आर्थिकी राजनीति गरीबी के साथ आर्थिक असमानता दूर करने का लक्ष्य हो June 9, 2025 / June 9, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment Read more » The goal should be to eliminate poverty and economic inequality गरीबी के साथ आर्थिक असमानता
Tech राजनीति स्टारलिंक की भारत में एंट्री: इंटरनेट की दुनिया में क्रांति या महंगा सपना? June 8, 2025 / June 9, 2025 by अशोक कुमार झा | Leave a Comment अशोक कुमार झा भारत में इंटरनेट सेवा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक और विश्व के सबसे चर्चित उद्यमियों में से एक एलन मस्क की सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक (Starlink) को आखिरकार भारत में काम करने का आधिकारिक लाइसेंस मिल गया है। यह सेवा अब उन क्षेत्रों में […] Read more » Starlink Starlink's entry into India Starlink's entry into India: Revolution in the internet world or an expensive dream?
आर्थिकी राजनीति महाकुंभ 2025 ने पहुंचाया भारत को चौथी अर्थव्यवस्था में June 8, 2025 / June 9, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment पंकज जायसवाल भारत ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की GDP अब $4.19 ट्रिलियन तक पहुँच चुकी है। यह उपलब्धि कई वर्षों की नीति, प्रयास और विशेषतः महाकुंभ 2025 जैसे […] Read more » भारत चौथी अर्थव्यवस्था
राजनीति जाति जनगणना: गिनती नहीं, पहचान June 8, 2025 / June 9, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सचिन त्रिपाठी भारत केवल एक भूगोल नहीं है। यह संवेदनाओं, विविधताओं, संघर्षों और चेतनाओं की जीवित भूमि है। यहां हर नदी की धारा, हर पर्वत की छाया, हर गांव की मिट्टी में एक कथा छिपी है और इन सब कथाओं को जोड़ने वाली जो सबसे महीन और गहरी रेखा है, वह है जाति। जाति यह शब्द जितना साधारण दिखता है, उतना ही जटिल है इसकी गुत्थी। यह किसी व्यक्ति के नाम के साथ चलती है, कभी उसके आगे तो कभी उसके पीछे, परंतु उससे अलग कभी नहीं होती। यह उसके खाने, पहनने, बोलने, चलने, बैठने, यहां तक कि स्वप्न देखने के अधिकार को भी निर्धारित करती है। ऐसे में अगर कोई कहे कि भारत को जाति जनगणना की आवश्यकता नहीं, तो यह वैसा ही होगा जैसे कोई आंखें मूंदकर सूरज को नकार दे। जातियों की गणना कोई नया विचार नहीं है। ब्रिटिश भारत में 1931 में अंतिम बार व्यापक जातिवार जनगणना हुई थी। उसके बाद भारत स्वतंत्र हुआ, संविधान बना, लोकतंत्र आया, लेकिन जातियों का अस्तित्व कभी समाप्त नहीं हुआ। वे हमारे सामाजिक व्यवहार में बनी रहीं। किसी के आंगन की चौखट तक सीमित तो किसी के सपनों की ऊंचाई तक पहुंचने में बाधा बनीं। इसलिए जब हम जाति जनगणना की बात करते हैं तो हम महज आंकड़ों की नहीं, बल्कि उन कहानियों की बात करते हैं जो आंकड़ों के पीछे छुपी हैं। वंचना की कहानियां, उपेक्षा की पीड़ाएं और संघर्ष की ज्वालाएं। क्या यह आवश्यक नहीं कि हम जानें, कौन-कौन से समाज अब भी अधूरे हैं? कौन-से वर्ग अब भी हाथ में पात्र लेकर अवसरों की भिक्षा मांग रहे हैं? भारत ने संविधान में वादा किया था। सबको समान अवसर मिलेगा। पर बिना यह जाने कि कौन कहां खड़ा है, यह समानता महज़ एक कविता बन जाती है सुंदर लेकिन असंभव। जाति जनगणना उसी कविता को गद्य में बदलने का पहला कदम हो सकती थी। जब तक हमें यह न पता चले कि किस जाति की कितनी जनसंख्या है, उनका आर्थिक स्तर क्या है, वे शिक्षा से कितनी दूर हैं। तब तक उनकी समस्याओं का समाधान कैसे संभव है? मान लीजिए, एक गांव में पांच जातियां हैं। एक ऊंची जाति, जो वर्षों से सब संसाधनों पर अधिकार रखती आई है, और चार वे जो छाया बनकर जीती रही हैं। यदि सबको समान रूप से योजनाएं दी जाएँ, तो क्या यह वास्तव में न्याय होगा? जाति जनगणना एक ऐसी दृष्टि प्रदान करती जिससे योजनाएं अंधेरे में तीर चलाने के बजाय सटीक निशाने पर उतरतीं। भारतीय लोकतंत्र जाति से अनभिज्ञ नहीं है। हर चुनाव, हर टिकट, हर नारा कहीं न कहीं जाति की गणित में उलझा रहता है। राजनीतिक दल जब ‘बहुजन हिताय’ की बात करते हैं, तो उनका गणना तंत्र जातियों के अनुमानों पर आधारित होता है, न कि ठोस आंकड़ों पर। अगर जाति जनगणना होती, तो इस अनुमान का स्थान ज्ञान ले लेता। कौन जातियां अभी भी प्रतिनिधित्व से दूर हैं? किन्हें बार-बार सत्ता में हिस्सेदारी मिली और किन्हें केवल नारे? यह जानना आवश्यक है। बिहार द्वारा 2023 में किये गए जातीय सर्वेक्षण से जब यह सामने आया […] Read more » but identification Caste Census: Not counting जाति जनगणना
