समाज सार्थक पहल एक नई जीवनशैली की आदत डालनी होगी May 11, 2020 / May 11, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग – कोविड-19 की महामारी एवं कहर ने सबकुछ बदल दिया है। जो पहले हमारी जीवन का अपरिहार्य हिस्सा था, वह सबकुछ अब एक अलग दुनिया की चीज हो गयी है। एक बड़ा प्रश्न है कि हम कब अपनी पहले वाली जीवनशैली की ओर लौटेंगे। क्या लॉकडाउन में ढील दिए जाने या खत्म होने […] Read more » Have to get used to a new lifestyle नई जीवनशैली की आदत
लेख समाज संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं May 10, 2020 / May 11, 2020 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment (मातृ दिवस 10 मई 2020 पर विशेष आलेख) आज मातृ दिवस है, एक ऐसा दिन जिस दिन हमें संसार की समस्त माताओं का सम्मान और सलाम करना चाहिये। वैसे माँ किसी के सम्मान की मोहताज नहीं होती, माँ शब्द ही सम्मान के बराबर होता है, मातृ दिवस मनाने का उद्देश्य पुत्र के उत्थान में उनकी महान भूमिका को सलाम करना है। श्रीमद भागवत गीता में कहा गया है कि माँ की सेवा से मिला आशीर्वाद सात जन्म के पापों को नष्ट करता है। यही माँ शब्द की महिमा है। असल में कहा जाए तो माँ ही बच्चे की पहली गुरु होती है एक माँ आधे संस्कार तो बच्चे को अपने गर्भ में ही दे देती है यही माँ शब्द की शक्ति को दशार्ता है, वह माँ ही होती है पीडा सहकर अपने शिशु को जन्म देती है। और जन्म देने के बाद भी मॉं के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान होती है इसलिए माँ को सनातन धर्म में भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है। ‘माँ’ शब्द एक ऐसा शब्द है जिसमे समस्त संसार का बोध होता है। जिसके उच्चारण मात्र से ही हर दुख दर्द का अंत हो जाता है। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। रामायण में भगवान श्रीराम जी ने कहा है कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। कहा जाए तो जननी और जन्मभूमि के बिना स्वर्ग भी बेकार है क्योंकि माँ कि ममता कि छाया ही स्वर्ग का एहसास कराती है। जिस घर में माँ का सम्मान नहीं किया जाता है वो घर नरक से भी बदतर होता है, भगवान श्रीराम माँ शब्द को स्वर्ग से बढकर मानते थे क्योंकि संसार में माँ नहीं होगी तो संतान भी नहीं होगी और संसार भी आगे नहीं बढ पाएगा। संसार में माँ के समान कोई छाया नहीं है। संसार में माँ के समान कोई सहारा नहीं है। संसार में माँ के समान कोई रक्षक नहीं है और माँ के समान कोई प्रिय चीज नहीं है। एक माँ अपने पुत्र के लिए छाया, सहारा, रक्षक का काम करती है। माँ के रहते कोई भी बुरी शक्ति उसके जीवित रहते उसकी संतान को छू नहीं सकती। इसलिए एक माँ ही अपनी संतान की सबसे बडी रक्षक है। दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग मिलता है तो वो माँ के चरणों में मिलता है। जिस घर में माँ का अनादर किया जाता है, वहाँ कभी देवता वास नहीं करते। एक माँ ही होती है जो बच्चे कि हर गलती को माफ कर गले से लगा लेती है। यदि नारी नहीं होती तो सृष्टि की रचना नहीं हो सकती थी। स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश तक सृष्टि की रचना करने में असमर्थ बैठे थे। जब ब्रह्मा जी ने नारी की रचना की तभी से सृष्टि की शुरूआत हुई। बच्चे की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी चुनौती का डटकर सामना करना और बड़े होने पर भी वही मासूमियत और कोमलता भरा व्यवहार ये सब ही तो हर ‘माँ’ की मूल पहचान है। दुनिया की हर नारी में मातृत्व वास करता है। बेशक उसने संतान को जन्म दिया हो या न दिया हो। नारी इस संसार और प्रकृति की ‘जननी’ है। नारी के बिना तो संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सृष्टि के हर जीव और जन्तु की मूल पहचान माँ होती है। अगर माँ न हो तो संतान भी नहीं होगी और न ही सृष्टि आगे बढ पाएगी। इस संसार में जितने भी पुत्रों की मां हैं, वह अत्यंत सरल