समाज स्वस्थ बहस March 29, 2017 by डॉ. मधुसूदन | 3 Comments on स्वस्थ बहस एक अनोखा उदाहरण स्मरण हो रहा है; हमारी सत्यान्वेषी परम्परा का। उस के ऐतिहासिक अंशपर संदेह हो ही नहीं सकता। उसके काल के विषय में दो मत हैं; पर ऐतिहासिकता पर संदेह नहीं है। आदि शंकर और मण्डन मिश्र के बीच बहस हुयी थी जो २१ दिन चली थी; जिसे स्वस्थ बहस कहना ही उचित होगा। और अचरज! मिश्रजी की पत्नी इस बहस की निर्णेता थीं। जी हाँ; बहस में मण्डन मिश्र की हार और शंकर की जीत का निर्णय देनेवाली निर्णेता मण्डन मिश्र की पत्नी उभय भारती थीं।आचार्य शंकर से मण्डन मिश्र काफी बडे भी थे। बडा हारा, छोटा शंकर जीता। और बडे की पत्नी थी, निर्णेता? Read more » argument Featured healthy argument वाद-विवाद और संवाद का अंतर स्वस्थ बहस
समाज बदलते भारत में बदलती शिक्षा March 28, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment उच्च शिक्षा के संबध में लोगो की राय जानने के लिए दिल्ली स्थित गैर सरकारी संगठन चरखा ने कुछ छात्रों से बात की। इस संबध में जम्मू विश्वविद्यालय के छात्र जफर कहते हैं कि "विश्वविद्यालय में एडमिशन के बारे पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता की कमी है। उनके पास जानकारी नहीं है कि कब प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा रही है। हालांकि सरकार कई योजनाएं लाती है, लेकिन छात्रों को इन योजनाओं के बारे में सूचित करने का कोई रास्ता नहीं है। जम्मू जैसे क्षेत्र में कभी कभी सूचना इतनी देर से पहुंचती है कि छात्र उसके लाभ से वंचित रह जाते है”। Read more » changing education in India Featured भारत भारत में बदलती शिक्षा
राजनीति समाज मैकाले-पद्धति को शीर्षासन कराता महर्षि अरविन्द का शिक्षा-दर्शन March 27, 2017 / March 27, 2017 by मनोज ज्वाला | Leave a Comment “ वास्तविक शिक्षण का प्रथम सिद्धान्त है- ‘कुछ भी न पढ़ाना’ , अर्थात् शिक्षार्थी के मस्तिष्क पर बाहर से कोई ज्ञान थोपा न जाये । शिक्षण प्रक्रिया द्वारा शिक्षार्थी के मस्तिष्क की क्रिया को सिर्फ सही दिशा देते रहने से उसकी मेधा-प्रतिभा ही नहीं, चेतना भी विकसित हो सकती है, जबकि बाहर से ज्ञान की घुट्टी पिलाने पर उसका आत्मिक विकास बाधित हो जाता है ।” Read more » “उदात्त सत्य का ज्ञान” Featured Integral view of life) Realization of the sublime Truth) है जो “समग्र जीवन-दृष्टि” महर्षि अरविन्द महर्षि अरविन्द का शिक्षा-दर्शन मैकाले-पद्धति मैकाले-पद्धति को शीर्षासन कराता
समाज महिला यात्रियों की सुविधाओं की अनदेखी क्यों ? March 27, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment "आपको पता होना चाहिए कि हमारे जिले की अधिकांश आबादी पहाड़ी गांव में बस्ती हैं जहां आने के लिए किसी क्षेत्र में रोड है तो कार नहीं और कार है तो किराया देने के पैसे नही। कई किलोमीटर दूर से महिलाएं पुंछ शहर आती हैं परंतु बस स्टैंड में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सीमा क्षेत्र होने के कारण अधिकतर विकलांग हैं। ऐसे रोगियों में महिलाएं भी होती हैं और उन्हें जब जम्मू ले जाया जाता है तो उनके लिए रास्ते में शौच का प्रबंध नहीं होता। क्या यह एक राष्ट्रीय समस्या नहीं है?, क्या इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत नहीं है? Read more » no washroom on jammu poonch rajmarg जम्मू पुंछ राजमार्ग सरकारी शौचालय
बच्चों का पन्ना समाज हम सबकी जिम्मेदारी है : पिछड़े बालकों की समस्याएँ March 26, 2017 / March 27, 2017 by शालिनी तिवारी | Leave a Comment विकास व्यक्ति की अनुवांसिक क्षमताओं एवं वातावरण के मध्य होनें वाली आंतरिक क्रिया का परिणाम होता है. बालक की अनुवांसिक क्षमताओं का विकास वातावरण से ही होता है. इसके अतिरिक्त स्वयं वातावरण भी बालक के विकास की दिशा, दशा और गति निर्धारित करनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. Read more » Featured पिछड़े बालकों की विशेषताएँ पिछड़े बालकों की समस्याएँ प्रतिभाशाली बालक प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताएँ प्रतिभाशाली बालकों की समस्याएँ
