मीडिया शख्सियत समाज सच्चे पत्रकार मार्क टली को विनम्र श्रद्धांजलि January 27, 2026 / January 27, 2026 by शम्भू शरण सत्यार्थी | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी अचानक विलियम मार्क टली का नाम सुनते ही समय जैसे पीछे लौट गया। नई दिल्ली में उनके निधन की खबर आई और उसके साथ ही पत्रकारिता के एक पूरे युग के अंत का एहसास हुआ। यह सिर्फ़ किसी एक वरिष्ठ पत्रकार के जाने की सूचना नहीं थी, बल्कि उस भरोसे, उस नैतिकता और उस […] Read more » विलियम मार्क टली
समाज हनी ट्रैप: भय, बदनामी और अपराध का संगठित जाल January 23, 2026 / January 23, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में शामिल कुछ महिलाएं योजनाबद्ध ढंग से आम नागरिकों से संपर्क साधती थीं, उनसे दोस्ती और भावनात्मक नजदीकी बढ़ाती थीं, फिर उन्हें आपत्तिजनक परिस्थितियों में फंसा कर झूठे दुष्कर्म, Read more » हनी ट्रैप
शख्सियत समाज देश के असली हीरो व अजेय योद्धा ‘नेताजी सुभाष बोस’ January 23, 2026 / January 23, 2026 by डॉ. पवन सिंह मलिक | Leave a Comment डॉ. पवन सिंह ‘बिना कीमत चुकाए कुछ हासिल नहीं होता और आज़ादी की कीमत है शहादत’ आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों को इस आह्वान के साथ ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ नारे के द्वारा प्रेरित करने वाले व्यक्तित्व का नाम है सुभाष बोस. जय हिंद तथा दिल्ली चलो की प्रेरणा थे सुभाष। […] Read more » नेताजी सुभाष बोस
समाज बालिका विकास के बन्द दरवाजे खोलने का समय January 23, 2026 / January 23, 2026 by ललित गर्ग | Leave a Comment राष्ट्रीय बालिका दिवसः 24 जनवरी 2026-ललित गर्ग-राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए जागरूकता बढ़ाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का दिन है, जिसकी शुरुआत 2008 में हुई; जिसके माध्यम से बालिकाओं की तस्वीर बदल रही है, जहाँ अब वे शिक्षा, खेल और नेतृत्व में आगे बढ़ रही हैं, […] Read more » राष्ट्रीय बालिका दिवसः
समाज वाइफ स्वैपिंग’ और हमारे रिश्तों की टूटती नींव: समाज का आईना January 23, 2026 / January 23, 2026 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment – डॉ. प्रियंका सौरभ कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन पर लिखना आसान नहीं होता। वे केवल शब्दों की नहीं, बल्कि सामाजिक, मानसिक और नैतिक साहस की भी माँग करते हैं। यह विषय भी उन्हीं में से एक है, जहाँ चुनौती केवल प्रस्तुति की नहीं, बल्कि उस सच को सामने लाने की है जिसे समाज […] Read more » वाइफ स्वैपिंग
समाज सुभाष चन्द्र बोस : जिनके नाम से अंग्रेजों के हृदय कांपते थे January 21, 2026 / January 21, 2026 by प्रमोद कुमार | Leave a Comment प्रमोद दीक्षित मलय ब्रिटिश शासन सत्ता की बेड़ियों में जकड़ी भारत माता की मुक्ति के लिए हुए स्वाधीनता समर की बलिवेदी पर वीर सपूतों ने निज जीवन की आहुति दी है। अपने सुवासित जीवन-पुष्पों की माला से भारत माता का कंठ सुशोभित किया है तो रुधिर से भाल पर अभिषेक भी। उन्हीं जननायकों में से एक महानायक बनकर उभरा जिसे विश्व सुभाष चन्द्र बोस के नाम से जानता है। सुभाष का जन्म 23 जनवरी, 1897 को कटक में प्रतिष्ठित वकील जानकी नाथ बोस एवं प्रभावती के कुल में हुआ था। 1919 में बी.