समाज अजब गजब रिवाज थे राज रजवारे के December 4, 2018 / December 4, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पटियाला (पंजाब) में पुरानी रियासत के महल आज भी महाराजा भुपिंदर सिंह की 365 रानियों के किस्से बयान करते हैं। महाराजा भुपिंदर सिंह ने यहां वर्ष 1900 से वर्ष 1938 तक राज किया। महाराज भुपिंद्र सिंह का जीवन रंगीनियों से भरा हुआ था। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा की 10 अधिकृत रानियों के समेत […] Read more » गेट महाराजा नरेन्द्र सिंह महाराजा भूपिंदर सिहं शिव मंदिर
समाज मीणा भाषा की उत्पत्ति और विकास December 3, 2018 by अभिलेख यादव | 1 Comment on मीणा भाषा की उत्पत्ति और विकास श्री पिंटू कुमार मीना “निज भाषा उन्नति अहे, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शूल ।” भारतेंदु हरिश्चन्द्र का उक्त प्रसंग आज भी प्रासंगिक बना हुआ है । हम अपनी भाषा के अभाव में न अपना विकास पर पाएंगे और न ही अपने हृदय को आत्मसंतुष्टि दे पाएंगे […] Read more » उदई कऊ- (सिगरी) गंगापुर ग्रामीण गड्डमड्ड- (ऊपर-नीचे) चीना- (चिन्ह) जाहिरा डांडी डोल/डोड़- (मेंड) दचकी- (पिचकी) निपजी-(उपजी) न्यांहा- (यहाँ) पदड़ता- (भागता) पिण- (लेकिन) बड़ीला बामणवास तहसील ब्यालू- (शाम का खाना) भेड़े- (इकट्टे) भौत- (बहुत) रपेटी- (दवाई) राणीला लग्गे-ढग्गे- (आस-पास) लड्डी- (ऊट गाड़ी) लोही- (खून) तथा छांद हम्बे रे- (हाँ रे)
समाज भुखमरी के प्रति संवेदनाशून्य होता वैश्विक समाज December 3, 2018 / December 3, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य आज की तथाकथित सभ्य दुनिया के लिए यह बहुत ही दुखद और आश्चर्यजनक है कि जब धरती के कुछ मुट्ठी भर लोग आसमान से बातें कर रहे हो तब इस भूमंडल पर ऐसे करोड़ों लोग कीड़े मकोड़ों की भांति अपना जीवन यापन करने के लिए विवश हैं जिन्हें भुखमरी की अवस्था में […] Read more » अंतर राष्ट्रीय कृषि विकास कोष बाल विकास कोष भुखमरी के प्रति संवेदनाशून्य होता वैश्विक समाज विश्व खाद्य संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन
समाज देश की आजादी और शिक्षा के क्षेत्र में अहम् योगदान रहा परमपूज्य स्वामी ब्रह्मानंद जी का December 3, 2018 / December 3, 2018 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment ब्रह्मानंद राजपूत स्वामी ब्रह्मानंद का व्यक्तित्व महान था। उन्होंने समाज सुधार के लिए काफी कार्य किएदेश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने जहां स्वयं को समर्पितकर कई आंदोलनों में जेल काटी।आजादी के बाद देश की राजनीति में भी उनका भावी योगदान रहा हैस्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही कार्यकिए।समाज के लोगों को शिक्षा की ओर ध्यान देने का आहवान किया। स्वामी ब्रह्मानंद महाराज का जन्म 04 दिसंबर 1894 को उत्तर प्रदेश केहमीरपुर जिले की राठ तहसील के बरहरा नामक गांव में साधारण किसान परिवार में हुआ था।