शख्सियत समाज #बलिदानदिवस : “एक ऐसा पत्रकार जिसके लिए पत्रकारिता सदैव एक मिशन रहा” March 25, 2017 by अनुज हनुमत | Leave a Comment इसी कलम ने ब्रिटिश हूकूमत की जड़ें हिला दी थी । इसी कलम से नेपोलियन भी डरा करता था । लेकिन आज के समय में कुछ गंदी और ओछी मानसिकता के हमारे भाई लोगों (पत्रकारों) की वजह से इस कलम की महत्ता में गिरावट आई है । लेकिन आज भी कुछ ऐसे कलम के सिपाही हैं जिनके ऊपर मौजूदा पत्रकारिता को गर्व है । आज गणेश शंकर विद्यार्थी जी हमारे बीच नही हैं लेकिन उनका वो मिशन जरूर है जिसके लिए उन्होंने अपने प्राणों को बलिदान कर दिया । ऐसे महान व् कर्मठ व्यक्तित्व को शत शत नमन ........ Read more » Featured Ganesh Shankar Vidhyarth गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता और गणेश शंकर विद्यार्थी
जन-जागरण समाज परिवार को पतन की पराकाष्ठा न बनने दे March 24, 2017 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग वर्तमान दौर की एक बहुत बड़ी विडम्बना है कि पारिवारिक परिवेश पतन की चरम पराकाष्ठा को छू रहा है। अब तक अनेक नववधुएँ सास की प्रताड़ना एवं हिंसा से तंग आकर भाग जाती थी या आत्महत्याएँ कर बैठती थी वहीं अब नववधुओं की प्रताड़ना एवं हिंसा से सास उत्पीड़ित है, परेशान है। वे […] Read more » Featured पतन की पराकाष्ठा परिवार
समाज कभी इन असली जंगलियों से भी मिलिए March 22, 2017 by अरुण तिवारी | Leave a Comment बांस, बहेड़ा, टीम, गांभरी, सेब, गुलमोहर, आम, बरगद... जादव द्वारा लगाये वृक्षों की सूची विविध और इतनी लंबी है कि आप हम पढ़ते-पढ़ते भले ही थक जायें; श्री जादव इन्हे लगाते-पालते-पोषते अभी भी नहीं थके हैं। उनकी सुबह आज भी तीन बजे शुरु होती है। यूं श्री जादव अभी भी दूध बेचते हैं, पर अब वह साधारण दूध विक्रेता नहीं हैं। मवेशी इनकी रोजी-रोटी भी हैं और इनके वृक्षारोपण को मिलने वाली खाद का स्त्रोत भी। पिछले 35 वर्षों मंे राॅयल बंगाल टाइगरों ने उनकी 85 गायों, 95 भैंसों और 10 सुअरों का शिकार किया है; बावजूद इसके जादव को टाइगर सबसे प्रिय हैं। अगस्त, 2012 में एक गैंडे का शिकार होने पर श्री जादव और उनके सबसे छोटे बेटे ने कई दिन तक खाना नहीं खाया। Read more »
समाज पानी के लिए हथियार नहीं, हाथ बढ़ाइए March 20, 2017 by मनोज कुमार | Leave a Comment एक अनुमान के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष 2,600 से 3,500 घन किलो मीटर के बीच जल की वास्तविक खपत है। मनुष्य को जिंदा रहने के लिए प्रतिवर्ष एक घन मीटर पीने का पानी चाहिए, परन्तु समस्त घरेलू कार्यों को मिलाकर प्रतिव्यक्ति प्रतिवर्ष 30 घन मीटर जल की आवश्यकता होती है। विश्व जल की खुल खपत 6 फीसदी हिस्सा घरेलू कार्यों में प्रयुक्त होता है। कृषि कार्यों में 73 प्रतिशत जल और उद्योगों में 21 प्रतिशत जल की खपत होती है। Read more » पानी
शख्सियत समाज योगीराज का लाॅगइन ‘विकास’ है तो पासवर्ड ‘हिंदुत्व’। March 20, 2017 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे। रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया। विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। गौर से देखें थे विक्रमादित्य और आज के ‘योग्यादित्य’ के समय की परिस्थितियां एक जैसी हैं Read more » Featured Yogi Adityanath yogi Adityanath as cm in uttar pradesh पासवर्ड ‘हिंदुत्व’ योगीराज का लाॅगइन ‘विकास’
समाज बदलाव के लिए तैयार हो जाओ March 20, 2017 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment फौज़िया रहमान खान “बदलाव के लिए तैयार हो जाओ” इस नारे के साथ कुछ समय पहले देश भर में विश्व महिला दिवस का आयोजन किया गया। परंतु महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव की प्रक्रिया तब तक पूरी नही हो सकती जब तक शिक्षा उसके साथ जुड़ न जाए। इस सिलसिले में जेंडर और […] Read more » बदलाव के लिए तैयार हो जाओ
समाज इस्लाम,संगीत,फ़तवा और फ़तवेबाज़ March 20, 2017 by तनवीर जाफरी | Leave a Comment तनवीर जाफ़री इस्लाम धर्म से संगीत के क्या रिश्ते हैं,रिश्ते हैं भी या नहीं यह बहस काफी पुरानी है। निश्चित रूप से इस्लाम धर्म का ही एक वर्ग संगीत को इस्लाम विरोधी बताता है। परंतु इस्लाम के ही अनेक वर्ग या फिरके ऐसे भी हैं जो संगीत अथवा संगीत से संबंधित धुनों के प्रति अपना […] Read more » Featured इस्लाम नाहीद आफरीन फ़तवा फ़तवेबाज़ संगीत सुहाना सईद