राजनीति समाज सार्थक पहल कहीं आप किसी बच्चे की बौद्धिक मंदता के लिए ज़िम्मेदार तो नहीं? February 28, 2024 / February 28, 2024 by दीपमाला पाण्डेय | Leave a Comment दीपमाला पाण्डेय हर बार, बाज़ार जाने से पहले जब आप वो कपड़े का थैला ले जाना भूल जाते हैं और फिर सामान खरीदने के बाद दुकानदार से पॉलिथीन की थैली मांगते हैं, तब आप अनजाने में ही सही, लेकिन कहीं न कहीं, किसी बच्चे की बौद्धिक दिव्यांगता में योगदान दे रहे होते हैं। जी हाँ, […] Read more » Are you responsible for a child's intellectual disability?
लेख शख्सियत समाज सार्थक पहल रविदासजी एक सिद्ध एवं अलौकिक समाज-सुधारक संत थे February 24, 2024 / February 22, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment संत गुरु रविदास जयन्ती- 24 फरवरी, 2024 के उपलक्ष्य में– ललित गर्ग –जब भारतीय समाज और धर्म का स्वरूप रूढ़ियों एवं आडम्बरों में जकड़ा एवं अधंकारमय था तब संत गुरु रविदास एक रोशनी बनकर समाज को दिशा दी। वे अध्यात्म की सुदृढ़ परम्परा के संवाहक थे। वे ईश्वर को पाने का एक ही मार्ग जानते […] Read more » संत गुरु रविदास जयन्ती- 24 फरवरी
राजनीति समाज संदेशखाली: ममता की नफ़रत का प्रतीक February 23, 2024 / February 23, 2024 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी दो बंगाली लोकोक्तियाँ हैं – थेलाई ना पोरले बेरल गाछे ओथे ना -अर्थात् आपकी समस्याओं से पार पाने हेतु आपको उस समस्या का सामना करना ही होगा और दूजी कहावत है – किछुतेई किछु न फ़ेसतेई पोइसा- कुछ प्राप्त करने हेतु आलस्य छोड़कर कर्म करना ही होगा। आज की परिस्थिति में बंगाल में ममता […] Read more » Sandeshkhali's message and Trinamool's 'Shahjahan'
समाज क्या आने वाले दिनों में वाकई उत्तर प्रदेश नेहरू गांधी परिवार के वारिसानों से मुक्त हो जाएगा! February 19, 2024 / February 19, 2024 by लिमटी खरे | Leave a Comment सोनिया गांधी का सीधे चुनाव न लड़कर राज्य सभा का पर्चा भरना कांग्रेस के असली कार्यकर्ताओं को करेगा निराश . . . (लिमटी खरे) देश भर में राज्य सभा की 56 सीटों के लिए मतदान होना है एवं नामांकन की अंतिम तारीख 15 फरवरी है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता श्रीमति सोनिया गांधी ने राजस्थान से […] Read more »
लेख शख्सियत समाज साक्षात्कार रामकृष्ण परमहंस ब्रह्मर्षि, देवर्षि एवं त्रिकालदर्शी थे February 17, 2024 / February 17, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment रामकृष्ण परमहंस जन्म जयन्ती-18 फरवरी 2024– ललित गर्ग-अंगुलियों पर गिने जाने योग्य कुछ महान् व्यक्तियों को समय-समय पर भारत की रत्नगर्भा वसुंधरा ने पैदा किया, जिनकी आध्यात्मिक चेतना एवं सिद्धियों से समूची दुनिया चमत्कृत होती रही है। जो युग के साथ बहे नहीं, युग को अपने बहाव के साथ ले चले। ऐसे लोग सच्चे जीवन […] Read more » Devarshi and Trikaldarshi. Ramakrishna Paramhansa was a Brahmarshi रामकृष्ण परमहंस
समाज कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कांग्रेस छोड़ी पर पार्टी पर आंच नहीं आई . . . February 16, 2024 / February 16, 2024 by लिमटी खरे | Leave a Comment लिमटी खरे लगभग आधी सदी पहले कांग्रेस ने जब महज 154 सीटों पर परचम लहराया था, उस वक्त इंदिरा गांधी जिन्हें आयरन लेडी कहा जाता था, वे कांग्रेस को टूटने ने नहीं बचा पाईं थीं, उससे उलट 2014 में सिर्फ 44 और 2019 के आम चुनावों में 52 सीटों पर परचम लहराने के बाद भी कांग्रेस जर्जर जरूर […] Read more » Big leaders of Congress left Congress but the party was not affected.
