विविधा बापू की यादें बनीं जीवन का सहारा January 30, 2014 / January 30, 2014 by एम. अफसर खां सागर | Leave a Comment – एम अफसर खां सागर- उनकी काया शारीरिक रूप से दुर्बल ज़रुर दिखती थी मगर वे बेहद मजबूत थे, शारीरिक और आत्मिक दोनों रूपों में। आत्मबल के लिए जहां वो मौन रहने और ध्यान, पूजन-अर्चन पर विशेष रूप से केन्द्रित रहते थे, वहीँ शारीरिक तौर पर सक्रियता बनाये रखने के लिए वे हर […] Read more » Mahatma Gandhi Mahatma Gandhi memories बापू की यादें बनीं जीवन का सहारा
विविधा पंचायती राज और जातीय पंचायतें January 30, 2014 / January 30, 2014 by दिनेश परमार | Leave a Comment -दिनेश परमार- न्याय एक सार्वभौमिक अवधारणा है। अतः संसार के प्रत्येक देश में इसके संबंध में बहुत विपुल कार्य किया गया। पश्चिम में अरस्तु-प्लेटों जैसे आदर्शवादियों से लेकर मैकियावेली जैसे कुटनीतिज्ञों व लॉक-हॉब्स जैसे सामाजिक समझौतावादियों से लेकर मार्क्स जैसे क्रांतिवादियों तक सभी ने न्याय को अपने-अपने ढंग से परिभाषित किया। अपने देश में […] Read more » Panchayati Raj and caste panchayats Panchayati Raj and village assembly पंचायती राज और जातीय पंचायतें
विविधा बिहार के विकास के प्रारूप की समीक्षा January 29, 2014 / January 29, 2014 by आलोक कुमार | Leave a Comment -आलोक कुमार- मौजूदा दौर में अगर “बहुप्रचारित विकसित बिहार” की बात करें तो लंबी-चौड़ी सड़कों, अपार्टमेन्टस एवं मॉल्स के निर्माण और विकास दर (आंकड़ों की बाजीगरी) के बढ़ने को ही विकास बताया जा रहा है। सबसे घातक तो यह है कि सत्ता में बैठे लोग दूसरों को भी इसी अवधारणा को सच मानने के […] Read more » Bihar development report बिहार के विकास के प्रारूप की समीक्षा
विविधा विधवाओं को सिलाई मशीन और जवानों को जय हिन्द ? January 29, 2014 / January 29, 2014 by डा. अरविन्द कुमार सिंह | Leave a Comment -डॉ. अरविन्द कुमार सिंह- कल मुम्बई में एक कार्यक्रम हुआ। अवसर था ‘‘ऐ मेरे वतन के लोगों’’ गीत के 51 वीं जयन्ती का। राष्ट्र कवि प्रदीप का लिखा और सुर सामाग्री लता का गाया यह गीत वास्तव में कालजयी गीत है। इस गीत की पंक्तियां सुनकर अक्सर मैं कुछ कहना चाहता था। पर हर […] Read more » injustice with indian army ? विधवाओं को सिलाई मशीन और जवानों को जय हिन्द ?
विविधा विकेंद्रीकरण के सन्दर्भ में ब्राजील का अध्ययन January 29, 2014 / January 29, 2014 by कन्हैया झा | 6 Comments on विकेंद्रीकरण के सन्दर्भ में ब्राजील का अध्ययन -कन्हैया झा- बीसवीं शताब्दी में ब्राजील का आधुनिकरण तीन स्तंभों आर्थिक विकास, औद्योगीकरण, एवं शहरीकरण पर आधारित था. सन 1980 में कृषि एवं खनन (प्राथमिक क्षेत्र) में संलग्न जनता का प्रतिशत घटते-घटे केवल 30 रह गया था. गरीब एवं अति-गरीब का प्रतिशत 35 होने से ब्राजील उस समय सबसे अधिक असमान देश था. […] Read more » Brazil विकेंद्रीकरण के सन्दर्भ में ब्राजील का अध्ययन
विविधा सरकारी बंगलों में “सत्ता- प्रायोजित” गोरखधंधा January 29, 2014 / January 29, 2014 by आलोक कुमार | 1 Comment on सरकारी बंगलों में “सत्ता- प्रायोजित” गोरखधंधा -आलोक कुमार- बिहार के बहुप्रचारित सुशासन में सरकारी -सरंचनाओं का दुरुपयोग शासन की सहभागिता से धड़ल्ले से जारी है। एक तरफ तो राजधानी पटना में हेरिटेज इमारतों को ढाह कर नयी इमारतें खड़ी की जा रही हैं , जगह-जमीन की कमी का रोना रोया जा रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी -बंगलों में “अवैध […] Read more » Bihar government Bihar government flats using politicians सरकारी बंगलों में "सत्ता- प्रायोजित" गोरखधंधा
