विविधा जनता का पैसा October 10, 2013 by कन्हैया झा | Leave a Comment भारत सरकार पर जनता के पैसे को खर्च करने की जिम्मेवारी होती है, जिसे वह अनेक प्रकार के टैक्स के रूप में जनता से वसूल करती है. केंद्र तथा राज्य सरकारें मिलकर एक साल में लगभग 15 से 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करती हैं, जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र द्वारा तथा 40 प्रतिशत राज्यों द्वारा […] Read more » जनता का पैसा
विविधा रेलवे में लालू की बाजीगरी October 9, 2013 by हिमांशु शेखर | 3 Comments on रेलवे में लालू की बाजीगरी हिमांशु शेखर लालू यादव चारा घोटाले की सजा जेल में काट रहे हैं। कई लोग बतौर रेल मंत्री उनके कामकाज की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। 2004 में जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री बने तो उन्होंने घाटे का पर्याय बन चुके भारतीय रेल को अचानक मुनाफे की मशीन […] Read more » रेलवे में लालू की बाजीगरी
विविधा मन से स्वीकारें स्त्री के वजूद को तभी है देवी उपासना का अधिकार October 5, 2013 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on मन से स्वीकारें स्त्री के वजूद को तभी है देवी उपासना का अधिकार डॉ. दीपक आचार्य देवी उपासना का सीधा संबंध स्त्री के वजूद और परम व्यापक अस्तित्व की मन से स्वीकार्यता से जुड़ा है जहाँ स्त्री को अपने से ऊपर और अपेक्षाकृत अधिक शक्तिमान स्वीकारा गया है और यह साफ-साफ कह दिया गया है कि इसके बगैर पुरुष का न अस्तित्व है, न सामथ्र्य। शक्ति […] Read more » देवी उपासना
जरूर पढ़ें विविधा वेदों ने गौ माता को अवध्या कहकर पूजनीया माना है October 2, 2013 by राकेश कुमार आर्य | 15 Comments on वेदों ने गौ माता को अवध्या कहकर पूजनीया माना है राकेश कुमार आर्य वैदिक संस्कृति संसार की सर्वोत्तम संस्कृति है। इस संस्कृति ने अहिंसा को धर्म के दस लक्षणों में जीवन को उन्नतिशील बनाने वाले दस यम नियमों में प्रमुख स्थान दिया है। इसने दुष्ट की दुष्टता के दमन के लिए मन्यु की अर्थात सात्विक क्रोध की तो कामना की है, परंतु अक्रोध को धर्म […] Read more » वेदों ने गौ माता को अवध्या कहकर पूजनीया माना है
विविधा आधार कार्ड हुआ निराधार September 30, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव आखिरकार केंद्र सरकार के हलफनामे और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने आधार कार्ड निराधार घोषित कर दिया। अब आधार कार्ड बनेंगे तो सही लेकिन इनकी अहमियत अनिवार्यता के बजाय वैकिलपक ही रहेगी। हालांकि संसद की स्थायी समिति ने भी इस पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसके निर्माण […] Read more » आधार कार्ड हुआ निराधार
जन-जागरण विविधा ज्ञान महाशक्ति कब बनेगा भारत? September 30, 2013 / September 30, 2013 by कुन्दन पाण्डेय | 3 Comments on ज्ञान महाशक्ति कब बनेगा भारत? कुन्दन पाण्डेय सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे महत्वपूर्ण अंग शिक्षा है। भारत में शिक्षा विदेशों से बहुत बेहतर स्थिति में नालंदा विश्वविद्यालय के जीवित रहने तक थी। भारत आर्थिक महाशक्ति बन चुका है। सैन्य महाशक्ति बनने की ओर तेजी से अग्रसर है, लेकिन भारत ज्ञान महाशक्ति कब बनेगा? इसे केंद्र सरकार नहीं बता पा रही है। […] Read more » ज्ञान महाशक्ति कब बनेगा भारत?