लेख शख्सियत समाज महावीर नए भारत के अभ्युदय की जीवंत प्रेरणा है February 12, 2024 / February 12, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भगवान महावीर के 2550वें मोक्ष कल्याणक दिवस को मनाने की सार्थक पहल करके एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। दिनांक 12 फरवरी 2024 को विज्ञान भवन में आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में संघ के सर संघचालक श्री मोहन भागवत जी एवं चारों जैन संप्रदाय के आचार्य और […] Read more » Mahavir is the living inspiration for the emergence of new India
लेख समाज राजस्थान : शैक्षणिक बाधाओं से गुज़रती ग्रामीण किशोरियां January 24, 2024 / January 24, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सीता सिद्धलूणकरणसर, राजस्थान हमारे देश में आजादी के बाद जिन बुनियादी विषयों पर सबसे अधिक फोकस किया गया है, उनमें शिक्षा भी महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसा विषय है, जिसे नजरअंदाज कर कोई भी सरकार विकास का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकती है। यही कारण है कि केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकारों ने शिक्षा […] Read more » Rajasthan: Rural girls facing educational obstacles
लेख शख्सियत समाज अमर शहीद हेमु कालाणी सिंध के नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना जगाते रहे January 23, 2024 / January 23, 2024 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment ऐसा कहा जाता है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में गर्म दल के स्वतंत्रता सेनानियों का भी भरपूर योगदान रहा है। इस दृष्टि से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के वीर सेनानियों ने, मां भारती को अंग्रेजों के क्रूर शासन से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से, देश के कोने कोने से भाग लिया था। इन वीर सेनानियों में से भारत के कई वीर सपूतों ने तो मां भारती के श्री चरणों में अपने प्राण भी न्योशावर कर दिए थे। भारत के इन्हीं वीर सपूतों में अमर शाहीद श्री हेमू कालाणी का नाम भी बड़े आदर के साथ लिया जाता है क्योंकि उन्हें बहुत ही कम उम्र, मात्र 19 वर्ष की आयु में दिनांक 21 जनवरी 1943 को क्रूर अंग्रेजी शासन द्वारा फांसी दे दी गई थी। दिनांक 23 मार्च 1923 को श्री हेमू कालाणी का जन्म सिन्ध प्रांत के सक्खर जिले में सवचार स्थान पर श्री पेसूमल जी कालाणी एवं माता श्रीमती जेठी बाई कालाणी के घर पर हुआ था। श्री हेमू कालानी बचपन में ही सर्वगुण संपन्न व होनहार बालक थे, जो अपनी पढ़ाई लिखाई में तेज तर्रार होने के साथ साथ एक अच्छे तैराक, तीव्र साईकिल चालक तथा अच्छे धावक भी थे। वह कई बार तैराकी में भी कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके थे। बचपन में ही श्री हेमू कालाणी “स्वराज्य सेना” नामक छात्र संगठन में सम्मिलित होकर इस संगठन के नेता बन गए थे। इन सभी विशेषताओं के ऊपर, श्री हेमू कालाणी अपने बचपन काल से ही राष्ट्रवाद की भावना से भी ओतप्रोत थे और आपने अंग्रेजों की क्रूर हुकूमत को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प ही ले लिया था और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रियाकलापों में भी भाग लेना शूरू कर दिया था। अत्याचारी अंग्रेजों द्वारा संचालित सरकार के विरुद्ध छापामार गतिविधियों में भाग लेकर उनके वाहनों को जलाने में श्री हेमू कालाणी अपने साथियों का नेतृत्व भी करने लगे थे। साथ ही, अमर शहीद हेमू कालाणी द्वारा सिंध प्रांत के नागरिकों में स्वावलम्बन का भाव जगाने का प्रयास भी किया जा रहा था। यह भी एक अजीब संयोग ही कहा जाएगा कि श्री हेमू कालानी की जन्मतिथि एवं अमर शहीद श्री भगतसिंह जी की पुण्यतिथि एक ही है, अर्थात 23 मार्च। वर्ष 1942 में मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में श्री हेमू कालाणी ने “अंग्रेजो भारत छोड़ो” के नारे को पूरे सिंध में गूंजायमान कर दिया था। श्री हेमू कालाणी के अदम्य साहस एवं उत्साह ने तो पूरे सिंधवासियों में ही स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए जोश भर दिया था। श्री हेमू कालाणी द्वारा अपनी किशोरावस्था में ही विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आग्रह सिंधवासियों से किया जाता था। मां भारती के प्रति तो उनके मन में एक विशेष भाव था एवं अंग्रेजों की हुकूमत उन्हें बिलकुल भी रास नहीं आती थी इसलिए अल्पायु में ही वे सिंधवासियों का आह्वान करते नजर आते थे कि वे केवल देश में निर्मित वस्तुओं का ही उपयोग करें जिससे भारतीय नागरिकों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जा सके। अंग्रेजी शासन द्वारा भारतीयों पर किए जा रहे