राजनीति ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्हा May 29, 2012 / June 28, 2012 by राकेश सिन्हा | 39 Comments on ये स्टालिनवादी वैचारिक बहुलता के विरोधी होते हैं / राकेश सिन्हा राकेश सिन्हा (जनसत्ता ने अपने चार रविवारीय अंकों में वैचारिक एवं बौद्धिक संवाद पर बहस चलाया. कई न्यूनताओं के बावजूद यह एक सराहनीय एवं अभिनंदनीय सम्पादकीय परियोजन है. इसने संवाद के प्रति सदिच्छा एवं काल्पनिक एवं कालबाह्य प्रवृत्तियों को सार्वजनिक बहस में लाने का काम किया है. बहस का कारण मंगलेश डबराल का भारत नीति […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान मंगलेश डबराल राकेश सिन्हा वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति हल्की फूंक से ही कांपने लगते हैं वामपंथी / विजय कुमार May 29, 2012 / June 28, 2012 by विजय कुमार | 9 Comments on हल्की फूंक से ही कांपने लगते हैं वामपंथी / विजय कुमार विजय कुमार संघप्रेरित विचार मंच (Think tank) ‘भारत नीति प्रतिष्ठान’ (India policy foundation) का मुख्यालय दिल्ली में है तथा इसका संचालन दिल्ली वि0वि0 में प्राध्यापक प्रो0 राकेश सिन्हा करते हैं। यह संस्था विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श के लिए प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों को बुलाती रहती है। पिछले दिनों समान्तर सिनेमा पर आयोजित एक गोष्ठी में वामपंथी लेखक […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान मंगलेश डबराल वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक May 29, 2012 / May 29, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | 1 Comment on कांग्रेस की मजहबी राजनीति को करारा तमाचा है मजहबी आरक्षण पर रोक सिद्धार्थ शंकर गौतम कांग्रेस की धर्म आधारित राजनीति पर लगता है ग्रहण लगने लगा है| आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को ज़बर्दस्त झटका देते हुए मजहब आधारित आरक्षण देने पर रोक लगा दी है| गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र केंद्र ने ओबीसी के […] Read more » congress anfd communalism कांग्रेस की मजहबी राजनीति मजहबी आरक्षण पर रोक
राजनीति हर कोई गोलबंद है / चंचल चौहान May 29, 2012 / June 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 2 Comments on हर कोई गोलबंद है / चंचल चौहान चंचल चौहान ओम थानवी की टिप्पणी ‘आवाजाही के हक में’ (‘अनन्तर’, 29 अप्रैल) अगर हिंदी लेखक समुदाय में व्याप्त संकीर्ण रुझानों को लेकर पीड़ा व्यक्त करती, तो उसके मूल संवेदनात्मक उद्देश्य से असहमत होने की गुंजाइश नहीं होती। यह एक पवित्र उद्देश्य ही होता कि लेखक विचारधारा के आधार पर छुआछूत न बरतें, सौ तरह […] Read more » ओम थानवी चंचल चौहान भारत नीति प्रतिष्ठान मार्क्सवाद वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव May 29, 2012 / June 28, 2012 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on न प्रगति न जनवाद, निपट अवसरवाद / के विक्रम राव के विक्रम राव वैचारिक आवाजाही निर्मल-प्रवाह जैसी हो तो बौद्धिक विकास ही कहलाएगी। वरना सोच में कोई भी बदलाव अमूमन मौकापरस्ती का पर्याय बन जाता है। आज के कथित प्रगतिवादी इसी दोयम दर्जे में आते हैं। वे सब आत्ममुग्ध होकर भूल जाते हैं कि हर परिवर्तन प्रगति नहीं होता, हालांकि हर प्रगति परिवर्तन होती है। […] Read more » ओम थानवी के. विक्रम राव जनसत्ता भारत नीति प्रतिष्ठान वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति यह छुआछूत उनकी ही देन है / अवनिजेश अवस्थी May 29, 2012 / June 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment अवनिजेश अवस्थी ओम थानवी के ‘अनन्तर’ पर पता नहीं चंचल चौहान इतना क्यों भड़क गए। थानवी जी की टिप्पणी के केंद्रीय मंतव्य- ‘‘क्या हम ऐसा समाज बनाना चाहते हैं जिसमें उन्हीं के बीच संवाद हो जो हमारे मत के हों? विरोधी लोगों के बीच जाना और अपनी बात कहना क्यों आपत्तिजनक होना चाहिए? क्या अलग […] Read more » ओम थानवी चंचल चौहान भारत नीति प्रतिष्ठान मार्क्सवाद वैचारिक अश्पृश्यता