राजनीति मोबाइल पर बजने वाला आरबीआई का संदेश बन रहा परेशानी का कारण June 8, 2025 / June 9, 2025 by संदीप सृजन | Leave a Comment -संदीप सृजन भारतीय रिज़र्व बैंक देश की वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो मौद्रिक नीतियों को लागू करने, मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने जैसे कार्यों के लिए जाना जाता है। हाल के वर्षों में, आरबीआई ने जनता को साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए कई अभियान शुरू […] Read more » आरबीआई का संदेश बन रहा परेशानी का कारण
राजनीति भारतीय इंजीनियरिंग का अनोखा, नायाब नमूना है चिनाब ब्रिज June 8, 2025 / June 9, 2025 by सुनील कुमार महला | Leave a Comment हाल ही में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर को चिनाब पुल का उद्घाटन करके एक बड़ी सौगात दी है। पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि यह(चिनाब पुल) दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है। 6 जून 2025 को चिनाब पुल का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसी ट्रैक पर […] Read more » Chenab Bridge Chenab Bridge is a unique and rare example of Indian engineering चिनाब ब्रिज
आर्थिकी राजनीति भारतीय अर्थव्यवस्था को भारतीय रिजर्व बैंक के दो महत्वपूर्ण तोहफे June 8, 2025 / June 9, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वैश्विक स्तर पर विश्व के कई देशों में आर्थिक गतिविधियों पर संकट के बादल मंडराते हुए दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका में तो श्री डॉनल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद से नित नई घोषणाएं की जा रही है। कभी टैरिफ को बढ़ाया जा रहा है तो कभी टैरिफ को लागू करने की तारीखों में […] Read more » भारतीय रिजर्व बैंक के दो महत्वपूर्ण तोहफे
राजनीति सिंदूर का पौधारोपण के निहितार्थ June 6, 2025 / June 6, 2025 by डॉ.वेदप्रकाश | Leave a Comment डॉ.वेदप्रकाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संकल्प से सिद्धि के नायक के रूप में जाने जाते हैं। वे एक ऐसे राष्ट्रीय और वैश्विक व्यक्तित्व हैं जो जब किसी कार्य का संकल्प लेते हैं तो उसे समुचित योजना बनाकर सिद्धि तक भी पहुंचाते हैं। वे आरंभ से ही विभिन्न चुनौतियों को दूर करते हुए भारतवर्ष की शक्ति व शौर्य के जागरण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर चल रहे हैं। विगत दिनों पहलगाम में हुए आतंकी हमले में सुनियोजित ढंग से पुरुषों को निशाना बनाया गया। निहत्थे पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया। अनेक महिलाओं की मांग से सिंदूर मिटाया गया। आतंकियों के इस दुष्कृत्य ने समूचे देश और विश्व को झकझोर दिया। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प लिया कि जिन लोगों ने भारत की माताओं- बहनों की मांग से सिंदूर मिटाया है, हम उन्हें ही मिटा देंगे। परिणामस्वरूप ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया और कुछ ही समय में सैकड़ों आतंकवादियों को मौत के घाट उतारते हुए उनके ढांचे और अड्डों को भी मिट्टी में मिलाया गया। प्रधानमंत्री अपने विभिन्न उद्बोधनों में बार-बार कह चुके हैं कि आतंकवाद किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब यदि सीमा पार से गोली चली तो भारत उसका जवाब गोले से देगा। ऑपरेशन सिंदूर ने उनके इस संकल्प को स्पष्ट कर दिया। ध्यातव्य है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना का पराक्रम और उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। देशभर में सामान्य जनता ने विभिन्न कार्यक्रमों से सेना