शख्सियत समाज साक्षात्कार पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता September 25, 2025 / September 25, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment भारत के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक इतिहास में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ऐसे महापुरुष के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने भारतीय चिंतन की जड़ों से जुड़कर आधुनिक युग के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत की। उनका जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जनपद के नगला चंद्रभान ग्राम (उत्तर प्रदेश) में हुआ। अल्पायु […] Read more » पंडित दीनदयाल उपाध्याय
शख्सियत समाज साक्षात्कार पंडित दीनदयाल उपाध्याय : शुरू किया वैकल्पिक राजनीति का दौर, देश को दिया अंत्योदय का मूल मंत्र September 24, 2025 / September 24, 2025 by प्रदीप कुमार वर्मा | Leave a Comment प्रदीप कुमार वर्मा एक जाने-माने अर्थशास्त्री, एक राष्ट्रवादी लेखक एवं संपादक, एक प्रबुद्ध समाजशास्त्री एवं इतिहासकार। एक विचारक, नियोक्ता और दार्शनिक। पंडित दीनदयाल उपाध्याय मात्र राजनेता नहीं थे, वे उच्च कोटि के चिंतक, विचारक और लेखक भी थे। उन्होंने शक्तिशाली और संतुलित रूप में विकसित राष्ट्र की कल्पना की थी। एकात्म मानववाद जैसी विचारधारा और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की आज जयंती है। जनसंघ से भाजपा के उदय तक पार्टी ने विपक्ष से राजनीति के मजबूत विकल्प का सफर तय किया है तो उसकी नींव डालने वाले व्यक्तित्व थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय। उन्होंने संगठन आधारित राजनीतिक दल का एक पर्याय देश में खड़ा किया। उसी का परिणाम है कि भारतीय जनसंघ से लेकर के भारतीय जनता पार्टी तक संगठन आधारित राजनीतिक दल देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के ही पार्टी के प्रति संस्कार और समर्पण का नतीजा है कि आज भारतीय जनता पार्टी विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में शुमार है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को धनकिया नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय नगला चंद्रभान फरह, मथुरा उप्र के निवासी थे। उनकी माता का नाम रामप्यारी था, जो धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। दीनदयाल अभी 3 वर्ष के भी नहीं हुये थे, कि उनके पिता का देहान्त हो गया। पति की मृत्यु से माँ रामप्यारी भी अत्यधिक बीमार रहने लगीं तथा 8 अगस्त 1924 को उनका भी देहावसान हो गया। उस समय दीनदयाल महज 7 वर्ष के थे। 8वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उपाध्याय ने कल्याण हाईस्कूल सीकर राजस्थान से दसवीं की परीक्षा में बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद वर्ष 1937 में पिलानी से इंटरमीडिएट की परीक्षा में पुनः बोर्ड में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 1939 में कानपुर के सनातन धर्म कालेज से बीए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए और कॉलेज छोड़ने के तुरंत बाद ही संघ के प्रचारक बन गए। अपने जीवनकाल के दौरान इन्होंने राजनीतिक क्षेत्र, दार्शनिक क्षेत्र, पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र इत्यादि में अनेक महत्त्वपूर्ण कार्य किये। दीनदयाल जी के राजनीतिक चिंतन पर गौर करें तो वे शासन और राजनीति के वैकल्पिक प्रारूपों के प्रस्तावक थे। उनका मानना था कि भारत के लिए न तो साम्यवाद और न ही पूंजीवाद उपयुक्त है। उनके प्रारूप को एकात्म मानव दर्शन का सिद्धांत कहा जाता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार, भारत में प्राथमिक चिंता एक स्वदेशी विकास मॉडल विकसित करना होना चाहिए जिसका मुख्य