विविधा जादू की छड़ी नहीं है विशेष राज्य का दर्जा September 17, 2013 / September 17, 2013 by देवेन्द्र कुमार | Leave a Comment देवेन्द्र कुमार एक लम्बा संघर्ष, अनगिनत कुर्बानियां और जनान्दोलन की कोख से उपजा झारखंड अपने जन्म के साथ ही राजनीतिक अस्थिरता का शिकार हो गया । छोटे छोटे दल और निर्दलियों की केन्द्रीय भूमिका हमेशा बनी रही । सच कहा जाय तो वे किंग मेकर की भूमिका में बने रहें । मंत्री – मुख्यमंत्री पद […] Read more »
विविधा दिल्ली विधानसभा चुनाव : यह आम आदमी पार्टी की अग्नि परीक्षा है September 14, 2013 / September 14, 2013 by डॉ. मनीष कुमार | 4 Comments on दिल्ली विधानसभा चुनाव : यह आम आदमी पार्टी की अग्नि परीक्षा है काजल की काली कोठरी के बाहर रह कर खुद को बेदाग कहना आसान है, लेकिन काजल की काली कोठरी के अंदर रह कर खुद को बेदाग रखना ही असली परीक्षा है. आम आदमी पार्टी राजनीति की काली कोठरी से अब तक बाहर है. अभी अंदर गई भी नहीं है, लेकिन इसके अंदाज बदलने लगे हैं. […] Read more » दिल्ली विधानसभा चुनाव
विविधा क्यों न खाएं पेट भर रोटी ? September 14, 2013 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment संदर्भ:- कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नया नारा- प्रमोद भार्गव चुनावी दौर में नए नारे बनते रहे हैं। किसी नए नारे के वजूद में आने के बाद उसी सांकेतिक अर्थ के पुराने नारे का लोप हो जाता है। राजस्थान के सलूम्बर ;उदसपुर में कांग्रेस के संपन्न आदिवासी-किसान सम्मेलन में बदलते नारे का नजारा देखने में […] Read more » क्यों न खाएं पेट भर रोटी ?
विविधा हिंदी दिवस हिन्दी दिवस नही ‘संस्कृति दिवस’ September 14, 2013 / September 14, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment हिंदी दिवस एक बार पुन: आ गया है। हर वर्ष हम 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाते हैं। हिंदी हमारी राजभाषा है, लेकिन राष्ट्रभाषा नही बन पायी है। स्वतंत्रता के बीते 66 वर्षों की यह दुखद उपलब्धि है कि हम आज तक हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा नही बना पाए, यद्यपि भारतवर्ष […] Read more » हिन्दी दिवस नही 'संस्कृति दिवस’
विविधा अंग्रेजी बनाम हिन्दी ‘गुलामी की हद नहीं तो और क्या है?’ September 13, 2013 by विकास कुमार गुप्ता | 3 Comments on अंग्रेजी बनाम हिन्दी ‘गुलामी की हद नहीं तो और क्या है?’ गांधीजी ने हिन्द स्वराज में कहा था- ‘हिन्दुस्तान की आम भाषा अंग्रेजी नहीं, बल्कि हिन्दी है। वह आपको सीखनी होगी और हम तो आपके साथ अपनी भाषा में ही व्यवहार करेंगे।‘ उन्होंने अपने बैरिस्टर होते हुए अंग्रेजी भाषा में बहस करने पर भी कटाक्ष किया था, ‘यह क्या कम जुल्म की बात है कि अपने […] Read more » अंग्रेजी बनाम हिन्दी अंग्रेजी बनाम हिन्दी ‘गुलामी की हद
विविधा भारत में दिशाविहीन शिक्षा प्रणाली: बुनियादी बदलाव की दरकार September 12, 2013 / September 12, 2013 by डॉ. संजय वर्मा | 1 Comment on भारत में दिशाविहीन शिक्षा प्रणाली: बुनियादी बदलाव की दरकार भाग-1 डॉ. संजय वर्मा भारत में शिक्षा प्रणाली की गौरवशाली परंपरा रही है। प्राचीन काल में भारत का अपने शिक्षा केन्द्रों के कारण पूरे विश्व में विशिष्ट स्थान था। नालंदा और तक्षशिला विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केन्द्र थे जहाँ विश्व के कोने-कोने से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। प्राचीन काल में भारतीय शिक्षा पद्धति का […] Read more » शिक्षा प्रणाली