समाज केवल आदिवासी ही भारत के मूलवासी हैं। March 8, 2016 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 2 Comments on केवल आदिवासी ही भारत के मूलवासी हैं। डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ हमारे कुछ मित्र दिन-रात “जय मूलनिवासी” और “मूलनिवासी जिंदाबाद” की रट लगाते नहीं थकते। बिना यह जाने और समझे कि मूलनिवासी का मतलब क्या होता है? साथ ही भारत के 85 फीसदी लोगों को भारत के मूलनिवासी घोषित करके, शेष आबादी ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय को विदेशी बतलाते हैं। आश्चर्य […] Read more » केवल आदिवासी ही भारत के मूलवासी हैं।
महिला-जगत समाज नारी सशक्तिकरण : भ्रम और सत्य March 8, 2016 / March 8, 2016 by अरुण तिवारी | Leave a Comment निर्भया के साथ जो हुआ, वह दुखद है; काला धब्बा है, किंतु उसकी प्रतिक्रिया में जो हुआ, क्या वह वाकई इस बात की गारंटी है कि आगे से हर निर्भया, अपने नाम के अनुरूप भयरहित जीवन का पर्याय बन सकेगी ? क्रिया की प्रतिक्रिया को आधार बनाकर निर्भया के नाम पर दो निर्णय हुए: पहला, […] Read more » Featured feaured नारी सशक्तिकरण : भ्रम और सत्य
लेख समाज साहित्य राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाली रानी जय राजकुमारी March 7, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment संत और राष्ट्र जागरण जब-जब देश-धर्म की हानि हुई है तब-तब भारत के संत महात्माओं ने भी अपने राष्ट्रधर्म का पालन करते हुए धर्म जागरण और राष्ट्र जागरण करने का पुनीत कार्य करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। वैसे भी राष्ट्र में शांति और सुव्यवस्था का सुंदर परिवेश ही व्यक्ति को धर्मशील बनाता है, और […] Read more » Featured Rani Jairajkumari sacrificed for rammandir रानी जय राजकुमारी राम मंदिर के लिए बलिदान देने वाली रानी जय राजकुमारी
महिला-जगत समाज अर्द्धनारीश्वर की पूर्ण अवधारणा की प्रतीक भारतीय नारी March 7, 2016 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment कृतिका हिन्दू परम्परा के परिवारों में सामान्यतः पितृसत्तात्मक समाज ही होते हैं, किंतु इसके साथ साथ सदा से यह स्थापना भी रही कि नारी प्रथम प्रणाम की अधिकारी है. इसके फलस्वरूप ही लिखा गया कि – पूजनीय आधारभूते मातृशक्ति नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते पितृसत्तात्मक समाज का जो एक प्रमुख लक्षण माना जाता है, वह यह कि […] Read more » Featured Indian women अर्द्धनारीश्वर की पूर्ण अवधारणा की प्रतीक भारतीय नारी
कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार समाज बारह साल बाद महाशिवरात्रि का दुर्लभ शिवयोग संयोग March 6, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार सात मार्च को यानी सोमवार को मनाया जाएगा। देवों के देव महादेव की आराधना का शिवरात्रि महापर्व सोमवार के दिन शिवयोग धनिष्ठा नक्षत्र में सात मार्च को है। सोमवार का दिन तो वैसे भी शिव का प्रिय दिन है। इस दिन दुर्लभ शिवयोग का संयोग श्रद्घालुओं के लिए विशेष फलकारी […] Read more » Featured महाशिवरात्रि
समाज जाट आरक्षण आंदोलन : सुलगते सवाल March 6, 2016 by तनवीर जाफरी तनवीर जाफ़री पिछले दिनों देश का सबसे खुशहाल एवं प्रगतिशील समझा जाने वाला हरियाणा राज्य जाट आरक्षण आंदोलन के नाम पर भीड़तंत्र का शिकार हो गया। महाभारत की इस ऐतिहासिक धरती को वैसे तो सांप्रदायिक सद्भाव,फसलों की अच्छी पैदावार तथा दूग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है। इस राज्य का प्रमुख नारा भी यही है- […] Read more » Featured जाट आरक्षण आंदोलन जाट आरक्षण आंदोलन सुलगते सवाल सुलगते सवाल