केंद्र मानव हो। यह पश्चिमी पूंजीवादी व्यक्तिवाद और मार्क्सवादी समाजवाद दोनों का विरोधी है। हालाँकि पश्चिमी विज्ञान का स्वागत करता है । यह पूंजीवाद और समाजवाद के बीच एक मध्य मार्ग तलाशता है, दोनों प्रणालियों का उनके संबंधित गुणों के आधार पर मूल्यांकन करता है, जबकि उनकी ज्यादतियों और अलगाव की आलोचना करता है। इसे भारतीय जन संघ में एक वैचारिक दिशा निर्देश के रूप में अपनाया गया। उनका मानना था कि धर्म किसी राज्य पर शासन करने का सबसे सही मार्गदर्शक सिद्धांत है। एक वक़्त था जब पंडित जवाहरलाल नेहरु के दौर यह माना जाता था कि देश में कांग्रेस का ही शासन रहेगा। लेकिन नेहरू के बाद कौन? पंचायत से पार्लियामेंट तक एक ही पार्टी का राज था। लेकिन अचानक 1962 से 1967 के बीच एक ऐसा राजनीतिक खालीपन आया कि देश को लगा कि इस रिक्तता को कौन भरेगा? पंडित दीनदयाल उपाध्याय की दृष्टि की वजह से ही वैकल्पिक राजनीति का दौर आया।दीनदयाल उपाध्याय ने कांग्रेस के विकल्प के तौर कार्यकर्ता के निर्माण पर जोर दिया। उनका उद्देश्य ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ताओं की एक नई श्रेणी तैयार करना था जिसका एक स्वतंत्र चिंतन हो, राष्ट्रभक्ति से प्रेरित हो और राष्ट्र-समाज को समर्पित हो। उन्होंने अपनी पूरी शक्ति संगठन को वैचारिक अधिष्ठान देने, कार्यकर्ता के निर्माण और संगठन के विस्तार में लगा दी। आज संघ और भाजपा जिस मुकाम पर है,उस विचार की नींव पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ही डाली थी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन का एक बड़ा हिस्सा उनके विचारक, लेखक और पत्रकार रूप में भी जाना जाता है। वर्ष 1940 के दशक में उन्होंने लखनऊ से मासिक “राष्ट्रधर्म”, साप्ताहिक पांचजन्य और दैनिक “स्वदेश” की शुरुआत की। उन्होंने हिंदी में “चंद्रगुप्त मौर्य” नाटक और “शंकराचार्य” की जीवनी भी लिखी। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कुछ पत्रिकाओं में भी कार्य किया। उन्होंने वर्ष 1940 में लखनऊ से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका राष्ट्रधर्म में काम किया। वहीं, बाद में पांचजन्य और स्वेदश की भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने शुरुआत की। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार की जीवनी का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया। इसके अलावा उनकी कृतियों में ‘सम्राट चंद्रगुप्त’, ‘राष्ट्र जीवन की समस्याएं” ‘जगतगुरू शंकराचार्य’, ‘अखंड भारत क्यों हैं’, ‘राष्ट्र चिंतन’ और ‘राष्ट्र जीवन की दिशा’ आदि भी शामिल हैं। पंडित दीनदयाल का विचार संगठन तक सीमित नहीं था, उनका आर्थिक दर्शन भाजपा की राजनीति का केंद्र है. दीनदयाल जी कहते थे- “आर्थिक योजनाओं तथा आर्थिक प्रगति का माप समाज के ऊपर की सीढ़ी पर पहुंचे हुए व्यक्ति नहीं, बल्कि सबसे नीचे के स्तर पर विद्यमान व्यक्ति से होगा। ”केंद्र सरकार की वित्तीय समावेशन की योजना आज समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है तो वह पंडित जी के अंत्योदय का ही उदाहरण है। दीनदयाल जी के विचारों का ही प्रभाव है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना’ की शुरुआत की जो आज ग्रामीण भारत की एक नई क्रांति बन चुकी है। उनका कहना था- “समाज की अंतिम सीढ़ी पर जो बैठा हुआ है; दलित हो, पीड़ित हो, शोषित हो, वंचित हो, गांव हो, गरीब हो, किसान हो… सबसे पहले उसका उदय होना चाहिए. राष्ट्र को सशक्त और स्वावलंबी बनाने के लिए समाज को अंतिम सीढ़ी पर ये जो लोग हैं उनका सामाजिक, आर्थिक विकास करना होगा.” यह भी एक सर्वमान्य ने सत्य है कि कोविड काल में देश के 80 करोड़ लोगों के फ़्री अनाज देना, किसान सम्मान निधि में अभी तक पौने दो लाख करोड़ की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचाना, 