समाज कानून से नहीं, आदतें सुधारने से बचेगा पानी April 22, 2016 by प्रवीण दुबे | 2 Comments on कानून से नहीं, आदतें सुधारने से बचेगा पानी प्रवीण दुबे ‘रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे, मोती मानुष चून।। रहीम के इस प्रेरणादायी दोहे से यदि हमने सीख ली होती तो शायद आज पेयजल के लिए हमारी सरकार को कानून बनाने की बात नहीं कहना पड़ती। सच पूछा जाए तो हमारा दर्शन, हमारी संस्कृति और हमारे पौराणिक ग्रंथों […] Read more » Featured आदतें सुधारने से बचेगा पानी दिल्ली में पानी की किल्लत बचेगा पानी वाहनों की सफाई में पानी का बर्बादी।
समाज सभ्य समाज की असभ्यता’-भाग-2 April 21, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment पश्चिमी अद्ध असभ्यता ने भारत की सभ्यता के साथ टी.वी. कल्चर और ‘बैड रूम कल्चर’ के द्वारा भयंकर छेड़छाड़ करनी आरम्भ की। इन दोनों चीज़ों को हमारे युवावर्ग ने बड़ी उत्सुकता से पकड़ा। उसने वीर्यनाश को मनोरंजन का साधन मान लिया। अब जो उसके सामने आ जाये वह उसी के साथ रासलीला करना चाहता है। […] Read more » Featured असभ्यता सभ्य समाज
कला-संस्कृति समाज भगवान महावीर की शिक्षायें मानव कल्याण के लिए! April 19, 2016 / April 21, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment महावीर जयन्ती पर जनहित में प्रकाशन हेतु विशेष लेख – डा.. जगदीश गांधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक, सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ (1) मानवता के लिए त्याग करने वाला महावीर है:- महावीर का जन्म वैशाली (बिहार) के एक राज परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशिला था। बचपन से […] Read more » Featured भगवान महावीर भगवान महावीर की शिक्षायें महावीर मानव कल्याण
विधि-कानून समाज भारतीय न्याय व्यवस्था पर श्वेत-पत्र April 19, 2016 by एडवोकेट मनीराम शर्मा | Leave a Comment उदारीकरण से देश में सूचना क्रांति, संचार, परिवहन, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सुधार अवश्य हुआ है किन्तु फिर भी आम आदमी की समस्याओं में बढ़ोतरी ही हुई है| आज भारत में आम नागरिक की जान-माल-सम्मान तीनों ही सुरक्षित नहीं हैं| ऊँचे लोक पदधारियों को सरकार जनता के पैसे से सुरक्षा उपलब्ध करवा देती है और […] Read more » Featured swet patra on indian judicial system भारतीय न्याय व्यवस्था श्वेत पत्र
समाज सभ्य समाज की असभ्यता April 19, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment मर्यादाऐं स्थापित करना जितना कठिन है उतना ही इन्हें तोड़ डालना सरल है। सदपरम्पराओं के विकास में आपको पर्याप्त समय लग सकता है और उन्हें स्थापित करने में आपको पर्याप्त परिश्रम भी करना पड़ सकता है, परन्तु उन्हें तोडऩे में न तो समय लगता है और ना ही किसी विशेष परिश्रम के करने की आवश्यकता […] Read more » Featured honour killing असभ्यता सभ्य समाज सभ्य समाज की असभ्यता
कला-संस्कृति समाज सद्भावना की परंपरा में देरी नहीं लगती April 18, 2016 by संजय स्वदेश | Leave a Comment पटना का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में रामवनवी के दिन आयोध्या के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। राम के जन्मोत्सव के जय घोष के दौराना मस्जिद में नामाज अता की गई। मुस्लिम भाइयों में हिंदू भाइयों से गले मिलकर सद्भावना का उदहरण पेश की। एक और उदाहरण देखिए। राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में […] Read more » Featured सद्भावना की परंपरा