कला-संस्कृति महिला-जगत समाज भारतीय संस्कृति में नारी कल, आज और कल March 4, 2016 by डॉ. सौरभ मालवीय | Leave a Comment डॉ.सौरभ मालवीय ‘नारी’ इस शब्द में इतनी ऊर्जा है कि इसका उच्चारण ही मन-मस्तक को झंकृत कर देता है, इसके पर्यायी शब्द स्त्री, भामिनी, कान्ता आदि है,इसका पूर्ण स्वरूप मातृत्व में विलसित होता है। नारी, मानव की ही नहीं अपितु मानवता की भी जन्मदात्री है, क्योंकि मानवता के आधार रूप में प्रतिष्ठित सम्पूर्ण गुणों की वही […] Read more » Featured women in Indian culture भारतीय संस्कृति में नारी
समाज हम नज़रबन्द हो गये हैं ! March 4, 2016 by कीर्ति दीक्षित | Leave a Comment कीर्ति दीक्षित वो बेधड़क हंसी! वो मुहल्लों की चुगलियां ! वो आपसी संवाद ! सब आश्चर्यसूचक चिन्ह के भीतर के कथन हो गये हैं । खासकर शहरी जीवन में, अब दिल्ली को ही ले लीजिए कभी आप मेट्रो में यात्र कीजिए तो उम्र कुछ भी हो लेकिन तनाव में डूबे चेहरे और टच फोन पर […] Read more » Featured हम नज़रबन्द हो गये हैं !
समाज उर की बात March 4, 2016 / March 4, 2016 by गोपाल बघेल 'मधु' | Leave a Comment अच्छा है कि समाचार पत्रों या जालपत्र समूहों पर हम लोग एक द्रष्टा या मुसाफ़िर के रूप में रहें व आत्म निरीक्षण करते हुए विश्व द्रष्टि से देखें या लिखें । प्रश्न स्वयं से पूछें दूसरों से नहीं । आप अपने विचार लिखें । जिस की कुछ बोलने की इच्छा होगी बोल देगा । पूछना […] Read more » Featured उर की बात
समाज मोहन भागवत की तो सुनो! February 26, 2016 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | 2 Comments on मोहन भागवत की तो सुनो! राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संचालक मोहन भागवत की दाद देनी पड़ेगी। लगता है कि देश के सार्वजनिक जीवन में वे ही मर्द हैं, जो ईमान की बात खुलकर कह रहे हैं। उन्होंने अभी फिर कहा है कि देश आरक्षण पर दुबारा विचार करे। स्वयं बाबा साहेब आंबेडकर ने भी कहा था कि यह आरक्षण […] Read more » Featured Mohan Bhagwat opinion on reservation मोहन भागवत की तो सुनो!
समाज आश्रम व्यवस्था और साम्यवाद February 24, 2016 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment अब सारे कार्यों के लिए लोग राज्य की ओर टकटकी लगाये रहकर देखते रहते हैं। अधिकार प्रेमी लोग प्रमादी होते हैं और कम्युनिस्टों ने ऐसे ही समाज का निर्माण किया है। जबकि भारत की आश्रम-व्यवस्था का तो शाब्दिक अर्थ भी आश्रम=श्रम से परिपूर्ण है। ब्रहमचर्याश्रम में विद्याध्ययन का श्रम है, गृहस्थ में गृहस्थी को चलाने […] Read more » Featured आश्रम व्यवस्था और साम्यवाद
विधि-कानून विविधा समाज उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता February 23, 2016 by प्रो. एस. के. सिंह | 1 Comment on उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता अभी हाल ही में तेलंगाना सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर कुलपति की नियुक्ति के लिये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित योग्यताओं में परिवर्तन किया है। विश्वविद्यालय प्रणाली में प्रोफेसर अथवा ख्याति प्राप्त शोध/अकादमिक प्रशासनिक संगठन में समतुल्य पद पर 10 वर्ष केअनुभव के स्थान पर तेलंगाना सरकार ने यह 5 वर्ष कर दिया […] Read more » Featured उच्च शिक्षा में स्वायत्तता एवं एकरूपता