लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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ईएमएस नम्बूदिरीपाद के जन्मशताब्दी के समापन पर विशेष

( जन्म 13 जून 1909 मृत्यु 12 मई 1998 )

ई.एम.एस. नम्बूदिरीपाद विश्व में विरल कम्युनिस्टों में गिने जाते हैं। आम तौर पर कम्युनिस्टों की जो इमेज रही है उससे भिन्न इमेज ईएमएस की थी। मुझे निजी तौर पर ईएमएस से सन् 1983 की मई में मिलने और ढ़ेर सारी बातें करने का पहली बार मौका मिला था। मैं उन दिनों जेएनयू में भारत का छात्र फेडरेशन का अध्यक्ष था।

जेएनयू को अधिकारियों ने अनिश्चतकाल के लिए बंद कर दिया था मैं दिल्ली में ही माकपा के किसी सांसद के वी पी हाउस स्थित एम पी फ्लैट में रहता था, पैसे नहीं थे इसलिए माकपा के केन्द्रीय दफ्तर की रसोई में खाना खाता था। इस रसोई में सभी केन्द्रीय दफ्तर के कर्मचारी खाना खाते थे और सभी पोलिट ब्यूरो सदस्य भी खाना खाते थे। जेएनयू में विख्यात मई आंदोलन चल रहा था। 450 से ज्यादा छात्र तिहाड़ जेल में बंद थे। सैंकड़ों छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्कासित कर दिया था। इस अवस्था में आंदोलन को बीच में छोड़कर घर नहीं जा सकता था।

माकपा के केन्द्रीय दफ्तर में और आम सभाओं में मैंने कईबार ईएमएस को देखा और सुना था लेकिन करीब से देखने और बात करने का मौका इस बार ही मिला था। मैं उस क्षण को आज भी भूल नहीं सकता जब ईएमएस, हरिकिशन सुरजीत, वासव पुन्नैया, बी.टी. रणदिवे एक साथ खाना खा रहे थे और मैं खाना खाने के लिए हॉल में घुसा। मेरे साथ केन्द्रीय दफ्तर के एक कॉमरेड थे।

भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन के इन चार महापुरूषों को मैंने पहलीबार करीब से देखा, मेरे साथ आए कॉमरेड ने इन सभी से मेरा परिचय कराया और बातों ही बातों में मेरे साथी कॉमरेड ने सुरजीत से कहा कि मैं ज्योतिषाचार्य हूँ और पार्टी मेम्बर हूँ, संभवतः युवाओं में संस्कृत की पृष्टभूमि से कम्युनिस्ट पार्टी में आया अकेला सदस्य था। जेएनयू के कॉमरेड मुझे पंडित कहकर पुकारते थे।

उस समय ईएमएस ने मजाक में सवाल किया क्या तुम यह बता सकते हो भारत में क्रांति कब होगी? कम से कम पार्टी को तुम्हारे ज्ञान का खुछ लाभ तो मिले। मैंने तुरंत मजाक में कहा आप मुझे सटीक समय बताएं जब आप लोग भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से वाकआउट करके बाहर आए थे मैं आपको क्रांति की सटीक भविष्यवाणी बता दूँगा। मेरे इस कथन के बाद क्रांति और ज्योतिष पर वहां उपस्थित सभी ने अपने बड़े ही रोचक विचार रखे।

मैंने पहली बार देखा कि माकपा के दफ्तर में सभी एक जैसा खाना खा रहे थे, सभी कॉमरेड अपने जूठे बर्तन धो रहे थे, सभी पोलिट ब्यूरो सदस्य भी अपने बर्तन स्वयं साफ कर रहे थे। इतने बडे कम्युनिस्ट नेताओं की इस सादगी और अनौपचारिकता का मेरे ऊपर गहरा असर पड़ा। उसके बाद ईएमएस से मुझे कई बार लंबी बातें करने का मौका मिला।

ईएमएस बेहतरीन इंसान, महान देशभक्त, लोकतंत्र के पुजारी और गंभीर बुद्धिजीवी थे। उनके पास किसी भी जटिल बात को सरलतम ढ़ंग से कहने की कला थी। वे प्रत्येक बात को जीवनानुभवों की कसौटी पर कसते थे। भारत के स्वाधीनता संग्राम में उन्होंने सक्रिय भाग लिया था।

