मगध साम्राज्य राजगृह के सम्राट

—विनय कुमार विनायक
आरंभ से मगध रहा है आर्य, अनार्य,
व्रात्यजन,जैन तीर्थंकर की आदिभूमि,
अथर्ववेद की प्रसव स्थली,जादू टोना,
वैद्य वैदगी, आयुर्वेद, बुद्ध के दर्शन,
बृहद्रथ,हर्यक,शिशुनाग,नन्द,मौर्य,शुंग,
कण्व,सातवाहन, गुप्तों की शौर्यभूमि!

चेदिराज उपरिचर वसुपुत्र बृहद्रथ था
संस्थापक मगध में एक राजवंश का,
माता गिरि के नाम बसाया गिरिव्रज!
मगधराज जरासंध था उनका आत्मज,
अत्याचारी और नरमेध यज्ञ आकांक्षी,
कृष्णयुक्ति से भीमसेन ने किया वध!

जरासंध पुत्र सहदेव से रिपुंजय तक
बृहद्रथ के वंशज इक्कीस राजाओं ने
मगध पर शासन किया हजार साल,
फिर उज्जैन के हर्यक या हैहयक ने
रिपुंजय से छीना था मगध की सत्ता,
हर्यक हैहय क्षत्रिय का हैहयक रुप है!

बृहद्रथवंशी रिपुंजय की उनके ही मंत्री
पुलिक ने हत्याकर पुत्र को दी गद्दी!
पुलिकपुत्र को मारकर सामंत भट्टी ने
अपने पुत्र बिम्बिसार को दिया राजत्व
ईसा पूर्व पांच सौ चौवालीसवें साल में
बिम्बिसार बना महाराज मगधदेश का!

बिम्बिसार ने पांच पहाड़ियों से घिरे
गिरिव्रज से बाहर निकल श्मशान में,
नई राजधानी राजगृह को बसाया था!
बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंध बनाकर
मगध साम्राज्य को विस्तृत किया था!
पहली महारानी नन्द श्री थी ब्राह्मणी!

अभय राजकुमार पुत्र था नन्द श्री का,
लिच्छवीगण प्रमुख चेटकपुत्री चेल्लना
माता थी पितृहंता पुत्र अजातशत्रु की!
कोशलराज प्रसेनजित की बहन के संग
विवाह से काशी राज्य दहेज में मिला!
मद्रकन्या खेमा,विदेहपुत्री वासवी रानी!
ये रानियां थी मगधराज बिम्बिसार की!

बिम्बिसार साढू था महावीर के पिताश्री
वज्जिसंघ ज्ञातृकगण के सिद्धार्थ का!
अवन्ति राज चण्ड प्रद्योत, वत्स राज
उदयन के पिता शतानीक, सिन्धु-सौवीर
नरेश उदायन जैसे महान राजाओं का!
चण्डपुत्री वासवदत्ता वत्सराज की पत्नी!

बिम्बिसार सेनिया श्रेणिक था जैनधर्मी,
बाद में बन गया था बौद्ध धर्मावलंबी!
पुत्र अजातशत्रु कुणिक ने पिता श्री की
चार सौ तिरानवे ईसा पूर्व में हत्या की
हासिल किया था मगध राज सिंहासन,
अजातशत्रु जैन से बना था बौद्ध श्रमण!

अजातशत्रु साम्राज्य विस्तारक राजा था,
मामा कोशल राज प्रसेनजित की कन्या
वाजिरा से विवाह करके कोशलराज्य को
अपने मगधसाम्राज्य में मिला लिया था!
रथमूसल, महाशिलाकण्टक आयुध के बूते
वृज्जिसंघ वैशाली को विजित किया था!

चार सौ इकसठ ईसा पूर्व में उदायिन ने
पिता अजातशत्रु की हत्या की बनके शत्रु
और पाटलीग्राम में बसायी थी राजधानी
जो पाटलीपुत्र, कुसुमपुर, पुष्पपुर नाम से
शिशुनाग, नन्द, मौर्य, शुंग, कण्व, गुप्त
राजवंशों की राजधानी रही, अब है पटना!

हर्यकवंशी सभी शासक बने थे पितृघाती,
बिम्बिसार को अजातशत्रु ने मार दिया
अजातशत्रु को पुत्र उदायिन/उदयभद्र ने
फिर अनुरुद्ध, मुण्ड और नागदशक ने
अपने-अपने पिताश्री की हत्या करके ही
मगध की गद्दी को हासिल किया था!

मगध की प्रजा त्राहिमाम थी हर्यकों से,
नागदशक ने पाया दण्ड निर्वासन का!
शिशुनाग का अभिषेक हुआ मगध के
राजपद पर,जो उपराजा था काशी का!
शिशुनाग वंशी काकवर्ण कालाशोक ने
जय किया अवंती,महानन्दिन ने अंत!
—विनय कुमार विनायक

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