ए. आनर्स प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में दूसरा स्थान प्राप्त किया। विवेकानन्द साहित्य के अध्ययन ने उनको राष्ट्रीय चेतना से समृद्ध किया और चिंतन-मनन करने की सुदृढ जमीन दी। पुत्र को आईसीएस बनाने की पिता की इच्छा का मान रखते हुए सुभाष 1919 में इंगलैण्ड के लिए रवाना हुए और आईसीएस परीक्षा न केवल उत्तीर्ण की बल्कि चौथा स्थान भी हासिल किया किन्तु हृदय में धधक रही देशप्रेम की ज्वाला के कारण अंग्रेजों की चाकरी को स्वीकार न कर भारत माता की सेवा-साधना का कंटकाकीर्ण पथ अंगीकार किया। फलतः सेवा से त्यागपत्र देकर जून 1921 में भारत वापस आकर कांग्रेस में महात्मा गांधी के सुझाव पर सुभाष जी कलकत्ता जाकर देशबंधु चितरंजन दास के साथ काम करने लगे। चितरंजन दास का उस समय बंगाल में बहुत प्रभाव था और आम जन में उनकी छवि एक उत्कृष्ट नेता की थी। दास ने कांग्रेस के अंदर ही ‘स्वराज्य दल’ बनाकर कलकत्ता महापालिका का चुनाव लड़ा और जीत अर्जित कर महापौर बने। तब उन्होंने सुभाष को महापालिका का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया। यह सुभाष के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत थी। यहां पर सुभाष ने अपनी कार्यशैली और दूरदृष्टि का परिचय देकर काफी नये और महत्वपूर्ण काम किए जिससे उनकी कार्यशैली और राजनीतिक सोच से सभी परिचित हुए और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई। साथ ही उनकी गिनती देश के अग्रणी नेताओं में होने लगी। उनके जीवन में समय पालन, लक्ष्य के प्रति समर्पण और अनुशासन का बहुत प्रभाव रहा जिसकी पृष्ठभूमि में विद्यार्थी जीवन में ही टेरीटोरियल आर्मी में रंगरूट के रूप में प्राप्त सैन्य प्रशिक्षण था। 1929 में कांग्रेस के अधिवेशन में सुभाष खाकी सैन्य गणवेश में उपथित होकर अध्यक्ष मोतीलाल नेहरु को सलामी दी। और आगे चलकर यही सैन्य अनुशासन ‘आजाद हिन्द फौज’ के गठन का दृढ आधार भी बना। 1933 से 1936 तक स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप प्रवास के दौरान आपने इटली के नेता मुसोलिनी और आयरलैण्ड के नेता डी. बलेरा से भेंट-विमर्श कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए सहयोग का वचन लिया। इसी दौरान आस्ट्रिया में निजी टाईपिस्ट एमिली शेंकेल की सेवा, समझ और भारत के प्रति उदात्त सोच से प्रभावित हो सुभाष ने उनसे विवाह कर लिया। वह भारत वापस आये। देश में सुभाष की लोकप्रियता उफान पर थी। 1938 में हरिपुरा में आयोजित कांग्रेस के 51वें अधिवेशन में गांधी जी ने सुभाषबाबू को अध्यक्ष मनोनीत किया और सम्मान में 51 बैलों द्वारा इनके रथ को खींचा गया। उस अवसर पर अध्यक्ष के रूप में दिया गया सुभाष का ओजस्वी भाषण दुनिया के प्रमुख भाषणों में शुमार किया जाता है। अध्यक्षीय कार्यकाल में आपने जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘योजना आयोग’ और विख्यात अभियंता विश्वेश्वरैया के नेतृत्व में ‘विज्ञान परिषद’ बनाई। कांग्रेस में सुभाष के बढ़ते प्रभाव और कार्यकर्ताओं पर मजबूत होती पकड़ से कांग्रेस के अन्दर ही कुछ नेताओं का प्रभामंडल कमजोर होने लगा और वे सुभाष को कमजोर करने की चालें चलने लगें। गांधी जी से भी मतभेद हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि 1939 के त्रिपुरा अधिवेशन में अध्यक्ष के मनोनयन की परम्परा के उलट कांग्रेस को चुनाव करवाना पड़ा। देश और कार्यकर्ताओं की पसंद सुभाष ने गांधी जी के समर्थित प्रत्याशी पट्टाभि सीतारमैया को पराजित कर दिया। जिस पर गांधी जी की