हमारे देश में नेता अनेक हुए हैं, लेकिन देश निर्माता कम नेता हुए हैं। भारत में आधुनिक केरल के निर्माता के रूप में ईएमएस की केन्द्रीय भूमिका रही है। ईएमएस के पास भारत के साथ केरल का विज़न था। वे केरल के जर्रे-जर्रे से वाकि़फ थे। केरल में कम्युनिस्टों की पहली सरकार 1957 में उनके नेतृत्व में बनी। यह वह जमाना था जब कांग्रेस के पास नेहरू,पटेल आदि सभी दिग्गज नेता थे, देश की आजादी के नेतृत्व का विजय मुकुट इनके माथे पर रखा था। ऐसे में कम्युनिस्टों का किसी पूंजीवादी मुल्क में मतपत्रों के जरिए सत्ता में आना विश्व की विरल घटना थी।

कांग्रेस का सारा नेतृत्व ईएमएस और उनके साथी कॉमरेडों की आभा के सामने फीका पड़ चुका था। आजादी मिलने के मात्र 10 साल के अंदर कांग्रेस को देश और राज्य के अप्रासंगिक सिद्ध करना महान घटना थी। उस समय आम जनता में कांग्रेस को हराना अकल्पनीय काम था। लेकिन ईएमएस की मेधा, जनता के प्रति वचनवद्धता, राजनीतिक साख और लोकतांत्रिक राजनीतिक कार्यक्रम के आगे कांग्रेस बुरी तरह विधानसभा चुनाव में हारी। ईएमएस पहलीबार केरल के मुख्यमंत्री बने।

उनके मंत्रिमंडल की कार्यप्रणाली और पंडित नेहरू और कांग्रेसी नेताओं की कार्यप्रणाली में जमीन आसमान का अंतर था। उन दिनों प्रधानमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रपति दिल्ली के बंगलों में शानदार जिंदगी जी रहे थे। कारों के काफिले से चलते थे और गांधी के विचारों के राही होने का दावा कर रहे थे। राष्ट्रपति से लेकर केन्द्रीय मंत्रियों तक के लिए आए दिन शानदार नई कारें खरीदी जा रही थीं।

इसके विपरीत ईएमएस ने जो मंत्रीमंडल बनाया था वह सही मायने में क्रांतिकारी-गांधीवादी था। स्वयं ईएमएस साईकिल से मुख्यमंत्री कार्यालय जाते थे, साईकिल के पीछे उनका टाइपराइटर बंधा रहता था, सभी मंत्री किराए के मकानों में रहते थे। पार्टी के द्वारा निर्धारित जीवनयापन के खर्चे में गुजारा करते थे। केरल के मुख्यमंत्री और मंत्रियों की इस सादगी के सामने देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सादगी की चमक फीकी थी। सारी दुनिया के कॉमरेड अचम्भित थे कि चुनाव के जरिए केरल में कॉमरेड शासन चला रहे हैं।

भारत के कम्युनिस्टों और क्रांतिकारियों ने आजादी की जंग में जबर्दस्त कुर्बानियां दीं और बाद में लोकतंत्र के निर्माण के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां दीं। भारत के कम्युनिस्टों ने ईएमएस जैसे क्रांतिकारी की लोकतंत्र की महान सेवाओं के जरिए यह दिखाया है कि राज्य का मुख्यमंत्री कैसा होता है।

आधुनिक केरल के निर्माण में कम्युनिस्टों की भूमिका को देखें और आज के मुख्यमंत्रियों की भूमिका और राजनीति देखें तो सही ढ़ंग से समझ सकते हैं कि मुख्यमंत्री को सीईओ नहीं राज्य निर्माता होना चाहिए। पूंजीपतियों-सामंतों का चाकर नहीं जनता का सेवक-संरक्षक और मार्गदर्शक होना चाहिए।

ईएमएस के व्यक्तित्व की खूबी थी कि वे बेहद सरल, ईमानदार और सहज इंसान थे। उन्हें पार्टी से जितना प्यार था लेखन और अध्ययन से भी उतना ही प्यार था। वे प्रतिदिन लिखते और पढ़ते थे। संभवतः भारत के वे अकेले राजनेता हैं जिन्होंने भारत की राजनीति, संस्कृति, इतिहास, साहित्य, मार्क्सवाद आदि पर सबसे ज्यादा लिखा है। उनके द्वारा लिखित सामग्री 100 से ज्यादा खंड़ों में मलयालम में है, जो क्रमशः प्रकाशित हो रही है। यह सामग्री उन्होंने नियमित लेखक के नाते लिखी है। देश-विदेश की समस्याओं और नीतिगत सवालों पर ईएमएस का विज़न, कर्म और लेखन आज भी हमारे लिए नई रोशनी देता है।