विविधा नकल माफ़ियाओं के चंगुल में माध्यमिक और उच्च शिक्षा January 28, 2014 / January 28, 2014 by राघवेन्द्र कुमार 'राघव' | Leave a Comment -राघवेन्द्र कुमार राघव- हरदोई ज़िले की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह नकल माफ़ियाओं की गिरफ़्त में है। प्रतिवर्ष 50,000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं नकल की महामारी से संक्रमित होकर अंधकार के गर्त में गिर जाते हैं। शासन और प्रशासन नकल के इस काले खेल में बराबरी की भागीदारी का निर्वाह करता दिखता है। मार्च माह में होने […] Read more » Middle and high school exam नकल माफ़ियाओं के चंगुल में माध्यमिक और उच्च शिक्षा
विविधा मुस्लिम घुसपैठियों पर चुप्पी क्यों? January 28, 2014 / January 28, 2014 by प्रवीण दुबे | 2 Comments on मुस्लिम घुसपैठियों पर चुप्पी क्यों? -प्रवीण दुबे- घुसपैठ विशेषकर मुस्लिम घुसपैठ को लेकर हमारी केन्द्र सरकार अपने मुंह पर मुसीका क्यों लगा लेती है? कश्मीर में पाकिस्तान से और पूर्वोत्तर के राज्यों में बांग्लादेश से होने वाली मुस्लिम घुसपैठ पर यह सरकार कभी खुलकर नहीं बोलती और न इन्हें रोकने के लिए कोई कड़े कदम उठाए जाते हैं। अब […] Read more » why silence on muslim infiltrator ? muslim infiltrator मुस्लिम घुसपैठियों पर चुप्पी क्यों?
विविधा संकट में ग्रामीण शिक्षा January 28, 2014 / January 28, 2014 by अभिषेक रंजन | Leave a Comment -अभिषेक रंजन- खबरिया चैनलों, अखबारों के माध्यम से आजकल हर रोज कोई न कोई नया सर्वे होने की खबर मिलती रहती है. लेकिन दुखद बात है कि जहां एक तरफ राजनीतिक सर्वे को लेकर दिन-रात बहस होती दिखाई देती है, वहीं देश से जुड़े कुछ अहम् मुद्दे चर्चा के केंद्र बिंदु बनना तो दूर, […] Read more » rural education in problem संकट में ग्रामीण शिक्षा
विविधा नीतीश के टूटते हुए तिलिस्म का ट्रेलर January 24, 2014 / January 24, 2014 by आलोक कुमार | 1 Comment on नीतीश के टूटते हुए तिलिस्म का ट्रेलर -आलोक कुमार- हाल ही में बिहार के बेगूसराय जिले के गढ़पुरा में नीतीश कुमार की सभा में जिस प्रकार का विरोध प्रदर्शन हुआ। वो फिर से यह दर्शाता है कि नीतीश के शासन के खिलाफ जनता में कैसा आक्रोश है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि बिहार से संबंधित मीडिया के किसी […] Read more » Nitish Kumar नीतीश के टूटते हुए तिलिस्म का ट्रेलर
विविधा वाह रज़ा बनारस, वाह ! January 24, 2014 / January 24, 2014 by नीरज वर्मा | 1 Comment on वाह रज़ा बनारस, वाह ! -नीरज वर्मा- भारतवर्ष ! उसका एक बड़ा और अहम हिस्सा उत्तर-प्रदेश ! और उत्तर-प्रदेश का बेहद अहम् हिस्सा वाराणसी / काशी / बनारस ! मोक्ष की नगरी – तीर्थाटन की नगरी – और औघड़-दानी भगवान शिव की नगरी ! हिन्दुस्तानी संस्कृति और सभ्यता की प्रतीक ! विदेशों में सर्वाधिक लोकप्रिय भारतीय शहर ! एक अजीब […] Read more » Banaras वाह ! वाह रज़ा बनारस
विविधा महेश भट्टजी ! तो हो जाए शशि-सुनंदा पर भी एक फिल्म! January 24, 2014 / January 24, 2014 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment -तारकेश कुमार ओझा- सचमुच जीवन विरोधाभासों से भरता जा रहा है। व्यवहार में जो बातें असंभव प्रतीत होती है, दुनिया में वही होता दिखाई देता है। अब देश के सर्वाधिक संभ्रांत कहे-समझे जाने वाले राजनेता शशि थरुर का ही उदाहरण लें। विचार और जीवनशैली में फिल्म निदेशक महेश भट्ट के करीब नजर आने वाले […] Read more » Shashi Tharur Sunanda Pushkar महेश भट्टजी ! तो हो जाए शशि-सुनंदा पर भी एक फिल्म!