विविधा यूजफुल ईडीयट्स की भूमिका July 11, 2011 / December 9, 2011 by शंकर शरण | 1 Comment on यूजफुल ईडीयट्स की भूमिका शंकर शरण ‘यूजफुल ईडीयट्स’ एक विश्व-विख्यात मुहावरा है। इसी नाम से बीबीसी ने गत वर्ष एक ज्ञानवर्द्धक डॉक्यूमेंटरी भी बनाई है। इस कवित्वमय मुहावरे के जन्मदाता रूसी कम्युनिज्म के संस्थापक लेनिन थे। अर्थ थाः वे बुद्धिजीवी जो अपनी किसी हल्की या भावुक समझ से कम्युनिस्टों की मदद करते थे। ऐसे बुद्धिजीवियों को उपयोगी मूर्ख कहने […] Read more » Communist कम्युनिस्ट यूजफुल ईडीयट्स वामपंथी
विविधा एड्स के जीवाणु हमारे पूर्वज तो नहीं July 11, 2011 / December 9, 2011 by महेश दत्त शर्मा | 2 Comments on एड्स के जीवाणु हमारे पूर्वज तो नहीं महेश दत्त शर्मा पहले एक विनम्र निवेदन : इस लेख में प्रस्तुत विचार मेरी नितांत मौलिक परिकल्पना या कहना होगा अनुभूति हैं। इनसे किसी को ठेस लगे तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। मेरे घर में बहुत सी चींटियाँ हैं, कॉक्रोच हैं; छिपकलियाँ, चूहे, मकड़ियाँ, दीमक और अनेक छोटे-बड़े कीट-पतंगे हैं जो मेरे परिवार के साथ […] Read more » aids एड्स
विविधा जेएनयू की बौद्धिक संस्कृति July 8, 2011 / December 9, 2011 by शंकर शरण | 16 Comments on जेएनयू की बौद्धिक संस्कृति शंकर शरण जब एक संवाददाता ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की चार दशक की उपलब्धियों के बारे में प्रश्न पूछा, तो वहाँ के रेक्टर का प्रमुख उत्तर था कि अब तक सिविल सर्विस में इतने छात्र वहाँ से चुने गए। दूसरी कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि वे गिना नहीं पाए जो समाचार में स्थान पा सकती। सरसरी […] Read more » JNU जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जेएनयू मार्क्सवाद वामपंथ
विविधा भ्रष्टाचारी का, भ्रष्टाचार के लिए, भ्रष्ट शासन July 7, 2011 / December 9, 2011 by जीतेन्द्र कुमार नामदेव | 1 Comment on भ्रष्टाचारी का, भ्रष्टाचार के लिए, भ्रष्ट शासन जितेन्द्र कुमार नामदेव इतिहास गवाह है जब-जब अति हुई है उसका अंत भी हुआ है। भारत को आजादी के बाद एक सम्पूर्ण लोकतान्त्रिक गणराज्य बनाने का सपना जो देश के महापूरूषों ने देखा था वो पूरा तो हुआ पर एक सपने की तरह। जब आंख खुली तो लोकतान्त्रिक गणराज्य विखरा हुआ पाया जिसका नतीजा आज […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
विविधा क्या महज ‘‘औपचारिक‘‘ रह गई है गांधी टोपी! July 7, 2011 / December 9, 2011 by लिमटी खरे | 2 Comments on क्या महज ‘‘औपचारिक‘‘ रह गई है गांधी टोपी! लिमटी खरे कांग्रेस का इतिहास गौरवमयी रहा है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। एक दशक से कांग्रेस अपने मूल मार्ग से भटक चुकी है। अब सत्ता की मलाई चखना, भ्रष्टों को प्रश्रय देना, जनता जनार्दन का गला रेतकर उसकी जेब से पैसा निकालना कांग्रेस का मूल मंत्र बन गया है। आधी […] Read more » Mahatma Gandhi गांधी टोपी
विविधा आंख मूंदने से बात नहीं बनेगी July 6, 2011 / December 9, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 4 Comments on आंख मूंदने से बात नहीं बनेगी विमल कुमार सिंह एक समय था जब ईसाइयत और इस्लाम ने प्रलय मचाती सेनाओं का सहारा लेते हुए दुनिया के एक बड़े हिस्से में अपने मत का प्रचार-प्रसार किया। किंतु आज के बदले हुए माहौल में जब ताकत के बल पर अपने मतावलंबियों की संख्या बढ़ाना संभव नहीं रहा, तब इन दोनों मतों ने अपनी […] Read more » Muslim ईसाई मुस्लिम
विविधा बिना क्रांति के विकास की कल्पना कोरी गल्प July 5, 2011 / December 9, 2011 by बृजेन्द्र अग्निहोत्री | 1 Comment on बिना क्रांति के विकास की कल्पना कोरी गल्प बृजेन्द्र अग्निहोत्री महात्मा गाँधी का नाम सुनते ही हमारी स्मृति में एक देवतुल्य आकृति आ उभरती है। आजादी की चर्चा होते ही, महात्मा गाँधी का स्मरण अनासास हो जाता है। हमें यह स्वीकार करना ही पड़ता है कि आज दासता की जंजीरों से मुक्त, हम जो खुले आसमान के नीचे सांस ले रहे है वह […] Read more » Mahatma Gandhi क्रांति महात्मा गांधी
विविधा वो तुम्हारे जाने का गम July 4, 2011 / December 9, 2011 by चंडीदत्त शुक्ल | Leave a Comment चर्चित संगीतकार दान सिंह को श्रद्धा-सुमन चण्डीदत्त शुक्ल बेदम, निचुड़ी-सूखी धरती ने इधर-उधर छिटके पानी से अपने पपड़ाए होंठ गीले करने की नाकाम कोशिश के बाद हाथ जोड़कर सूरज से कहा–क़हर बरपाना छोड़ो, फिर बादलों से गुहार की–निष्ठुर, कितना इंतज़ार करूं! उलाहना जैसे दिल में तीर की तरह लगा और सब के सब काले बादल […] Read more » Daan singh दान सिंह
विविधा तरक्की के दौर में आरक्षण का क्या औचित्य July 4, 2011 / December 9, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 5 Comments on तरक्की के दौर में आरक्षण का क्या औचित्य दीनानाथ मिश्र आज के इस दौर में 25-30 प्रतिशत भारतीय शेर की गति से छलांग लगाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इतनी तेजी से कि पश्चिमी देश भी भारतीय रफ्तार को देख कर दंग हैं। लेकिन 20-25 प्रतिशत भारत की आबादी घायल हाथी की तरह टुकुर-टुकुर मुंह ताक रही है, जिसमें से कुछ […] Read more » Reservation आरक्षण
विविधा परीक्षा में विलीन होती शिक्षा July 3, 2011 / December 9, 2011 by चैतन्य प्रकाश | Leave a Comment चैतन्य प्रकाश बारहवीं की परीक्षा में आपके कितने परसेंट मार्क्स थे?” ”अच्छे ही थे!” दो खूब परिचित सहकर्मियों की बातचीत के बीच का यह छोटा सा हिस्सा है। परीक्षा के अंकों को लेकर पैदा होता मानसिक संकोच लगभग ‘शख्सियत’ का हिस्सा बनता जाता है। आज की शिक्षा प्रणाली की क्या यह स्वाभाविक निष्पत्ति है कि […] Read more » Education परीक्षा शिक्षा
विविधा पराई बुद्धि से स्वकार्य संपन्न नहीं होते- कुसुमलता केडिया July 3, 2011 / December 9, 2011 by प्रो. कुसुमलता केडिया | 12 Comments on पराई बुद्धि से स्वकार्य संपन्न नहीं होते- कुसुमलता केडिया कोई भी समाज तब तक स्वस्थ, सबल, स्वाधीन एवं प्रतिष्ठा संपन्न नहीं हो सकता जब तक उसकी सामूहिक बुध्दि जाग्रत एवं प्रदीप्त न हो। उधार की तलवार से लड़ाई तो हो सकती है, परंतु उधारकी बुध्दि से ऐश्वर्य एवं श्री की प्राप्ति असंभव है। पराई बुध्दि से स्वकार्य संपन्न नहीं होते, पराई सेवा तो खूब […] Read more »
विविधा डॉ. मुकर्जी बलिदान दिवस July 2, 2011 / December 9, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | Leave a Comment लालकृष्ण आडवाणी विशुद्ध ऐतिहासिक रुप से जून का महीना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। भाजपा में हमारे लिए इसकी अनेक तिथियां कभी न भूलने वाली हैं। मैं यह ब्लॉग 25 जून को लिख रहा हूं। सन् 1975 में इसी दिन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक […] Read more » Emergency आपातकाल डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी