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    कोरोना का बढ़ता प्रकोप ——

    पिछले साल लाकडाउन के बाद देश ने दूसरे देशों की तुलना में अपने आपको संभाल लिया था।
    इस बार कोरोना संक्रमण की गति फिर से तेज हो गई है। अब पिछले वर्ष 6 माह में जितने मरीज मिले , उतने इस बार तीन माह में ही हो गए हैं। कोरोना की दूसरी लहर का कोफ दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है और पिछले वर्ष की तुलना में कई ज्यादा भयावह है। कोरोना की दूसरी लहर भयावह , डरा देने वाली है, हर जगह मौत का मातम सा नजर आ रहा है।

    कैरोना का बढ़ता प्रकोप कई घरों की खुशियों को छीन रहा है। पिछले वर्ष की तरह ही इस बार भी लाकडाउन , नाइट कर्फ्यू की स्थिति बढ़ती जा रही है। इस बार के कोरोना का प्रभाव पिछले वर्ष की तुलना में कई ज्यादा डेंजर रूप में पैर पसारे फेला हुआ है। हम सोचे की वक्सिंग लगवा ली तो हम सैफ हो गए, हमें कोरोना नहीं होगा तो यह मूर्खता पूर्ण ही बात होगी । आज बढ़ते कोरोना को देखते हुए बाहोत जरूरी हो तो ही घर से बाहर न निकलें अन्यथा नहीं। क्योंकि यह बहुत डेंजर रूप में फेल रहा है। इसका संक्रमण पहले शहरों तक ही सीमित हो पाया था , पर आज गावों में भी यह पैर पसार चुका है । गावों में इसका गंभीर असर देखा जा रहा है। जहा गावों को भी पूरी सख्ती के साथ बन्द किया जा रहा है। ईधर प्राथना तो उधर प्राण निकल रहे हैं ऐसे कई दृश्य देखे जा रहे हैं।

    इसके टीकाकरण के लिए कई व्यवस्था है , पर संतोषजनक नहीं है। इन केंद्रों पर सोशल दिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस अवस्था में कोरोना ज्यादा फैलेगा। टीकाकरण की अव्यवस्था नजर आ रही है। कही पर वैक्सिंग की कमी है ।

    कोरोना की दूसरी लहर अब बॉलीवुड हो या नेता नगरी सभी को चपेट में लेता जा रहा है, तथा
    ” यह रक्त बीज की तरह मुंह फैलाए बैठा है, सभी को काल का ग्रास बना रहा है। इस स्थिति को कंट्रोल न किया गया तो और ज्यादा भयावह स्थिति देखने को मिलेगी। अस्पतालों में बेड की कमी देखी जा रही है, यह मरीजों की संख्या के सामने कम पड़ गए, डाक्टर अब थक से गए है, लड़ते – लड़ते। सतर्कता के नजारा कही देखा जाए तो शासकीय सुविधाओं की लाचार हालात से भी लोगो में भय पैदा हो रहा है।

    कोरोना का रुख भी बदल गया है पिछले वर्ष की तुलना में सर्दी – खासी , बुखार के आलावा शरीर में दर्द आदि कई लक्षण वाले मरीज भी कोराना पॉजिटिव हो सकते है। संक्रमण लगातार बढ़ते जा रहे हैं, इसका मुख्य कारण लापरवाही और मौसम है। बीमार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्रो में एक्टिव रहते है यह सभी कोरोना फैलाने में सहायक बना हुआ है। पहले लोग सचेत थे , सर्दी जुखाम जरा सा कुछ होने पर डाक्टर को तुरन्त दिखा देते थे , सावधानी बरतते थे । लेकिन अब लोग बीमारी को छिपा रहे है , इसलिए स्थिति घातक बन चुकी है। इस समय भी घबराने की जरूरत नहीं है , बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालकर संभलने की जरूरत है । कोरोना की लहर को पहले भी हराया है और आगे भी मिलजुल कर कोरोना को हराना है।

    संध्या शर्मा
    कवियित्री

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