो क्या होता है? पहले तो वह ईमानदार रहने […] Read more » Featured भुक्खड़ नहीं होते ईमानदार
आलोचना राजनीति ‘आप’ का तुगलकी फरमान December 7, 2015 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 3 Comments on ‘आप’ का तुगलकी फरमान अदालत के यह कहने पर कि दिल्ली में रहना ऐसा है, जैसे ‘गैस चेम्बर’ में रहना, दिल्ली सरकार द्वारा की जा रही तुरंत कार्रवाई पर हमें उसे शाबाशी देनी होगी लेकिन उसने जैसी कार्रवाई सुझाई है, उस पर उसे सबसे ज्यादा शाबाशी कार कंपनियों के मालिक देंगे। यदि दिल्ली सरकार का तुगलकी फरमान स्थायी तौर […] Read more » ‘आप’ का तुगलकी फरमान Featured
मीडिया राजनीति सहिष्णुता का समीकरण December 7, 2015 by डॉ. मधुसूदन | 1 Comment on सहिष्णुता का समीकरण डॉ. मधुसूदन (एक) कुछ प्रश्न: प्रश्न (१): सहिष्णुता शब्द किस भाषा का है? उत्तर(१): अंग्रेज़ी का तो लगता नहीं। फिर क्या अरबी का है, या फारसी का है? नहीं। तो लातिनी, ग्रीक इत्यादि में से किस भाषा का है? नहीं जी, यह शब्द तो हिन्दी का है। पर महाराज, हिन्दी में कहाँ से आया? अब […] Read more » Featured सहिष्णुता का समीकरण