स्वामी ब्रह्मानंद महाराज जी के पिता का नाममातादीन लोधी तथा माता का नाम जशोदाबाई था। स्वामी ब्रह्मानंद के बचपन का नाम शिवदयाल था। स्वामी ब्रह्मानंद ने बचपन से ही समाज मेंफैले हुए अंधविश्वास और अशिक्षा जैसी कुरूतियों का डटकर विरोध किया। स्वामी ब्रह्मानंद जी की प्रारम्भिक शिक्षा हमीरपुर में ही हुई। इसकेपश्चात् स्वामी ब्रह्मानंद जी ने घर पर ही रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों का अध्ययन किया। इसी समय से लोग उन्हेंस्वामी ब्रह्मानंद से बुलाने लगे। कहा जाता है कि बालक शिवदयाल के बारे में संतों ने भविष्यवाणी कि थी कि यह बालक या तो राजा होगा याप्रख्यात सन्यासी। बालक शिवदयाल का रुझान आध्यात्मिकता कि तरफ ज्यादा होने के कारण पिता मातादीन लोधी को डर सताने लगा कि कहीं वेसाधु न बन जाए। इस डर से मातादीन लोधी ने स्वामी ब्रह्मानंद जी का विवाह 7 वर्ष की उम्र में हमीरपुर के ही गोपाल महतो कि पुत्री राधाबाई सेकरा दिया। आगे चलकर राधाबाई ने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया। लेकिन स्वामी जी का चित्त अब भी आध्यात्मिकता कि तरफ था। स्वामीब्रह्मानंद जी ने 24 वर्ष की आयु में पुत्र और पत्नी का मोह त्याग गेरूए वस्त्र धारण कर परम पावन तीर्थ स्थान हरिद्वार में भागीरथी के तट पर‘‘हर कि पेड़ी’’ पर सन्यास कि दीक्षा ली। संन्यास के बाद शिवदयाल लोधी संसार में ‘‘स्वामी ब्रह्मानंद’’ के रूप में प्रख्यात हुए। संन्यास ग्रहण करनेके बाद स्वामी ब्रह्मानंद ने सम्पूर्ण भारत के तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया। इसी बीच उनका अनेक महान साधु संतों से संपर्क हुआ। इसी बीच उन्हेंगीता रहस्य प्राप्त हुआ। पंजाब के भटिंडा में स्वामी ब्रह्मानंद जी की महात्मा गाँधी जी से भेट हुई। गाँधी जी ने उनसे मिलकर कहा कि अगर आपजैसे 100 लोग आ जायें तो स्वतंत्रता अविलम्ब प्राप्त की जा सकती है। गीता रहस्य प्राप्त कर स्वामी ब्रह्मानंद ने पंजाब में अनेक हिंदी पाठशालाएंखुलवायीं और गौबध बंदी के लिए आंदोलन चलाये। इसी बीच स्वामी जी ने अनेक सामजिक कार्य किये 1956 में स्वामी ब्रह्मानंद को अखिलभारतीय साधु संतों के अधिवेशन में आजीवन सदस्य बनाया गया और उन्हें कार्यकारिणी में भी शामिल किया गया। इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी सम्मिलित हुए। स्वामी जी सन् 1921 में गाँधी जी के संपर्क में आकर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। स्वतंत्रताआन्दोलन में भी स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बढ चढकर हिस्सा लिया। 1928 में गाँधी जी स्वामी ब्रह्मानंद के प्रयासों से राठ पधारे। 1930 में स्वामी जीने नमक आंदोलन में हिस्सा लिया। इस बीच उन्हें दो वर्ष का कारावास हुआ। उन्हें हमीरपुर, हरदोई और कानपूर कि जेलों में रखा गया। उन्हें पुनःफिर जेल जाना पड़ा। स्वामी ब्रह्मानंद जी ने पूरे उत्तर भारत में उन्होने अग्रेजों के खिलाफ लोगों में अलख जगाई। स्वतंत्रता आन्दोलन के समयस्वामी जी का नारा था उठो! वीरो उठो!! दासता की जंजीरों को तोड फेंको। उखाड़ फेंको इस शासन को एक साथ उठो आज भारत माता बलिदानचाहती है। उन्होने कहा था की दासता के जीवन से म्रत्यु कही श्रेयस्कर है। बरेली जेल में स्वामी ब्रह्मानंद की भेट पंडित जवाहर लाल नेहरू जी से हुई। जेल से छूटकर स्वामी ब्रह्मानंद शिक्षा प्रचार में जुट गए। 1942 में स्वामी जी को पुनः भारत छोडो आंदोलन में जेल जाना पड़ा। स्वामी जी नेसम्पूर्ण बुन्देलखंड में शिक्षा की अलख जगाई आज भी उनके नाम से हमीरपुर में डिग्री कॉलेज चल रहा है। जिसकी नीव स्वामी ब्रह्मानंद जी ने 1938में ब्रह्मानंद विद्यालय के रूप में रखी। 