समाज गिग-वर्कर्सः डिजिटल सुविधा की चकाचौंध में पसीने का अंधेरा January 2, 2026 / January 2, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment अपना व परिवार का पोषण करने वाले इन युवा गिग-वर्कर्स को अकसर सरपट दौड़ती मोटरसाइकिलों पर, भारी थैलों के साथ ऊँची इमारतों की सीढ़ियाँ चढ़ते देखा जा सकता है। समय सीमा का दबाव इतना तीव्र होता है कि ज़रा-सी देरी पर आर्थिक दंड झेलना पड़ता है। Read more » गिग-वर्कर्स
समाज सर्वनाश की ओर ले जाता तूफान December 31, 2025 / December 31, 2025 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment आज के युवाओं को प्रभावित करने वाली चीजों में से मुख्य हैं- इंटरनेट, अश्लील एवं फूहड़ फिल्में, पब संस्कृति, ड्रग्स, फैशन, महंगे मोबाइल, जिनमें एसएमएस एवं एमएमएस करना, महंगी गाड़ियां एवं न सबके लिए मोटी रकम। ये चीजें ऐसी हैं, जो युवाओं में रचनात्मक एवं सृजनात्मक सोच के बजाय, घातक सोच को अंजाम दे रही हैं, Read more » युवा युग
समाज पारिवारिक परंपरा को बोझ नहीं, वैश्विक समाधान समझें December 31, 2025 / December 31, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment वैश्विक परिवार दिवस, शान्ति और साझेदारी का एक दिन, संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिवर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी समारोह, ‘शान्ति में एक दिन’ से विकसित हुआ। Read more » वैश्विक परिवार दिवस
समाज आखिर कब रुकेंगे सडक़ हादसे? December 30, 2025 / December 30, 2025 by अमरपाल सिंह वर्मा | Leave a Comment हाल ही में केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में सडक़ हादसों को लेकर जो कहा, वह केवल एक मंत्री का बयान नहीं था बल्कि भावुक, विचलित और एक बेचैन इंसान की स्वीकारोक्ति भी थी कि सडक़ हादसे ऐसी राष्ट्रीय त्रासदी है, जिसे हम ठीक से रोक नहीं पा रहे। Read more » When will road accidents stop कब रुकेंगे सडक़ हादसे
समाज बढ़ते कामकाजी जीवन के दबाव में बिखरते परिवार December 30, 2025 / December 30, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment व्यस्ततम, घटनाबहुल एवं कामकाजी जिंदगी जीने के साथ परिवार के लिए वक्त निकालना आज के इंसान के लिए ज्यादा जरूरी हो गया है। परिवार से यह जुुड़ाव व्यक्ति को न केवल भावनात्मक रूप से, बल्कि शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी खुशनुमा Read more » दबाव में बिखरते परिवार बिखरते परिवार
समाज नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति की ओर लाल गलियारा December 29, 2025 / December 29, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment माओवादी अर्से से देश में एक ऐसी जहरीली विचारधारा रही है, जिसे नगरीय बौद्धिकों का समर्थन मिलता रहा है। ये बौद्धिक नक्सली संगठनों को आदिवासी समाज का हितचिंतक मानते रहे हैं, जबकि जो आदिवासी नक्सलियों के विरोध में रहे, उन्हें इनकी हिंसक क्रूरता का शिकार होना पड़ा है। बावजूद इसे दुर्भाग्य Read more » Red Corridor towards complete freedom from Naxalite terror नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति
समाज वीर बाल दिवस: युवा भारत की प्रेरणा December 27, 2025 / December 27, 2025 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment डा. शिवानी कटारा भारत का इतिहास केवल तिथियों और युद्धों का संकलन नहीं है, बल्कि वह मानवीय साहस, नैतिक दृढ़ता और आत्मबल की जीवंत परंपरा है। वीर बाल दिवस, जो प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है, इसी परंपरा का एक अमर अध्याय है। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के […] Read more » युवा भारत की प्रेरणा वीर बाल दिवस
शख्सियत समाज त्याग और बलिदान के सच्चे प्रतीक गुरू गोबिंद सिंह December 27, 2025 / December 27, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment गुरु गोबिंद सिंह जयंती (27 दिसंबर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलसिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व इस वर्ष 27 दिसंबर को मनाया जा रहा है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1667 ई. में पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 विक्रम संवत् को पटना […] Read more » a true symbol of renunciation and sacrifice Guru Gobind Singh गुरु गोबिंद सिंह जयंती
समाज आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य क्या है December 27, 2025 / December 27, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment अगर आप आज के दलित संगठनों की गतिविधियों का आकलन करेंगे तो पाएंगे कि वो किसी एक लक्ष्य को लेकर चल रहे है और हर संगठन किसी विशेष जाति या वर्ग से जुड़ा होता है । सम्पूर्ण समाज की लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा है, सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं । आजकल सभी राजनीतिक दल सबसे गरीब आदमी की बात करके अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकते है । Read more » What is the real aim of reservation आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य
समाज हर साल दो लाख लोगों के देश की नागरिकता छोड़ने के मायने December 27, 2025 / December 27, 2025 by राजेश जैन | Leave a Comment देश की नागरिकता छोड़ने वालों के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकेत हैं। जब संसद को बताया जाता है कि 2011 से 2024 के बीच 20.6 लाख भारतीय देश से कानूनी रिश्ता तोड़ चुके हैं तो सवाल स्वाभाविक है, आखिर ऐसा क्या बदल गया है? Read more » The meaning of two lakh people giving up their citizenship every year देश की नागरिकता छोड़ने के मायने
समाज भाई दूर, पड़ोसी नेड़े — आधुनिक जीवन में पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता December 27, 2025 / December 27, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment आधुनिक और तथाकथित उन्नत जीवन-शैली में पड़ोसी संबंध लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। महानगरों की ऊँची-ऊँची इमारतों में लोग वर्षों तक साथ रहते हैं, फिर भी एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानते। ऊपर-नीचे या अगल-बगल की मंज़िलों में रहने वाले लोग केवल औपचारिक ‘नमस्ते’ तक सीमित रह गए हैं। Read more » पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता
शख्सियत समाज गुुरु गोविन्द सिंहः हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षक December 27, 2025 / December 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (वर्तमान बिहार) में हुआ। उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। Read more » Guru Govind Singh: Protector of Hindu religion and culture गुुरु गोविन्द सिंह जयन्ती