45 करोड़ से अधिक गरीबों का जनधन खाते खुलवाना, उज्ज्वला के तहत 9 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन, घर-घर शौचालय का निर्माण, स्वनिधि योजना, आयुष्मान भारत, नल जल योजना आदि के जरिए कदम बढ़ा रही केंद्र सरकार की सभी गरीबोन्मुख पहल पंडित जी के अंत्योदय के दर्शन से ही निकली हैं। एकात्म मानववाद और अंत्योदय के जिस रास्ते पर चलकर आज केंद्र सरकार देश के हर वर्ग के सपने का साकार कर आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ा रही है, उसके प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय ही हैं। एकात्म मानववाद का उद्देश्य व्यक्ति एवं समाज की आवश्यकता को संतुलित करते हुए प्रत्येक मानव को गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है। यह प्राकृतिक संसाधनों के संधारणीय उपभोग का समर्थन करता है जिससे कि उन संसाधनों की पुनः पूर्ति की जा सके। आज वैश्विक स्तर पर एक बड़ी जनसंख्या गरीबी में जीवन यापन कर रही है। विश्वभर में विकास के कई मॉडल लाए गए लेकिन आशानुरूप परिणाम नहीं मिला। अतः दुनिया को एक ऐसे विकास मॉडल की तलाश है जो एकीकृत और संधारणीय हो। एकात्म मानववाद ऐसा ही एक दर्शन है जो अपनी प्रकृति में एकीकृत एवं संधारणीय है। एकात्म मानववाद न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक एवं सामाजिक लोकतंत्र एवं स्वतंत्रता को भी बढ़ाता है। यह सिद्धांत विविधता को प्रोत्साहन देता है अतः भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए यह सर्वाधिक उपयुक्त है। “एकात्म मानववाद” का उद्देश्य प्रत्येक मानव को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है एवं “अंत्योदय” अर्थात समाज के निचले स्तर पर स्थित व्यक्ति के जीवन में सुधार करना है अतः यह दर्शन न केवल भारत अपितु सभी विकासशील देशों में सदैव प्रासंगिक रहेगा। भारत के संदर्भ में यह भी सुखद है की वर्तमान में देश की बागडोर एनडीए सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी के हाथ में है, जो एकात्म मानववाद औऱ अंत्योदय के संकल्प को साकार करने में जुटे हैं। प्रदीप कुमार वर्मा Read more » gave the country the basic mantra of Antyodaya Pandit Deendayal Upadhyay: Started the era of alternative politics पंडित दीनदयाल उपाध्याय
शख्सियत समाज साक्षात्कार ‘राष्ट्रवाद के पथ प्रदर्शक और एकात्म मानव दर्शन के प्रवर्तक- पंडित दीनदयाल उपाध्याय September 23, 2025 / September 23, 2025 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (25 सितंबर 2025, 109वीं जयंती पर विशेष आलेख) भारत की पावन भूमि सदैव से महापुरुषों की जन्मभूमि रही है। समय-समय पर यहाँ ऐसे युगपुरुष अवतरित हुए जिन्होंने अपने विचारों, कर्मों और त्याग से राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की। ऐसी ही पुण्य भूमि पर 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान नामक गाँव […] Read more » एकात्म मानव दर्शन के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय
समाज सार्थक पहल स्वस्थ हरियाणा की ओर: गुटखा-पान मसाला पर बैन September 23, 2025 / September 23, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment हरियाणा सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू पर पूर्ण बैन लगाने का फैसला किया है। अब इन उत्पादों की बिक्री करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। हर महीने राज्य में लगभग 4000 नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। गुटखा और तंबाकू न केवल स्वास्थ्य, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से […] Read more » ban on gutkha and pan masala गुटखा-पान मसाला पर बैन
