समाज जीवन की राहः शांति की चाह March 20, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment शांति केवल शब्द भर नहीं है, यह जीवन का अहम् हिस्सा है। शांति की इच्छा जहां भी, जब भी, जिसके द्वारा भी होगी पवित्र उद्देश्य और आचरण भी साथ होगा। शांति की साधना वह मुकाम है जहां मन, इन्द्रियां और कषाय तपकर एकाग्र और संयमित हो जाते हैं। जिंदगी से जुड़ी समस्याओं और सवालों का समाधान सामने खड़ा दिखता है तब व्यक्ति बदलता है बाहर से भी और भीतर से भी क्योंकि बदलना ही शांति की इच्छा का पहला सोपान है और बदलना या बदलाव ही शांति के संकल्पों की बुनियाद भी है। Read more » जीवन जीवन की राह शांति की चाह
समाज नैतिक मूल्यों का असल जीवन में महत्व March 17, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment हर रोज जन्दगी कुछ पुरानी, नयी उम्मीदें एवं नया रूप दिखाती हैं, कुछ चीजों को हम ध्यानित करते हैं, एवं कुछ चीजों को भूल जाते हैं। कुछ अच्छाईयां, बुराईया हमें एक नया रास्ता बताती हैं। अब हम इस मोड़ पर क्या नया कदम चुनेगे, यह आपका दिल और दिमाग ही बता पायेगा । हमें हमेशा लगनपूर्वक सामाजिक, सांसारिक जिमेवारी निभाते हुए कुछ अलग करने की साहस रखना होगा । यह तभी सम्भव हैं, जब हर इंसान अपनी नैतिक मूल्यों का सही मूल्यांकन अपने सहासिक कदमो से इस धरती पर गौरवान्वित करें। Read more » नैतिक मूल्यों का महत्व
शख्सियत समाज वीरव्रत March 17, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment कल्पना से परे है कि अध्ययन में कुशाग्र, हर ओर से समाज की बराबरी करने के बाद भी समाज ने उनसे भेदभाव किया। लेकिन लगातार प्रताड़ित होने के बाद भी उन्होंने संघर्ष नहीं छोड़ा। विधि, अर्थशास्त्र व राजनीति शास्त्र में अध्ययन, कोलंबिया वि.वि. और लंदन स्कूल आॅफ इकाॅनोमिक्स से कई डाक्टरेट डिग्रियां लीं। कुल 32 डिग्रियां बाबासाहेब ने प्राप्त कीं। जीवन भर समाज के दलित, पिछड़े और शोषित वर्ग की आवाज बने रहे। उन्होंने अपने समाज को शैक्षिक, आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक आदि रूपों में समान करने का अथक प्रयास किया। मृत्यु के 34 वर्ष उपरान्त 1990 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। Read more » वीरव्रत
समाज कट्टरपंथ की बुरी नजर से कला-संस्कृति को बचाना होगा March 16, 2017 by लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Leave a Comment लोकेन्द्र सिंह असम के 46 मौलवियों की कट्टरपंथी सोच को 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन ने करारा जवाब दिया है। नाहिद ने कहा है कि खुदा ने उसे गायिका का हुनर दिया है, संगीत की अनदेखी करना मतलब खुदा की अनदेखी होगा। वह मरते दम तक संगीत से जुड़ी रहेंगी और वह किसी फतवे से […] Read more » 16 वर्षीय गायिका नाहिद आफरीन Featured इस्लाम इस्लाम और संगीत के रिश्ते गायिका नाहिद आफरीन नाहिद आफरीन संगीत
समाज धर्म मजहब और धर्म निरपेक्षता March 16, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका। लेकिन हमारी अमरनाथ यात्रा हर साल बाधित होती है। फिर भी हम ही असहिष्णु हैं। हमें दोषी ठहराके ये अपने एवार्ड वापस करने का नाटक करते हैं। यह तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है। समय रहते भारत के हिन्दुओं समझ जाओ, संभल जाओ । Read more » धर्म धर्म निरपेक्षता धर्म मजहब
समाज मध्यम-वर्ग: नई भोर की आहट March 15, 2017 / March 15, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment मध्यमवर्ग भले ही आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न न भी हो, वह शिक्षित भी है, जागरूक भी है और #विकासोन्मुखी भी है लेकिन वह अपनी परम्पराओं और रूढियों से खुद को मुक्त नहीं कर सका। संस्कार और संस्कृति उसकी जेहन में रहते हैं। यही कारण है कि मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा पीड़ित है। मध्यम वर्ग की विडम्बना देखिये कि उसे अपना दर्द व्यक्त करने का मंच भी सुलभ नहीं है। यत्र-तत्र चर्चाओं में भाग लेकर अपना आक्रोश तो प्रकट करता है परन्तु समय, धन व जनबल के आभाव के कारण सत्ता में बैठे लोगों को अपने हित चिंतन के लिए विवश नहीं कर पाता। Read more » Featured नई भोर की आहट मध्यम-वर्ग