1966 में गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद ने 10-12 लाख लोगों के साथ संसद के सामने आंदोलनकिया। गौहत्या निषेध आंदोलन में स्वामी ब्रह्मानंद को गिरप्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया गया। तब स्वामी ब्रह्मानंद ने प्रण लिया कि अगली बारचुनाव लड़कर ही संसद में आएंगे। स्वामी जी 1967 से 1977 तक हमीरपुर से सांसद रहे।जेल से मुक्त होकर स्वामी जी ने हमीरपुर लोकसभा सीटसे जनसंघ से 1967 में चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीतकर संसद भवन पहुंचे देश की संसद में स्वामी ब्रह्मानंद जी पहले वक्ता थे जिन्होनेगौवंश की रक्षा और गौवध का विरोध करते हुए संसद में करीब एक घंटे तक अपना ऐतहासिक भाषण दिया था। 1972 में स्वामी जी पूर्व प्रधानमंत्रीइंदिरा गाँधी के आग्रह पर कांग्रेस से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और राष्ट्रपति वीवी गिरि से स्वामी ब्रह्मानंद केकाफी निकट संबंध थे। स्वामी जी की निजी संपत्ति नहीं थीसन्यास ग्रहण करने के बाद उन्होने पैसा न छूने का प्रण लिया था और इस प्रण कापालन मरते दम तक किया। स्वामी ब्रह्मानंद अपनी पेंशन छात्रछात्राओं के हित में दान कर दिया करते थे।समाज सुधार और शिक्षा के प्रसार केलिए उन्होने अपना जीवन अर्पित कर दिया। वह कहा करते थे मेरी निजी संपत्ति नहीं है, यह तो सब जनता Read more » डॉ. राजेंद्र प्रसाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडित जवाहर लाल नेहरू महात्मा गांधी संन्यास स्वामी ब्रह्मानंद जी
राजनीति समाज दुनिया 30 साल बाद भी नहीं जीत पायी एड्स की जंग November 30, 2018 / November 30, 2018 by प्रभुनाथ शुक्ल | Leave a Comment प्रभुनाथ शुक्ल एड्स की 30 वीं वर्षगाँठ पूरी दुनिया में 01 दिसम्बर को मनायी जाती है। भारत के साथ वैश्विक देशों के लिए भी यह सामजिक त्रासदी और अभिशाप है। दुनिया में पहली बार 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न ने इस दिवस के बारे में कल्पना की थी। एड्स स्वयं में […] Read more » परामर्शदाता स्टाफ नर्स केयर कॉर्डिनेटर केयर कॉर्डिनेटर व सोशल वर्कर डाटा मैनेजर डॉक्टर दुनिया 30 साल बाद भी नहीं जीत पायी एड्स की जंग राहुल गांधी लैब टेक्निशियन सीएम योगी आदित्यनाथ
समाज राष्ट्र की अवचेतना का संरक्षक कौन ? November 30, 2018 / November 30, 2018 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य एक लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका , कार्यपालिका और विधायिका इन तीनों को राष्ट्र की अवचेतना का संरक्षक माना जाता है। इसके साथ – साथ जब इनमें से कोई भी अपने दायित्व और कर्तव्य के निर्वहन में कहीं चूक करता है तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ प्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका भी सामने आती […] Read more » अतार्किक अवैज्ञानिक कार्यपालिका जाति धर्म न्यायपालिका राष्ट्र की अवचेतना का संरक्षक कौन ? लिंग विधायिका
राजनीति समाज ऐतिहासिक सूत्रपात November 29, 2018 / November 29, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप पंजाब में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का शिलान्यास उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कर एक ऐतिहासिक मार्ग का सूत्रपात किया है। सिखों के प्रथम गुरु बाबा नानक देव के 550वें प्रकाश-पर्व पर यह आस्थामयी शुरुआत हो रही है। दूरबीन से निहारने और मत्था टेकने वाले करीब 12 करोड़ नानकभक्त अब गलियारे के जरिए पाकिस्तान […] Read more » ऐतिहासिक सूत्रपात करतारपुर गुरुद्वारे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह संयुक्त राष्ट्र सर्जिकल स्ट्राइक सिद्धू
समाज अनटोल्ड ट्रैजेटी आफ स्ट्रीट डॉग्स …!! November 29, 2018 / November 29, 2018 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा हे देश के नीति – नियंताओं । जिम्मेदार पदों पर आसीन नेताओं व अफसरों … आप सचमुच महान हो। जनसेवा में आप रात – दिन व्यस्त रहते हैं। इतना ज्यादा कि आप शूगर , प्रेशर , थाइराइड आदि से परेशान रहते हैं। आप देश के खेवैया हो। राष्ट्र की यह नैया आपके […] Read more » अनटोल्ड ट्रैजेटी आफ स्ट्रीट डॉग्स ...!! थाइराइड प्रेशर शूगर
समाज हिंसा से जख्मी होती राष्ट्रीय अस्मिता November 28, 2018 / November 28, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग- दिल्ली के द्वारका में नरभक्षी होने की अफवाह के चलते लोगों ने अफ्रीकी नागरिकों पर हमला कर दिया था। एक अन्य घटना में बेकाबू भीड़ ने पीट-पीटकर आटो ड्राइवर अविनाश कुमार की हत्या कर दी और दो अन्य को भी इतना पीटा कि वे अस्पताल में जिन्दगी के लिए जंग लड़ रहे हैं। […] Read more » अफ्रीकी नागरिकों पुलिस भारतीय समाज भीड़तंत्र भेड़तंत्र हिंसा से जख्मी होती राष्ट्रीय अस्मिता
समाज दिन ब दिन टूटते रिश्ते November 26, 2018 / November 26, 2018 by डॉ नीलम महेन्द्रा | Leave a Comment डॉ नीलम महेंद्र हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर जापान के नियमों के मुताबिक, उन्हें राजघराने से अपना नाता तोड़ना पड़ा। उनके इस विवाह के बाद अब वे खुद भी राजकुमारी से एक साधारण नागरिक बन गईं हैं। कैम्ब्रिज के ड्यूक और ब्रिटेन के […] Read more » दिन ब दिन टूटते रिश्ते फाइनैंशल स्टेटस ब्रिटेन राजकुमार विलियम संस्कार सामाजिक आर्थिक
समाज जलती चिताओं के पास पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर November 26, 2018 / November 26, 2018 by अनिल अनूप | Leave a Comment अनिल अनूप काशी के उस श्मशान पर जिसके बारे में ये मशहूर है कि यहां चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष मिलता है। दुनिया का वो इकलौता श्मशान जहां चिता की आग कभी ठंडी नहीं होती। जहां लाशों का आना और चिता का जलना कभी नहीं थमता। पर जब दहकती चिताओं के ठीक करीब […] Read more » काशी जलती चिताओं के पास पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर डांस पुलिस प्रशासन मणिकर्णिका घाट
राजनीति समाज प्रकृति एवं पर्यावरण की उपेक्षा क्यों? November 26, 2018 / November 26, 2018 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग- विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस प्रति वर्ष पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने एवं लोगों को जागरूक करने के सन्दर्भ में सकारात्मक कदम उठाने के लिए २६ नवम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के द्वारा आयोजित किया जाता है। पिछले करीब तीन दशकों से ऐसा महसूस किया जा रहा […] Read more » कन्द-मूल पशु-पक्षी पेड़़ पौधे प्रकृति एवं पर्यावरण की उपेक्षा क्यों? प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लताएं