पर्व - त्यौहार लेख उल्लास का प्रतीक है होली का त्यौहार March 27, 2021 / March 27, 2021 by डॉ. वंदना सेन | Leave a Comment डॉ. वंदना सेनभारत उत्सव प्रधान देश है। लोक चेतना के भाव से अनुप्राणित हमारे त्यौहार वास्तव में हमारे जीवंत संस्कारों की ऐसी धरोहर है, जिसकी मिसाल विश्व के किसी भी देश में देखने को नहीं मिलती, लेकिन जहां इन त्यौहारों की झलक प्रादुर्भित होती है, वहां किसी न किसी रूप में भारत के संस्कारों का […] Read more » Holi festival is a symbol of joy उल्लास का प्रतीक है होली का त्यौहार होली का त्यौहार
पर्व - त्यौहार लेख होली का संदेश : सामाजिक एकता March 27, 2021 / March 27, 2021 by सुरेश हिन्दुस्थानी | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानीभारत भूमि के संस्कार वास्तव में एक ऐसी अनमोल विरासत है, जो सदियों से एक परंपरा के रूप में प्रचलित है। जो समाज में ऐक्य भाव की स्थापना करने का मार्ग प्रशस्त करता है। वर्तमान में जहां परिवार टूट रहे हैं, वहीं समाज में अलगाव की भावना भी विकसित होती जा रही है। इस […] Read more » Holi सामाजिक एकता होली
पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार होली खुशियों को मिल-बांटने का अपूर्व अवसर March 20, 2021 / March 20, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment -ललित गर्ग –होली प्रेम, आपसी सद्भाव और मस्ती के रंगों में सराबोर हो जाने का अनूठा त्यौहार है। कोरोना महामारी के कारण इस त्यौहार के रंग भले ही फीके पड़े हैं या मेरेे-तेरे की भावना, भागदौड़, स्वार्थ एवं संकीर्णता से होली की परम्परा में बदलाव आया है। परिस्थितियों के थपेड़ों ने होली की खुशी को […] Read more » A unique opportunity to share Holi happiness होली- 28 मार्च
पर्व - त्यौहार लेख होली गेहूं की फसल के आगमन की खुशियां मनाने का पर्व है March 18, 2021 / March 18, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहोली का पर्व प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रथम तिथि को मनाया जाता है। एक दिन पूर्व फाल्गुल मास की पूर्णिमा पर होलिका दहन की परम्परा भी लम्बे समय से समाज में चली आ रही है। होली प्राचीन काल में ऋषियों व विद्वानों द्वारा किये जाने वाले महायज्ञ का एक […] Read more » Holi is a festival to celebrate the arrival of wheat crop. होली होली गेहूं की फसल के आगमन की खुशियां मनाने का पर्व है
पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार सृजन एवं समभाव के स्वामी हैं शिव March 5, 2021 / March 5, 2021 by ललित गर्ग | Leave a Comment महाशिवरात्रि-11 मार्च, 2021 पर विशेष-ललित गर्ग- सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है महाशिवरात्रि। इस दिन भक्त जप, तप और व्रत रखते हैं और भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं। शिवलिंग शिव एवं सृष्टि का प्रतीक है। […] Read more » mahashivaratri Shiva is the master of creation and equality महाशिवरात्रि-11 मार्च
पर्व - त्यौहार मकर संक्रान्ति, उत्तरायण पर्व (बड़ा दिन) आज 22-12-2020 को December 23, 2020 / December 23, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य श्री राधेश्याम गोयल ‘ढाणीवाला’, नीचम का एक लेख 22 दिसम्बर को ‘‘सूर्य मकर रेखा पर” पाणिनी कन्या गुरुकुल की आचार्या जी से व्हटशप पर प्रसारित होकर हमें प्राप्त हुआ है। इस लेख में लेखक की दो बातों का हम उद्धृत कर रहे हैं। 1- 22 दिसम्बर को पृथिवी पर मकर रेखा […] Read more » makar sankranti Uttarayan festival उत्तरायण पर्व मकर संक्रान्ति
धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार मकर सक्रान्ति पर्व का महत्व और उसको जानने से लाभ December 5, 2020 / December 5, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य सभी आवश्यक विषयों का ज्ञान प्राप्त करना चाहता है। जो ज्ञान उसे अधिक महत्वपूर्ण लगता है उसे स्मरण रखते हुए उससे लाभ प्राप्त करने में उसी प्रवृत्ति बनती है। हमारे अनेक पर्व हमें उनके महत्व से परिचित कराते हैं जिन्हें मनाकर हम उससे यथोचित लाभ लेने का प्रयास करते हैं। […] Read more » Importance of Makar Sakranti festival मकर सक्रान्ति पर्व
पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है ‘‘देवोत्थान एकादशी’’ November 25, 2020 / November 25, 2020 by ब्रह्मानंद राजपूत | Leave a Comment देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। दीपावली के ग्यारह दिन बाद आने वाली एकादशी को ही प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी या देव-उठनी एकादशी कहा जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव चार मास के लिए शयन करते हैं। इस बीच हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य शादी, विवाह आदि नहीं होते। देव चार महीने शयन करने के बाद कार्तिक, शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं। इसीलिए इसे देवोत्थान (देव-उठनी) एकादशी कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी तुलसी विवाह एवं भीष्म पंचक एकादशी के रूप में भी मनाई जाती है। इस दिन लोग तुलसी और सालिग्राम का विवाह कराते हैं और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करते हैं। हिन्दू धर्म में प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी का अपना ही महत्त्व है। इस दिन जो व्यक्ति व्रत करता है उसको दिव्य फल प्राप्त होता है। उत्तर भारत में कुंवारी और विवाहित स्त्रियां एक परम्परा के रूप में कार्तिक मास में स्नान करती हैं। ऐसा करने से भगवान् विष्णु उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। जब कार्तिक मास में देवोत्थान एकादशी आती है, तब कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती है। पूरे विधि विधान पूर्वक गाजे बाजे के साथ एक सुन्दर मण्डप के नीचे यह कार्य सम्पन्न होता है। विवाह के समय स्त्रियाँ मंगल गीत तथा भजन गाती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान् विष्णु प्रसन्न होते हैं और कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। हिन्दू धर्म के शास्त्रों में कहा गया है कि जिन दंपत्तियों के संतान नहीं होती, वे जीवन में एक बार तुलसी का विवाह करके कन्यादान का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। अर्थात जिन लोगों के कन्या नहीं होती उनकी देहरी सूनी रह जाती है। क्योंकि देहरी पर कन्या का विवाह होना अत्यधिक शुभ होता है। इसलिए लोग तुलसी को बेटी मानकर उसका विवाह सालिगराम के साथ करते हैं और अपनी देहरी का सूनापन दूर करते हैं। प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी के दिन भीष्म पंचक व्रत भी शुरू होता है, जो कि देवोत्थान एकादशी से शुरू होकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक चलता है। इसलिए इसे इसे भीष्म पंचक कहा जाता है। कार्तिक स्नान करने वाली स्त्रियाँ या पुरूष बिना आहार के रहकर यह व्रत पूरे विधि विधान से करते हैं। इस व्रत के पीछे मान्यता है कि युधिष्ठर के कहने पर भीष्म पितामह ने पाँच दिनो तक (देवोत्थान एकादशी से लेकर पांचवें दिन पूर्णिमा तक) राज धर्म, वर्णधर्म मोक्षधर्म आदि पर उपदेश दिया था। इसकी स्मृति में भगवान् श्रीकृष्ण ने भीष्म पितामह के नाम पर भीष्म पंचक व्रत स्थापित किया था। मान्यता है कि जो लोग इस व्रत को करते हैं वो जीवन भर विविध सुख भोगकर अन्त में मोक्ष को प्राप्त करते हैं। देवोत्थान एकादशी की कथा एक समय भगवान विष्णु से लक्ष्मी जी ने कहा- हे प्रभु ! अब आप दिन-रात जागा करते हैं और सोते हैं तो लाखों-करोड़ों वर्ष तक को सो जाते हैं तथा उस समय समस्त चराचर का नाश भी कर डालते हैं। अत: आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें। […] Read more » Devotthan Ekadashi देवोत्थान एकादशी
धर्म-अध्यात्म पर्व - त्यौहार लेख कायस्थ समाज आज मना रहा है अपने कुल देवता भगवान चित्रगुप्त जी की जयंती November 16, 2020 / November 16, 2020 by संजय सक्सेना | 1 Comment on कायस्थ समाज आज मना रहा है अपने कुल देवता भगवान चित्रगुप्त जी की जयंती […] Read more » कायस्थ समाज भगवान चित्रगुप्त जी की जयंती
पर्व - त्यौहार लेख वर्त-त्यौहार दीवाली का बदलता ट्रैंड November 11, 2020 / November 11, 2020 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment – योगेश कुमार गोयल समाज में ज्यों-ज्यों आधुनिकता का समावेश हो रहा है, वैसे-वैसे हमारे तीज-त्यौहारों पर भी आधुनिकता का प्रभाव स्पष्ट देखा जा रहा है। दीवाली जैसा हमारा पारम्परिक त्यौहार भी आधुनिकता की चपेट से नहीं बच पाया है। पहले लोग दीवाली के दिन श्रद्धापूर्वक अपने घर के अंदर व बाहर सरसों तेल अथवा […] Read more » Diwali changing trend giving gifts on diwali दीवाली का बदलता ट्रैंड
पर्व - त्यौहार लेख हमें उजाले बाहर ही नहीं, भीतर भी करने होंगे November 11, 2020 / November 11, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment दीपावली- 14 नवम्बर 2020 पर विशेष-ललित गर्ग- दीपावली एक लौकिक पर्व ही नहीं, आध्यात्मिक पर्व है। यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी है। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह, माया, लोक और मूच्र्छा के अंधकार को दूर करे, मन को मांजें एवं आत्मा को उजाले तभी […] Read more » दीपावली दीपावली 14 नवम्बर 2020
कला-संस्कृति पर्व - त्यौहार लेख बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता हैं विघ्नहर्ता गणेश August 21, 2020 / August 21, 2020 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment गणेश चतुर्थी (22 अगस्त) पर विशेष – योगेश कुमार गोयल हर वर्ष की भांति मंगलमूर्ति गणेश एक बार फिर गणेशोत्सव अर्थात् गणेश चतुर्थी के अवसर पर घर-घर पधार रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश का जन्म हुआ था। इसी चतुर्थी से आरंभ होकर गणेशोत्सव पूरे […] Read more » गणेश चतुर्थी विघ्नहर्ता गणेश समृद्धि और सौभाग्य के देवता