शख्सियत समाज साक्षात्कार भागलपुर ने दी राष्टकवि दिनकर को ख्याति September 22, 2025 / September 22, 2025 by कुमार कृष्णन | Leave a Comment जन्मदिन (23 सितम्बर पर विशेष ) कुमार कृष्णन भागलपुर से ही राष्टकवि रामधारी सिंह दिनकर को ख्याति मिली।इसे उन्होंने स्वयं स्वीकार किया है। उनके मुताबिक- ” 1933 में सुप्रसिद्ध इतिहासकार काशी प्रसाद जायसवाल नें भागलपुर में बिहार प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन का सभापतित्व किया था।इसके आयोजक थे पं शिवदुलारे मिश्र. अपनी कविता ‘हिमालय’ ‘के प्रति’ […] Read more » Bhagalpur gave fame to national poet Dinkar राष्टकवि दिनकर
लेख समाज संवादहीनता: परिवार और समाज की चुनौती September 22, 2025 / September 22, 2025 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment आज के व्यस्त और डिजिटल जीवन में संवादहीनता परिवार और समाज की बड़ी चुनौती बन गई है। बातचीत की कमी भावनात्मक दूरी, गलतफहमियाँ और मानसिक तनाव बढ़ाती है। परिवार में बच्चे और बड़े एक-दूसरे की भावनाओं को साझा नहीं कर पाते, जबकि समाज में सहयोग और सामूहिक प्रयास कमजोर पड़ते हैं। इसका समाधान नियमित संवाद, […] Read more » Lack of communication: A challenge for family and society संवादहीनता
लेख समाज सार्थक पहल दिव्यांगजन की आवाज़: मुख्यधारा से जुड़ने की पुकार September 19, 2025 / September 19, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment (सहानुभूति से परे, कानून, शिक्षा, रोज़गार, मीडिया और तकनीक के माध्यम से बराबरी व सम्मान की ओर) भारत में करोड़ों दिव्यांगजन आज भी शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन में हाशिए पर हैं। संवैधानिक अधिकारों और 2016 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के बावजूद सामाजिक पूर्वाग्रह, ढांचागत बाधाएँ और मीडिया में विकृत छवि उनकी गरिमा को […] Read more » Voice of the Disabled: A Call to Join the Mainstream दिव्यांगजन की आवाज़
लेख समाज जनरेशन गैप और संवादहीनता के कारण टूटते परिवार September 18, 2025 / September 18, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment राजेश कुमार पासी नानक दुखिया सब संसारा, वर्तमान हालातों पर ये बात पूरी तरह लागू होती है क्योंकि हर व्यक्ति अलग-अलग कारणों से परेशान है । आज का बड़ा सच है कि बुजुर्ग बच्चों से परेशान हैं और बच्चे बुजुर्गों से परेशान हैं । इसके लिए ज्यादातर लोग जनरेशन गैप को दोषी ठहराते हैं जबकि यह […] Read more » Families breaking up due to generation gap and lack of communication जनरेशन गैप और संवादहीनता के कारण टूटते परिवार
महिला-जगत लेख समाज प्रसवोत्तर देखभाल: माँ का साथ सास से ज्यादा कारगर September 17, 2025 / September 17, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment प्रसवोत्तर देखभाल: माँ की गोद में मिलती सुरक्षा, सास की भूमिका पर उठे सवाल अध्ययन बताते हैं कि प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल करने में सास की तुलना में उनकी अपनी माँ कहीं अधिक सक्रिय और संवेदनशील रहती हैं। लगभग 70 प्रतिशत प्रसूताओं को नानी से बेहतर सहयोग मिला, जबकि मात्र 16 प्रतिशत को […] Read more »
लेख समाज उपेक्षा और संवेदना के बीच बुजुर्गों की स्थिति September 16, 2025 / September 16, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment भारतीय समाज की रीति-नीति और सांस्कृतिक परंपराओं में बुजुर्गों का स्थान हमेशा से उच्च माना गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की भाँति ही हमारी संस्कृति में यह भी विश्वास किया गया कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से घर-परिवार की उन्नति होती है। यही कारण है कि सदियों तक संयुक्त परिवार की परंपरा ने […] Read more » बुजुर्गों की स्थिति