टिप्पणी, ‘‘सीतारमैया की हार मेरी हार है,‘‘ से सुभाष बहुत व्यथित हुए क्योंकि उनके मन में गांधी जी के प्रति असीम आदर भाव था। देश जानता है कि विदेश प्रवास के दौरान सुभाष ने ही अपने एक रेडियो भाषण में गांधी जी को सर्वप्रथम ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्बोधित किया था लेकिन मतभेद शान्त होने की जगह बढ़ता गया। गांधी जी के कहने पर कार्यकारिणी के 15 पदाधिकारियों में से दो को छोड़कर शेष ने त्यागपत्र दे दिया तो दल की एकता और देश की मजबूती के लिए सुभाष ने विवश होकर अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया और कांग्रेस के अन्दर ही ‘फारवर्ड ब्लॉक’ बनाकर काम करने लगे लेकिन उन्हें कांग्रेस से निकाल दिया गया। अंग्रेजी शासन ने उनको घर पर नजरबन्द कर दिया पर सुभाष तो दूसरी ही मिट्टी के बने थे, उन्हें कैद रखना अंग्रेजों के लिए आसान न था। जनवरी 1941 में अपने घर पर नजरबंदी के दौरान ही ब्रिटिश पुलिस और जासूसों को चकमा देकर एक पठान के रूप में सुभाष निकल भागे और पेशावर, काबुल, मास्कों होते हुए जर्मनी पहुंचे। हिटलर एवं जर्मनी के अन्य नेताओं से भेंट कर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग का वचन प्राप्त किया और वहीं ‘आजाद हिन्द रेडियो’ की स्थापना की। वहां से आप जापान पहुंच कर जनरल तोजो से भेंट की और जापानी संसद को सम्बोधित किया। जापान के सहयोग से रासबिहारी बोस के मार्गदर्शन में ‘आजाद हिन्द फौज’ का गठन कर सिपाहियों और नागरिकों का आह्वान किया कि ‘तुम मूझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’। 5 जुलाई, 1943 को सिंगापुर में टाउन हॉल के सामने आजाद हिन्द फौज के वीर सिपाहियों के सम्मुख ओजस्वी भाषण देते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था जिसे प्रत्येक सिपाही ने हृदय से स्वीकार कर बर्मा (अब म्यांमार), कोहिमा, इम्फाल के मोर्चे पर अंग्रेजी सेना से मुकाबला कर दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। 21 अक्टूबर, 1943 को सुभाष ने आजाद हिन्दुस्तान की अंतरिम सरकार बनाई जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और युद्धमंत्री का दायित्व स्वयं निर्वहन किया। इस आजाद हिन्द सरकार को जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, आयरलैण्ड आदि 9 देशों ने मान्यता प्रदान की थी। और जापान सरकार द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह सुभाषबाबू की उस अस्थायी सरकार को भेंट किए गये थे जिसे सुभाष ने ‘शहीद’ और ‘स्वराज्य’ नाम दे अमर कर दिया। उस अस्थायी सरकार के गठन के 75 वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर अक्टूबर 2018 में भारत के प्रधानमंत्री मा0 नरेन्द्र मोदी द्वारा लालकिले पर तिरंगा ध्वज फहराकर उसके महत्व को रेखांकित किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद सुभाष आजादी की लड़ाई हेतु आवश्यक संसाधन जुटाने हेतु रूस जाने का निश्चय कर 18 अगस्त, 1945 को हवाई जहाज से निकले किन्तु रास्ते में ही वे लापता हो गये। कहा गया कि उनका हवाई जहाज ताईवान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें सुभष चन्द्र बोस की मृत्यु हो गई। हालांकि ताईवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बताया था कि उस दिन ताईवान के आकाश में कोई विमान दुर्घटना ही नहीं हुई। सुभाष जीवित रहे या विमान दुर्घटना का शिकार हुए, यह सत्य तो काल के गर्भ में है पर कोटि-कोटि भारतीयों के हृदय में वह सदा सर्वदा जीवित रहेंगे। भारत माता के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किया गया अनथक अदम्य प्रयास उन्हें चिरकाल तक अमर रखेगा। नेता जी सुभाषचन्द्र बोस की एक भव्य प्रतिमा राजपथ दिल्ली में लगाई गयी है और उनके जन्मदिवस को पराक्रम दिवस के रूप में 2021 से मनाया जा रहा है। प्रमोद दीक्षित ʺमलयʺ Read more » सुभाष चन्द्र बोस