के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन की न केवल प्रशंसा की अपितु हर परिस्थिति में देश सेना के साथ है, यह भरोसा भी दिया। हाल ही में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर सिंदूर का पौधा रोपा है। यह पौधा विगत दिनों उन्हें गुजरात की उन वीरांगना महिलाओं ने भेंट किया था, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान नष्ट हुई एयरस्ट्रिप को रातों-रात तैयार करने में असाधारण साहस और देशभक्ति का परिचय दिया था। पौधारोपण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा- यह पौधा देश की नारी शक्ति के शौर्य और प्रेरणा का प्रतीक बनेगा। वे पहले भी विभिन्न अवसरों पर देश की नारी शक्ति के शौर्य,प्रेरणा एवं उनके सम्मान की रक्षा हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त कर चुके हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के संदर्भ से भी समझने की आवश्यकता है। वहां वर्णन है कि वनवास के लिए निकले श्रीराम ने अगस्त्य मुनि के आश्रम में पहुंचकर उनसे अपने वनवास की अवधि के लिए शांत और एकांत स्थान पूछा। मुनि ने उन्हें निवास हेतु गोदावरी नदी के निकट दंडक वन में पंचवटी नामक स्थान बताया। पंचवटी ऐसा स्थान है जहां अनेक प्रकार के फल-फूल वाले पेड़ और वनस्पतियां हैं। इस रमणीय स्थान पर निवास करते हुए जब श्रीराम का वनवास बीत रहा था, तभी वहां खर दूषन आदि राक्षस उत्पात मचाते हैं, जिनमें से कई श्रीराम के हाथों मारे जाते हैं और फिर लंकापति राक्षस राज रावण छल से माता सीता का हरण कर लेता है। फिर कुछ समय बाद नारी शक्ति के सम्मान की रक्षा और आसुरी प्रवृत्ति की समाप्ति हेतु समूची लंका का विध्वंस सर्वविदित है। कुछ इसी प्रकार का कृत्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों के पहलगाम हमले में भी सामने आया,जिसके विध्वंस हेतु ऑपरेशन सिंदूर चला और अभी भी जारी है। विगत वर्ष भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक पेड़ मां के नाम इस अभियान को शुरू किया था,जिसके अंतर्गत देशभर में जगह-जगह वृक्षारोपण हुआ और अब तक लगभग 109 करोड़ पौधे रोपे जा चुके हैं। इस बार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून को विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और उसे हरित बनाने के लिए 700 किलोमीटर लंबे अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया है। सर्वाधिक है कि अरावली पर्वत श्रंखला में खनन, सूखा, अतिक्रमण, जलवायु परिवर्तन और विकास कार्यों के चलते पर्वत क्षेत्र और हरियाली लुप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सभी पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। यह एक बहुत बड़ी योजना और संकल्प है जिसे दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान और गुजरात को अपने अपने क्षेत्र में बड़े प्रयास करते हुए सिद्धि तक पहुंचाना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने आवास पर रोपा सिंदूर का पौधा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नारी शक्ति, सांस्कृतिक परंपरा और उनके सम्मान की रक्षा का संकल्प एवं प्रतीक भी है। आज हमें यह भी समझने की आवश्यकता है कि भारत की लड़ाई जितनी प्रदूषण के विरुद्ध और प्रकृति पर्यावरण की रक्षा के लिए है। उतनी ही भारत विरोधी ताकतों और आतंकवाद जैसी मानसिकता के विरुद्ध भी है। प्रधानमंत्री द्वारा सिंदूर के पौधे का रोपण यह संदेश देता है कि जब तक आतंकवाद एवं भारत विरोधी ताकतें भारत को कमजोर करने का प्रयास करेंगे, नारी शक्ति के सिंदूर को मिटाने का प्रयास करेंगे। तब तब भारत पूरी ताकत के साथ जवाब देगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रोपा गया सिंदूर का पौधा जन सामान्य के लिए भी प्रेरणा का सूचक है। इस पौधे से प्रेरणा लेकर जन-जन भी नारी शक्ति के सम्मान एवं उसकी रक्षा के लिए एक एक पौधे का रोपण अवश्य करें। ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी के नेतृत्व में विभिन्न अवसरों पर प्रेरक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पूज्य स्वामी जी ने पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में यह घोषणा की कि देशभर में पांच ‘सिटी- पंचवटी’ सिंदूर वाटिकाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए ऋषिकेश, गंगोत्री-यमुनोत्री, प्रयागराज, अयोध्या आदि शहरों में जन भागीदारी से पंचवटी सिंदूर वाटिका तैयार करने का उद्देश्य जन मन में ऑपरेशन सिंदूर की स्मृति, सेना के शौर्य एवं नारी शक्ति के सम्मान का भाव निहित रहेगा। ध्यान रहे जलवायु परिवर्तन आज एक राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौती बनती जा रही है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ता प्रदूषण मानवता के लिए संकट बनता जा रहा है। अनेक नदियां मर चुकी है अथवा करने के कगार पर हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जल स्रोत भयंकर प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण एक बड़ा समाधान सिद्ध हो सकता है। आज आवश्यक है देश के छोटे बड़े प्रत्येक शहर में पंचवटी वाटिकाएं बनें। सरकार के साथ-साथ संत समाज और जन भागीदारी से यह काम आसान हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया पौधारोपण हमें प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण-संवर्धन का भी संदेश देता है। आइए हम सभी अपने-अपने ढंग से प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण- संवर्धन हेतु प्रयास करें। डॉ.वेदप्रकाश Read more » Implications of planting vermillion सिंदूर का पौधारोपण
राजनीति उत्तराखंड में विरोधी मुहिम: बड़े बड़ों की गर्दन नपी June 6, 2025 / June 6, 2025 by जयसिंह रावत | Leave a Comment जयसिंह रावत उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, पिछले तीन वर्षों से एक ऐसी सरकार के नेतृत्व में बदलाव की राह पर है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को न केवल शब्दों में बल्कि कार्यों में भी लागू कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2021 में सत्ता […] Read more » उत्तराखंड में विरोधी मुहिम
राजनीति विश्ववार्ता एक बार फिर से भड़कता दिख रहा रूस-यूक्रेन युद्ध June 6, 2025 / June 6, 2025 by राजेश जैन | Leave a Comment राजेश जैन फरवरी 2022 में शुरू हुआ रूस-यूक्रेन युद्ध चौथे साल में चल रहा है। लाखों लोगों की जान जा चुकी है, शहर उजड़ चुके हैं और अब दुनिया की नजरें इस सवाल पर टिकी हैं — आखिर कौन जीत रहा है यह युद्ध? क्या यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की रूस के ताकतवर राष्ट्रपति व्लादिमीर […] Read more » The Russia-Ukraine war seems to be flaring up once again रूस-यूक्रेन युद्ध
राजनीति प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में बढ़ता वैचारिक पक्षपात June 6, 2025 / June 6, 2025 by गजेंद्र सिंह | Leave a Comment गजेंद्र सिंह हाल ही में विश्व के दो सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों — मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और हार्वर्ड विश्वविद्यालय — के दीक्षांत समारोहों में दिए गए भाषणों ने वैश्विक स्तर पर तीखी बहस को जन्म दिया है। इन मंचों पर छात्रों द्वारा व्यक्त विचारों ने न केवल राजनीतिक और वैचारिक रुझानों को उजागर किया […] Read more » Megha Vemuri MIT's graduating class president publicly criticized Israel and MIT's ties to the US Department of Defense while wearing an Islamic kafiya in her convocation address. प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में बढ़ता वैचारिक पक्षपात
राजनीति राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दलों के नये चेहरें June 6, 2025 / June 6, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – सिंदूर ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान दुनिया से सहानुभूति बटोरने के लिये जहां विश्व समुदाय में अनेक भ्रम, भ्रांतिया एवं भारत की छवि को छिछालेदार करने में जुटा है, वहीं भारत का डर दिखा-दिखा कर ही पाक अनेक देशों से आर्थिक मदद मांग रहा है। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए दुनिया के […] Read more » राजनीति को नई दिशा देते विपक्षी दल