समाज क्यों लड़कियों को ही स्कूल पहुँचने में चुनौतियां आती हैं? September 16, 2025 / September 16, 2025 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment जशोदालूणकरणसर, राजस्थान शिक्षा हर किसी के लिए जरूरी है। लेकिन लड़कियों और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र की किशोरियों के लिए शिक्षा प्राप्त करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उनके लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ पढ़ाई नहीं बल्कि सुरक्षित और सहज शिक्षा तक पहुँच का होता है। यह सफ़र उनके लिए बहुत आसान नहीं होता है, क्योंकि […] Read more » Why do girls face challenges in reaching school? लड़कियों को ही स्कूल पहुँचने में चुनौतियां
लेख शख्सियत समाज परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी का वैराग्य नैसर्गिक था September 11, 2025 / September 11, 2025 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (43वीं पुण्यतिथि 13 सितम्बर 2025 पर विशेष) स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व महान था। उन्होंने समाज सुधार के लिए काफी कार्य किए। देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पित कर कई आंदोलनों में जेल काटी। आजादी के बाद देश की राजनीति में भी उनका भावी योगदान रहा है। स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही कार्य किए। समाज के लोगों को शिक्षा की ओर ध्यान देने का आह्वान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज जी के पिता का नाम मातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज में फैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरीतियों का डटकर विरोध किया। स्वामी ब्रह्मानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसके पश्चात् स्वामी ब्रह्मानंद जी ने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी समय से लोग उन्हें स्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लगे। कहा जाता है कि बालक शिवदयाल के बारे में संतों ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो राजा होगा या प्रख्यात सन्यासी। बालक शिवदयाल का रुझान आध्यात्मिकता की तरफ ज्यादा होने के कारण पिता मातादीन लोधी को डर सताने लगा कि कहीं वे साधु न बन जाए। इस डर से मातादीन लोधी ने स्वामी ब्रह्मानंद जी का विवाह सात वर्ष की उम्र में हमीरपुर के ही गोपाल महतो की पुत्री राधाबाई से करा दिया। आगे चलकर राधाबाई ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन स्वामी जी का चित्त अब भी आध्यात्मिकता की तरफ था। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरूए वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर ‘‘हर कि पेड़ी’’ पर सन्यास कि दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। संन्यास ग्रहण करने के बाद स्वामी ब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ। इसी बीच उन्हें गीता रहस्य प्राप्त हुआ। पंजाब के भटिंडा में स्वामी ब्रह्मानंद जी की महात्मा गांधी जी से भेंट हुई। गांधी जी ने उनसे मिलकर कहा कि अगर आप जैसे 100 लोग आ जायें तो स्वतंत्रता अविलम्ब प्राप्त की जा सकती है। गीता रहस्य प्राप्त कर स्वामी ब्रह्मानंद ने पंजाब में अनेक हिंदी पाठशालाएँ खुलवायीं और गोवध बंदी के लिए आंदोलन चलाये। इसी बीच स्वामी जी ने अनेक सामाजिक कार्य किये 1956 में स्वामी ब्रह्मानंद को अखिल भारतीय साधु संतों के अधिवेशन में आजीवन सदस्य बनाया गया और उन्हें कार्यकारिणी में भी शामिल किया गया। इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सम्मिलित हुए। स्वामी जी सन् 1921 में गाँधी जी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रता आन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 1928 में गांधी जी स्वामी ब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जी ने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ। उन्हें हमीरपुर, हरदोई और कानपूर कि जेलों में रखा गया। उन्हें पुनः फिर जेल जाना पड़ा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने पूरे उत्तर भारत में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लोगों में अलख जगाई। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय स्वामी जी का नारा था उठो! वीरो उठो!! दासता की जंजीरों को तोड फेंको। उखाड़ फेंको इस शासन को एक साथ उठो आज भारत माता बलिदान चाहती है। उन्होने कहा था की दासता के जीवन से म्रत्यु कही श्रेयस्कर है। बरेली जेल में स्वामी ब्रह्मानंद की भेट पंडित जवाहर लाल नेहरू जी से हुई। जेल से छूटकर स्वामी ब्रह्मानंद शिक्षा प्रचार में जुट गए। 1942 में स्वामी जी को पुनः भारत छोडो आंदोलन में जेल जाना पड़ा। स्वामी जी ने सम्पूर्ण बुंदेलखंड में शिक्षा की अलख जगाई आज भी उनके नाम से हमीरपुर में डिग्री कॉलेज चल रहा है। जिसकी नीव स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 1938 में ब्रह्मानंद विद्यालय के रूप में रखी। 1966 में गौ हत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद ने 10-12 लाख लोगों के साथ संसद के सामने आंदोलन किया। गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तब स्वामी ब्रह्मानंद ने प्रण लिया कि अगली बार चुनाव लड़कर ही संसद में आएंगे। स्वामी जी 1967 से 1977 तक हमीरपुर से संासद रहे। जेल से मुक्त होकर स्वामी जी ने हमीरपुर लोकसभा सीट से जनसंघ से 1967 में चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर संसद भवन पहुंचे। देश की संसद में स्वामी ब्रह्मानंद जी पहले वक्ता थे जिन्होने गौवंश की रक्षा और गौवध का विरोध करते हुए संसद में करीब एक घंटे तक अपना ऐतहासिक भाषण दिया था। 1972 में स्वामी जी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आग्रह पर कांग्रेस से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति वीवी गिरि से स्वामी ब्रह्मानंद के काफी निकट संबंध थे। स्वामी जी की निजी संपत्ति नहीं थी। सन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होंने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण का पालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्र-छात्राओं के हित में दान कर दिया करते थे। समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होंने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता की है। कर्मयोगी शब्द का जीवंत उदाहरण यदि भारत देश में है तो स्वामी ब्रह्मानंद का नाम अग्रिम पंक्ति में लिखा है। कर्म को योग बनाने की कला अगर किसी में थी तो वो स्वामी ब्रह्मानंद जी ही थे। स्वामी जी का वैराग्य नैसर्गिक था उनका वैराग्य स्वयं या अपने आप तक सीमित नहीं था। बल्कि उनके वैराग्य का लाभ सारे समाज को मिला। हमेशा गरीबों की लड़ाई लड़ने वाले बुन्देलखण्ड के मालवीय नाम से प्रख्यात, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, त्यागमूर्ति, सन्त प्रवर, परम पूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी 13 सितम्बर 1984 को ब्रह्मलीन हो गए। लेकिन उनका जीवन और शिक्षाएं आज भी हमें राह दिखाती हैं। आज हम त्यागमूर्ति, संत प्रवर, परम पूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी को उनकी 43वीं पुण्यतिथि 13 सितम्बर 2025 पर नमन करते हुए यही कह सकते हैं कि- ‘‘लाखों जीते लाखों मरते याद कहा किसी की रह जाती, रहता नाम अमर उन्ही का जो दे जाते अनुपम थाती’’ – ब्रह्मानंद राजपूत Read more » परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी