विविधा सवाल सिर्फ़ हिंदी का नहीं August 12, 2013 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | Leave a Comment उमेश उपाध्याय बहस हिंदी और अंग्रेज़ी की कतई नहीं है सवाल सारी गैर अंग्रेज़ी भाषाओँ का हैं. अंग्रेजी अब एक खास तरीके से समाज में असमानता को और ज्यादा गहराने वाली भाषा बन गई है. ज्यों ज्यों इन्टरनेट का फैलाव हो रहा है कार्य व्यापार से भारतीय भाषाएँ सिमटती जा रहीं हैं.आज से पचास साल […] Read more » हिंदी
जरूर पढ़ें विविधा “भारतीय संस्कृति -एक परिचय “ August 12, 2013 / August 12, 2013 by डॉ. सौरभ मालवीय | 7 Comments on “भारतीय संस्कृति -एक परिचय “ डॉ. सौरभ मालवीय संस्कृति का उद्देश्य मानव जीवन को सुन्दर बनाना है। मानव की जीवन पद्धति और धर्माधिष्ठित उस जीवन पद्धति का विकास भी उस संस्कृति शब्द से प्रकट होने वाला अर्थ है। इस अर्थ में राष्ट्र उसकी संतति रूप समाज, उस समाज का धर्म इतिहास एवं परम्परा आदि सभी बातों का आधार संस्कृति है। […] Read more » "भारतीय संस्कृति -एक परिचय " भारतीय संस्कृति
विविधा थूक का स्वाद August 11, 2013 / August 11, 2013 by रवि कुमार छवि | Leave a Comment रवि कुमार छवि आइए शर्मा जी, कैसे हैं आप. मुरारी बाबू पान पर चूना लगाते-लगाते भले मन से पूछ ही लेते हैं. ठीक हूं. आप कैसे हैं, और ये बेवजह, अपना गमछा क्यों ओढ़ के रखे हैं वो भी इतनी गर्मी में. थोड़े उदास मन से शर्मा जी बोलते हैं। मुरारी बाबू की निकली हई […] Read more » थूक का स्वाद
राजनीति विविधा अब तो इस तालाब का पानी बदल दो August 10, 2013 by वीरेंदर परिहार | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार दुर्गा शक्ति नागपाल का निलम्बन एक ऐसा प्रकरण है,जिससे यह पता चलता है, हमारी शासन-व्यवस्था का किस हद तक पतन हो चुका है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की गौतम बुद्ध नगर की आर्इ.ए.एस. अधिकारी जो कि प्रशिक्षु एस.डी.एम. थी, वह एक दमदार अधिकारी थी। उन्होने खनन-माफिया को ठिकाने लगा दिया। स्वाभाविक […] Read more » दुर्गा शक्ति नागपाल का निलम्बन
विविधा नरेश भारतीय की कविता – संकल्प कर, संकल्प कर August 8, 2013 / August 8, 2013 by नरेश भारतीय | Leave a Comment शूरवीरों की हुंकार भर गांडीव की टंकार कर नरसिंह की दहाड़ सा अपमान के प्रतिशोध का भारत के युवा रक्त संकल्प कर, संकल्प कर. मां भारती पुकारती निज भाग्य को धिक्कारती संतप्त वह संत्रस्त है चीन, पाक पूर्ववत् सतत् षड्यंत्र व्यस्त हैं. पाप का भरता घड़ा फूटने को है मगर अनजान क्यों शासक […] Read more »
विविधा विश्ववार्ता आतंक में शान्ति खोजती भारत सरकार August 8, 2013 by वासुदेव त्रिपाठी | Leave a Comment वासुदेव त्रिपाठी आज जब समूचा भारतीय उपमहाद्वीप बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है और नाटो सेनाएँ अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की तैयारी में हैं, पाकिस्तान के बदतर हालातों के बींच सफल लोकतान्त्रिक सत्ता हस्तांतरण एशियाई व वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। नवाज़ शरीफ के रेकॉर्ड तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं और […] Read more »
टॉप स्टोरी विविधा भारतीय राज्य पुनर्गठन –एक दृष्टि August 5, 2013 by डॉ. धनाकर ठाकुर | 9 Comments on भारतीय राज्य पुनर्गठन –एक दृष्टि डा॰ धनाकर ठाकुर भारत – राज्यों का संघ है – राज्य ही मूल इकाई होनी चाहिए जो २.५- ५ % आबादी या और क्षेत्रफल के मानडंडों को पूरा करने वाला हो मैं १९७७ से देश में सांगठनिक प्रवास कर रहा हु प्रान्त की जीविता , भूगोल, जलवायु, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, राष्ट्र की सुरक्षा और भाषा जो […] Read more » भारतीय राज्य पुनर्गठन
विविधा समाज प्रेमचंद या मुंशी प्रेमचंद ? August 4, 2013 / August 4, 2013 by डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री | Leave a Comment डा. रवीन्द्र अग्निहोत्री 31 जुलाई । महान साहित्यकार एवं उपन्यास सम्राट प्रेमचंद का जन्मदिवस। इस अवसर पर अनेक लेखकों ने उन्हें याद किया, उनके साहित्य, उनकी विशेषताओं, उनके योगदान की चर्चा की। किसी ने उन्हें प्रेमचंद लिखा तो किसी ने मुंशी प्रेमचंद। यह तथ्य तो प्रायः सर्वज्ञात है कि जिन्हें हम ” प्रेमचंद ” के नाम से […] Read more » प्रेमचंद या मुंशी प्रेमचंद ?
विविधा एक ही थैली के चट्टे बट्टे August 4, 2013 / August 4, 2013 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment राकेश कुमार आर्य जब हम किन्हीं दो या दो से अधिक लोगों के विषय में ये कहते हैं कि वे तो दोनों या वे सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं, तो सामान्यत: इसका अर्थ कुछ इस प्रकार लेते हैं, जैसे वे एक ही थैली के बट्टे (तोल में काम आने वाले बाट आदि) है। इस बट्टे के […] Read more » थैली के चट्टे बट्टे
विविधा व्यंग्य जाम-स्तुति August 2, 2013 / August 2, 2013 by डा.राज सक्सेना | Leave a Comment डा.राज सक्सेना वह सुरा – पात्र दो दयानिधे,जब मूड बने तब भर जाए | है आठ लार्ज, कोटा अपना,बिन – मांगे पूरा कर जाए | प्रातः उठते ही हैम – चिकन, फ्राइड फिश से हो ब्रेकफास्ट | हो मट्न लंच में हे स्वामी, मैं बटरचिकन से करूं लास्ट | मिलजाय डिनर बिरयानी का,संग […] Read more » जाम-स्तुति
विविधा भारोपीय परिवार की भारतीय आर्य भाषाएँ August 1, 2013 / August 1, 2013 by प्रोफेसर महावीर सरन जैन | 1 Comment on भारोपीय परिवार की भारतीय आर्य भाषाएँ प्रोफेसर महावीर सरन जैन [ भारत की भाषाओं के अध्ययन की रूपरेखा एवं भाषाओं के विवरण के आधार शीर्षक लेख के अंतर्गत मैंने भारत में बोले जाने वाले चार भाषा-परिवारों तथा उन परिवारों की भाषाओं के अध्ययन के आधारों की चर्चा की थीः https://www.pravakta.com/study-design-of-indian-languages-and-description-of-thelanguages इस लेख के अंतर्गत उक्त लेख में वर्णित चार भाषा-परिवारों […] Read more » भारतीय आर्य भाषाएँ
विविधा सियासत से खंडित होता देश August 1, 2013 / August 1, 2013 by सिद्धार्थ शंकर गौतम | 1 Comment on सियासत से खंडित होता देश सिद्धार्थ शंकर गौतम स्कूल में रोज सुबह होने वाली प्रार्थना में हम सभी भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रणाम करते हुए इसकी सलामती की दुआ मांगा करते थे, पर शायद हमारे ही देश के नेताओं को इसकी अखंडता और संप्रभुता रास नहीं आ रही। तभी चंद स्वार्थी तत्वों ने अपनी राजनीति को चमकाने के […] Read more » सियासत से खंडित होता देश