रूप में हैं। कहने का मतलब कि मां एकदम से सहज रूप में होती हैं। वे अपनी संतानों पर शीघ्रता से प्रसन्न हो जाती हैं। वह अपनी समस्त खुशियां अपनी संतान के लिए त्याग देती हैं, क्योंकि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, पुत्री कुपुत्री हो सकती है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती। एक संतान माँ को घर से निकाल सकती है लेकिन माँ हमेशा अपनी संतान को आश्रय देती है। एक माँ ही है जो अपनी संतान का पेट भरने के लिए खुद भूखी सो जाती है और उसका हर दुख दर्द खुद सहन करती है। लेकिन आज के समय में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपने मात-पिता को बोझ समझते हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम में रहने को मजबूर करते हैं। ऐसे लोगों को आज के दिन अपनी गलतियों का पश्चाताप कर अपने माता-पिताओं को जो वृध्द आश्रम में रह रहे हैं उनको घर लाने के लिए अपना कदम बढाना चाहिए। क्योंकि माता-पिता से बढकर दुनिया में कोई नहीं होता। माता के बारे में कहा जाए तो जिस घर में माँ नहीं होती या माँ का सम्मान नहीं किया जाता वहाँ दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का वास नहीं होता। हम नदियों और अपनी भाषा को माता का दर्जा दे सकते हैं तो अपनी माँ से वो हक क्यों छीन रहे हैं। और उन्हें वृध्दाआश्रम भेजने को मजबूर कर रहे है। यह सोचने वाली बात है। माता के सम्मान का एक दिन नहीं होता। माता का सम्मान हमें 365 दिन करना चाहिए। लेकिन क्यों न हम इस मातृ दिवस से अपनी गलतियों का पश्चाताप कर उनसे माफी मांगें। और माता की आज्ञा का पालन करने और अपने दुराचरण से माता को कष्ट न देने का संकल्प लेकर मातृ दिवस को सार्थक बनाएं. Read more » (मातृ दिवस 10 मई 2020 mothers day माँ मातृ दिवस
लेख समाज त्याग, समर्पण व ममता की प्रतिमूर्ति जीवनदायिनी माँ May 10, 2020 / May 10, 2020 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment दीपक कुमार त्यागीहमारे देश की प्राचीन गौरवशाली संस्कृति में वैसे तो माँ आदिकाल से ही पूज्यनीय रही है उसके लिए हमको मातृ-दिवस के एक दिन इंतजार करना आवश्यक नहीं है। लेकिन पश्चिमी संस्कृति से प्रभाव के चलते अब भारत में भी प्रत्येक वर्ष मातृ-दिवस मई महीने के दूसरे रविवार को जोरशोर से मनाया जाने लगा […] Read more » जीवनदायिनी माँ त्याग ममता की प्रतिमूर्ति
लेख समाज मां और भारतीय परिवार विज्ञान : विश्व की एक अद्भुत व्यवस्था जिसकी संचालिका होती है मां May 10, 2020 / May 10, 2020 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment आज मातृ दिवस है । सचमुच हम सब में वे लोग सौभाग्यशाली हैं जिनकी मां है । जिनकी नहीं है , उन्हें निश्चय ही आज अपनी मां की याद आ रही होगी । मुझे भी अपनी मां का प्यार और उसकी ममता की स्वाभाविक रूप से याद आ रही है ।अपनी उसी ममतामयी मां की […] Read more » Mother and Indian Family Science wonderful system of the world which is governed by the mother मां और भारतीय परिवार विज्ञान
समाज अमानवीय व्यवहार को बढ़ावा देता कोरोना वायरस(कोविड-19) May 10, 2020 / May 10, 2020 by शिवेन्दु राय | Leave a Comment कोरोना वायरस(कोविड-19) जैसी वैश्विक महामारी से हम भयभीत है, सशंकित है. जिसके कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और यह जरुरी भी है. लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर मजदूरों और गरीबों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा है, जो भारत जैसे लोकतान्त्रिक और गंगा-जमुनी तहजीब वाले देश में अपराध की श्रेणी […] Read more » गांवों में कोरोना वायरस
लेख समाज दुनिया बदलना चाहते हैं तो शुरुआत घर से करें May 9, 2020 / May 9, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग – दुःख को सुख मेें बदलने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास बहुत जरूरी है। एक ही परिस्थिति और घटना को दो व्यक्ति भिन्न-भिन्न प्रकार से ग्रहण करते हैं। जिसका चिंतन विधायक होता है, वह अभाव को भी भाव तथा दुःख को भी सुख में बदलने में सफल हो सकता है। जिसका सोच […] Read more » दुनिया बदलना चाहते हैं
समाज देश के सभी नागरिकों का चरित्र निर्माण किए बिना देशोन्नति होना सम्भव नहीं May 7, 2020 / May 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देश में भौतिक उन्नति की बातें बहुत की जाती है और कुछ सीमा तक देश में भौतिक उन्नति हुई भी है। परन्तु यह भी सच है कि इस उन्नति का लाभ देश के सभी नागरिकों को समान रूप से नहीं मिला। इसका प्रमुख कारण देश के नागरिकों का चरित्रवान न होना […] Read more » देशोन्नति
लेख समाज सोशल मीडिया से बच्चों में दर्ज होती विकृतियां May 7, 2020 / May 7, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग-दिल्ली में स्कूल जानेवाले नाबालिग बच्चे इंस्टाग्राम पर ‘बॉयज लॉकर रूम’ ग्रुप बनाकर गंदी बातें करते थे, नाबालिग लड़कियों नग्न फोटोज शेयर करते और लड़कियों पर गलत कॉमेंट्स और फिर रेप तक करने की बातें होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसमें दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों के 21 छात्रों के शामिल होने […] Read more » Social media causes distractions in children इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकॉनामिक्स बच्चों में दर्ज होती विकृतियां सोशल मीडिया यूज एंड चिल्ड्रन्स वेलबीइंग
लेख समाज गांधी के चरखे से आत्मनिर्भर होंगे गांव May 5, 2020 / May 8, 2020 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव वैश्विक कोरोना महामारी के इस दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सरपंचों को संबोधित करते हुए इच्छा जताई है कि गांधी के अर्थशास्त्र के अनुसार ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू हो। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय (एमएसएमई) के अधीनस्थ कार्यरत खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने फिलहाल […] Read more » MSME एमएसएमई ग्रामों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा चरखा और खादी सूक्ष्म
समाज कोरोना संक्रमण के दौर में पेट के लिए जूझता मजदूर May 3, 2020 / May 3, 2020 by मुरली मनोहर श्रीवास्तव | Leave a Comment मुरली मनोहर श्रीवास्तव मजदूर और उनके दर्द को समझ पाना हर किसी के वश की बात नहीं है। कोरोना वायरस के फैलने के बाद देश और दुनिया में मजदूरों के समक्ष भूखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। अपनी मेहनत के बूते अपनों का पेट भरने वाला मजदूर आज खुद ही अपने पेट को […] Read more » कोरोना संक्रमण पेट के लिए जूझता मजदूर
समाज गांव से शहरो की ओर पलायन जिम्मेदार कौन May 2, 2020 / May 2, 2020 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment भारत गाँवों का देश है। भारत की अधिकतम जनता गाँवों में निवास करती हैं। महात्मा गाँधी जी कहते थे कि वास्तविक भारका दर्शन गाँवों में ही सम्भव है जहाँ भारत की आत्मा बसती है। गांव देश की उन्नति में अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी कहते थे देश की […] Read more » Who is responsible for migration from village to cities
समाज स्वास्थ्य-योग कोरोना को परास्त करने की सकारात्मक सोच May 2, 2020 / May 2, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment – ललित गर्ग –कोरोना महामारी के बाद जीवनशैली में व्यापक बदलाव होंगे। यह महामारी मानव मन, जीवन और उसके पूरे भविष्य को गंभीर व दीर्घकालिक रूप से परिवर्तित करेगी। कोरोना का महासंकट विश्व को एक नई दिशा में मोड़ेगा, ऐसा भी कहा जा सकता हैं कोरोना कहर से मुक्ति के बाद लाखों-करोड़ों लोगों का जीवन […] Read more » Positive Thinking of Defeating Corona कोरोना कोरोना महासंकट से मुक्ति में सफलता