कला-संस्कृति समाज उत्तराखंड का बालपर्व “फूलदेई” March 15, 2017 by प्रदीप रावत | Leave a Comment पहाड़ की यह अनूठी बाल पर्व की परम्परा जो मानव और प्रकृति के बीच के पारस्परिक सम्बन्धों का प्रतीक है । तेज़ी से बड़ रही आधुनिकता के कारण यह प्राचीन परम्परा विलुप्त की कगार पर खड़ी हो गयी है इन प्राचीन परम्पराओ को बचाने के लिए सरकार को निति तय करनी होगी और स्कूलों मे बच्चों को इस बालपर्व फूलदेई को मनाने के लिए प्रेरित किया जाय व इस परम्परा से संबन्धित लेख या कविताओं को नौनिहालों के पाठ्यक्रम मे शामिल किया जाय ताकि इसे व्यापकता प्रदान हो सके. Read more » Featured उत्तराखंड का बालपर्व फूलदेई बाल पर्व
समाज जानिए घर पर वास्तु अनुसार भगवा ध्वजा लगाने के लाभ और प्रभाव … March 14, 2017 by पंडित दयानंद शास्त्री | 2 Comments on जानिए घर पर वास्तु अनुसार भगवा ध्वजा लगाने के लाभ और प्रभाव … भारत की सनातन संस्कृति की धरोहर का सांस्कृतिक दूत है परम पवित्र भगवा ध्वज! धर्म ध्वजा केसरिया, भगवा या नारंगी रंग की होती है| संस्कृति की समग्रता, राष्ट्रीय एकता जिसमें समाहित है| आदि काल से वैदिक संस्कृति, सनातन संस्कृति, हिंदू संस्कृति, आर्य संस्कृति, भारतीय संस्कृति एक दूसरे के पर्याय हैं जिसमें समस्त मांगलिक कार्यों के […] Read more » घर पर वास्तु अनुसार भगवा ध्वजा लगाने के लाभ भगवा ध्वजा
समाज क्या भारत को आज सिकुड कर बैठना चाहिए? March 12, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 10 Comments on क्या भारत को आज सिकुड कर बैठना चाहिए? डॉ. मधुसूदन भारत को आज संसार से अलग सिकुडकर बैठने का अवसर नहीं है। क्यों? जानने के लिए आगे पढें। (एक) क्या विदेशी निवेश , सिकुडकर बैठने से संभव है? मार्च-३-२०१७ का, वॉल स्ट्रीट जर्नल का आलेख आया है। जिस में भारत में निवेश को प्रोत्साहित किया है। कहा है India is the best country […] Read more » Featured भारत को सिकुड कर बैठना चाहिए?
समाज बृद्धावस्था बोझ नहीं, परिवार व समाज के उद्धारक बनें March 10, 2017 / March 10, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 1 Comment on बृद्धावस्था बोझ नहीं, परिवार व समाज के उद्धारक बनें दादा दादी , नाना नानी के संरक्षण में बच्चों में आत्मविश्वास और सुरक्षित होने की भावना बढ़ती है। जिन घरों में गृहणियां बाहर नहीं जातीं , वहां भी वरिष्ठ सदस्यों की प्रासंगिकता रहती है। पति पत्नी एक मर्यादा में रहते हैं। बात बात में आपे से बाहर नहीं होते।बुढ़ापे को बेकार मत समझिए। इसे सार्थक दिशा दीजिए। तन में बुढ़ापा भले ही आ जाए, पर मन में इसे मत आने दीजिए। आप जब 21 के हुए थे तब आपने शादी की तैयारी की थी, अब अगर आप 51 के हो गए हैं तो शान्ति की तैयारी करना शुरू कर दीजिए। सुखी बुढ़ापे का एक ही मन्त्र हैं। दादा बन जाओ तो दादागिरी छोड़ दो और परदादा बन जाओ तो दुनियादारी करना छोड़ दो। Read more » Featured परिवार बृद्धावस्था बोझ नहीं समाज के उद्धारक
पर्व - त्यौहार वर्त-त्यौहार समाज बुराई को त्यागने का प्रतीक है होली March 10, 2017 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment रंगों का पर्व होली हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार है। यह मौज-मस्ती व मनोरंजन का त्योहार है। सभी हिंदू जन इसे बड़े ही उत्साह व सौहार्दपूर्वक मनाते हैं। यह त्योहार लोगों में प्रेम और भाईचारे की भावना उत्पन्न करता है। Read more » Featured होली
कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार वर्त-त्यौहार समाज होली पर्व भारत में बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक March 9, 2017 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment होली पर्व पूरे देश में परंपरा, हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है। होली पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली पर्व हमारे देश में उपस्थित बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक है। होली पर्व देश में हमारी संस्कृति और सभ्यता के मूल सहिष्णुता और सौहार्द की भावना को बढ़ावा देने वाला पर्व है। इस पर्व को सभी लोगों को शांति, सौहार्द और भाईचारे की भावना से मनाना चाहिए। Read more » Featured जीवंत रंगों का प्रतीक होली पर्व होली पर्व भारत में बहुसांस्कृतिक समाज के जीवंत रंगों का प्रतीक