लेख शख्सियत समाज “सत्यानंद योग” भारतवर्ष ही नहीं विश्व में सर्वश्रेष्ठ November 26, 2021 / November 26, 2021 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णनस्वामी सत्यानंद सरस्वती देश के ऐसे संत हुए, जिन्होंने न सिर्फ योग को पूरी दुनिया में फैलाया बल्कि सामाजिक चिंतन के जरिए विकास के मॉडल को पेश किया। स्वामी सत्यानंदजी के जीवन प्रवाह में भी हम पाते हैं कि पढ़- लिख कर भरे-पूरे परिवार से आने वाला एक 20 वर्षीय युवक अध्यात्म की राह […] Read more » सत्यानंद योग स्वामी सत्यानंद सरस्वती
लेख समाज मासूम बच्चों पर अपराध का बढ़ता दायरा November 17, 2021 / November 17, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़े के अनुसार देश में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों में 2019 की तुलना में 2020 में चार सौ फीसद की बढ़ोतरी हुई। इनमें से ज्यादातर मामले यौन कृत्यों में बच्चों को चित्रित करने वाली सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से जुड़े हैं। बच्चों को भगवान का स्वरूप […] Read more » Cyber crime cyber crimes against children Increasing scope of crime on innocent children बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध बच्चों पर अपराध का बढ़ता दायरा
लेख समाज पुरुष प्रधान समाज की वीभत्स कल्पना है भूतनी या चुड़ैल November 17, 2021 / November 17, 2021 by निर्मल रानी | Leave a Comment निर्मल रानीपिछले दिनों भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने देश की अनेक हस्तियों को देश के सबसे बड़े एवं प्रमुख पदम् पुरस्कारों से नवाज़ा। इनमें सरकार द्वारा संस्तुति प्राप्त जहाँ कंगना रानावत जैसे कई नाम ऐसे थे जिन्हें सरकार ने ‘अपना समझकर ‘ पदम् पुरस्कार दिलवाये वहीँ निश्चित रूप से कई ऐसे लोगों को […] Read more » Horrible fantasy of male dominated society is ghost or witch कल्पना है भूतनी या चुड़ैल वीभत्स कल्पना है भूतनी या चुड़ैल
लेख समाज परिवार की संस्कृति को बचाना होगा November 16, 2021 / November 16, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग-वर्तमान में भारत की परिवार-संस्था का अस्तित्व एवं अस्मिता खतरे में हैं। तथाकथित आधुनिकतावादी जीवनशैली के दौर में संबंधों का अंत, भावनाओं का अंत तथा पारिवारिक रिश्तों के अंत की चर्चा व्यापक स्तर पर सुनने को मिल रही है। यह एक विरोधाभास ही तो है कि वसुधैव कुटुंबकम् में आस्था रखने वाला समाज एवं […] Read more » family culture must be preserved परिवार की संस्कृति परिवार की संस्कृति को बचाना होगा
लेख समाज जनजातियों का गौरवपूर्ण अतीत एवं उनके साथ हो रहे वैश्विक षड्यंत्र November 12, 2021 / November 12, 2021 by कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल | Leave a Comment ~कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटलभारतीय सनातन संस्कृति सदैव से ही आक्रमणकारियों के निशाने पर रही है ।भारत की समाजिक राजनीतिक-आर्थिक-आध्यात्मिक -वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की सर्वोत्कृष्टता तथा समृद्धि को देखकर विभिन्न विदेशी शक्तियों यथा-तुर्क,मंगोल ,अरब ,मुगलों,अंग्रेजों ने तलवार की नोंक एवं आपसी फूट तथा उदारवादी व भारतीयो क्षमादान की प्रवृत्ति का फायदा उठाकर समय-समय पर आक्रमण कर […] Read more » The glorious past of the tribes and the global conspiracies The glorious past of the tribes and the global conspiracies going on with them जनजातियों का गौरवपूर्ण अतीत
लेख समाज कोरोना काल में घर लौटे प्रवासी नहीं शुरू कर पाये स्वरोजगार November 8, 2021 / November 8, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment महानंद सिंह बिष्ट गोपेश्वर, उत्तराखंड कोरोना काल में जब सारा देश इस लड़ाई से जूझ रहा था. कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉक डाउन से लोगों को खाने पीने की कठिनाइयां आ गई थी, उस समय भी गांवों में रहने वाले लोगों के पास कुछ संसाधन मौजूद थे. जिससे कि उनके […] Read more » प्रवासी नहीं शुरू कर पाये स्वरोजगार