जन-जागरण समाज सफलता के लिये अच्छाई का निवेश जरूरी है April 16, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग अच्छाई और सफलता की कसौटी क्या है? इनका कोई लेबल नहीं, न कोई आवरण है। व्यक्ति की कार्यशैली, व्यवहार, कर्म, वाणी, रहन-सहन, प्रकृति और स्वभाव ही उसका मापदंड है। सफलता भाग्य की फसल और पुरुषार्थ की निष्पत्ति है। हर किसी को वह नसीब नहीं होती, यह सतत जागरूकता, जीवन के प्रति सकारात्मकता एवं […] Read more » Featured success
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 April 15, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 4 Comments on देश का वास्तविक गद्दार कौन ? भाग-14 गांधीजी से चार गुणा अधिक जेल में रहे सावरकरजी हमारे क्रांतिकारियों ने हर वर्ष की भांति 1933 के प्रारंभ से ही कई स्थानों पर बम विस्फोट कर करके सरकार की नाक में दम कर दिया था। सरकार का उन दिनों वश चलता तो वह एक क्रांतिकारी को भी छोड़ती नही। परंतु क्रांतिकारियों के पीछे जनता […] Read more » Featured who is the real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन
महत्वपूर्ण लेख राजनीति लेख समाज साहित्य देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-13 April 14, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment गांधीजी और सावरकरजी की कार्य शैली में था मौलिक मतभेद अब हम देखेंगे कि गांधीजी और वीर सावरकरजी की कार्यशैली व चिंतनशैली में कितना मौलिक मतभेद था? सावरकर जी ने उन मुस्लिम लीगी और अलगाववादी मुस्लिम नेताओं को लताड़ते हुए कहा था, जो देश के बंटवारे की कीमत पर ही स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग करने […] Read more » Featured real traitor of India देश का वास्तविक गद्दार कौन
शख्सियत समाज महावीर हैं जीवन की सार्थकता के प्रतीक April 13, 2016 by ललित गर्ग | Leave a Comment महावीर जयंती 19 अप्रैल, 2016 पर विशेषः ललित गर्ग महावीर का संपूर्ण जीवन स्व और पर के अभ्युदय की जीवंत प्रेरणा है। लाखों-लाखों लोगों को उन्होंने अपने आलोक से आलोकित किया है। इसलिए महावीर बनना जीवन की सार्थकता का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष भगवान महावीर की जन्म-जयन्ती हम मनाते हैं। समस्त विश्व में जैन समाज […] Read more » महावीर जयंती
महत्वपूर्ण लेख लेख समाज देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-12 April 12, 2016 by राकेश कुमार आर्य | 1 Comment on देश का वास्तविक गद्दार कौन? भाग-12 सावरकरजी के हिन्दुत्व और नेहरूजी की ‘हिन्दुस्तान की कहानी’ का सच स्वतंत्रता आंदोलन के काल में हमारे क्रांतिकारी जब भी कोई ‘आतंकी घटना’ कर ब्रिटिश सरकार को हिलाने का प्रशंसनीय कार्य करते थे तभी हमारे कांग्रेसी नेताओं की कंपकंपी छूट पड़ती थी। उस कंपकंपी से मुक्ति पाने के लिए गांधीजी की कांग्रेस तुरंत एक ‘माफीनामा’ […] Read more » Featured who is the real traitor of India गद्दार देश का वास्तविक गद्दार कौन सावरकर
समाज विकास का एक पैमाना अंधविश्वास और कुप्रथा निर्मूलन भी हो April 12, 2016 / April 18, 2016 by शैलेन्द्र चौहान | Leave a Comment शैलेन्द्र चौहान हमारे देश को आजाद हुए 68 वर्ष हो चुके हैं और हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे हैं। देश के अनेकों सर्वोच्च पदों को महिलाएं सुशोभित कर रही हैं किंतु महिलाओं पर अत्याचार वाली कुप्रथाएं बदस्तूर जारी हैं। देश चाहे कितनी भी तरक्की कर रहा हो लेकिन कुछ गलत हरकतें इसकी शान में […] Read more » Featured अंधविश्वास कुप्रथा निर्मूलन विकास कापैमाना