अत्याचारों के खिलाफ मात्र 19 साल की उम्र में श्री हेमू कालाणी ने जो किया, इस पर पूरे देश को आज भी गर्व है। वर्ष 1942 में “करो या मरो”, “अंग्रेजों भारत छोड़ो”, के नारों में एक आवाज श्री हेमू कालाणी की भी थी। सिंध प्रांत के सक्खर शहर में देश की आजादी के लिए कार्य कर रही संस्था “स्वराज्य सेना” के एक युवक ने श्री हेमू कालाणी को यह जानकारी दी कि आजादी के लिए प्रयासरत आंदोलनकारियों को कुचलने और उनका दमन करने के लिए रोहड़ी (सिंध) से अंग्रेज सैनिकों एवं हथियारों से भरी एक विशेष रेलगाड़ी सक्खर से होकर बलूचिस्तान की ओर जाने वाली है। यह सुनकर श्री हेमू कालाणी और उनके जाबांज साथी रेल ट्रैक पर गए और रेल की पटरी के नट बोल्ट खोलने लगे, परंतु श्री हेमू कालाणी पर अंग्रेज सिपाहियों की नजर पड़ गई और उसे पकड़कर लिया गया कर फिर जेल भेज दिया गया। आजादी के दीवाने मात्र 19 साल के इस जवान का हौसला ही था कि पकड़े जाने व घोर यातनाओं को सहन करने के बाद भी उसने अंग्रेजों को यह राज नहीं बताया कि पटरियों के नट बोल्ट खोलने में उसके और कौन कौन साथी थे। श्री हेमू कालाणी के हौसले एवं उसकी देश भक्ति के आगे हार कर अंग्रेजों द्वारा 21 जनवरी 1943 को प्रातः सक्खर (सिंध) के केंद्रीय कारागार में श्री हेमू कालाणी को फांसी पर चढ़ा दिया गया। इससे पूरा देश गमगीन हो गया। देश के युवाओं में बदले का भाव जगा और वे भी अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हो गए एवं इस प्रकार अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन और अधिक तेज हो गया। कालांतर में आजादी के मतवाले अमर शहीद श्री हेमू कालाणी को श्रद्धांजलि प्रदान करने के उद्देश्य से श्री हेमू कालाणी जी की माताजी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज के सेनानियों द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया था। 14 अक्टोबर 1983 को भारतीय डाक व तार विभाग द्वारा अमर शहीद श्री हेमू कालाणी की स्मृति में एक डाक टिकट जारी किया गया था एवं भारत के संसद भवन में 21 अगस्त 2003 को श्री हेमू कालाणी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस प्रतिमा का लोकार्पण तत्कालीन प्रधानमंत्री माननीय श्री अटलबिहारी वाजपेयी जी द्वारा किया गया था। केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा आजादी के दीवाने अमर शहीद श्री हेमू कालाणी का जन्म शताब्दी समारोह (दिनांक 23 मार्च 2022 से 23 मार्च 2023 तक) को, विशाल रूप में मनाया गया ताकि देश के युवा अमर शहीद श्री हेमू कालाणी के बलिदान से प्रेरणा लेकर समय आने पर मां भारती के लिए अपने प्राण भी न्यौशावर करने को तैयार रहें। प्रहलाद सबनानी Read more »
लेख समाज तिलक यज्ञोपवीत और शिखा का माहात्म्य January 18, 2024 / January 18, 2024 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment सनातन परम्परा में हिन्दू देवी-देवताओं के ललाट पर धारित विभिन्न स्वरूप के तिलक हमें अपनी ओर आकर्षित कर एक सुखद अनुभूति प्रदान कर स्वयं तिलक धारण करने की सद्प्रेरणा प्रदान करता है परिणामस्वरूप हम उनकी पूजा-अर्चना, आराधना के समय तिलक धारण कर स्वयं को गौरवान्वित पाते है। तिलक की ही भॉति सिर के मध्य में […] Read more » Importance of Tilak Yagyopavit and Shikha Tilak Yagyopavit and Shikha तिलक यज्ञोपवीत और शिखा का माहात्म्य
राजनीति लेख शख्सियत समाज रामभद्राचार्य श्रीराम के अद्भुत शिल्पकार एवं व्याख्याकार January 16, 2024 / January 16, 2024 by ललित गर्ग | Leave a Comment जगतगुरु रामभद्राचार्य अमृत महोत्सव-ललित गर्ग- देश में कितने ही पवित्र संत, गुरु, ऋषियों ने अपने दैवीय शक्ति, आनंद, प्राचीन ग्रंथों के ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान के साथ दुनिया को अलौकिक एवं चमत्कृत किया है, परम सत्ता से साक्षात्कार के लिये अग्रसर किया है। इनमें श्रद्धेय पद्म विभूषण जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज भी हैं, जिन्होंने श्रीरामचरित मानस […] Read more » Rambhadracharya the wonderful sculptor and interpreter of Shri Ram. रामभद्राचार्य
लेख समाज सार्थक पहल बाधाओं को पार कर सशक्त बनती महादलित समाज की किशोरियां January 15, 2024 / January 15, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment सिमरन सहनीमुजफ्फरपुर, बिहार 21वीं सदी के भारत ने कई क्षेत्रों में बदलाव व विकास के नए प्रतिमान स्थापित किया है. चाहे वह नए अनुसंधान का क्षेत्र हो, अभियांत्रिकी विकास, प्रौद्योगिकी विकास, बौद्धिक विकास, सामरिक क्षमता या फिर कुशल नेतृत्व की बात हो, कोई ऐसा सेक्टर नहीं है जहां भारतीयों ने अपना परचम न लहराया हो. […] Read more » Girls from Mahadalit community become empowered by overcoming obstacles.