लेख शख्सियत समाज रामरतन चूड़ीवाला जिनके लिए समाजसेवा एक जज्बा है November 5, 2021 / November 5, 2021 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment कुमार कृष्णन रामरतन चूड़ीवाला पूर्व बिहार के ऐसे समाजसेवी हैं जिनकी पहचान पूरे इलाके में है। समाज के लिए काम एक परिवर्तन और वदलाव के लिए करते हैं।समाजसेवा का भाव इनके पारिवारिक विरासत में मिला। इनके पिता शुभकरण चूड़ीवाला बिहार के ख्यााति प्राप्त स्वतंत्रता सेनानी थे। महात्मा गांधी जब भागलपुर आए थे तो उनके आह्वान […] Read more » Ramratan Churiwala Ramratan Churiwala for whom social service is a passion रामरतन चूड़ीवाला
लेख समाज जिन घड़ियों में हंस सकते हैं, उनमें रोये क्यों? November 5, 2021 / November 5, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग जिन्दगी का एक लक्ष्य है- उद्देश्य के साथ जीना। सामाजिक स्वास्थ्य एवं आदर्श समाज व्यवस्था के लिए बहुत जरूरी होता है कत्र्तव्य-बोध और दायित्व-बोध। कत्र्तव्य और दायित्व की चेतना का जागरण जब होता है तभी व्यक्तिगत जीवन की आस्थाओं पर बेईमानी की परतें नहीं चढ़ पाती। सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत जीवनशैली के शुभ […] Read more » Why cry in times when you can laugh
लेख समाज आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है October 19, 2021 / October 19, 2021 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment हरीश कुमार पुंछ, जम्मू शायद ही ऐसा कोई दिन गुज़रता होगा, जब समाचारपत्र में किसी के आत्महत्या की खबर नहीं छपती है. कई बार छोटी छोटी मुश्किलों का मुकाबला करने की जगह उससे घबराकर लोग आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम उठा ले रहे हैं. परीक्षा में तनाव हो या घर में झगड़ा, व्यापार में घाटा हो जाए या फिर […] Read more » Suicide is not the solution to the problem आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं
लेख समाज स्वस्थ सोच को सच बनाने का अभियान October 15, 2021 / October 15, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग-आजादी के अमृत महोत्सव मनाते हुए हमारे देश, समाज और मनुष्यता तीनों के सामने ही प्रश्नचिन्ह खड़े हैं। किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास में विचार एवं सृजनात्मक लेखन की महत्वपूर्ण भूमिका है। विचार एवं लेखन ही वह सेतु है, जो व्यक्ति-चेतना और समूह चेतना को वैश्विक, राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक […] Read more » Campaign to make healthy thinking a reality healthy thinking a reality स्वस्थ सोच को सच बनाने का अभियान
लेख शख्सियत समाज अमृतलाल वेगड़ : जिसने नदी के लिए जीवन जिया October 11, 2021 / October 11, 2021 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment -डॉ. मयंक चतुर्वेदी वे ऐसी शख्सियत थे जो उनसे एक बार मिला वह उनका हो गया समझो। नदी से प्यार कैसे किया जाता है, क्यों नदियों की जीवित रखना हैं, जो सूख चुकी हैं उन्हें कैसे जीवित करें। ऐसे तमाम प्रयास उनसे जुड़े हैं, जिन्हें अपने जीते जी तो वे करते ही रहे, किंतु उनकी […] Read more » Amritlal Vegad Amritlal Vegad lived for the river अमृतलाल वेगड़
लेख समाज धर्म की आड़ में दुराचार October 5, 2021 / October 5, 2021 by डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक धार्मिक संस्थानों में कितना दुराचार होता है, इसकी ताजा खबर अभी पेरिस से आई है। फ्रांस के रोमन केथोलिक चर्च के एक आयोग ने गहरी छान-बीन के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि पिछले 70 साल में उसके 3000 पादरियों और कर्मचारियों ने बच्चों के साथ व्यभिचार किया है। इस छान-बीन में […] Read more » misconduct in the guise of religion धर्म की आड़ में दुराचार