चित्र परिचय – ईएमएस अपनी पत्नी आर्या के साथ 1998 में

लेखक- जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

3 Responses to “लोकतंत्र के महासेनानी ईएमएस नम्बूदिरीपाद”

  1. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    भारत के महानतम क्रांतिवीर स्व्धीन्तासेनानी मेहनतकशों के मसीहा कामरेड इ एम् एस नम्बूदिरिपाद के बारे में संक्षिप्त जानकारी तथा उनकी अद्वतीय सादगी के बारे में हलाकि हम बहुत कुछ जानते हैं ,किन्तु चतुर्वेदी जी की अविरल शानदार लेखनी का शुक्रिया जिन्हीने आज के महा पतितपूंजीवादी राजनीतिज्ञों के बरक्स एक महानतम चिन्तक साहित्यकार सर्व्हारापरस्त राजनीतिग तथा लोकतंत्रात्मक तरीकों में सर्वहारा क्रांति की संभावना के द्रष्टा पर ध्य्नाकर्षण किया

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  2. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    आपके इस आलेख की विषय VASTU से देश के अनेक प्रगतिशील साहित्यकार ,सुपरिचित हैं किन्तु वर्तमान दौर
    के पूंजीवादी मुख्यमंत्रियों को यदि इ एम् एस के व्यक्तित्व
    से शतांश भी ग्रहण करवा पाने में आप सफल हो जाएँ तो भारतीय आवाम शोषण से मुक्ति की और अवश्य चल पड़ेगी .आपके आलेख का प्रतेक शब्द जीवंत दस्तावेज है.बीसवीं सदी के महानतम नायकों में से एक शख्स वह भी था जिसे भारत के करोडो जन गन प्यार से इ एम् एस कहते हैं .

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  3. अभिषेक पुरोहित

    abhishek purohit

    mujhe apase bahut sahanubhuti he,ki ap vampanth se jude.yah apaka bahut bada durbhagy hi kaha jayega ki apako pure bharat ko badal dene vale hindu andolan ki jankari nahi he,jisaka aguva rastriy savmsevak sangh he.bechare communisto ko koe nahi puchhata he,lal jhanda lekar “keval”hadtal karane vale ye communist aaj jivan ke har kshetra par sangh vichar se har gaye he,kya majdur,kya kisan,kya rajniti,kya vidhyarthi varg,kya vidhvta varg,kya samny janta sab jagah enako karari mat mili he,pata he kyo???
    1.bharat ne hamesha se hi dharm ko pradhanata di he na ki arth v kam ko,kuchh samay ke liye bhale hi ye log chamke ho par jald hi dharm ke acharn ne enhe patg diya.
    2.bharat ke log loktantr me ya dharmik rajshahi me vishvas karate he naki adharmik sangatan ki tana shahi me,or communist kabhi loktantra ke samrthak nahi rahe he.
    3.marks ke sidhant me sharu se khot he,”varg sangrash” ki avdharna bhart me fit bethati hi nahi he.
    4.bharat me dharm ki jade bahut gahari he.
    5.hinsa me nahi bharatiy ahinsa me visvas karate he jabaki communisum ki mul avdharna me hi hinsa he.
    ab apase kuchh prashan
    1.kya apane kabhi bhi sangh ka koe bhi karykarm dekha he??
    2.ek “bunch of thoughts” ko chhod kar koe bhi sangh ki book padhi he???khas kar sheshadri ji ki “kriti rup sangh darshan”
    3.sangh ke kisi bhi svymsevak ya prachark se mile he??
    4.sangh ko chhodiye kisi hindu chintak se bhi mile he??kabhi apane vichar unake samane rakhe he??
    ye me sab es liye puchh raha hu ki ap abhi bhi apani akhe kholana nahi chahate he ki “apaka vampanth to kabhi ka dah chuka he,kyu ek mari hue vichardhara ka dol pit rahe he???”
    or ek asafal neta ka mhima mandan kar rahe he jisane rajnitik hatyao ko janm diya tha keral me or puri tarike se brabad kar diya us state ko.

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