शख्सियत समाज सार्वजनिक स्मृति से ओझल ऐतिहासिक योगदान January 16, 2026 / January 16, 2026 by गजेंद्र सिंह | Leave a Comment गजेंद्र सिंह हाल ही में दरभंगा की महारानी कुसुम देवी के निधन के बाद सोशल मीडिया पर भारत के इतिहास का एक ऐसा अध्याय फिर से चर्चा में आया है जिसे लंबे समय तक लगभग भुला दिया गया था। वर्ष 1962 के भारत–चीन युद्ध के दौरान दरभंगा राजपरिवार द्वारा राष्ट्ररक्षा के लिए किए गए असाधारण […] Read more » Maharani Kusum Devi of Darbhanga passes away दरभंगा की महारानी कुसुम देवी
लेख समाज स्वास्थ्य-योग पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग January 7, 2026 / January 7, 2026 by शम्भू शरण सत्यार्थी | Leave a Comment आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज Read more » People dying due to lack of money आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग
समाज सड़ांध मारती व्यवस्थाओं का नतीजा है इंदौर का भागीरथपुरा प्रकरण . . .. January 7, 2026 / January 7, 2026 by लिमटी खरे | Leave a Comment पूरे मामले को अब सियासी रंग में रंगा जा चुका है। कोई भाजपा के साथ है तो कैलाश विजयवर्गीय के साथ नहीं, कोई दोनों के साथ है तो कोई कैलाश विजयवर्गीय के साथ दिख रहा है पर भाजपा के साथ नहीं . . ., कुल मिलाकर सभी दूषित पानी पर ही चर्चारत दिख Read more » इंदौर का भागीरथपुरा प्रकरण
समाज सोशल मीडिया : कितने दृष्टिकोण January 7, 2026 / January 7, 2026 by डॉ. नीरज भारद्वाज | Leave a Comment वर्तमान स्थिति में सामान्य जन मीडिया से अधिक सोशल मीडिया से सीधा जुड़ा हुआ है। वह सोशल मीडिया को जानकारी के साधन के साथ-साथ एक हथियार के रूप में प्रयोग भी कर रहा है। Read more » सोशल मीडिया
समाज सार्थक पहल आनंदमय विद्यालय निर्माण के लिए सामूहिक चेतना आवश्यक January 7, 2026 / January 7, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment प्राथमिक विद्यालय से लेकर संकुल और बीआरसी स्तर तक काम किया है। इन वर्षों में विद्यालय को लेकर शिक्षक, विद्यार्थी, समाज और अधिकारी वर्ग की दृष्टि, सोच एवं कल्पना को समझने का अवसर मिला। इनमें से प्रत्येक वर्ग विद्यालय को बेहतर बनाना चाहता है। किंतु, विद्यालय बेहतर बनाने की दृष्टि, कल्पना एवं कार्य योजना अलग-अलग हैं। Read more » आनंदमय विद्यालय
समाज उच्च शिक्षा संस्थान में संभावना की मौत January 6, 2026 / January 6, 2026 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के सरकारी महाविद्यालय में तीन छात्राओं द्वारा एक छात्रा की रैगिंग और प्राध्यापक द्वारा यौन उत्पीड़न का शर्मनाक मामला सामने आया है। छात्रा की 26 दिसंबर को लुधियाना के एक अस्पताल में उपचार के दौरान मौत के बाद आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। Read more » A case of sexual harassment of a student by a professor who was ragging on students in Dharamshala Himachal Pradesh