राजनीति ताकि गर्द कुछ हटे / ओम थानवी May 29, 2012 / June 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 1 Comment on ताकि गर्द कुछ हटे / ओम थानवी ओम थानवी एक पाठक ने ‘आवाजाही’ पर चली बहस पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया की: यह हाल तो तब है जब ‘अनन्तर’ कभी-कभार छपता है। ‘कभी-कभार’ की तरह निरंतर छपने लगेगा तब? पता नहीं। पर जो टिप्पणियां हमने छापीं, वे सब प्रतिनिधि प्रतिक्रियाएं नहीं थीं। एकाध को छोड़कर लोग आवाजाही के हक में ही जान पड़े। […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान मार्क्सवाद वैचारिक अश्पृश्यता संवाद
राजनीति आवाजाही के हक में / ओम थानवी May 29, 2012 / June 28, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment ओम थानवी इंटरनेट बतरस का एक लोकप्रिय माध्यम बन गया है। घर-परिवार से लेकर दुनिया-जहान के मसलों पर लोग सूचनाओं, जानकारियों, विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, प्रतिक्रिया देते हैं। ब्लॉग, पोर्टल या वेब-पत्रिकाएं और सार्वजनिक संवाद के ‘सोशल’ ठिकाने यानी फेसबुक-ट्वीटर आदि की खिड़कियां आज घर-घर में खुलती हैं। गली-मुहल्लों, चाय की थड़ी या कहवा-घरों, […] Read more » भारत नीति प्रतिष्ठान मार्क्सवाद वैचारिक अश्पृश्यता संवाद
महत्वपूर्ण लेख राजनीति कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और विफलता-१ May 28, 2012 / June 10, 2012 by विपिन किशोर सिन्हा | 9 Comments on कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व, विरोधाभास और विफलता-१ विपिन किशोर सिन्हा शोषणविहीन और समतामूलक समाज के सपने के साथ शुरू हुआ कार्ल मार्क्स प्रणीत कम्युनिज्म जल्द ही पूरी दुनिया में फैल गया। युवाओं में इसके प्रति विशेष आकर्षण रहा। रूस, चीन, भारत समेत अनेक देशों में इसका प्रभाव समाज जीवन के सभी क्षेत्रों यथा – शिक्षा, ट्रेड यूनियन, पत्रकारिता, साहित्य, कला, रंगमंच आदि- […] Read more » reasons for the failure of communism कम्युनिज्म का अन्तर्द्वन्द्व कम्युनिज्म का विरोधाभास और विफलता विरोधाभास और विफलता-१
राजनीति “हिंदुत्व” से “मोदित्व” की ओर बढ़ती भाजपा? May 28, 2012 / May 28, 2012 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री पिछले दिनों मुंबईं में भारतीय जनता पाटा की राष्ट्रीय कार्यंकारिणी की दो दिवसीय बैठक सम्पन्न हुईं। बजाय इसके कि इस कार्यंकारिणी की बैठक में पाटा द्वारा किया गया कोईं चिंतन-मंथन अथवा राष्ट्रीय हितों के मद्देनजर लिया गया कोईं निर्णय चर्चा का विषय बनता ठीक इसके विपरीत पाटा की भीतरी कलह, नरेन्द्र मोदी, बीएस […] Read more » modi defeated sanjay joshi modi getting heavier on bjp मोदि की ओर बढ़ती भाजपा मोदित्व" की ओर बढ़ती भाजपा
राजनीति जगन की अदावत कहीं भारी न पड़ जाए कांग्रेस को May 28, 2012 / May 28, 2012 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | Leave a Comment सिद्धार्थ शंकर गौतम कभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के ख़ास क्षत्रप वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी से कांग्रेस की बीते २ वर्षों से चली आ रही अदावत ने अब गंभीर रूप ले लिया है जहां से दोनों के राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन करना कठिन हो गया है| आँध्रप्रदेश की राजनीति में आने वाले […] Read more » jaganmohan reddy जगनमोहन रेड्डी की अदावत वाईएस राजशेखर रेड्डी
राजनीति मायावती सरकार के घोटाले May 26, 2012 / May 26, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 2 Comments on मायावती सरकार के घोटाले राकेश कुमार आर्य भारत में राजनीति जैसे पवित्र मिशन को जब से कुछ लोगों ने व्यवसाय बनाया है, तब से यह मिशन न होकर घृणास्पद पेशा बन गया है। राजनीति और भ्रष्टाचार आजादी के बाद कुछ इस प्रकार घुले मिले हैं कि दोनों को अलग अलग करना ही असंभव हो गया है। जहां राजनीति होगी […] Read more » indian politics and its worst face मायावती सरकार के घोटाले