समाज भारत की अधिकांश समस्याओं की जड़ है अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि April 26, 2026 / April 26, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment भारत में जनसंख्या वृद्धि का स्वरूप जटिल है, क्योंकि एक ओर कुल प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है, तो दूसरी ओर जनसंख्या का कुल आकार इतना विशाल है कि प्रतिवर्ष करोड़ों लोगों की वृद्धि अभी भी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल प्रजनन दर लगभग 2.0 के आसपास आ चुकी है Read more » अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि
समाज बेटी का घर संवार सकती है समझदार माँ April 26, 2026 / April 26, 2026 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment यहां पर माँ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। एक समझदार माँ वही है जो बेटी की हर बात पर आंख मूंदकर समर्थन न करे, बल्कि उसे संयम, धैर्य और समझदारी से काम लेने की सीख दे। यदि बेटी को हर छोटी बात पर प्रतिक्रिया देने की बजाय सहनशीलता और संवाद की कला सिखाई जाए, तो कई विवाद शुरुआत में ही समाप्त हो सकते हैं। Read more » A wise mother can improve her daughter's home. बेटी का घर
शख्सियत समाज आचार्य महाश्रमण की निर्गुण-चेतना से विश्व-शांति की नई दिशा April 24, 2026 / April 24, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment आचार्य महाश्रमण का जीवन ‘रहें भीतर, जीएँ बाहर’ के सूत्र पर आधारित है। यह सूत्र आधुनिक जीवन की जटिलताओं में संतुलन स्थापित करने का एक अद्वितीय मार्ग प्रस्तुत करता है। आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों की दौड़ में अपने भीतर के शून्य को अनदेखा कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप तनाव, असंतोष और हिंसा का जन्म होता है। Read more »
समाज कृत्रिम बुद्धिमत्ता: सुविधा का वरदान या मूल्यों का संकट April 21, 2026 / April 21, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक और चिंताजनक पक्ष है साइबर अपराधों में इसका बढ़ता उपयोग। आज अपराधी किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करके उसके परिचितों को धोखा देने में सक्षम हो गए हैं। Read more » कृत्रिम बुद्धिमत्ता
समाज छात्रों का आत्मघातः सपनों का बोझ है या सिस्टम की नाकामी? April 21, 2026 / April 21, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में दो महीनों के भीतर चार छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं केवल एक संस्थान की त्रासदी एवं नाकामी नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय समाज, शिक्षा व्यवस्था और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर लगा गहरा प्रश्नचिह्न हैं। ये घटनाएं हमें झकझोरती हैं कि Read more » छात्रों का आत्मघात
समाज भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग April 21, 2026 / April 21, 2026 by प्रो. एस. के. सिंह | Leave a Comment हजारों सालों से पूरी पृथ्वी को एक मानने एवं मानवता के समग्र कल्याण पर आधारित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे भारतीय सिद्धांतों में विकास और प्रगति का अर्थ किसी एक व्यक्ति या किसी एक राष्ट्र का हित नहीं बल्कि समग्र रूप में पूरी मानवता का कल्याण करना है, Read more » The path to global welfare lies in Indianness भारतीयता भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग
समाज सार्वजनिक खपत पर सरकार लापरवाह April 21, 2026 / April 21, 2026 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment शहर के कई हिस्सों में दिन के समय भी नगर परिषद की स्ट्रीट लाइटें जलती रहती देखी जाती हैं, ना तो परिषद व ना ही जिला प्रशासन की इस ओर ध्यान दे पा रहा है। खास बात तो यह है कि अधिकतर लाइटों Read more » मंहगा विद्युत टैरिफ
समाज अंतरजातीय विवाह: शास्त्र सम्मत, सामाजिक आवश्यकता और राजनीतिक चेतना का प्रश्न April 20, 2026 / April 20, 2026 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment भारतीय संस्कृति की महानता उसकी लचीलेपन और समावेशी दृष्टिकोण में निहित है। अंतरजातीय विवाह, जिसे अक्सर आधुनिक प्रगतिशील विचार माना जाता है, वास्तव में हमारे प्राचीन शास्त्रों और इतिहास में गहराई से निहित एक मान्यतापूर्ण प्रथा रही है। यह न केवल शास्त्र सम्मत है, बल्कि आज के विखंडित समाज—जहाँ जातिवाद की जड़ें गहरी हैं और […] Read more »
समाज सेवा परमो धर्माः April 20, 2026 / April 20, 2026 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह भी सेवा है। आज भी अनेक राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक संगठन तो अनेक लोग व्यक्तिगत स्तर में सेवा कार्य करते हुए बेशक अपने बैनर लगाते हैं। Read more » सेवा परमो धर्माः
समाज आखिर क्यों टूट रहे हैं छात्र? April 20, 2026 / April 20, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि युवाओं में आत्महत्या के मामलों में पारिवारिक दबाव एक प्रमुख कारण होता है। विशेष रूप से उन छात्रों के लिए, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, यह दबाव और भी अधिक होता है। उनके माता-पिता अपनी सीमित आय का बड़ा हिस्सा उनकी पढ़ाई पर खर्च करते हैं, और बदले में उनसे सफलता की अपेक्षा करते हैं। ऐसे में यदि छात्र किसी भी Read more » राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र में 4 आत्महत्याएँ
विधि-कानून समाज विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच नई खाई April 20, 2026 / April 20, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment आधुनिकता के संक्रमणकालीन दौर में सबसे अधिक यदि कोई संस्था प्रश्नों के घेरे में है, तो वह विवाह और रिश्तों की पारंपरिक अवधारणा है। बदलती जीवनशैली, आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीक, वैश्वीकरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चेतना ने रिश्तों की परिभाषा, अपेक्षाएँ और संरचना-सब कुछ बदल दिया है Read more » A new divide between the institution of marriage and individual freedom विवाह संस्था विवाह संस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता
समाज ‘वात्सल्य पीठ’: करुणा, साधना और आत्मोन्नति का दिव्य तीर्थ April 17, 2026 / April 17, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment दिल्ली जैसे महानगर की आपाधापी, भागदौड़ और संवेदनहीनता के बीच यदि कोई ऐसा स्थान निर्मित हो, जहाँ पहुंचते ही मन शांत हो जाए, आत्मा को विश्राम मिले और जीवन को Read more » ‘वात्सल्य पीठ’: करुणा वात्सल्य पीठ’ साधना और आत्मोन्नति का दिव्य तीर्थ